मेरठ नीले ड्रम हत्याकांड: मुस्कान और साहिल को मौत की सजा, जानिए सौरभ राजपूत की हत्या से अदालत के फैसले तक की पूरी कहानी
मेरठ नीले ड्रम हत्याकांड: उत्तर प्रदेश के मेरठ में सामने आए सौरभ राजपूत हत्याकांड ने पूरे देश को झकझोर दिया था। एक पति की हत्या, शव को नीले ड्रम में छिपाने की कोशिश और उसके बाद सामने आई जांच की परतों ने इस मामले को देशभर में चर्चा का विषय बना दिया। इस मामले में मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को अदालत ने दोषी करार दिया। 14 अक्टूबर 2026 को मेरठ की जिला अदालत ने दोनों को मौत की सजा सुनाई। आइए जानते हैं इस चर्चित हत्याकांड की शुरुआत से लेकर फैसले तक का पूरा घटनाक्रम।
- प्रेम विवाह से शुरू हुई थी सौरभ और मुस्कान की कहानी
सौरभ राजपूत मेरठ के रहने वाले थे और मर्चेंट नेवी से जुड़े रहे थे। वर्ष 2016 में उन्होंने मुस्कान रस्तोगी से प्रेम विवाह किया था। दोनों की एक बेटी भी थी। शुरुआती वैवाहिक जीवन के बाद उनके रिश्ते में तनाव और पारिवारिक विवाद की बातें सामने आईं। वर्ष 2019 में दोनों के बीच अलगाव की स्थिति बनी। इसी दौरान मुस्कान की नजदीकियां साहिल शुक्ला से बढ़ने की बात जांच में सामने आई।
- फरवरी 2025 में लंदन से लौटे थे सौरभ
मामले से जुड़ी रिपोर्टों के अनुसार, सौरभ 24 फरवरी 2025 के आसपास लंदन से मेरठ लौटे थे। परिवार में खुशियों का माहौल था और पत्नी मुस्कान के जन्मदिन के अवसर पर भी कार्यक्रम हुआ था। किसी को अंदाजा नहीं था कि कुछ ही दिनों बाद यह परिवार एक ऐसी घटना का सामना करेगा, जिसकी चर्चा देशभर में होने लगेगी।
- 3 मार्च 2025 को हुई थी हत्या

अभियोजन पक्ष के मुताबिक, 3 मार्च 2025 को मेरठ के इंद्रानगर स्थित घर में सौरभ की हत्या की गई। आरोप था कि मुस्कान ने सौरभ को खाने में नशीला पदार्थ देकर बेहोश करने के बाद साहिल को घर बुलाया। इसके बाद दोनों ने मिलकर सौरभ की चाकू से हत्या कर दी।
जांच में सामने आए विवरणों के मुताबिक, हत्या के बाद शव के टुकड़े किए गए। इसके बाद शव के अवशेष एक बड़े नीले प्लास्टिक के ड्रम में रखकर रेत, पानी और सीमेंट के मिश्रण से छिपाने की कोशिश की गई। यह कदम कथित तौर पर अपराध को छिपाने और शव से आने वाली दुर्गंध को रोकने के लिए उठाया गया था।
- हिमाचल प्रदेश जाने के बाद भी जारी रही गुमराह करने की कोशिश
अभियोजन पक्ष के अनुसार, घटना के बाद मुस्कान और साहिल हिमाचल प्रदेश चले गए। जांच में यह भी सामने आया कि सौरभ के मोबाइल फोन से उनके परिजनों को संदेश भेजे गए, जिससे ऐसा लगे कि सौरभ जीवित हैं और बाहर गए हुए हैं। इस तरह परिवार को कुछ समय तक वास्तविक स्थिति का पता नहीं चल पाया।
- 17 मार्च को खुला नीले ड्रम का राज
17 मार्च 2025 को सौरभ के परिजनों और अन्य लोगों को संदेह हुआ। इसके बाद घर में तलाश की गई और नीले ड्रम को खोलने पर सौरभ के शव के अवशेष बरामद हुए। इसी घटना के बाद मामला सामने आया और पुलिस ने हत्या की जांच शुरू की।
रिपोर्टों के अनुसार, सौरभ की छोटी बेटी की बातों ने भी परिवार और आसपास के लोगों का ध्यान ड्रम की ओर खींचने में भूमिका निभाई। हालांकि, मामले का खुलासा पुलिस की जांच और बरामद साक्ष्यों के आधार पर आगे बढ़ा।
- पुलिस जांच में जुटाए गए कई अहम सबूत
पुलिस ने मामले की जांच के दौरान आरोपियों की गतिविधियों, मोबाइल फोन रिकॉर्ड, लोकेशन, फोरेंसिक साक्ष्यों और अन्य परिस्थितिजन्य सबूतों की पड़ताल की। अभियोजन पक्ष ने अदालत में ड्रम, सीमेंट, अन्य सामान की खरीद से जुड़े गवाहों और तकनीकी साक्ष्यों सहित कई महत्वपूर्ण तथ्य पेश किए।
पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा। जांच पूरी होने के बाद आरोपपत्र दाखिल किया गया और मामले की सुनवाई अदालत में शुरू हुई।
- करीब 13 महीने चली सुनवाई, 30 सितंबर को दोषी करार
इस मामले की सुनवाई लगभग 13 महीने चली। रिपोर्टों के मुताबिक, अदालत में 126 सुनवाइयां हुईं और अभियोजन पक्ष के 22 गवाहों के बयान दर्ज किए गए। दोनों पक्षों की दलीलें और पेश किए गए साक्ष्यों पर विचार करने के बाद 30 सितंबर 2026 को मेरठ की जिला अदालत ने मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को हत्या तथा साक्ष्य मिटाने से संबंधित अपराधों में दोषी ठहराया।
- 14 अक्टूबर को दोनों को सुनाई गई मौत की सजा
14 अक्टूबर 2026 को जिला जज अरविंद कुमार मिश्रा की अदालत ने सजा पर सुनवाई के बाद दोनों दोषियों को मौत की सजा सुनाई। अभियोजन पक्ष ने अपराध की गंभीरता का हवाला देते हुए कठोरतम सजा की मांग की थी। अदालत का फैसला इस मामले में लंबे समय से न्याय की प्रतीक्षा कर रहे सौरभ के परिवार के लिए एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम रहा।
यह ध्यान रखना जरूरी है कि मौत की सजा सुनाया जाना और सजा का अंतिम रूप से लागू होना अलग-अलग कानूनी चरण हैं। मृत्युदंड के मामले में कानून के अनुसार उच्च न्यायालय की पुष्टि की प्रक्रिया भी आवश्यक होती है।
निष्कर्ष: एक हत्या, कई सवाल और लंबी कानूनी लड़ाई

सौरभ राजपूत हत्याकांड ने पारिवारिक रिश्तों, विश्वास और अपराध को छिपाने की कोशिश से जुड़े गंभीर सवाल खड़े किए। इस मामले में पुलिस जांच, तकनीकी साक्ष्यों, गवाहों और लंबी न्यायिक सुनवाई के बाद अदालत ने मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को मौत की सजा सुनाई।
अब इस मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया भी महत्वपूर्ण होगी। सौरभ के परिवार के लिए यह फैसला न्याय की दिशा में एक बड़ा कदम है, जबकि यह मामला समाज को याद दिलाता है कि गंभीर अपराधों की जांच और न्यायिक प्रक्रिया में साक्ष्यों की अहम भूमिका होती है।
