Monday, September 7, 2026
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iPhone की किस्त के लिए पहाड़ी पर पहुंचा कुणाल, बचाने गए माता-पिता के साथ हुआ दर्दनाक हादसा

महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर से सामने आई एक बेहद दर्दनाक घटना ने हर किसी को झकझोर कर रख दिया है। एक महंगे iPhone की किस्त को लेकर शुरू हुआ पारिवारिक विवाद देखते ही देखते ऐसी त्रासदी में बदल गया, जिसमें एक परिवार ने अपने इकलौते बेटे को खो दिया। बेटे को बचाने की कोशिश में उसके माता-पिता भी पहाड़ी से गहरी खाई में जा गिरे। घटना के बाद इलाके में मातम पसरा हुआ है और लोग इस घटना को लेकर गहरे सदमे में हैं।

बताया जा रहा है कि यह मामला छत्रपति संभाजीनगर के जालना फाटा इलाके का है। यहां कुणाल अपने पिता मुरलीधर और मां संगीता के साथ रहता था। जानकारी के मुताबिक कुणाल अपने माता-पिता का इकलौता बेटा था। उसके पिता मुरलीधर ड्राइवर का काम करते थे और इसी आमदनी से किसी तरह परिवार का खर्च चलाते थे। परिवार आर्थिक रूप से बहुत संपन्न नहीं था, लेकिन अपने बेटे की जरूरतों को पूरा करने की पूरी कोशिश करता था।

कुछ समय पहले कुणाल ने अपने पिता से iPhone खरीदने के लिए पैसे मांगे थे। पिता ने उसे समझाया था कि महंगा फोन खरीदना उनके परिवार की आर्थिक स्थिति के हिसाब से ठीक नहीं है। मुरलीधर ने बेटे से कहा था कि वह ड्राइवर हैं और उनकी आमदनी सीमित है। ऐसे में इतने महंगे फोन की कीमत या उसकी किस्तें चुकाना उनके लिए आसान नहीं होगा।

लेकिन कुणाल अपनी जिद पर अड़ा रहा। बताया जा रहा है कि उसने आखिरकार iPhone खरीद लिया। फोन तो उसके हाथ में आ गया, लेकिन उसकी EMI चुकाने की जिम्मेदारी भी उसके सामने खड़ी हो गई। कुणाल खुद इतनी कमाई नहीं कर पा रहा था कि वह समय पर फोन की किस्त चुका सके।

फिर आया 21 अगस्त 2026 का दिन। बताया जा रहा है कि इसी दिन iPhone की EMI जमा करने की आखिरी तारीख थी। सुबह कुणाल अपने पिता के पास पहुंचा और उनसे किस्त के पैसे मांगे। उसने पिता से कहा कि उसे आज फोन की EMI जमा करनी है और वह पैसे दे दें।

लेकिन पिता मुरलीधर के लिए यह रकम जुटाना आसान नहीं था। उन्होंने बेटे को समझाते हुए कहा कि अगर वह खुद फोन की EMI नहीं कमा पा रहा है तो फिर इतना महंगा फोन खरीदने की जरूरत ही क्या थी। उन्होंने यह भी कहा कि उनके पास भी इतने पैसे नहीं हैं कि वह हर बार बेटे के फोन की किस्त भर सकें।

इसी बात को लेकर पिता-पुत्र के बीच बहस हो गई। शुरुआत में मामला सामान्य कहासुनी जैसा ही था, लेकिन देखते ही देखते कुणाल नाराज हो गया। इसके बाद उसने ऐसा कदम उठा लिया जिसकी कल्पना शायद उसके माता-पिता ने भी नहीं की थी।

कुणाल घर से निकलकर जालना फाटा के पास स्थित 30 गांव की खवडिया पहाड़ी पर पहुंच गया। बताया जा रहा है कि वह पहाड़ी के सबसे ऊंचे हिस्से पर जाकर खड़ा हो गया। जब उसके माता-पिता को पता चला कि उनका बेटा पहाड़ी पर चला गया है, तो दोनों घबराकर उसके पीछे वहां पहुंच गए।

माता-पिता को डर था कि गुस्से में उनका बेटा कहीं कोई खतरनाक कदम न उठा ले। पहाड़ी पर पहुंचने के बाद उन्होंने कुणाल को समझाने की कोशिश शुरू की। मां संगीता लगातार अपने बेटे से नीचे आने की गुहार लगाती रहीं। पिता मुरलीधर भी उसे समझाते रहे।

बताया जा रहा है कि करीब तीन घंटे तक कुणाल को मनाने की कोशिश की गई। उसकी मां उससे कहती रही कि बेटा नीचे आ जाओ, जो चाहिए वह मिल जाएगा। माता-पिता ने उसे समझाने की हर संभव कोशिश की। वहां मौजूद ग्रामीणों ने भी उससे नीचे आने की अपील की।

