Monday, September 7, 2026
Homeस्वास्थ्यइकलौते बेटे की मौत के बाद माता-पिता ने लिया अंगदान का फैसला,...

इकलौते बेटे की मौत के बाद माता-पिता ने लिया अंगदान का फैसला, पिता बोले- “मेरा बेटा एक साथ चार जगह जन्म ले चुका है”

इंदौर। जीवन और मृत्यु के बीच की लड़ाई कई बार इंसान को ऐसे फैसले लेने पर मजबूर कर देती है, जो हमेशा के लिए मिसाल बन जाते हैं। मध्य प्रदेश के इंदौर में रहने वाले 25 वर्षीय गौरव के परिवार ने भी ऐसा ही एक निर्णय लिया, जिसने दुख की घड़ी को कई लोगों के लिए नई जिंदगी में बदल दिया। अपने इकलौते बेटे को खोने का गम सहने के बावजूद माता-पिता ने उसके अंगदान की अनुमति देकर चार लोगों को नया जीवन देने का रास्ता खोल दिया। यही वजह है कि गौरव के पिता सतीश की आंखों से आंसू छलक पड़े, लेकिन उनके शब्द हर किसी का दिल छू गए। उन्होंने कहा, “मेरा बेटा एक साथ चार जगह जन्म ले चुका है। बस भगवान उसे जहां भी रखे, खुश रखे।”

फिल्म इंडस्ट्री में काम करते थे गौरव

इंदौर के खजूरी बाजार क्षेत्र के रहने वाले गौरव फिल्म जगत में कास्टिंग कोऑर्डिनेटर के रूप में कार्यरत थे। उनके पिता सतीश सरकारी कर्मचारी हैं, जबकि मां कविता गृहिणी हैं। गौरव परिवार का इकलौता बेटा था और पूरे परिवार की उम्मीदों का केंद्र भी।

अचानक बिगड़ी तबीयत

13 जुलाई 2026 को गौरव की तबीयत अचानक खराब हो गई। परिवार ने बिना किसी देरी के उन्हें इंदौर के राजश्री अपोलो हॉस्पिटल में भर्ती कराया। डॉक्टरों ने जांच के बाद बताया कि उनके मस्तिष्क में गंभीर समस्या है, जिसके चलते 15 जुलाई को ब्रेन सर्जरी की गई।

परिवार को उम्मीद थी कि ऑपरेशन के बाद गौरव की हालत में सुधार होगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। 17 जुलाई को उनकी तबीयत और बिगड़ गई और उन्हें वेंटिलेटर पर शिफ्ट करना पड़ा। इसके बाद कई दिनों तक डॉक्टर लगातार उनका इलाज करते रहे, जबकि परिवार भगवान से उनके स्वस्थ होने की प्रार्थना करता रहा।

डॉक्टरों ने सुनाई सबसे दर्दनाक खबर

करीब दस दिनों तक चली इस जंग के बाद 26 जुलाई की रात डॉक्टरों ने गौरव के परिवार को बताया कि उनका ब्रेन डेड हो चुका है। डॉक्टरों के अनुसार अब उनके बचने की कोई संभावना नहीं बची थी। कुछ घंटों बाद गौरव ने अंतिम सांस ली।

यह खबर सुनकर पूरा परिवार टूट गया। माता-पिता के लिए यह सबसे बड़ा सदमा था क्योंकि उनका इकलौता बेटा अब हमेशा के लिए उन्हें छोड़ चुका था।

दुख की घड़ी में सामने आया अंगदान का प्रस्ताव

गौरव के निधन के बाद अंगदान के लिए कार्य करने वाली संस्था मुस्कान पारमार्थिक ट्रस्ट के प्रतिनिधियों ने परिवार से संपर्क किया। सबसे पहले उन्होंने गौरव की बड़ी बहन वैदेही राठी और उनके पति पलकश राठी से इस विषय पर बात की।

दोनों ने गंभीरता से इस प्रस्ताव को समझा। उन्होंने सोचा कि गौरव अब उनके बीच नहीं है, लेकिन उसके अंग किसी और की जिंदगी बचा सकते हैं। हालांकि अंतिम निर्णय लेने का अधिकार केवल गौरव के माता-पिता के पास था।

इकलौते बेटे को खो चुके माता-पिता के सामने रखा प्रस्ताव

उस समय सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि जिस मां-बाप ने अभी-अभी अपने इकलौते बेटे को खोया हो, उनसे अंगदान जैसी बात कैसे की जाए।

