Friday, September 4, 2026
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खुद को ADM बताकर बहनों के साथ चला रही थी नौकरी दिलाने का खेल? विप्रा शर्मा की पूरी कहानी

बरेली/लखनऊ, उत्तर प्रदेश: उत्तर प्रदेश में फर्जी अधिकारी बनकर लोगों को नौकरी दिलाने के नाम पर कथित ठगी का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। आरोप है कि बरेली की रहने वाली विप्रा शर्मा ने खुद को ADM अधिकारी बताकर न केवल सरकारी अफसर का रुतबा कायम किया, बल्कि अपनी दो रिश्तेदारों को भी अपने साथ कर्मचारी बनाकर कथित तौर पर नौकरी दिलाने के नाम पर लोगों से लाखों रुपये वसूले। पुलिस कार्रवाई के बाद यह पूरा मामला सामने आया और तीनों महिलाओं को गिरफ्तार किए जाने की बात सामने आई है।

मामले की सबसे हैरान करने वाली बात यह बताई जा रही है कि विप्रा शर्मा के पास वास्तविक ADM पद होने का दावा कथित तौर पर फर्जी था। इसके बावजूद वह नीली बत्ती लगी SUV के साथ घूमती थीं और आसपास के लोगों के बीच खुद को प्रशासनिक अधिकारी के तौर पर पेश करती थीं।

हालांकि, इस मामले से जुड़े सभी आरोपों और घटनाक्रम की अंतिम पुष्टि जांच और अदालत की प्रक्रिया के बाद ही होगी।

पढ़ाई में थीं काफी आगे, UPSC की तैयारी भी की

बताया जाता है कि विप्रा शर्मा बरेली की रहने वाली हैं और उन्होंने उच्च शिक्षा हासिल की है। उनके बारे में दावा किया जाता है कि वह डबल MA और PhD हैं। वर्ष 2020 में उन्होंने UPPCS की प्रारंभिक परीक्षा भी पास की थी।

लेकिन आगे की परीक्षा में उन्हें सफलता नहीं मिली। आरोप है कि प्रशासनिक अधिकारी बनने की इच्छा और अधिकारी जैसा रुतबा हासिल करने के शौक के चलते उन्होंने वर्ष 2022 के आसपास खुद को ADM के तौर पर पेश करना शुरू कर दिया।

धीरे-धीरे स्थानीय स्तर पर लोग उन्हें ADM अधिकारी समझने लगे। कथित तौर पर वह नीली बत्ती वाली गाड़ी में चलती थीं और अपने आसपास ऐसा माहौल बनाए रखती थीं कि लोगों को उनके पद और प्रभाव पर शक न हो।

दो रिश्तेदारों को बनाया अपनी ‘टीम’

आरोप है कि विप्रा शर्मा ने अकेले यह कथित नेटवर्क नहीं चलाया। उन्होंने अपने साथ दो महिलाओं को भी शामिल किया। इनमें एक उनकी सगी बहन शिख शर्मा और दूसरी उनकी मामा की बेटी दीक्षा पाठक बताई जा रही हैं।

कथित तौर पर तीनों ने अपने-अपने काम बांट रखे थे। दीक्षा पाठक का काम ऐसे लोगों की तलाश करना बताया गया, जिन्हें नौकरी की जरूरत थी। शिख शर्मा कथित तौर पर लोगों के बीच अधिकारी का प्रभाव और माहौल तैयार करती थीं।

इसके बाद कथित तौर पर अंतिम बातचीत और पैसे की डील विप्रा शर्मा करती थीं।

इस तरह तीनों की एक ऐसी टीम तैयार हो गई, जिसके सामने आम व्यक्ति को यह भरोसा हो जाता था कि उसके संपर्क में वास्तव में कोई बड़ा सरकारी अधिकारी है और वह सरकारी नौकरी या अन्य काम करवा सकता है।

नौकरी के नाम पर 10 से 15 लाख रुपये लेने का आरोप

पुलिस के सामने आए आरोपों के मुताबिक, तीनों महिलाएं लोगों को सरकारी नौकरी दिलाने का भरोसा देती थीं। इसके बदले कथित तौर पर प्रत्येक व्यक्ति से 10 से 15 लाख रुपये तक लिए जाते थे।

सिर्फ पैसे लेना ही नहीं, बल्कि लोगों को भरोसा दिलाने के लिए फर्जी दस्तावेज तैयार करने का भी आरोप है।

कथित तौर पर फर्जी नियुक्ति पत्र तैयार किए जाते थे। उन पर अधिकारियों के हस्ताक्षर और सरकारी मुहर जैसी चीजें लगाई जाती थीं। इसके बाद नियुक्ति पत्र को बाकायदा पोस्ट ऑफिस के जरिए संबंधित व्यक्ति के घर तक भेजे जाने का दावा किया गया है।

यानी पूरी प्रक्रिया को इस तरह दिखाने की कोशिश की जाती थी कि पीड़ित को लंबे समय तक यह एहसास ही न हो कि उसके साथ धोखा हो रहा है।

एक महिला ने दिए 15 लाख और खुल गया राज

मामले का खुलासा कथित तौर पर उस समय हुआ जब एक महिला ने नौकरी पाने के लिए 15 लाख रुपये दिए।

