Monday, October 26, 2026
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प्रेमी के साथ मिलकर रची पति की हत्या की साजिश, 8 साल बाद ब्रेन मैपिंग से खुला राज, हड्डियों के टुकड़ों से हुआ खुलासा

राजस्थान के अलवर जिले से जुड़ा यह मामला उन चर्चित हत्याकांडों में शामिल है, जिनमें एक व्यक्ति वर्षों तक लापता रहा और पुलिस को सच्चाई तक पहुंचने में करीब आठ साल लग गए। इस पूरे मामले का सबसे बड़ा मोड़ तब आया, जब पुलिस ने मुख्य आरोपी की ब्रेन मैपिंग करवाई। इसके बाद जो सच सामने आया, उसने जांच अधिकारियों को भी चौंका दिया।

मामले के अनुसार, रवि की शादी शकुंतला से हुई थी। शादी के बाद दोनों का वैवाहिक जीवन सामान्य रूप से चल रहा था। हालांकि, जांच के दौरान यह बात सामने आई कि शादी से पहले शकुंतला का अपने गांव के रहने वाले कमल के साथ प्रेम संबंध था। शादी के बाद भी दोनों एक-दूसरे के संपर्क में बने रहे।

बताया जाता है कि कुछ समय के लिए शकुंतला अपने मायके चली गई थी। बाद में कमल ने उसे समझाकर दोबारा ससुराल लौटने के लिए तैयार किया। पहली नजर में यह सामान्य बात लग रही थी, लेकिन पुलिस जांच के अनुसार यहीं से एक बड़ी साजिश की शुरुआत हुई।

रिश्तेदार से मिलाने के बहाने बुलाया

22 मार्च 2011 को शकुंतला ने अपने पति रवि से कहा कि उसके कुछ रिश्तेदार पास में ही रहते हैं और वह उनसे मिलना चाहती है। उसने यह भी कहा कि यदि समय बचा तो दोनों फिल्म भी देखने जाएंगे। पत्नी की बात सुनकर रवि तैयार हो गया और दोनों घर से निकल पड़े।

दोनों बस स्टैंड के पास बस का इंतजार कर रहे थे। तभी वहां एक कार आकर रुकी। कार में कमल और उसका दोस्त गणेश मौजूद थे। शकुंतला ने रवि से कहा कि वह दोनों उसके गांव के परिचित हैं। इसके बाद कमल ने दोनों को कार में बैठने का प्रस्ताव दिया।

कमल ने शकुंतला को उसके बताए स्थान पर छोड़ दिया। इसके बाद उसने रवि से कहा कि उसे कुछ जरूरी बात करनी है और वह शकुंतला को रिश्तेदारों के यहां छोड़कर वापस आ जाए। रवि को किसी तरह का संदेह नहीं हुआ और वह कमल के पास लौट आया।

पानी में नशीला पदार्थ देने का आरोप

पुलिस जांच के अनुसार, रवि के वापस आने पर कमल ने उसे पानी पीने के लिए दिया। आरोप है कि पानी में नशीला पदार्थ मिला हुआ था। पानी पीने के कुछ ही देर बाद रवि बेहोश हो गया।

जांच में सामने आया कि बेहोशी की हालत में कमल और गणेश ने रवि की गला दबाकर हत्या कर दी। हत्या के बाद दोनों शव को राजस्थान के अलवर जिले के तपुकरा क्षेत्र के पास एक सुनसान जगह पर ले गए। वहां गड्ढा खोदकर शव को दफना दिया गया ताकि किसी को इस वारदात की भनक न लगे।

गुमशुदगी का मामला बना रहस्य

जब कई घंटे बीतने के बाद भी रवि घर नहीं लौटा तो परिवार चिंतित हो गया। काफी तलाश के बाद भी कोई सुराग नहीं मिलने पर रवि के पिता ने पुलिस थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई।

स्थानीय पुलिस ने जांच शुरू की, लेकिन महीनों तक रवि का कोई पता नहीं चल सका। बाद में मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच दिल्ली क्राइम ब्रांच को सौंप दी गई। इसके बावजूद वर्षों तक पुलिस के हाथ कोई ठोस सबूत नहीं लगा।

