Saturday, July 25, 2026
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मौत के बाद दूसरी जिंदगी! सुमित्रा बनी ‘शिवा’, पुनर्जन्म की इस कहानी ने दुनिया को चौंका दिया

क्या भारत में पुनर्जन्म का सबसे चर्चित मामला सच था? सुमित्रा-शिवा की कहानी पर विदेशी वैज्ञानिकों ने भी की थी जांच

पुनर्जन्म की इकलौती ऐसी कहानी जो सच है क्योंकि इस कहानी की सत्यता की जांच के लिए अमेरिका के वर्जनिया यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों को पुनर्जन्म जैसी घटनाओं की सत्यता की जांच करते हैं। उन्हें भारत आना पड़ा। वो भारत आकर इस पूरी घटना के साक्ष्य को चेक करते हैं। फैक्ट्स देखते हैं, रिसर्च करते हैं। तब जाके उन्होंने भारत की इकलौती पुनर्जन्म की कहानी को सच्ची कहानी का सर्टिफिकेट दिया। दरअसल इस कहानी की शुरुआत होती है उत्तर प्रदेश के इटावा के सरीपुरा गांव से जहां पर एक ठाकुर का परिवार रहा करता था। परिवार में सिर्फ दो लोग थे पति और पत्नी। [संगीत] उनको कुछ समय बाद एक बेटी पैदा होती है जिसका नाम वो सुमित्रा रखते हैं। पिता घर की जिम्मेदारियों की वजह से दिल्ली कमाने चले जाते हैं तो सुमित्रा अपनी मां के साथ ही रहा करती थी। लेकिन सुमित्रा जब महज 2 से 3 साल की थी तभी सुमित्रा की मां यह दुनिया छोड़कर चली जाती हैं। यानी सुमित्रा जो पहले से ही अपने पिता के प्यार के बगैर सिर्फ अपनी मां के पास रह रही थी। आज उस सुमित्रा की मां भी अब उसको छोड़कर चली गई थी। तो सुमित्रा का पालन पोषण उनके दूर के रिश्तेदार ने किया। जब सुमित्रा महज 13 साल की थी तो सुमित्रा की शादी जगदीश सिंह से करा दी जाती है। जगदीश सिंह सुमित्रा से बेइंतहा प्यार करते थे।

लेकिन घर की मजबूरी की वजह से अपने परिवार का पेट भरने के लिए जगदीश भी अपनी पत्नी सुमित्रा [संगीत] को छोड़कर बाहर कमाने चले जाते हैं। सुमित्रा के ससुराल में सासससुर तो थे लेकिन सुमित्रा अपने सासससुर से उतना घुलमिल नहीं पाई [संगीत] थी। इस वजह से सुमित्रा अपने आप को बहुत ही ज्यादा अकेला, लाचार और बेबस महसूस कर रही थी। जन्म हुआ तो पिता बाहर कमाने चले गए। जब महज दो से तीन साल की थी तो मां यह दुनिया छोड़कर चली गई। दूर के कजिन ने सुमित्रा का भरण पोषण किया [संगीत] और आज जब शादी हुई, सुमित्रा को अपने पति के साथ की जरूरत थी। तो सुमित्रा के पति भी ना चाहते हुए भी [संगीत] सुमित्रा को छोड़कर बाहर कमाने चले जाते हैं। सुमित्रा हमेशा ससुराल में शांत, गुमसुम और अकेले ही रहा करती थी। दिसंबर 1984 में सुमित्रा एक बेटे को जन्म देती है। सुमित्रा बहुत ही ज्यादा खुश होती है। उसे लगता है अब उसका साथी आ गया। अब उसी के साथ उसका समय बीतेगा। उसे प्यार करेगी और वह अपने बेटे को हमेशा अपने सीने से लगा के रखेगी। और सुमित्रा ऐसा ही करती। दिन भर अपने बेटे के साथ खेलती। जब तक उसके दोनों हाथ खाली रहते तो उन हाथों में उसका बेटा रहता। उसे हमेशा अपने सीने से लगा के रखती। वो अपने बेटे को तभी अपने आप से दूर रखती जब उसके दोनों हाथ कामों में व्यस्त हो। वरना वह अपने बेटे को हमेशा अपने दोनों हाथों से खिलाती रहती। उसे अपने सीने से लगाई रहती।

