गणित के महान विद्वान प्रोफेसर पुरुषोत्तम लाल सचदेवा बेंगलुरु के वीवीआईपी इलाके आरटी नगर में अपने परिवार के साथ रह रहे थे। उनके परिवार में कुल चार सदस्य थे। पुरुषोत्तम लाल सचदेवा उनकी पत्नी रीता सदेवा उनका स्पेशल चाइल्ड 35 वर्षीय बेटा दीपक सचदेवा और प्रोफेसर पुरुषोत्तम और उनकी पत्नी रीता ने अपने ही भतीजे अनुराग को गोद ले लिया था। क्योंकि उनका जो खुद का बेटा था दीपक वो स्पेशल चाइल्ड था और अब इन चार लोगों में से तीन लोगों की मृत्यु हो चुकी थी। घर में बचा था इकलौता गोद लिया हुआ बेटा अनुराग। अब पुलिस वालों को अनुराग पर ही डाउट था। कहीं अनुराग ने ही तो प्रॉपर्टी के लालच में यह सब कुछ नहीं कर दिया।
लेकिन पुलिस पूरे 10 महीने तक अनुराग से अलग-अलग एंगल से पूछताछ करती रही। लेकिन अनुराग के खिलाफ कोई भी साक्ष्य सामने नहीं आते। फिर इस पूरे हाई प्रोफाइल मामले को क्राइम ब्रांच के जानेमाने ऑफिसर सी डब्ल्यू पुया को सौंप दिया गया। क्योंकि अगर सी डब्ल्यू पुया किसी भी केस को अपने हाथों में लेते थे तो उसका सच वो बाहर निकाल के ही रहते थे। फिर सी डब्ल्यू पोइया इस पूरे केस की शुरू से जांच करते हैं। फिर वो पता लगाने की कोशिश करते हैं कि आखिर पुरुषोत्तम सचदेवा, उनकी पत्नी रीता, उनके स्पेशल चाइल्ड बेटे दीपक और उनके गोद लिए हुए बेटे अनुराग के अलावा क्या उस घर में कोई और भी आता जाता था? तो पता चलता है कि हां उस घर में उनकी हाउसमेट सुचित्रा हालदार भी आया करती थी।

तो सी डब्ल्यू पुिया पूछते हैं कि इन तीनों लोगों की मृत्यु के बाद क्या सुचित्रा हालदार कभी इस कॉलोनी में दिखी? तो पता चलता है नहीं बल्कि जिसके यहां वो काम भी करती थी वो भी सुचित्रा को और सुचित्रा के पति दीपक हलदार को फोन करने की कोशिश करता है। तो सुचित्रा और उनके पति दीपक का फोन नहीं लगता। श्री डब्ल्यू पोइया अब इस पूरे केस को समझ चुके थे कि हो ना हो इस पूरे केस की कर्ताधर्ता सुचित्रा और उनके पति दीपक हवलदार ही है। फिर सी डब्ल्यू पोइया को कहीं से सुचित्रा उनके पति दीपक और उनकी पांच साल की बेटी की एक फोटो मिलती है और यह भी जानकारी मिलती है कि जो सुचित्रा थी वो पश्चिम बंगाल के दक्षिण परगना जिले की रहने वाली थी।
फिर सी डब्ल्यू पोइया पश्चिम बंगाल के दक्षिण परगना पहुंचते है कि इस पूरे केस में सी डब्ल्यू पोइया इतने ज्यादा संलग्न हो जाते हैं उनकी दाढ़ी बड़ी हो जाती है। यानी वो पूरी तरीके से एक साधु बाबा लग रहे तो फिर सबसे पहले जितने भी वहां पर स्कूल थे वहां पर सुचित्रा उनके पति दीपक और उस बच्ची की फोटो दिखाकर यह पता किया जाने लगा कि क्या उस स्कूल में यह बच्ची पढ़ती है? तो फिर एक स्कूल से पता चलता है कि ये बच्ची उस स्कूल में पढ़ती है। फिर वहां से सी डब्ल्यू पुया उस बच्ची के घर पहुंचते है। लेकिन जब उस बच्चे के माता-पिता से सीडब्ल्यू पुया मिलते हैं तो उस बच्ची के माता पिता कहते हैं मेरा नाम सुचित्रा या दीपक नहीं है। मेरा नाम राहुल और सुजाता है।
लेकिन सी डब्ल्यू पोया ये समझ चुके थे कि ये लोग अपने नाम को चेंज कर चुके हैं। फिर जब सी डब्ल्यू पुया और उनके साथ जांच कर रही टीम राहुल और सुजाता से कड़ाई से पूछताछ करते हैं तो ये तुरंत सच उगल देते हैं कि हां मैं ही सुचित्रा हूं और उनका पति बोलता है कि हां मैं ही दीपक हलदार हूं। 15 फरवरी की सुबह रोज की तरह जैसे मैं उनके घर में काम करने जाती थी वैसे काम करने जाती हूं। लेकिन उस दिन मेरे साथ उस घर में मेरा पति दीपक हालदार और उसके दो दोस्त थे। जैसे ही मैं बेल बजाती हूं अंदर से पुरुषोत्तम लाल की पत्नी रीता दरवाजा खोलती है। मेरे पति ने तुरंत सबसे पहले मालकिन रीता का गला तब तक जब तक उनकी मौत नहीं हो जाती।
फिर हम दूसरे नंबर पर पुरुषोत्तम लाल के रूम में जाते हैं। उनकी भी इसी तरह से हत्या कर देते हैं। फिर हम लोग उस घर में जो भी ज्वेलरी थी उसे लेते हैं और लेने के बाद हम लोग जाते-जाते चार्जर का तार लेते हैं और उससे दीपक का भी गला देते हैं जिससे उसकी भी मृत्यु हो जाती है। सोचिए कांड करने वाली उनके घर की मेड थी लेकिन पूरे 10 महीनों तक पुलिस गोद लिए हुए बेटे अनुराग पर डाउट करती रही और उससे पूछताछ करती रही। बाकी सुचित्रा जैसी होममेड पर आपकी क्या राय है? जिनकी वजह से अब हर हाउसमेट को शक की नजर से देखा जाएगा कि यह भी गरीबी के आड़ में कहीं हमारे साथ भी सुचित्रा जैसा ना कर