जब घटना की जानकारी गांव के लोगों को मिली तो गांव के पूर्व सरपंच सहित कुछ अन्य लोग भी पहाड़ी पर पहुंच गए। सभी लोग कुणाल को समझाने लगे। लेकिन कुणाल किसी की बात सुनने को तैयार नहीं था।

वह लगातार अपने माता-पिता से कह रहा था कि वह उन्हें हमेशा के लिए छोड़कर जा रहा है। दूसरी तरफ माता-पिता के लिए उस समय उनका बेटा ही सबसे महत्वपूर्ण था। वे बार-बार उससे नीचे आने की अपील कर रहे थे।

इसी दौरान कुणाल के पिता मुरलीधर ने बेटे को बचाने के लिए एक जोखिम भरा कदम उठाने का फैसला किया। जब उनकी पत्नी संगीता बेटे का ध्यान अपनी ओर करके उससे बात कर रही थीं, तब मुरलीधर धीरे-धीरे कुणाल के करीब पहुंचने लगे। उनका मकसद था कि वह अचानक बेटे को पकड़कर उसे सुरक्षित जगह पर ले आएं।

लेकिन जैसे ही मुरलीधर ने कुणाल का हाथ पकड़ने की कोशिश की, कुणाल ने कथित तौर पर उनका हाथ झटक दिया। इसी दौरान दोनों का संतुलन बिगड़ गया और दोनों पहाड़ी से नीचे करीब 300 फीट गहरी खाई में जा गिरे।

कुछ ही सेकंड में वहां चीख-पुकार मच गई। मां संगीता की आंखों के सामने उनका पति और इकलौता बेटा खाई में गिर गए। वह इस दृश्य को देखकर खुद को रोक नहीं पाईं और अपने पति और बेटे को बचाने की कोशिश में नीचे की ओर चली गईं। बताया जा रहा है कि इस दौरान वह भी हादसे का शिकार हो गईं।

इस दर्दनाक घटना ने पूरे इलाके को सदमे में डाल दिया। जिस फोन की एक किस्त को लेकर परिवार में विवाद शुरू हुआ था, वही विवाद एक पूरे परिवार के लिए जिंदगी की सबसे बड़ी त्रासदी बन गया।

यह घटना सिर्फ एक हादसे की कहानी नहीं है, बल्कि माता-पिता और बच्चों के बीच बढ़ती अपेक्षाओं और आर्थिक दबाव पर भी सवाल खड़े करती है। महंगे मोबाइल फोन और दूसरी चीजों की चाहत आज युवाओं में आम हो गई है, लेकिन हर परिवार की आर्थिक स्थिति एक जैसी नहीं होती। कई बार बच्चे अपनी इच्छाओं को पूरा करने के लिए माता-पिता पर दबाव डालते हैं, जबकि माता-पिता अपनी सीमित आमदनी में परिवार की जरूरतें पूरी करने की कोशिश करते रहते हैं।

इस घटना का सबसे दुखद पहलू यही है कि कुछ समय पहले तक जिस परिवार में एक बेटा अपने माता-पिता के साथ रह रहा था, वही परिवार एक छोटे से आर्थिक विवाद के बाद ऐसी त्रासदी में बदल गया।

iPhone या कोई भी महंगा सामान इंसान की जिंदगी और माता-पिता के प्यार से बड़ा नहीं हो सकता। एक फोन की कीमत कुछ हजार या लाख रुपये हो सकती है, लेकिन माता-पिता की जिंदगी की कीमत किसी भी रकम से नहीं आंकी जा सकती।

इस घटना से एक बड़ा सवाल भी सामने आता है—क्या किसी महंगे सामान की किस्त इतनी महत्वपूर्ण हो सकती है कि उसके लिए इंसान अपनी जिंदगी और अपने परिवार को दांव पर लगा दे?

जिंदगी में आर्थिक परेशानियां आती-जाती रहती हैं। EMI की तारीख निकल सकती है, फोन बाद में खरीदा जा सकता है और किसी चीज की इच्छा कुछ समय के लिए टाली जा सकती है। लेकिन एक बार चली गई जिंदगी वापस नहीं आती।

Sonu Baali
Sonu Baalihttp://khasharyananews.com
संस्थापक, खास हरियाणा न्यूज़- हरियाणा की ज़मीन से जुड़ा एक निष्पक्ष और ज़मीनी पत्रकार। पिछले 6+ वर्षों से जनता की आवाज़ को बिना किसी एजेंडे के सामने लाने का प्रयास कर रहे हैं। देसी अंदाज़ और सच्ची पत्रकारिता में विश्वास रखते हैं। 🌐 khasharyana.com
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