बेटा धीरे-धीरे 5 महीने का हो चुका था। अप्रैल 1985 का समय था जब सुमित्रा गांव के कुएं पर पानी भरने जा रही थी। [संगीत] एक हाथ में पानी भरने वाला बर्तन और दूसरे हाथ में उनका 5 महीने का बेटा जिसे वो सीने से लगाकर गांव के कुएं में पानी भरने जाती हैं। सुमित्रा जब पानी भर के अपने घर की तरफ वापस आ रही थी, तभी जोर-जोर से सांस लेने की आवाज, दांत किटकिटाने की आवाज आने लगती है। आसपास के लोग जब पीछे मुड़ के देखते हैं तो वह देखते हैं सुमित्रा के हाथ में जो पानी का बर्तन था वो नीचे गिरा पड़ा था और गोद में जो बेटा था उसे सुमित्रा और तेज जकड़ के पकड़ ली थी। एक हाथ सुमित्रा का आसमान की तरफ और उसका चेहरा भी आसमान की तरफ था। सुमित्रा आसमान की तरफ देखते हुए अपने आंखों को गोल-गोल घुमाए जा रही थी। दांत को कटखटा रही थी और जोर-जोर से सांस ले रही थी। जैसे सुमित्रा कुछ कहने की कोशिश कर रही हो लेकिन उसके मुख से कुछ भी नहीं निकल रहा हो। उसकी यह हालत देखकर आसपास खड़े लोगों को भी डर लग जाता है। वो चाह के भी सुमित्रा के पास नहीं जा पा रहे थे। उन्हें लगा सुमित्रा के ऊपर भूत प्रेत का साया आ गया है। सुमित्रा के हाथ में जो उनका बेटा था जिसे सुमित्रा कभी एक पल के लिए भी रोने नहीं देती थी। आज वो बेटा सुमित्रा की यह हरकत देखकर चिल्ला रहा था, चीख रहा था। लेकिन सुमित्रा को अपने बेटे के चीखने की, चिल्लाने की जरा भी खबर नहीं थी। [संगीत] लगभग 5 से 10 मिनट ऐसा ही होने के बाद सुमित्रा नॉर्मल हो जाती है। तो वह देखती है कि आसपास सभी लोग मुझे देख रहे हैं। मेरा बेटा चिल्ला रहा है। तो वह लोगों से पूछती है कि क्या हुआ? कुछ हुआ था क्या? तो जो वहां पर लोग थे, वह सुमित्रा की वैसी हरकत देखकर डर गए थे। उनकी हिम्मत नहीं हो रही थी कि वह सुमित्रा से यह कह पाते कि तुम अभी कुछ समय पहले ही क्या कर रही थी।

