दिल्ली के नरेला की रहने वाली प्रीति राठी के लिए 1 मई 2013 का दिन उनके जीवन का सबसे महत्वपूर्ण दिन था। बचपन से देश की सेवा करने का सपना देखने वाली प्रीति का चयन भारतीय नौसेना में नर्सिंग ऑफिसर के पद पर हुआ था। वह अपनी नई नौकरी जॉइन करने के लिए परिवार के साथ दिल्ली से मुंबई रवाना हुई थीं। लेकिन किसी को अंदाजा नहीं था कि यह सफर उनकी जिंदगी को हमेशा के लिए बदल देगा।
सपनों की शुरुआत, लेकिन रास्ते में हुआ हमला
1 मई 2013 को प्रीति राठी अपने पिता अमर राठी और अपने चाचा-चाची के साथ दिल्ली के हजरत निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन से मुंबई जाने वाली ट्रेन में सवार हुईं। ट्रेन में काफी भीड़ थी। सीटों से ज्यादा लोग खड़े होकर यात्रा कर रहे थे।
यात्रा के दौरान परिवार की नजर एक ऐसे युवक पर पड़ी जिसने अपने चेहरे को गमछे से ढक रखा था और सिर पर टोपी पहन रखी थी। परिवार के अनुसार वह व्यक्ति बार-बार अपनी सीट बदल रहा था, कभी खड़ा होता तो कभी वॉशरूम की तरफ जाता और उसकी नजर लगातार प्रीति पर बनी हुई थी। इस वजह से प्रीति के परिजन पूरी रात सतर्क रहे।
मुंबई पहुंचते ही हुआ हमला
2 मई 2013 की सुबह करीब 8:30 बजे ट्रेन मुंबई के बांद्रा टर्मिनस पहुंची। सफर लंबा होने के कारण प्रीति काफी थक चुकी थीं। उनके पिता और अन्य परिजन आगे-आगे चल रहे थे जबकि प्रीति कुछ दूरी पर पीछे थीं।
इसी दौरान प्रीति को महसूस हुआ कि किसी ने उनके कंधे पर हाथ रखा है। जैसे ही उन्होंने पीछे मुड़कर देखा, सामने वही व्यक्ति खड़ा था जिसने ट्रेन में अपना चेहरा ढक रखा था। इससे पहले कि प्रीति कुछ समझ पातीं, उस व्यक्ति ने उनके चेहरे पर तेजाब फेंक दिया।

तेजाब पड़ते ही प्रीति दर्द से चीखने लगीं और मदद के लिए अपने परिजनों को आवाज देने लगीं। उनके पिता और अन्य रिश्तेदार तुरंत उनके पास पहुंचे। तेजाब के छींटे उनके परिजनों पर भी पड़े। परिवार तुरंत समझ गया कि यह कोई सामान्य घटना नहीं बल्कि सुनियोजित हमला है।
आरोपी मौके से फरार
हमले के समय स्टेशन पर मौजूद समीर नामक एक युवक ने पूरी घटना देखी। उसे तुरंत एहसास हुआ कि हमला जानबूझकर किया गया है। उसने अपने दोस्तों सलीम और सलमान के साथ मिलकर आरोपी का पीछा करने की कोशिश की, लेकिन भीड़ का फायदा उठाकर हमलावर मौके से फरार हो गया।
इसके बाद गंभीर रूप से घायल प्रीति को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनका इलाज शुरू किया गया।
अस्पताल में शुरू हुई पुलिस जांच
घटना की सूचना मिलते ही मुंबई पुलिस अस्पताल पहुंची और मामले की जांच शुरू की। हालांकि, उस समय प्रीति की हालत बेहद गंभीर थी। तेजाब के कारण उनके चेहरे और शरीर के कई हिस्से गंभीर रूप से झुलस चुके थे। वह बोलने की स्थिति में नहीं थीं।
डॉक्टरों की निगरानी में इलाज जारी रहा और पुलिस लगातार मामले के हर पहलू की जांच करती रही।
एक फोन कॉल ने बढ़ाया शक
4 मई 2013 को प्रीति की बहन तन्नू के मोबाइल पर पवन नाम के एक युवक का फोन आया। उसने खुद को बीटेक का छात्र बताते हुए कहा कि वह प्रीति का दोस्त है और उनका हालचाल जानना चाहता है।
परिवार को यह बात कुछ असामान्य लगी। प्रीति के पिता अमर राठी ने इस फोन कॉल की जानकारी जांच अधिकारियों को दी। इसके बाद पुलिस ने पवन की भूमिका की भी जांच शुरू कर दी।
लिखकर दिए अहम सुराग
इलाज के दौरान जब प्रीति की हालत थोड़ी स्थिर हुई तो वह बोल नहीं पा रही थीं, लेकिन कागज पर लिखकर अपने परिवार और पुलिस से संवाद करने लगीं।
पुलिस ने संदिग्ध हमलावर का स्केच तैयार कराया और प्रीति को दिखाया। स्केच देखने के बाद प्रीति ने कागज पर तीन नाम लिखे— सत्यम, अंकुर और पवन कुमार।
ये वे लोग थे जिनका चेहरा उन्हें उस स्केच से मिलता-जुलता लगा। पुलिस ने इन तीनों व्यक्तियों से जुड़े हर पहलू की जांच शुरू कर दी।
जांच ने लिया नया मोड़
शुरुआती जांच में पुलिस इन्हीं नामों के इर्द-गिर्द घूमती रही। लेकिन जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी, कई नए तथ्य सामने आने लगे। कॉल रिकॉर्ड, यात्रा से जुड़े साक्ष्य, गवाहों के बयान और तकनीकी जांच के आधार पर पुलिस ने मामले की तह तक पहुंचने का प्रयास किया।
जांच एजेंसियों को धीरे-धीरे ऐसे सुराग मिले जिन्होंने पूरे मामले की दिशा बदल दी। पुलिस को यह एहसास हुआ कि हमला जितना साधारण दिखाई दे रहा था, उसके पीछे की साजिश उससे कहीं अधिक जटिल थी।
देशभर में चर्चा का विषय बना मामला
यह घटना उस समय पूरे देश में चर्चा का विषय बन गई। एक ऐसी युवती, जिसने अपने दम पर भारतीय नौसेना में नर्सिंग ऑफिसर बनने का सपना पूरा किया था, उसके साथ नौकरी जॉइन करने पहुंचते ही हुआ हमला लोगों को झकझोर गया।
इस मामले ने सार्वजनिक स्थानों पर महिलाओं की सुरक्षा, एसिड की बिक्री पर नियंत्रण और पीड़ितों के लिए बेहतर चिकित्सा व्यवस्था जैसे कई महत्वपूर्ण सवाल खड़े किए।
न्याय की दिशा में जांच
जांच एजेंसियों ने इस मामले में उपलब्ध सभी साक्ष्यों, गवाहों के बयानों और वैज्ञानिक जांच के आधार पर कार्रवाई आगे बढ़ाई। बाद के चरणों में इस मामले में कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए, जिन्होंने जांच को निर्णायक दिशा दी।
प्रीति राठी का मामला आज भी भारत के चर्चित एसिड अटैक मामलों में गिना जाता है। इस घटना ने न केवल कानून व्यवस्था बल्कि महिलाओं की सुरक्षा को लेकर भी व्यापक बहस छेड़ दी थी।
नोट: यह लेख उपलब्ध सार्वजनिक जानकारी और जांच के शुरुआती घटनाक्रम पर आधारित है। किसी भी आरोपी की कानूनी जिम्मेदारी का अंतिम निर्धारण न्यायालय के निर्णय के अनुसार होता है।
