उत्तर प्रदेश के हापुड़ जिले से सामने आई एक घटना ने पैक्ड ड्रिंकिंग वॉटर की गुणवत्ता और उसकी पैकेजिंग को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहां एक युवती को कथित तौर पर पैक्ड बोतल से पानी पीना उस समय भारी पड़ गया, जब बोतल से पानी की जगह कथित रूप से तेल जैसी चीज निकलने की बात सामने आई। बोतल खोलकर पानी के सिर्फ दो घूंट पीने के बाद ही युवती की तबीयत अचानक बिगड़ गई और उसे उल्टियां होने लगीं। हालत गंभीर होने पर उसे मेरठ मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया।

बताया जा रहा है कि यह घटना 10 जुलाई 2026 की शाम करीब 6:24 बजे हापुड़ जिले में हुई। रिया अपनी मां के साथ ज्वेलरी शॉप पर खरीदारी करने पहुंची थीं। शाम के समय उन्हें अचानक तेज प्यास लगी। ज्वेलरी शॉप संचालक ने अपने एक कर्मचारी को पास की किराने की दुकान से पैक्ड बोतल का पानी लाने के लिए भेजा।
परिवार के मुताबिक, जो बोतल रिया को दी गई थी, वह बाहर से पूरी तरह पैक और सीलबंद दिखाई दे रही थी। रिया ने खुद बोतल खोली और उसमें से पानी के दो घूंट पी लिए। लेकिन पानी मुंह में जाते ही उनकी हालत अचानक बिगड़ने लगी। वह घबराकर उठीं और दुकान से बाहर की तरफ चली गईं। कुछ ही देर में उन्हें उल्टियां होने लगीं।
रिया की हालत देखकर उनकी मां घबरा गईं। आसपास मौजूद लोग भी मौके पर पहुंचे और परिवार को सूचना दी गई। इसके बाद रिया को तत्काल नजदीकी अस्पताल ले जाया गया। वहां डॉक्टरों ने उनकी स्थिति को गंभीर देखते हुए उन्हें मेरठ मेडिकल कॉलेज के लिए रेफर कर दिया।
परिवार का दावा है कि मेडिकल जांच और इलाज के दौरान यह बात सामने आई कि रिया के गले में सामान्य पानी नहीं बल्कि तेल जैसी कोई चीज चली गई थी। इसके बाद उस पैक्ड बोतल को लेकर सवाल और गंभीर हो गए। आखिर जिस बोतल को पानी की बोतल समझकर खरीदा गया, उसके अंदर ऐसा क्या था, जिससे दो घूंट पीते ही रिया की तबीयत इतनी खराब हो गई?
मामले की सच्चाई जानने के लिए बोतल में मौजूद तरल पदार्थ की जांच की गई। परिवार की ओर से दावा किया गया कि बोतल का पानी बाहर निकालने पर उसमें झाग जैसा दिखाई दिया और तरल पदार्थ सामान्य पीने के पानी जैसा नहीं लग रहा था। हालांकि, इस पदार्थ की वास्तविक प्रकृति क्या थी, इसका अंतिम जवाब वैज्ञानिक जांच और लैब रिपोर्ट से ही सामने आ सकता है।
घटना के बाद पुलिस भी मामले की जांच में जुट गई। पुलिस ने किराना दुकान के संचालक को पूछताछ के लिए थाने ले जाकर मामले की जानकारी जुटाई। वहीं दुकान पर मौजूद महिला ने कथित तौर पर कहा कि उन्होंने बोतल उसी तरह दी थी, जिस तरह वह दुकान पर रखी हुई थी। उनके मुताबिक, बोतल पैक थी और उन्हें खुद भी नहीं पता था कि उसके अंदर मौजूद तरल पदार्थ में कोई गड़बड़ी हो सकती है।
अब इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर बोतल बाहर से सीलबंद थी, तो उसके अंदर पानी की जगह तेल जैसा पदार्थ कैसे पहुंचा?
इस मामले में कई संभावनाओं पर जांच की जरूरत है। पहली संभावना यह हो सकती है कि बोतल नकली हो या उसमें किसी स्तर पर मिलावट की गई हो। दूसरी संभावना यह हो सकती है कि बोतल की पैकेजिंग या निर्माण प्रक्रिया में किसी तरह की गड़बड़ी हुई हो। तीसरी संभावना स्टोरेज या सप्लाई चेन से जुड़ी हो सकती है। यदि बोतल किसी अधिकृत सप्लायर या डीलर के माध्यम से दुकान तक पहुंची थी, तो उस सप्लाई चेन की भी जांच जरूरी होगी।
हालांकि, अभी इन संभावनाओं में से किसी को भी सच मानना जल्दबाजी होगी। यह भी जरूरी है कि संबंधित बोतल, उसका बैच नंबर, निर्माण तिथि, एक्सपायरी डेट और सील की स्थिति की जांच की जाए। साथ ही बोतल के अंदर मौजूद तरल पदार्थ को अधिकृत लैब में भेजकर उसकी रासायनिक जांच कराई जाए। तभी यह पता चल सकेगा कि वास्तव में बोतल के अंदर क्या था और वह रिया के लिए इतनी खतरनाक क्यों साबित हुई।
इस घटना ने पैक्ड पानी खरीदने वाले लोगों की चिंता भी बढ़ा दी है। आम तौर पर ग्राहक सीलबंद बोतल देखकर उसे सुरक्षित मान लेते हैं। लेकिन इस तरह की घटना सामने आने के बाद उपभोक्ताओं के लिए यह जरूरी हो जाता है कि वे बोतल खरीदते समय केवल ब्रांड का नाम देखकर भरोसा न करें। बोतल की सील, लेबल, बैच नंबर, निर्माण और एक्सपायरी की तारीख तथा पैकेजिंग की स्थिति भी जरूर देखें।
फिलहाल रिया की हालत को लेकर परिवार चिंतित है और पूरे मामले की जांच जारी बताई जा रही है। असली सच्चाई पुलिस जांच और लैब रिपोर्ट के बाद ही सामने आएगी।