आरोप है कि पैसे लेने के बाद उसे एक नियुक्ति पत्र दिया गया। महिला को लगा कि उसकी सरकारी नौकरी लग गई है। इसके बाद वह नियुक्ति पत्र लेकर संबंधित अधिकारियों के पास पहुंची।

वहां दस्तावेज की जांच हुई तो कथित तौर पर पता चला कि नियुक्ति पत्र फर्जी है। उस पर मौजूद हस्ताक्षर और अन्य आधिकारिक विवरण वास्तविक नहीं थे।

यह जानकारी सामने आते ही महिला के पैरों तले जमीन खिसक गई। उसने नौकरी पाने के लिए अपनी मेहनत की कमाई के 15 लाख रुपये दिए थे, लेकिन उसके हाथ में जो नियुक्ति पत्र था, वह कथित तौर पर नकली निकला।

इसके बाद महिला ने पुलिस से संपर्क किया और पूरी शिकायत दर्ज कराई।

पुलिस पहुंची तो सामने आया पूरा खेल

शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की। आरोपों के मुताबिक जांच आगे बढ़ी तो विप्रा शर्मा और उनकी दोनों सहयोगियों तक पुलिस पहुंची।

पुलिस कार्रवाई के दौरान नीली बत्ती लगी SUV का भी जिक्र सामने आया। जिस वाहन का इस्तेमाल कथित तौर पर अधिकारी होने का प्रभाव पैदा करने के लिए किया जाता था, उसे भी पुलिस ने अपने कब्जे में लिया।

इसके बाद तीनों महिलाओं को गिरफ्तार किए जाने की बात सामने आई।

मामले में पुलिस ने कथित तौर पर बैंक खातों की भी जांच की। रिपोर्टों में दावा किया गया है कि विप्रा शर्मा के बैंक खाते में करीब 55 लाख रुपये मिले, जिन्हें पुलिस द्वारा फ्रीज किए जाने की बात कही गई है।

यह रकम कहां से आई और इसका कथित फर्जी नौकरी नेटवर्क से क्या संबंध है, इसका जवाब जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।

सिर्फ ठगने वाले ही नहीं, नौकरी खरीदने वालों पर भी सवाल

यह मामला सिर्फ फर्जी अधिकारी बनने के आरोप तक सीमित नहीं है। इसमें एक दूसरा बड़ा सवाल भी सामने आता है—आखिर लोग सरकारी नौकरी पाने के लिए लाखों रुपये देने को तैयार क्यों हो जाते हैं?

सरकारी नौकरी हासिल करने का कोई शॉर्टकट नहीं होता। भर्ती प्रक्रिया निर्धारित नियमों, परीक्षा और आधिकारिक चयन प्रक्रिया के जरिए होती है। ऐसे में अगर कोई व्यक्ति किसी अधिकारी या नेता से संपर्क होने का दावा करके नौकरी लगवाने के नाम पर पैसे मांगता है तो यह अपने आप में बड़ा खतरे का संकेत है।

इस मामले में अगर पुलिस की जांच में आरोप सही साबित होते हैं तो यह उन लोगों के लिए भी चेतावनी होगी जो मेहनत और परीक्षा के बजाय पैसे देकर सरकारी नौकरी हासिल करने का रास्ता तलाशते हैं।

नीली बत्ती और रुतबे के पीछे छिपा कथित फर्जीवाड़ा

विप्रा शर्मा की कहानी में सबसे चौंकाने वाला पहलू यही है कि कथित तौर पर सिर्फ एक फर्जी पहचान नहीं बनाई गई, बल्कि उसके साथ पूरा माहौल तैयार किया गया। नीली बत्ती वाली गाड़ी, ADM का परिचय, साथ में काम करने वाली महिलाएं और फर्जी नियुक्ति पत्र—इन सभी चीजों के जरिए कथित तौर पर लोगों का विश्वास जीतने की कोशिश की गई।

अब पुलिस जांच में यह स्पष्ट होना बाकी है कि इस कथित नेटवर्क से कितने लोग जुड़े थे, कितने लोगों से पैसे लिए गए और कुल कितनी रकम का लेन-देन हुआ।

फिलहाल तीनों आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद मामला कानूनी प्रक्रिया में है। पुलिस की जांच और अदालत के फैसले से ही यह स्पष्ट होगा कि लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है।

यह घटना एक महत्वपूर्ण संदेश जरूर देती है—सरकारी नौकरी के नाम पर किसी भी व्यक्ति को लाखों रुपये देने से पहले उसके दावे और आधिकारिक दस्तावेजों की जांच करना बेहद जरूरी है।

Sonu Baali
Sonu Baalihttp://khasharyananews.com
संस्थापक, खास हरियाणा न्यूज़- हरियाणा की ज़मीन से जुड़ा एक निष्पक्ष और ज़मीनी पत्रकार। पिछले 6+ वर्षों से जनता की आवाज़ को बिना किसी एजेंडे के सामने लाने का प्रयास कर रहे हैं। देसी अंदाज़ और सच्ची पत्रकारिता में विश्वास रखते हैं। 🌐 khasharyana.com
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