वो कहते हैं नहीं कुछ नहीं हुआ। बस ऐसे ही तुम्हारे हाथ से पानी गिर गया। लेकिन सुमित्रा के मन में यह बात बस गई थी कि शायद मेरे साथ कुछ तो हुआ था जो लोग मुझे यहां पर देख रहे थे। मेरा बेटा रो रहा था। सुमित्रा वापस अपने पानी वाले बर्तन को उठाती है और दोबारा कुएं के पास जाती है। पानी भरती है और पानी लेकर अपने घर चली जाती है। घर जाने के बाद भी सुमित्रा के मन में यही चल रहा था कि आखिर मेरे साथ हुआ क्या था। लोग मुझे देख क्यों रहे थे? लेकिन सुमित्रा को कुछ याद नहीं था तो वह कुछ समय बाद वह सारी बातें भूल जाती है। रात बीती, सुबह हुई और लगातार तीन दिनों तक सुमित्रा बिल्कुल नॉर्मल रही। लेकिन लगभग तीन दिन बीत जाने के बाद जब सुमित्रा का बेटा सुबह सो रहा था। सुमित्रा किचन में खाना बना रही थी। [संगीत] तो वह दोबारा जोर-जोर से सांसे लेने लगती है। उसका दांत कटखटाने लगता है। बाहर बैठी सासू किचन में आती हैं। वो सुमित्रा का यह हाल देखकर घबरा जाती हैं। वो चुपचाप सुमित्रा को देखे जा रही थी। सुमित्रा अपने पुराने रूप में आ चुकी थी। वही सुमित्रा जो ऊपर की तरफ हाथ करती अपने सर को ऊपर करते हुए अपने आंख को घुमाए जा रही थी। दांत कटखटा रहा था। जोर-जोर से सांस ले रही थी। मानो सुमित्रा दोबारा कुछ कहने की कोशिश कर रही हो लेकिन उसके मुख से कुछ निकल ना रहा हो। लगातार 10 मिनट तक सुमित्रा इसी हालत में रही। जब वो नॉर्मल होती है तो वह देखती है कि वहां पर उसकी सास और ससुर दोनों खड़े थे। वो पूछती है [संगीत] क्यों क्या हुआ था? आप लोग मुझे ऐसे क्यों देख रहे हैं? सासू मां भी सुमित्रा का वो रूप देख के डर गई थी। उनकी यह हिम्मत नहीं हो रही थी कि वो सुमित्रा से कह पाती कि तुम अभी 2 मिनट पहले [संगीत] किस हालात में थी। वो सुमित्रा से पूछती है क्यों कोई दिक्कत है क्या? तबीयत खराब है क्या? सुमित्रा बोलती है नहीं मैं बिल्कुल नॉर्मल हूं। लेकिन सुमित्रा की सास सुमित्रा का यह रूप देख के डर गई थी। वो चिट्ठी के माध्यम से सुमित्रा के पति को सुमित्रा का यह हाल बताती हैं। सुमित्रा के पति गांव चले आते हैं। तो कुछ दिनों तक तो सुमित्रा बिल्कुल ठीक रही। लेकिन कुछ दिन बाद दोबारा सुमित्रा के साथ ऐसा ही हुआ। ऊपर देखते हुए आंख नचाती उंगली को ऊपर करती हुई कुछ कहने की कोशिश करती।

लेकिन सुमित्रा के मुख से कुछ भी नहीं निकलता। सुमित्रा का यह रूप देख सुमित्रा के पति भी डर जाते हैं। वह गांव के एक वैद को बुलाते हैं। सुमित्रा की सारी बातें बताते हैं। वैद जब जाकर सुमित्रा को देखते हैं तो वैद कहते हैं कुछ नहीं हुआ। सुमित्रा बिल्कुल नॉर्मल है। अब धीरे-धीरे सुमित्रा को भी यह महसूस होने लगा था कि उसके साथ कुछ ना कुछ तो हो रहा है। तो उसे लगा कहीं मैं इस वजह से अपने छोटे बच्चे को ना नुकसान पहुंचा दूं। इस वजह से जिस बच्चे को सुमित्रा अपने जान से बढ़ के लाड प्यार करती थी, उसे दुलार करती थी, एक पल के लिए भी वह अपने आप से अपने बच्चे को दूर नहीं करती थी। धीरे-धीरे अपने बच्चे से दूर होने लगी। वो अपने बच्चे को तभी अपने पास लेती जब उसके आसपास उसकी सास, ससुर या उनके पति होते। जब भी सुमित्रा अकेले होती, वह अपने बच्चे से दूर ही रहा करती। उसे लगता कब मेरे साथ क्या हो जाए और मैं उस रूप में आने के बाद कहीं अपने बच्चे को कुछ नुकसान ना पहुंचा दूं। धीरे-धीरे समय बीत रहा था। 16 जुलाई 1995 का समय था जब सुमित्रा सुबह का खाना बना चुकी थी। अपने सासससुर पति को खाना खिला चुकी थी। दोपहर का समय था जब सुमित्रा अपने बच्चे के साथ खेल रही थी। काफी देर खेलने के बाद सुमित्रा जब थक जाती है तो वो अपने बच्चे को नीचे बिठा देती है और थोड़ा चैन की सांस लेती है। तभी सुमित्रा दोबारा उस रूप में चली आती है। वही हाल उसका एक हाथ ऊपर की तरफ सर भी ऊपर की तरफ देखकर अपने आंख को घुमा रही थी। दांत कटखटा रहे थे। जोर-जोर से सांस ले रही थी। लेकिन जो हर बार सुमित्रा के जुबान से कुछ निकलता नहीं था। बस वह गहरी-गहरी सांसे लिया करती थी। इस बार सुमित्रा एक बात बोलती है और वह बोलती है कि आज से महज 3 दिन बाद 19 जुलाई 1995 को मेरी मृत्यु हो जाएगी। यह सुनकर सामने खड़े पति साससुर भी डर जाते हैं क्योंकि वो पहली बार था जब सुमित्रा अपने जुबान से उस दौरे में आने के बाद कुछ बोली थी। सुमित्रा कुछ समय बाद नॉर्मल होती है तो उसके पति डरते हुए पूछते हैं कि अभी तुमने क्या बोला? तो सुमित्रा बोलती है नहीं मैंने कुछ नहीं बोला। तो पति डरते हुए सुमित्रा से कहते हैं अभी तुमने कहा कि मैं 3 दिन बाद मर जाऊंगी। तो सुमित्रा कहती है अरे पागल हो मैं ऐसा क्यों कहूंगी? मैं बिल्कुल नॉर्मल हूं। मुझे कुछ नहीं हुआ। लेकिन सुमित्रा के पति और उनके सासससुर के मन में अब डर बस गया था।