शकुंतला और कमल पर बढ़ा शक

जांच के दौरान पुलिस ने रवि के गायब होने के बाद शकुंतला की गतिविधियों पर नजर रखी। इसी दौरान यह जानकारी मिली कि वह लगातार कमल के संपर्क में है और दोनों अक्सर मिलते-जुलते रहते हैं।

पुलिस ने कमल और उसके दोस्त गणेश से कई बार पूछताछ की, लेकिन दोनों हर बार खुद को निर्दोष बताते रहे। उनके खिलाफ कोई प्रत्यक्ष सबूत नहीं होने के कारण पुलिस कार्रवाई नहीं कर पा रही थी।

ब्रेन मैपिंग बनी जांच का टर्निंग पॉइंट

आखिरकार दिल्ली क्राइम ब्रांच ने अदालत से अनुमति लेकर कमल और गणेश की ब्रेन मैपिंग कराने का निर्णय लिया। दोनों को अहमदाबाद स्थित फॉरेंसिक लैब ले जाया गया, जहां वैज्ञानिक जांच की गई।

पुलिस के अनुसार, पूछताछ के दौरान कमल ने रवि की मौत और शव को ठिकाने लगाने से जुड़ी अहम जानकारी दी। उसने उस स्थान के बारे में बताया, जहां शव को दफनाया गया था।

खुदाई में मिले हड्डियों के अवशेष

कमल की निशानदेही पर पुलिस राजस्थान के अलवर जिले के उस स्थान पर पहुंची। वहां खुदाई कराई गई, जिसमें मानव शरीर के करीब 25 हड्डियों के टुकड़े बरामद हुए।

फॉरेंसिक जांच के लिए इन अवशेषों का डीएनए टेस्ट कराया गया। साथ ही रवि के माता-पिता के डीएनए नमूने भी लिए गए। जांच रिपोर्ट में डीएनए का मिलान हो गया और पुष्टि हुई कि बरामद अवशेष रवि के ही थे।

तीनों आरोपियों पर कार्रवाई

डीएनए रिपोर्ट आने के बाद पुलिस ने कमल और गणेश को हत्या और साक्ष्य मिटाने सहित विभिन्न धाराओं में गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद पुलिस शकुंतला को गिरफ्तार करने उसके घर पहुंची, लेकिन वह पहले ही फरार हो चुकी थी।

पुलिस ने कई दिनों तक तलाश अभियान चलाया और आखिरकार शकुंतला को भी गिरफ्तार कर लिया। जांच एजेंसियों का आरोप है कि वह पूरी साजिश की जानकारी होने के बावजूद लगातार पुलिस को गुमराह करती रही।

जांच पूरी होने के बाद खुला राज

करीब आठ वर्षों तक यह मामला एक रहस्य बना रहा। लेकिन वैज्ञानिक जांच, ब्रेन मैपिंग और डीएनए परीक्षण की मदद से पुलिस इस हत्याकांड की गुत्थी सुलझाने में सफल रही। यह मामला इस बात का उदाहरण माना जाता है कि आधुनिक फॉरेंसिक तकनीक और लगातार जांच से वर्षों पुराने मामलों का भी खुलासा संभव है।

नोट: इस मामले में आरोपों और घटनाक्रम का आधार पुलिस जांच और उपलब्ध न्यायिक रिकॉर्ड हैं। अंतिम दोष सिद्धि अदालत के निर्णय पर निर्भर करती है।

Sonu Baali
Sonu Baalihttp://khasharyananews.com
संस्थापक, खास हरियाणा न्यूज़- हरियाणा की ज़मीन से जुड़ा एक निष्पक्ष और ज़मीनी पत्रकार। पिछले 6+ वर्षों से जनता की आवाज़ को बिना किसी एजेंडे के सामने लाने का प्रयास कर रहे हैं। देसी अंदाज़ और सच्ची पत्रकारिता में विश्वास रखते हैं। 🌐 khasharyana.com
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