गोरखपुर में अस्पताल से बच्ची को ले जाने वाला सिपाही निकला आरोपी
उत्तर प्रदेश के गोरखपुर से सामने आया 10 वर्षीय बच्ची के अपहरण और हत्या का मामला पुलिस व्यवस्था और वर्दी पर आम लोगों के भरोसे को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है। आरोप है कि जिला अस्पताल से घर लौट रही बच्ची को डायल-112 में तैनात सिपाही अभिषेक यादव ने घर छोड़ने के बहाने अपनी बाइक पर बैठाया और फिर वह बच्ची वापस अपने घर नहीं पहुंची। पुलिस जांच में सीसीटीवी फुटेज के जरिए सिपाही की भूमिका सामने आई। बाद में बच्ची का शव रोहिन नदी के पास से बरामद किया गया।
यह घटना 28 जुलाई 2026 की रात की बताई गई है। बच्ची का परिवार मूल रूप से आजमगढ़ के कप्तानगंज क्षेत्र का रहने वाला है और पिछले कुछ वर्षों से गोरखपुर में रह रहा था। परिवार के पिता ई-रिक्शा चलाकर अपने परिवार का पालन-पोषण करते थे। परिवार में पांच बेटियां थीं। घटना से पहले उनकी 13 वर्षीय बेटी बीमारी के चलते गोरखपुर जिला अस्पताल में भर्ती थी।
बड़ी बहन को खाना देने अस्पताल पहुंची थी बच्ची
पुलिस और मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, 28 जुलाई की रात करीब साढ़े आठ से दस बजे के बीच 10 वर्षीय बच्ची अपनी बीमार बड़ी बहन के लिए खाना लेकर जिला अस्पताल पहुंची थी। खाना देने के बाद वह वापस घर जाने लगी। इसी दौरान वहां डायल-112 में तैनात सिपाही अभिषेक यादव की नजर उस पर पड़ी।
आरोप है कि सिपाही ने बच्ची से उसके घर जाने के बारे में पूछा और रात का समय होने की बात कहते हुए उसे सुरक्षित घर पहुंचाने की बात कही। बच्ची के साथ मौजूद उसकी बड़ी बहन को भी लगा कि सामने पुलिसकर्मी है और वह बच्ची को सुरक्षित घर पहुंचा देगा। इसके बाद बच्ची सिपाही की बाइक पर बैठकर चली गई।
लेकिन इसके बाद बच्ची घर नहीं पहुंची। परिवार ने उसकी तलाश शुरू की। जब काफी समय तक उसका कोई पता नहीं चला तो परिजनों ने पुलिस को सूचना दी और मुकदमा दर्ज कराया।
करीब 200 सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली गई
बच्ची के लापता होने के बाद पुलिस ने जिला अस्पताल और आसपास के इलाकों में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालनी शुरू की। रिपोर्टों के मुताबिक, जांच के दौरान करीब 200 कैमरों की फुटेज देखी गई। इसी जांच में एक फुटेज सामने आई, जिसमें बच्ची एक वर्दीधारी व्यक्ति की बाइक पर बैठकर जाती दिखाई दी। जांच आगे बढ़ने पर उस व्यक्ति की पहचान सिपाही अभिषेक यादव के रूप में हुई।
इसके बाद पुलिस ने अभिषेक यादव को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की। शुरुआती पूछताछ में वह पुलिस को गुमराह करने की कोशिश करता रहा, लेकिन पुलिस ने सीसीटीवी और अन्य तकनीकी व वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर उससे पूछताछ जारी रखी। बाद की रिपोर्टों में पुलिस के हवाले से बताया गया कि पूछताछ के दौरान आरोपी ने घटना में अपनी भूमिका स्वीकार की।
बच्ची का शव नदी के पास मिला
पुलिस जांच के दौरान आरोपी की निशानदेही पर बच्ची का शव गोरखपुर के चिउटहा पुल के पास रोहिन नदी क्षेत्र से बरामद किया गया। यह बरामदगी 30 जुलाई की सुबह हुई थी। इसके बाद मामले में हत्या की धाराएं भी जोड़ी गईं।
पुलिस ने मामले में अपहरण, दुष्कर्म और हत्या के गंभीर आरोपों के तहत कार्रवाई की। जांच के दौरान यह भी सामने आया कि आरोपी सिपाही पर पहले भी गंभीर आरोप लगे थे। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, फरवरी 2025 में भी उस पर एक युवती को अगवा करने और उसके साथ आपराधिक कृत्य करने के आरोप लगे थे, जिसके बाद उसे निलंबित कर गिरफ्तार किया गया था। बाद में उसकी सेवा में वापसी हुई थी। इस पुराने मामले की परिस्थितियों और उसकी दोबारा तैनाती को लेकर भी सवाल उठे।
सिपाही को सेवा से बर्खास्त किया गया
घटना के बाद पुलिस विभाग ने अभिषेक यादव के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की। रिपोर्टों के मुताबिक उसे सेवा से बर्खास्त कर दिया गया। पुलिस ने यह भी कहा था कि मामले में राष्ट्रीय सुरक्षा कानून यानी NSA के तहत कार्रवाई पर विचार किया जाएगा।
जुलाई में हुई घटना के बाद मामला अदालत तक पहुंचा। सितंबर 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, फॉरेंसिक रिपोर्ट मिलने के बाद पुलिस ने मामले में पूरक चार्जशीट भी अदालत में दाखिल की। आरोपी बर्खास्त सिपाही के खिलाफ अपहरण, दुष्कर्म और हत्या के आरोपों से जुड़ी न्यायिक कार्यवाही जारी है।
वर्दी और भरोसे पर उठे सवाल
इस पूरे मामले का सबसे गंभीर पहलू यह है कि बच्ची ने जिस व्यक्ति पर भरोसा किया, वह पुलिस की वर्दी में था। रात के समय घर लौट रही बच्ची को सुरक्षित घर पहुंचाने का भरोसा दिया गया और परिवार ने भी पुलिसकर्मी समझकर उस पर विश्वास किया। इसी भरोसे के बाद बच्ची उसके साथ चली गई।
यह मामला केवल एक आपराधिक घटना नहीं, बल्कि उन परिस्थितियों पर भी सवाल खड़े करता है जिनमें गंभीर आरोपों का सामना कर चुके पुलिसकर्मियों की सेवा, बहाली और तैनाती की प्रक्रिया होती है। हालांकि किसी आरोपी के खिलाफ अंतिम दोषसिद्धि अदालत के फैसले से ही तय होती है, लेकिन इस मामले में पुलिस ने जांच पूरी करने के बाद आरोपपत्र और बाद में फॉरेंसिक रिपोर्ट के आधार पर पूरक चार्जशीट दाखिल की है।
10 वर्षीय बच्ची की मौत ने परिवार को ऐसा दर्द दिया है जिसकी भरपाई संभव नहीं। अब इस मामले में आगे की न्यायिक प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी और अदालत के फैसले से ही आरोपों पर अंतिम कानूनी निष्कर्ष सामने आएगा। साथ ही यह घटना पुलिस विभाग में भर्ती, निगरानी, निलंबन के बाद बहाली और संवेदनशील ड्यूटी पर तैनाती की व्यवस्था को लेकर भी गंभीर चर्चा की वजह बनी है।
