उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले के सरसावा इलाके के सलेमपुर गांव से सामने आई एक घटना ने पूरे परिवार को झकझोर दिया है। 52 वर्षीय बॉडी बिल्डर और जिम संचालक देवदत्त शर्मा की गोली लगने से मौत हो गई। घटना से करीब एक घंटे पहले उन्होंने अपनी भांजी को WhatsApp पर कुछ ऐसे संदेश भेजे थे, जिनमें उन्होंने अपनी पत्नी को लेकर बेहद गंभीर बातें लिखी थीं।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर देवदत्त शर्मा ने मौत से पहले अपनी भांजी को ये संदेश क्यों भेजे? क्या वह वास्तव में किसी मानसिक या पारिवारिक परेशानी से गुजर रहे थे? या फिर इस पूरे मामले में कोई ऐसी कड़ी है, जो अभी जांच के बाद सामने आनी बाकी है?
परिवार में पत्नी और दो बेटे
देवदत्त शर्मा की उम्र 52 वर्ष थी। वह सहारनपुर के सरसावा क्षेत्र के सलेमपुर गांव के रहने वाले थे। उनके परिवार में उनकी 49 वर्षीय पत्नी सीमा रानी और दो बेटे थे।
उनका बड़ा बेटा अभिषेक दुबई में नौकरी करता है, जबकि छोटा बेटा आदित्य चंडीगढ़ में रहकर फॉरेंसिक साइंस की पढ़ाई कर रहा है।
परिवार को जानने वाले लोगों के मुताबिक, बाहर से देखने पर ऐसा नहीं लगता था कि देवदत्त किसी बड़ी पारिवारिक परेशानी से गुजर रहे हैं। आर्थिक स्थिति भी ठीक थी।
देवदत्त शर्मा पिछले करीब 26 वर्षों से रॉक नाम से जिम चला रहे थे। वह खुद भी बॉडी बिल्डिंग और वेटलिफ्टिंग से जुड़े हुए थे। इसके अलावा वह एक इंटर कॉलेज में क्लर्क के पद पर भी काम करते थे।
यानी उनका जीवन कई गतिविधियों से जुड़ा हुआ था और परिवार के सामने भी ऐसी कोई बड़ी परेशानी दिखाई नहीं देती थी, जिससे अंदाजा लगाया जा सके कि वह किसी गंभीर तनाव में हैं।
लेकिन 1 अगस्त 2026 की शाम जो हुआ, उसने पूरे परिवार को सदमे में डाल दिया।
शाम 5 से 6 बजे के बीच भांजी को भेजा मैसेज

बताया जा रहा है कि 1 अगस्त की शाम करीब 5 से 6 बजे के बीच देवदत्त शर्मा ने अपनी भांजी के WhatsApp पर कुछ संदेश भेजे।
इन संदेशों में उन्होंने कथित तौर पर अपनी इच्छा जाहिर की कि उनकी मौत के बाद उनकी पत्नी उनकी पार्थिव देह को न छुएं और अंतिम संस्कार में भी उनकी पत्नी शामिल न हों।
उन्होंने अपने अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी अपने छोटे बेटे आदित्य को देने की इच्छा भी जताई।
संदेशों में उन्होंने अपनी आत्मा की शांति के लिए होने वाले धार्मिक अनुष्ठानों को लेकर भी बेहद असामान्य बातें लिखीं। इन संदेशों की भाषा से अंदाजा लगाया जा सकता है कि उस समय वह किसी बेहद गंभीर भावनात्मक स्थिति से गुजर रहे होंगे।
लेकिन सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि उनकी भांजी इन संदेशों को उनके जीवित रहते नहीं पढ़ पाईं।
इन संदेशों का पता तब चला जब देवदत्त की मौत हो चुकी थी।
करीब एक घंटे बाद घर में चली गोली
WhatsApp संदेश भेजने के करीब एक घंटे बाद, लगभग शाम 7 बजे देवदत्त शर्मा जिम से अपने घर पहुंचे।
बताया जा रहा है कि उनकी पत्नी उस समय घर के दूसरे कमरे में थीं। देवदत्त अपने कमरे में चले गए।
कुछ ही देर बाद उनके कमरे से अचानक गोली चलने की आवाज आई।
आवाज सुनकर उनकी पत्नी घबराकर कमरे की तरफ पहुंचीं। वहां देवदत्त खून से लथपथ हालत में पड़े हुए थे।
अचानक हुई इस घटना से परिवार में चीख-पुकार मच गई।
परिजनों और आसपास के लोगों की मदद से देवदत्त को तुरंत अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
मौत के बाद सामने आया आखिरी संदेश
देवदत्त की मौत के बाद जब उनकी भांजी ने अपना WhatsApp देखा तो वहां उनके मामा के भेजे हुए संदेश मौजूद थे।
इन संदेशों ने परिवार को और ज्यादा परेशान कर दिया।
आखिर देवदत्त ने मौत से करीब एक घंटे पहले ये संदेश क्यों भेजे थे?