सुमित्रा लगातार तीन दिनों तक नॉर्मल रही। समय आ जाता है। तारीख आती है 19 जुलाई 1995 [संगीत] का। उस दिन सुमित्रा अपने आप को लगातार बचा के ही रखती थी क्योंकि उनके पति भी नहीं चाहते थे कि सुमित्रा कोई ऐसा काम करें जिससे उसकी जान जाने का डर रहे। सुमित्रा ना तो सुबह खाना बनाती है ना कहीं ऊंचे स्थान पर जाती है ना पानी भरने जाती है। बस वो दिन भर कमरे में लेट कर आराम ही कर रही थी। धीरे-धीरे शाम का वक्त हो रहा था। परिवार वालों को भी लगा कि सब कुछ ठीक है। अब यह दिन तो बीत ही जाएगा। लेकिन शाम के लगभग 4:00 बजे के आसपास सुमित्रा घर में लेटी हुई अपने आप को उलझन में महसूस करती है तो वह सोचती है कि गर्मी की वजह से शायद मुझे दिक्कत हो रही है तो वो अपने रूम से बाहर निकलकर दरवाजे की तरफ खड़ी होकर बाहर की ठंडी हवा लेने लगी। तभी गांव की सुमित्रा की एक सखी वहां से गुजरती हैं। तो सुमित्रा अपनी उस सहेली को बुलाकर कहती है कहां जा रही हो? सुमित्रा को उस सहेली को भी पता था कि सुमित्रा आज की तारीख ही रखी है जिस दिन वह बोली है कि उसकी मौत हो जाएगी। वो खड़ी होकर सुमित्रा से बात करती हैं। दोनों लोग हंसी मजाक करते हैं और सुमित्रा की वह सहेली कहती है कि सुमित्रा तुम्हें अक्सर क्या हो जाता है? तुम ऐसा क्यों करने लगती हो? तो सुमित्रा कहती है पता नहीं क्या हो जाता है मुझे खुद ही नहीं पता। दोनों आपस में बात ही कर रही थी तभी सुमित्रा खड़ी ही थी कि सुमित्रा की पूरी बॉडी पत्थर की तरह हो जाती है। बिल्कुल शांत एकदम चुप। सुमित्रा की सहेली बातें किए जा रही हैं। लेकिन जब सुमित्रा कुछ समय तक जवाब नहीं देती तो सुमित्रा की सहेली सुमित्रा [संगीत] से पूछती है क्या हुआ? वो पास जाकर देखती हैं तो सुमित्रा की आंखें खुली हुई और सुमित्रा की पूरी शरीर पत्थर सी हो गई थी। वह जोर-जोर से बदहास हालत में चिल्लाने लगती हैं। अंदर से उनके पति भी आते हैं, सासससुर भी आते हैं तो देखते हैं सुमित्रा का पूरा शरीर पत्थर बन गया है।

