मुंबई की सड़कों पर फटे-पुराने कपड़े पहने एक व्यक्ति हाथ में कटोरा लिए लोगों से खाना और पैसे मांगता नजर आया। देखने वालों को वह आम भिखारी ही लगा, लेकिन जब उसकी असली पहचान सामने आई तो लोग हैरान रह गए। दरअसल, वह व्यक्ति घाटकोपर ईस्ट से BJP विधायक पराग शाह थे, जिन्होंने एक आध्यात्मिक अभ्यास के तहत कुछ घंटों के लिए भिखारी का वेश धारण किया था। इस घटना का वीडियो सितंबर 2026 में सोशल मीडिया पर वायरल हुआ।
करोड़ों की संपत्ति घोषित करने वाले विधायक सड़क पर मांगते दिखे भीख
पराग शाह महाराष्ट्र के घाटकोपर ईस्ट विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं और 2019 तथा 2024 में इसी सीट से निर्वाचित हुए। महाराष्ट्र के 2024 के चुनावी हलफनामे के अनुसार उन्होंने कुल 3,383.06 करोड़ रुपये की संपत्ति घोषित की थी। 2019 के हलफनामे में यह आंकड़ा करीब 500.62 करोड़ रुपये था। इसलिए उन्हें महाराष्ट्र के सबसे अधिक संपत्ति घोषित करने वाले उम्मीदवारों में गिना गया।
हालांकि, सोशल मीडिया और कुछ मीडिया रिपोर्टों में उनकी कंपनी की वैल्यू या कारोबारी संपत्ति को आधार बनाकर 5,000 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति का उल्लेख किया गया है। यह आंकड़ा उनकी व्यक्तिगत चुनावी हलफनामे में घोषित संपत्ति से अलग है। इसलिए दोनों आंकड़ों को एक ही चीज मानना सही नहीं होगा।

रियल एस्टेट कारोबार से बनाई पहचान
पराग शाह का संबंध रियल एस्टेट और कंस्ट्रक्शन कारोबार से रहा है। कंपनी के दस्तावेजों के अनुसार उन्होंने 1991 में अपने पारिवारिक कारोबार से जुड़कर काम शुरू किया था। बाद में वह Man Infraconstruction से जुड़े और कंपनी के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
उन्होंने कॉमर्स की पढ़ाई की है और 1990 में B.Com की डिग्री हासिल की थी। उनके चुनावी रिकॉर्ड में भी उन्हें बिजनेसमैन और ग्रेजुएट बताया गया है।
राजनीति में आने के बाद वह 2017 में मुंबई महानगरपालिका के पार्षद बने और इसके बाद 2019 में पहली बार घाटकोपर ईस्ट से महाराष्ट्र विधानसभा पहुंचे। 2024 में उन्होंने इसी सीट से दोबारा जीत दर्ज की।
फिर अचानक क्यों पहन लिया भिखारी का वेश?
