उत्तर प्रदेश के गोरखपुर से सामने आया एक मामला पूरे प्रदेश को झकझोर देने वाला है। आरोप है कि जिस पुलिस वर्दी पर आम जनता अपनी सुरक्षा का भरोसा करती है, उसी वर्दी में तैनात एक सिपाही ने एक मासूम बच्ची के विश्वास का फायदा उठाकर ऐसा अपराध किया, जिसने हर किसी को स्तब्ध कर दिया। फिलहाल इस मामले में पुलिस ने आरोपी सिपाही को गिरफ्तार कर लिया है और आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है।
जानकारी के अनुसार, आजमगढ़ निवासी रिंकू शर्मा कुछ समय पहले बेहतर रोजगार की तलाश में अपने परिवार के साथ गोरखपुर आकर रहने लगे थे। परिवार में उनकी पत्नी और पांच बेटियां हैं। गोरखपुर में रिंकू शर्मा रिक्शा चलाकर अपने परिवार का पालन-पोषण कर रहे थे। आर्थिक स्थिति सामान्य होने के बावजूद परिवार किसी तरह अपना जीवनयापन कर रहा था।
बताया जाता है कि 27 जुलाई 2026 को उनकी 13 वर्षीय चौथी बेटी की अचानक तबीयत बिगड़ गई। उसे सीने में तेज दर्द, उल्टियां और बुखार की शिकायत हुई। परिजन बिना देरी किए उसे गोरखपुर के सदर अस्पताल में भर्ती करवा देते हैं, जहां उसका इलाज शुरू होता है।
अगले दिन यानी 28 जुलाई की रात परिवार की सबसे छोटी 10 वर्षीय बेटी अपनी बीमार बहन और परिजनों के लिए घर से खाना लेकर अस्पताल पहुंची। अस्पताल में खाना देने के बाद वह वापस अपने घर जाने लगी। इसी दौरान अस्पताल परिसर के बाहर ड्यूटी पर मौजूद बताए जा रहे पुलिस सिपाही अभिषेक यादव की उस बच्ची पर नजर पड़ी।

आरोप है कि सिपाही ने बच्ची से पूछा कि वह इतनी रात में अकेली कहां जा रही है। बच्ची ने बताया कि वह अपने घर लौट रही है। तभी उसकी बड़ी बहन भी वहां पहुंच गई और उसने बताया कि छोटी बहन खाना देकर अब घर जा रही है।
बताया जा रहा है कि सिपाही ने कहा कि इतनी रात में बच्ची का अकेले जाना सुरक्षित नहीं है। उसने परिवार से घर का पता पूछा और भरोसा दिलाया कि वह बच्ची को सुरक्षित उसके घर छोड़ देगा। पुलिस की वर्दी में मौजूद व्यक्ति पर विश्वास करते हुए परिवार ने बच्ची को उसके साथ भेज दिया।
इसके बाद काफी समय बीत जाने के बावजूद बच्ची न तो घर पहुंची और न ही अस्पताल वापस लौटी। इससे परिवार की चिंता बढ़ गई। पहले परिजनों ने अस्पताल और घर के बीच के रास्ते पर बच्ची की तलाश की, लेकिन उसका कहीं कोई सुराग नहीं मिला।
जब काफी देर तक बच्ची का पता नहीं चला तो रिंकू शर्मा स्थानीय पुलिस थाने पहुंचे और अपनी बेटी के लापता होने की शिकायत दर्ज करवाई। मामला गंभीर होने के कारण पुलिस ने तत्काल जांच शुरू की।
जांच के दौरान पुलिस ने अस्पताल और उसके आसपास लगे करीब 200 सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली। फुटेज में कथित रूप से यह दिखाई दिया कि बच्ची एक पुलिसकर्मी की बाइक पर बैठकर अस्पताल से निकल रही है। इसके बाद जांच का पूरा फोकस उसी पुलिसकर्मी पर आ गया।
पुलिस ने आरोपी सिपाही अभिषेक यादव की तलाश शुरू की। शुरुआती पूछताछ में वह कथित रूप से पुलिस को गुमराह करता रहा। हालांकि बाद में पुलिस ने उसे हिरासत में लेकर सख्ती से पूछताछ की। जांच के दौरान मिले तथ्यों और पूछताछ के आधार पर उसे गिरफ्तार कर लिया गया।
पुलिस के अनुसार, पूछताछ में आरोपी ने कथित रूप से स्वीकार किया कि वह बच्ची को बाइक पर बैठाकर एक सुनसान स्थान पर ले गया। आरोप है कि वहां उसने बच्ची के साथ गंभीर अपराध किया। इसके बाद पहचान उजागर होने के डर से उसने बच्ची की हत्या कर दी और शव को पास की नहर में फेंक दिया।

आरोपी की निशानदेही पर पुलिस ने नहर से बच्ची का शव बरामद किया। इसके बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया, ताकि मौत के कारण और अन्य तथ्यों की वैज्ञानिक जांच की जा सके।
इस घटना के सामने आने के बाद स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश देखने को मिला। लोगों का कहना है कि जब सुरक्षा देने वाली संस्था से जुड़े व्यक्ति पर ही ऐसे आरोप लगें, तो आम नागरिकों का विश्वास प्रभावित होता है। वहीं, पुलिस अधिकारियों ने कहा है कि कानून से ऊपर कोई नहीं है और यदि कोई पुलिसकर्मी अपराध करता है तो उसके खिलाफ भी वैसी ही कानूनी कार्रवाई की जाएगी जैसी किसी अन्य आरोपी के खिलाफ होती है।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में अदालत में उपलब्ध साक्ष्यों, मेडिकल रिपोर्ट, फोरेंसिक जांच और गवाहों के आधार पर सुनवाई होती है। दोष सिद्ध होने पर भारतीय कानून के तहत कठोर सजा का प्रावधान है। अंतिम फैसला अदालत द्वारा सुनवाई पूरी होने के बाद ही दिया जाता है।
यह घटना एक बार फिर इस बात की याद दिलाती है कि बच्चों की सुरक्षा के प्रति परिवार और समाज दोनों को अतिरिक्त सतर्क रहने की आवश्यकता है। साथ ही, किसी भी गंभीर आपराधिक मामले में न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने तक आरोपों और जांच के तथ्यों के आधार पर ही निष्कर्ष निकालना उचित माना जाता है।
फिलहाल इस मामले की जांच जारी है और पुलिस का कहना है कि सभी पहलुओं की गहनता से जांच की जा रही है। अदालत में पेश किए जाने वाले साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