वह किसी तरह से सुमित्रा को अंदर रूम में ले जाते हैं। एक खाट पर लिटाते हैं। सुमित्रा के [संगीत] पति दौड़े भागे गांव के बैद के पास जाते हैं। वैद बुलाए जाते हैं। जब वैद सुमित्रा को देखते हैं तो वैद कहते हैं सुमित्रा अब यह दुनिया छोड़कर जा चुकी है। उसकी सांसे नहीं चल रही है। घर में रोना पिटना मच जाता है। आसपास गांव के सभी लोग सुमित्रा को अंतिम विदाई देने के लिए आते हैं। सुमित्रा को नहलाने की प्रक्रिया चल रही थी। सुमित्रा के पूरे शरीर में तेल लगाया जा रहा था। तभी सुमित्रा के पास से एक औरत उठती है और भागते हुए बाहर जाती है और वह कहती है कि सुमित्रा की तो सांसे चल रही हैं। बाहर बैठे सभी लोग कहते हैं अरे तुमको घबराहट हुई है। तुमने सुमित्रा का वो रूप देखा है। तभी शायद तुम्हारे मन में सुमित्रा को लेकर डर बस गया है। लेकिन वो कहती है नहीं आप अंदर चलकर एक बार देखिए सुमित्रा की सांसे चल रही हैं। बाहर वैद बैठे ही थे। वैद भी अंदर जाते हैं तो देखते हैं सुमित्रा की सांसे चल रही थी। बाहर जो पति सुमित्रा के लिए रो रहा था वो दौड़ा भागा जाता है और सुमित्रा के गले लग जाता है। सुमित्रा जोर से अपने पति को धक्का देते हुए कहती हैं तुम कौन हो? तुम एक पराए मर्द होकर मुझे गले कैसे लगा सकते हो? सुमित्रा के पति डर जाते हैं। उन्हें लगता है कि शायद सुमित्रा अभी उस दौरे से बाहर नहीं निकली है। इसी वजह से सुमित्रा ऐसा बोल रही है। वैद भी कहते हैं कि शायद सुमित्रा के साथ जो हुआ वो एक चमत्कार ही है। तो सुमित्रा अभी उस झटके से बाहर नहीं निकल पाई है। तो सुमित्रा को थोड़ा वक्त दो। तो सुमित्रा नॉर्मल हो जाती है।

लेकिन वो अपने पास ना तो अपने सासससुर को आने दे रही थी। ना अपने पति को अपने नजदीक बैठने दे रही थी। ना उस बच्चे को जिसे सुमित्रा एक पल भी अपने आप से दूर नहीं रखती थी। उसे भी सुमित्रा अपने आप से दूर ही रख रही थी। जब सुमित्रा के पति पूछते क्या हुआ? तो वह कहती मैं ना तो तुमको पहचानती हूं ना तो अपने सासससुर को पहचानती हूं। मुझे नहीं पता तुम लोग कौन हो। जब सुमित्रा के पति कहते हैं यह देखो तुम्हारा बच्चा जिसे तुम बहुत प्यार करती थी। तो सुमित्रा कहती है नहीं यह मेरा बेटा नहीं है। सुमित्रा के पति और सुमित्रा के सासससुर को भी लगा शायद सुमित्रा को जो दौरा पड़ रहा था यह सब उसी का असर है। लेकिन धीरे-धीरे समय बीत रहा था। अक्टूबर 1995 का समय था जब सुमित्रा को इस हालत में आए हुए 3 महीने बीत चुके थे। लेकिन उन 3 [संगीत] महीनों में सुमित्रा सिर्फ अपने पति से एक काम करने के लिए कहती। वह एक पत्र लिखा करती थी और उस पत्र को अपने पति को देकर कहती कि इसे तुम जाकर पोस्ट ऑफिस में पोस्ट कराओ। पति भी सीधा-साधा अपनी पत्नी से बेइंतहा प्यार करता था। उसे लगा कि जो वो कह रही है उसकी खुशी के लिए मैं कर देता हूं। लेकिन सुमित्रा के पति के मन में एक चीज चल रही थी कि जो सुमित्रा कभी पढ़ी लिखी ही नहीं थी। वह आज अपने हाथों से पत्र कैसे लिख रही है? लेकिन उन्हें लगा कि शायद यह सब वही उनके उस दौरे में आने के बाद का असर है। तो वह कुछ भी ना बोलते हुए जैसा सुमित्रा कहती वैसा वह करते रहते थे। लगातार तीन महीनों तक सुमित्रा एक पत्र लिखती और अपने पति से वह रोज पोस्ट ऑफिस में पोस्ट करने के लिए कहा करती थी। तो एक दिन सुमित्रा के घर पर एक बुजुर्ग इंसान आते हैं। वो कहते हैं क्या आपके घर में कोई ऐसी औरत है जो अजीबो हरकत करती हैं। यहां से कुछ पत्र लिखा करती हैं तो सुमित्रा के पति बाहर आते हैं और कहते हैं हां मैं हूं लेकिन आप यहां पर क्यों आए हैं? तो वह बताते हैं मेरा घर इटावा है और मेरा नाम सियाराम त्रिपाठी है। जैसे ही वह बोलते हैं मेरा नाम सियाराम त्रिपाठी है।

