Sunday, September 6, 2026
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अखबार की एक हेडलाइन ने बदल दी जिंदगी: बेटे की आखिरी कॉल के बाद शुरू हुई रहस्यमयी कहानी

राजस्थान के किशनगढ़ से जुड़ी यह कहानी एक ऐसे रहस्यमयी घटनाक्रम की शुरुआत है, जिसने एक परिवार की दुनिया पूरी तरह बदलकर रख दी। एक तरफ अपने माता-पिता से बेहद प्रेम करने वाला बेटा था, तो दूसरी ओर एक ऐसा रहस्य, जिसकी परतें खुलने में वर्षों लग गए। कहानी की शुरुआत होती है 4 मई की एक सुबह से, जब एक अखबार की हेडलाइन ने एक बुजुर्ग पिता के पैरों तले जमीन खिसका दी।

अखबार की हेडलाइन पढ़ते ही छूट गया चाय का कप

4 मई की सुबह भगवती प्रसाद रोज की तरह अपने घर के बाहर पड़ा अखबार उठाते हैं। वह आराम से बैठकर चाय की चुस्कियों के साथ अखबार पढ़ना शुरू करते हैं। लेकिन जैसे ही उनकी नजर पहले पन्ने की एक खबर पर पड़ती है, उनके हाथ से चाय का कप नीचे गिर जाता है।

अखबार में छपा था—

“यदि किसी ऐसे व्यक्ति के बारे में जानकारी हो जिसकी बाईं आंख (Left Eye) के नीचे स्टील वायर की सर्जरी हुई हो, तो कृपया नजदीकी पुलिस थाने में संपर्क करें।”

यह पढ़ते ही भगवती प्रसाद के चेहरे का रंग उड़ गया। उन्हें तुरंत अपने बेटे भवानी शंकर शर्मा की याद आई, क्योंकि उनकी बाईं आंख के नीचे पहले स्टील वायर की सर्जरी हो चुकी थी।

यहीं से शुरू होती है एक ऐसी कहानी, जिसने पूरे परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया।

किशनगढ़ के सफल व्यवसायी थे भवानी शंकर

भवानी शंकर शर्मा राजस्थान के किशनगढ़ में अपनी पत्नी निधि शर्मा और दो बच्चों के साथ रहते थे। उनका मार्बल का कारोबार था और इलाके में उन्हें एक सफल व्यवसायी के रूप में जाना जाता था।

आर्थिक रूप से संपन्न होने के बावजूद भवानी शंकर बेहद पारिवारिक स्वभाव के व्यक्ति माने जाते थे। वह अपनी पत्नी और बच्चों से बहुत प्यार करते थे, लेकिन अपने माता-पिता के प्रति उनका लगाव और भी अधिक था।

माता-पिता से मिलने का नहीं छोड़ते थे कोई मौका

भवानी शंकर जब भी अपने काम से थोड़ा समय निकाल पाते, वह गांव जाकर अपने माता-पिता से जरूर मिलते थे। चाहे एक दिन की छुट्टी हो, दस दिन बाद समय मिले या पंद्रह दिन बाद, वह बिना किसी बहाने अपने माता-पिता के पास पहुंच जाते।

उनके माता-पिता भी बेटे के आने का बेसब्री से इंतजार करते थे। हर मुलाकात उनके लिए किसी त्योहार से कम नहीं होती थी।

पत्नी से इसी बात पर होता था विवाद

हालांकि, भवानी शंकर की यही आदत उनकी पत्नी निधि को पसंद नहीं थी। परिवार के अनुसार, निधि का मानना था कि बार-बार गांव जाना और लगातार लंबी यात्राएं करना ठीक नहीं है।

वह अक्सर अपने पति से कहती थीं कि महीने या दो महीने में एक बार माता-पिता से मिलने जाना पर्याप्त है। उनका कहना था कि बार-बार यात्रा करने से समय भी खराब होता है और परिवार भी अकेला रह जाता है।

इसके अलावा भवानी शंकर को घूमने-फिरने का भी काफी शौक था। वह कभी पहाड़ी इलाकों की यात्रा पर निकल जाते तो कभी दोस्तों के साथ बाहर समय बिताते थे।