14 सितंबर 2026 के आसपास उनका एक वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया, जिसमें वह फटे-पुराने कपड़ों में सड़क किनारे बैठे दिखाई दिए। चेहरे और बालों का ऐसा मेकअप किया गया था कि उन्हें आसानी से पहचानना मुश्किल हो। रिपोर्टों के मुताबिक उन्होंने अपनी सुरक्षा, गाड़ी और सामान्य सुविधाएं पीछे छोड़कर यह अनुभव लिया।
इसके पीछे वजह किसी आर्थिक मजबूरी को नहीं, बल्कि जैन आध्यात्मिक अभ्यास और आत्मचिंतन को बताया गया है।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार पराग शाह ने बताया कि यह अभ्यास उनके जैन आध्यात्मिक गुरु नम्रमुनि महाराज की सलाह पर किया गया था। उद्देश्य था कि कुछ समय के लिए पैसे, पद, पहचान और सामाजिक प्रतिष्ठा से दूर होकर यह महसूस किया जाए कि बिना इन चीजों के आम इंसान के साथ समाज का व्यवहार कैसा होता है।
लोगों से मांगा खाना और पैसे
भिखारी के रूप में पराग शाह घाटकोपर की सड़कों पर घूमे और लोगों से पैसे तथा भोजन मांगा। रिपोर्टों के मुताबिक शुरुआत में ज्यादातर लोग उन्हें पहचान नहीं पाए। किसी ने उन्हें कुछ पैसे दिए तो किसी ने खाना उपलब्ध कराया।
एक व्यक्ति ने कथित तौर पर उन्हें 20 रुपये दिए और खाने के लिए कहा। इसके बाद वह एक समोसे वाले के पास पहुंचे। उन्होंने बताया कि उनके पास पैसे नहीं हैं और उन्हें भूख लगी है। रिपोर्टों के मुताबिक दुकानदार ने उन्हें बिना पैसे लिए समोसे दिए।
कुछ रिपोर्टों में यह भी बताया गया कि उन्हें दाल, चावल और पानी जैसी चीजें भी लोगों से मिलीं। यानी जिस व्यक्ति को लोग करोड़ों की संपत्ति वाला विधायक और कारोबारी मानते हैं, उसी व्यक्ति ने कुछ घंटों के लिए सड़क पर खड़े होकर भोजन और मदद मांगने का अनुभव किया।
अपने ही इलाके में नहीं पहचान पाए लोग
इस अनुभव का एक दिलचस्प हिस्सा यह भी बताया गया कि भिखारी के वेश में होने के कारण आसपास के लोगों के साथ-साथ उनके सुरक्षा कर्मी और परिचित भी उन्हें पहचान नहीं पाए। यही इस प्रयोग का एक अहम हिस्सा था—देखना कि जब किसी व्यक्ति की पहचान, पद और आर्थिक हैसियत सामने न हो तो लोग उसके साथ कैसा व्यवहार करते हैं।
पराग शाह ने बाद में अपना भेष बदला और कुछ ऐसे लोगों से दोबारा मुलाकात की, जिन्होंने उन्हें भिखारी समझकर मदद की थी। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक उन्होंने मदद करने वाले दुकानदारों का आभार भी जताया। बाद की एक रिपोर्ट में बताया गया कि समोसा और बिरयानी देने वाले दो दुकानदारों को नम्रमुनि महाराज की मौजूदगी में सम्मानित भी किया गया।
क्या मिला इस अनुभव से?
रिपोर्टों के अनुसार पराग शाह ने इस अनुभव को जिंदगी को अलग नजरिए से देखने वाला बताया। सड़क पर कुछ घंटों तक भोजन और पैसे मांगने के दौरान उन्हें यह समझने का मौका मिला कि आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के लिए रोजमर्रा की छोटी-छोटी जरूरतें भी कितनी महत्वपूर्ण हो सकती हैं।
यह घटना इसलिए भी चर्चा में आई क्योंकि एक तरफ उनके चुनावी हलफनामे में हजारों करोड़ रुपये की संपत्ति दर्ज है, वहीं दूसरी तरफ वह खुद सड़क किनारे बैठकर कुछ रुपये और खाने की उम्मीद करते नजर आए। यही विरोधाभास सोशल मीडिया पर इस वीडियो को वायरल करने की बड़ी वजह बना।
इस पूरे मामले को एक राजनीतिक गतिविधि के बजाय व्यक्तिगत आध्यात्मिक और सामाजिक अनुभव के रूप में रिपोर्ट किया गया है। जैन परंपरा में त्याग, आत्मचिंतन और भौतिक आसक्ति से दूरी जैसे विचार महत्वपूर्ण माने जाते हैं, और उपलब्ध रिपोर्टों में पराग शाह के इस अनुभव को उसी संदर्भ में बताया गया है।
पद और पैसा या इंसानियत?
पराग शाह का यह अनुभव एक सवाल जरूर छोड़ता है—जब किसी व्यक्ति की पहचान, पद और पैसा सामने न हो तो समाज उसके साथ किस तरह व्यवहार करता है?
सड़क पर भिखारी के रूप में बैठे पराग शाह को किसी ने 20 रुपये दिए, किसी ने भोजन दिया और किसी ने बिना पैसे लिए समोसे खिला दिए। बाद में उन्होंने इन लोगों का आभार जताया।