यह आवाज सुमित्रा के कानों तक पहुंचती है। सुमित्रा घर में बैठी तेजी से दौड़ते हुए आती है और सियाराम के गले लिपट जाती है। सियाराम सुमित्रा को अपने गले से छुड़ाते हुए किसी तरह से दूर करते हैं और पूछते हैं तुम कौन हो? तो सुमित्रा कहती है पापा मैं आपकी बेटी शिवा। [संगीत] सियाराम चौंक जाते हैं क्योंकि वह तो सुमित्रा थी ना कि सियाराम की बेटी शिवा। वह कहते हैं कि नहीं तुम मेरी बेटी शिवा नहीं हो। सुमित्रा कहती है नहीं पिताजी मैं आपकी बेटी शिवा ही हूं। तो सियाराम अपने साथ एक बैग ले आए थे और उसमें कुछ फोटो भी थी। अपने बैग को बाहर रखते हैं और उसमें से कुल 15 फोटो निकालते हैं और कहते हैं तुम मेरी बेटी शिवा हो। तो सुमित्रा कहती है हां मैं आपकी बेटी शिवा ही हूं। तो वह सुमित्रा के सामने उन सभी 15 फोटो को रखते हैं और कहते हैं अगर तुम शिवा हो तो इन सभी फोटो को पहचान के बताओ कि यह कौन-कौन लोग हैं। सुमित्रा बिना सोचे बिना समझे हर एक फोटो पर उंगली रखते हुए कहती है यह आप मेरे पिता सियाराम है। यह मेरी मां है। यह मेरी सास है और यह मेरा पति छेदीलाल है। और यह मेरे दो बच्चे। ऐसे-से करके वो सभी लोगों की पहचान बताती है। तभी एक आखिरी फोटो पर सुमित्रा उंगली रखते हुए चुप हो जाती है। तो वहां पर आए सियाराम पूछते हैं कि तुमने जो कुछ भी बताया जिसकी भी पहचान बताई एकदम सही बताई। लेकिन तुम इस फोटो पर उंगली रख के क्यों चुप हो गई? तो सुमित्रा डरी सहमी कांपती हुई आवाज से कहती है, यह मेरी ननद है और इसी ने मेरा किया था। बगल में बैठे सियाराम रोते हुए उठते हैं और सामने बैठी सुमित्रा को गले लगाकर कहते हैं हां तुमने जो कुछ भी बताया सब सच है और तुम ही मेरी बेटी शिवा हो लेकिन यह सब जो हो रहा था सुमित्रा और सियाराम के बीच यह सब कुछ सुमित्रा के पति और सुमित्रा के सासससुर खड़े होकर देख रहे थे लेकिन उन्हें कुछ भी समझ नहीं आ रहा था तो सियाराम खड़े होते हैं और बताते हैं हां यह मेरी बेटी शिवा है