इन्हीं बातों को लेकर पति-पत्नी के बीच अक्सर बहस होती रहती थी।

शांत स्वभाव के थे भवानी शंकर

परिजनों के अनुसार, भवानी शंकर का स्वभाव बेहद शांत था। पत्नी के नाराज होने या बहस करने के बावजूद वह कभी गुस्सा नहीं करते थे।

वह पत्नी की बातें सुनते जरूर थे, लेकिन अपने माता-पिता से मिलने की आदत नहीं छोड़ते थे। उनके लिए परिवार और माता-पिता दोनों समान रूप से महत्वपूर्ण थे।

25 अप्रैल 2003 की आखिरी मुलाकात

25 अप्रैल 2003 को भवानी शंकर अपने काम से समय निकालकर गांव पहुंचे। वहां उन्होंने अपने माता-पिता से मुलाकात की। यह मुलाकात सामान्य दिनों से कुछ अलग थी।

बताया जाता है कि बातचीत के दौरान भवानी शंकर भावुक हो गए। उन्होंने अपने माता-पिता से कहा कि उन्हें उनकी बहुत याद आती है और यदि परिस्थितियां साथ देतीं तो वह उन्हें अपने साथ ही रखते।

उनके माता-पिता ने भी बेटे को समझाया कि वह अपने काम और परिवार की जिम्मेदारियां निभा रहे हैं। उनके लिए इतना ही काफी है कि बेटा समय-समय पर उनसे मिलने आता रहता है।

आखिरी विदाई

कुछ समय गांव में बिताने के बाद भवानी शंकर वापस किशनगढ़ लौट गए। वहां पहुंचने के बाद उन्होंने अपने माता-पिता को फोन कर बताया कि वह सुरक्षित घर पहुंच गए हैं।

फोन पर हुई यह बातचीत बिल्कुल सामान्य थी। किसी को जरा भी अंदाजा नहीं था कि यही बातचीत उनकी आखिरी बातचीत साबित होगी।

फिर कभी नहीं आया फोन

उस कॉल के बाद परिस्थितियां अचानक बदल गईं। भवानी शंकर ने दोबारा अपने माता-पिता को फोन नहीं किया। उधर माता-पिता भी बेटे की व्यस्तता समझकर कुछ समय तक इंतजार करते रहे।

धीरे-धीरे चिंता बढ़ने लगी। परिवार को समझ नहीं आ रहा था कि हमेशा संपर्क में रहने वाला बेटा अचानक इतना खामोश कैसे हो गया।

इसी बीच 4 मई को अखबार में छपी एक रहस्यमयी सूचना ने पूरे परिवार को झकझोर कर रख दिया।

एक हेडलाइन जिसने बढ़ा दी बेचैनी

अखबार में छपी उस सूचना में जिस व्यक्ति की पहचान मांगी गई थी, उसका सबसे बड़ा सुराग बाईं आंख के नीचे लगी स्टील वायर की सर्जरी थी। यह जानकारी पढ़ते ही भगवती प्रसाद को अपने बेटे की याद आई और उनके मन में कई तरह की आशंकाएं पैदा हो गईं।

उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि आखिर पुलिस ऐसी सूचना क्यों जारी कर रही है और इसका उनके बेटे से क्या संबंध हो सकता है।

यहीं से इस रहस्यमयी मामले की असली जांच शुरू होती है, जिसने आगे चलकर कई चौंकाने वाले खुलासे किए।

Sonu Baali
Sonu Baalihttp://khasharyananews.com
संस्थापक, खास हरियाणा न्यूज़- हरियाणा की ज़मीन से जुड़ा एक निष्पक्ष और ज़मीनी पत्रकार। पिछले 6+ वर्षों से जनता की आवाज़ को बिना किसी एजेंडे के सामने लाने का प्रयास कर रहे हैं। देसी अंदाज़ और सच्ची पत्रकारिता में विश्वास रखते हैं। 🌐 khasharyana.com
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