क्या उन्हें पहले से अंदाजा था कि उनके साथ कुछ होने वाला है?
क्या वह किसी घरेलू विवाद या मानसिक तनाव से गुजर रहे थे?
या फिर इन संदेशों के पीछे कोई ऐसी वजह थी, जिसे परिवार के लोग नहीं जानते थे?
फिलहाल इन सवालों के जवाब स्पष्ट नहीं हैं।
परिवार को नहीं थी किसी अनबन की जानकारी
जब देवदत्त शर्मा के भाई और परिवार के अन्य सदस्यों से उनकी पत्नी के साथ रिश्तों को लेकर सवाल किया गया तो उनका कहना था कि उन्हें दोनों के बीच किसी गंभीर अनबन की जानकारी नहीं थी।
परिजनों के मुताबिक, देवदत्त को देखकर कभी ऐसा नहीं लगा कि वह परिवार को लेकर किसी बड़ी परेशानी में हैं।
यही वजह है कि मौत से पहले भेजे गए संदेशों ने परिवार को और उलझा दिया है।
एक तरफ परिवार का कहना है कि उन्हें किसी गंभीर विवाद की जानकारी नहीं थी, दूसरी तरफ देवदत्त के संदेशों में उनकी पत्नी को लेकर बेहद गंभीर बातें सामने आई हैं।
अब जांच में सामने आएगा सच
इस पूरे मामले में सबसे जरूरी यह पता लगाना है कि देवदत्त शर्मा की मौत किन परिस्थितियों में हुई।
क्या यह वास्तव में आत्महत्या थी, जैसा घटनास्थल की परिस्थितियों से प्रतीत हो सकता है, या फिर किसी अन्य संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता?
मौत से पहले भेजे गए WhatsApp संदेशों की भी जांच बेहद महत्वपूर्ण होगी। पुलिस यह पता लगा सकती है कि संदेश वास्तव में देवदत्त ने खुद भेजे थे या नहीं, उनका समय क्या था और उस दौरान उनके फोन का इस्तेमाल किस तरह हुआ।
इसके अलावा घटनास्थल से मिले साक्ष्य, हथियार, फॉरेंसिक रिपोर्ट, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और परिवार के सदस्यों के बयान इस मामले की सच्चाई सामने लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
फिलहाल देवदत्त शर्मा की मौत ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
एक ऐसा व्यक्ति जो वर्षों से जिम चला रहा था, बॉडी बिल्डिंग करता था, नौकरी करता था और जिसका परिवार आर्थिक रूप से भी मजबूत नजर आता था—वह आखिर मौत से ठीक पहले इतनी गंभीर बातें क्यों लिख रहा था?
क्या वह वास्तव में किसी ऐसी परेशानी से गुजर रहा था, जिसे परिवार समझ नहीं पाया?
या फिर कहानी में कोई ऐसा पहलू है, जो अभी सामने आना बाकी है?
इन सवालों का जवाब जांच पूरी होने के बाद ही मिल सकेगा।
इस मामले में किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले पुलिस जांच और फॉरेंसिक साक्ष्यों का इंतजार करना जरूरी है। खासकर जब मौत से पहले भेजे गए संदेश और घटनास्थल की परिस्थितियां कई सवाल खड़े कर रही हों।
देवदत्त शर्मा की मौत ने उनके परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है। अब उनके परिजन और गांव के लोग जांच के नतीजे का इंतजार कर रहे हैं, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि 1 अगस्त की उस शाम आखिर उनके साथ हुआ क्या था।