क्योंकि मेरी बेटी की हत्या 16 जुलाई 1995 को शिवा की ननद ने शिवा के सर पर पत्थर मार के करा था। उन्होंने मेरे पास यह सूचना पहुंचवाई कि शिवा ने आत्महत्या कर ली है। लेकिन ऐसा नहीं था। दरअसल जो शिवा के पिता सियाराम थे वो स्कूल में टीचर थे। तो अपनी बेटी को उस जमाने में ग्रेजुएशन तक की पढ़ाई कराए हुए थे। कम समय में शिवा की शादी छेदीलाल से करा दी जाती है। महज 5 वर्ष के अंदर ही शिवा को दो बच्चे भी हो जाते हैं। लेकिन शिवा के जो ससुराल वाले थे वो लगातार शिवा को टॉर्चर कर रहे थे। परेशान कर रहे थे और दहेज के लिए उसे हमेशा पति छेदीलाल और शिवा की ननद जो थी वो हमेशा शिवा के साथ मारपीट किया करते थे। तो 16 जुलाई 1995 को शिवा की ननद और शिवा के बीच थोड़ी बहस होती है तो शिवा की ननद एक पत्थर उठाती है और उस पत्थर से शिवा के सर मौके पर ही शिवा की मौत हो जाती है और उसी दिन सुमित्रा की भी मौत हो चुकी थी तो बताया जाता है कि शिवा की जो आत्मा थी वो सुमित्रा की शरीर में आ जाती है और उसके बाद से ही सुमित्रा की शरीर रहती है और शिवा की आत्मा रहती है। इसी वजह से सुमित्रा वहां पर किसी को भी पहचान नहीं रही थी। तो सियाराम अपनी बेटी शिवा से पूछते हैं क्या तुम अपने घर चलोगी?

अपने उन दोनों बच्चों के साथ रहोगी? तो शिवा कहती है हां पापा मैं घर चलूंगी। लेकिन थोड़ी देर सोचने के बाद वो कहती है नहीं अब यही मेरा ससुराल है। अब मैं यहीं रहूंगी। क्योंकि जो मेरा वास्तविक ससुराल था उन लोगों ने तो मुझे मार दिया था। लेकिन जब मेरा दूसरा जन्म हुआ सुमित्रा के शरीर में तो मेरा ख्याल सुमित्रा के पति जगदीश ही रख रहे थे और अब मैं यह घर छोड़कर नहीं जाऊंगी। आज से मेरे पति जगदीश हैं। मेरे सासससुर जगदीश के माता-पिता हैं। सुमित्रा का बेटा भी अब मेरा बेटा ही है। तो शिवा अब जगदीश की पत्नी बनकर जगदीश के घर ही रहने लगी। तो यही वो पुनर्जन्म की कहानी है। तो उस वक्त भी यह कहानी काफी चर्चा में थी। तो इस कहानी की सत्यता की जांच के लिए अमेरिका की वर्जिनिया यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों को जो पुनर्जन्म जैसी कहानियों की सत्यता की जांच करते हैं उन्हें भारत आना पड़ा। वो इस कहानी के सभी पहलू को देखते हैं। साक्ष्य देखते हैं, फैक्ट्स चेक करते हैं और वो निष्कर्ष पर आते हैं कि यह भारत की पुनर्जन्म की इकलौती ऐसी कहानी है जो सच है और सुमित्रा से शिवा की पुनर्जन्म की कहानी को सच्ची पुनर्जन्म की कहानी का सर्टिफिकेट भी मिला है। बाकी इस पूरी कहानी पर आपकी क्या राय है?

Sonu Baali
Sonu Baalihttp://khasharyananews.com
संस्थापक, खास हरियाणा न्यूज़- हरियाणा की ज़मीन से जुड़ा एक निष्पक्ष और ज़मीनी पत्रकार। पिछले 6+ वर्षों से जनता की आवाज़ को बिना किसी एजेंडे के सामने लाने का प्रयास कर रहे हैं। देसी अंदाज़ और सच्ची पत्रकारिता में विश्वास रखते हैं। 🌐 khasharyana.com
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