गौरव के जीजा पलकश राठी और परिवार के अन्य सदस्यों ने हिम्मत जुटाई। वे गौरव के पिता सतीश और मां कविता के पास पहुंचे और बेहद शांत तरीके से अंगदान का महत्व समझाया। उन्होंने बताया कि गौरव के अंग कई लोगों की जिंदगी बचा सकते हैं।

गहरे दुख में डूबे माता-पिता ने कुछ समय तक चुपचाप सारी बातें सुनीं। इसके बाद उन्होंने अपने बेटे के अंगदान की अनुमति दे दी। यह फैसला जितना कठिन था, उतना ही प्रेरणादायक भी।

चार लोगों को मिली नई जिंदगी

गौरव के अंगदान के बाद कई मरीजों को नई उम्मीद मिली।

  • उनका लीवर इंदौर के राजश्री अपोलो हॉस्पिटल में भर्ती 48 वर्षीय मरीज को प्रत्यारोपित किया गया।
  • उनकी दोनों किडनियां इंदौर के दूसरे अस्पताल में भर्ती दो महिला मरीजों को दी गईं।
  • उनका हृदय विशेष ग्रीन कॉरिडोर के माध्यम से गुजरात के अहमदाबाद भेजा गया, जहां एक हार्ट मरीज का सफल प्रत्यारोपण किया गया।
  • वहीं उनकी आंखें भी दान की गईं, जिससे किसी जरूरतमंद को नई रोशनी मिल सकेगी।

इस तरह गौरव के अंगों ने कई परिवारों की उम्मीदें फिर से जगा दीं।

पिता की बात सुनकर नम हो गईं सभी की आंखें

जब अंतिम विदाई के दौरान मौजूद पत्रकारों ने गौरव के पिता सतीश से बात की तो उन्होंने बेहद भावुक होकर कहा,

“मेरा बेटा एक साथ चार जगह जन्म ले चुका है। मेरे बेटे ने चार लोगों को नई जिंदगी दी है। भगवान उसे जहां भी रखे, खुश रखे।”

उनके इन शब्दों ने वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम कर दीं। दुख के बीच भी उन्होंने मानवता का ऐसा संदेश दिया, जिसे लंबे समय तक याद रखा जाएगा।

गार्ड ऑफ ऑनर के साथ दी गई अंतिम विदाई

अंगदान की प्रक्रिया पूरी होने के बाद 25 वर्षीय गौरव को सम्मानपूर्वक गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। इसके बाद पूरे सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। अंतिम यात्रा में शामिल लोगों ने परिवार के साहस और मानवता की भावना को सलाम किया।

समाज के लिए एक प्रेरणा

गौरव अब इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनके अंग कई लोगों के शरीर में धड़क रहे हैं। उनका दिल किसी की छाती में धड़क रहा है, किडनियां दो मरीजों के शरीर को नया जीवन दे रही हैं, लीवर एक व्यक्ति को जिंदगी दे चुका है और उनकी आंखें किसी की दुनिया रोशन करेंगी।

सबसे बड़ी बात यह है कि अपने इकलौते बेटे को खोने के बाद भी माता-पिता ने ऐसा निर्णय लिया, जो समाज के लिए एक मिसाल बन गया। उनका यह कदम बताता है कि अंगदान केवल एक चिकित्सकीय प्रक्रिया नहीं, बल्कि मानवता की सबसे बड़ी सेवा भी है।

आज गौरव भले ही अपने परिवार के बीच नहीं हैं, लेकिन उनके अंगों के माध्यम से वह कई लोगों की जिंदगी में हमेशा जीवित रहेंगे। यही कारण है कि उनके पिता ने कहा कि उनका बेटा एक साथ चार जगह जन्म ले चुका है। यह केवल एक भावुक बयान नहीं, बल्कि अंगदान के महत्व को समझाने वाला ऐसा संदेश है, जो हर व्यक्ति को जीवन के बाद भी जीवन देने की प्रेरणा देता है।

Sonu Baali
Sonu Baalihttp://khasharyananews.com
संस्थापक, खास हरियाणा न्यूज़- हरियाणा की ज़मीन से जुड़ा एक निष्पक्ष और ज़मीनी पत्रकार। पिछले 6+ वर्षों से जनता की आवाज़ को बिना किसी एजेंडे के सामने लाने का प्रयास कर रहे हैं। देसी अंदाज़ और सच्ची पत्रकारिता में विश्वास रखते हैं। 🌐 khasharyana.com
RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Recent Comments