बाराबंकी: उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले के सुबेहा थाना क्षेत्र से पति-पत्नी के विवाद से जुड़ा एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसमें शादी के करीब डेढ़ महीने बाद महिला ने थाना परिसर के पास बच्चे को जन्म दे दिया। मामले की शुरुआत उस समय हुई, जब शादी के महज 10 दिन बाद काम के सिलसिले में गुजरात गए पति सूरज को पत्नी शिवानी के गर्भवती होने की जानकारी मिली। इसके बाद पति-पत्नी और दोनों परिवारों के बीच विवाद बढ़ गया और मामला पुलिस तक पहुंच गया। थाने में दोनों पक्षों के बीच बातचीत और समझौते की कोशिश चल रही थी, तभी शिवानी को प्रसव पीड़ा शुरू हो गई और उसने बच्चे को जन्म दे दिया।
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, सूरज और शिवानी की शादी 20 जून 2026 को हुई थी। सूरज का कहना है कि शादी के करीब 10 दिन बाद वह रोजगार के लिए गुजरात के अहमदाबाद चला गया था। वहां रहने के दौरान उसके परिवार की ओर से उसे शिवानी के गर्भवती होने की जानकारी दी गई। यह सुनकर सूरज वापस अपने गांव आया और पत्नी की गर्भावस्था को लेकर सवाल उठाए।
पत्नी की गर्भावस्था को लेकर उठे सवाल
सूरज के मुताबिक, शादी के इतने कम समय बाद पत्नी के गर्भवती होने की जानकारी मिलने से उसे शक हुआ। उसने शिवानी से इस संबंध में बातचीत की और मामले की पूरी सच्चाई जानने की कोशिश की। इसके बाद गांव के ही रहने वाले बबलू का नाम सामने आया।

यहां से मामले में दो अलग-अलग दावे सामने आए। पति सूरज का आरोप है कि शिवानी और बबलू के बीच पहले से कथित प्रेम संबंध था। दूसरी ओर, शिवानी ने बबलू पर उसके साथ जबरदस्ती करने का आरोप लगाया। रिपोर्टों के अनुसार, महिला का कहना था कि सामाजिक बदनामी के डर से उसने पहले इस बारे में किसी को जानकारी नहीं दी थी।
इस मामले में दोनों पक्षों के बयान अलग-अलग होने के कारण घटना की वास्तविक परिस्थितियों को लेकर सवाल बने हुए हैं। उपलब्ध रिपोर्टों में पुलिस की ओर से यह भी कहा गया है कि पूरे मामले को शिकायत के आधार पर देखा जा रहा था और दोनों पक्षों को बातचीत के लिए बुलाया गया था।
मामला पहुंचा सुबेहा थाने
विवाद बढ़ने के बाद शिवानी के पिता की ओर से पुलिस में शिकायत की गई। इसके बाद दोनों पक्षों को सुबेहा थाने बुलाया गया। सुबेहा थाना प्रभारी बेचू सिंह के अनुसार, दोनों पक्ष आईजीआरएस से जुड़ी शिकायत के सिलसिले में थाने पहुंचे थे। पुलिस के मुताबिक, बातचीत के दौरान दोनों पक्षों के बीच समझौते की स्थिति बन रही थी।
लेकिन इसी दौरान अचानक शिवानी की तबीयत बिगड़ गई। उसे प्रसव पीड़ा शुरू हो गई और थाना परिसर में बने मंदिर के पास ही उसने एक बच्चे को जन्म दे दिया। अचानक हुई इस घटना से वहां मौजूद पुलिसकर्मियों और दोनों परिवारों में अफरा-तफरी मच गई।
पुलिस ने तत्काल जच्चा और बच्चे को इलाज के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया। वहां प्राथमिक उपचार के बाद दोनों को जिला महिला अस्पताल रेफर किए जाने की जानकारी सामने आई है। रिपोर्टों के अनुसार, मां और नवजात को चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई गई।
पति-पत्नी के दावों में अंतर
इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि पति और पत्नी की ओर से घटना को लेकर अलग-अलग बातें सामने आई हैं। सूरज का दावा है कि उसे पत्नी की गर्भावस्था की जानकारी गुजरात में रहने के दौरान मिली और उसने इसके बाद पत्नी के कथित पुराने संबंधों के बारे में जानकारी जुटाई।
वहीं, शिवानी का कहना है कि उसके ससुराल पक्ष के लोगों को उसकी गर्भावस्था की जानकारी पहले से थी। इस बयान के बाद मामले की टाइमलाइन को लेकर भी सवाल उठे हैं। इसलिए उपलब्ध जानकारी के आधार पर किसी एक पक्ष के दावे को अंतिम सत्य मानना उचित नहीं होगा।
कुछ रिपोर्टों में सूरज की ओर से यह आरोप भी बताया गया है कि बबलू की तरफ से रुपये देकर मामला शांत करने और कुछ वर्षों तक बच्चे के खर्च की जिम्मेदारी लेने की बात कही गई थी। हालांकि, ये बातें संबंधित पक्षों के दावों के रूप में ही सामने आई हैं और इनके संबंध में स्वतंत्र पुष्टि अलग से सामने नहीं आई है।
अब जांच के बाद ही साफ होगी पूरी सच्चाई
बाराबंकी का यह मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि शादी के करीब डेढ़ महीने के भीतर महिला ने बच्चे को जन्म दिया और इसी दौरान पति-पत्नी के बीच गर्भावस्था को लेकर विवाद पुलिस तक पहुंच गया। हालांकि, घटना के संबंध में सामने आए बयानों में अंतर है।
फिलहाल इस मामले को लेकर किसी भी पक्ष के आरोप को अंतिम निष्कर्ष के रूप में पेश करना उचित नहीं है। यदि पुलिस जांच में कोई आपराधिक पहलू सामने आता है तो आगे की कार्रवाई उसी आधार पर होगी। वहीं बच्चे की देखभाल और दंपती के वैवाहिक संबंध को लेकर दोनों परिवारों के सामने अलग-अलग सामाजिक और कानूनी सवाल भी खड़े हैं।
इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल जरूर खड़ा किया है कि पारिवारिक विवाद जब पुलिस तक पहुंचते हैं तो तथ्यों की निष्पक्ष जांच और सभी पक्षों के बयान दर्ज करना कितना महत्वपूर्ण होता है। इस मामले में भी आगे की जांच और आधिकारिक कार्रवाई से ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि घटनाक्रम की वास्तविक स्थिति क्या थी।
