वादा, मौत के एक साल बाद उसी के हाथ से बंधी राखी; मां की आंखों
रक्षाबंधन का त्योहार भाई-बहन के प्यार, विश्वास और वादे का प्रतीक माना जाता है। लेकिन गुजरात के वलसाड से सामने आई यह कहानी भाई-बहन के रिश्ते की ऐसी भावुक कहानी है, जिसे सुनकर शायद ही कोई अपनी आंखों में आंसू रोक पाए। कहानी 9 साल की रिया और उसके छोटे भाई शिवम की है। रिया आज इस दुनिया में नहीं है, लेकिन अपने भाई से किया हुआ उसका वादा उसकी मौत के करीब एक साल बाद भी पूरा हुआ।

सबसे भावुक कर देने वाला पल उस समय आया, जब रिया की मां ने अपनी बेटी का वही हाथ अपनी आंखों के सामने देखा, जिससे उनकी बेटी ने कभी अपने भाई की कलाई पर राखी बांधी थी। फर्क सिर्फ इतना था कि अब वह हाथ उनकी बेटी के शरीर का हिस्सा नहीं था, बल्कि 15 साल की एक दूसरी बच्ची अनामता अहमद के शरीर का हिस्सा बन चुका था।
दरअसल, गुजरात के वलसाड में रिया अपने पिता बॉबी मिस्त्री, मां तृष्णा मिस्त्री और छोटे भाई शिवम के साथ रहती थी। रिया अपने भाई से बेहद प्यार करती थी। एक बार रक्षाबंधन के मौके पर जब रिया अपने भाई शिवम की कलाई पर राखी बांध रही थी, तब शिवम ने अपनी बहन से कहा था कि बहन, तुम हर रक्षाबंधन पर इसी तरह मुझे राखी बांधना।
भाई की इस बात पर रिया ने उससे एक ऐसा वादा कर दिया, जो उसकी जिंदगी खत्म होने के बाद भी पूरा हुआ। रिया ने अपने भाई से कहा था कि भाई, मैं जहां भी रहूं, लेकिन हर रक्षाबंधन पर तुम्हारी कलाई में मेरी राखी जरूर होगी।
लेकिन शायद किसी को नहीं पता था कि रिया का यह वादा इतना भावुक और दर्दनाक तरीके से पूरा होगा।
रक्षाबंधन के कुछ ही दिनों बाद, 14 सितंबर 2024 को अचानक रिया की तबीयत बिगड़ गई। उसके सिर में तेज दर्द हुआ और उसे लगातार उल्टियां होने लगीं। बेटी की हालत बिगड़ती देख रिया के माता-पिता बिना देर किए उसे इलाज के लिए सूरत के किरण हॉस्पिटल लेकर पहुंचे।
अस्पताल में डॉक्टरों ने रिया का सिटी स्कैन किया। जांच के बाद पता चला कि रिया को ब्रेन हेमरेज हुआ है। डॉक्टरों ने उसका इलाज शुरू किया, लेकिन रिया की हालत बेहद गंभीर थी। अगले ही दिन यानी 15 सितंबर 2024 को डॉक्टरों ने परिवार को बताया कि रिया ब्रेन डेड हो चुकी है।
एक पल में रिया के माता-पिता की दुनिया उजड़ गई। जिस बेटी को कुछ समय पहले तक वे अपने सामने हंसते-खेलते देख रहे थे, वह अब उनके बीच नहीं थी।
इसी बीच एक ऑर्गन डोनेशन संस्था ने रिया के परिवार से संपर्क किया। परिवार को बताया गया कि रिया को बचाना अब संभव नहीं है, लेकिन अगर वे चाहें तो अपनी बेटी के अंगों का दान करके कई जरूरतमंद लोगों को नई जिंदगी दे सकते हैं।
बेटी को खोने के इस असहनीय दुख के बीच रिया के माता-पिता ने बड़ा फैसला लिया। उन्होंने अपनी बेटी के अंगों को दान करने की सहमति दे दी। परिवार के इस फैसले से रिया की मौत के बाद भी कई लोगों के जीवन में उम्मीद की किरण जगी।
बताया गया कि रिया देश की सबसे कम उम्र की अंग दाताओं में शामिल रही और इस वजह से उसका नाम रिकॉर्ड में भी दर्ज हुआ।
लेकिन रिया की कहानी यहीं खत्म नहीं हुई।
दूसरी तरफ मुंबई के गोरेगांव में रहने वाली 15 साल की अनामता अहमद की जिंदगी भी एक दर्दनाक हादसे के बाद बदल चुकी थी।
अक्टूबर 2022 में अनामता उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में अपनी बुआ के घर गई हुई थी। वहां खेलते-खेलते वह घर की छत पर पहुंच गई। छत के ऊपर से 11 हजार वोल्ट की हाई टेंशन बिजली की लाइन गुजर रही थी। दुर्भाग्य से अनामता का हाथ बिजली के तार के संपर्क में आ गया।
हादसा इतना भयानक था कि अनामता बुरी तरह झुलस गई। डॉक्टरों ने उसकी जान तो बचा ली, लेकिन उसका एक हाथ नहीं बचाया जा सका। ऑपरेशन के दौरान डॉक्टरों को उसका हाथ काटना पड़ा।
इसके बाद लंबे समय तक अनामता का इलाज चलता रहा। लेकिन रिया के अंगदान ने अनामता की जिंदगी को एक नई दिशा दे दी। रिया का हाथ अनामता में ट्रांसप्लांट किया गया और यह ट्रांसप्लांट सफल रहा।
जब डॉक्टरों ने अनामता और उसके परिवार को बताया कि यह हाथ उस 9 साल की बच्ची रिया का है, जो अपने छोटे भाई से बेहद प्यार करती थी और रक्षाबंधन पर उसे हर साल राखी बांधने का वादा करके गई थी, तो यह कहानी केवल एक मेडिकल ट्रांसप्लांट की कहानी नहीं रही।
यह एक अधूरे वादे को पूरा करने की कहानी बन गई।
इसके बाद अनामता के परिवार ने फैसला किया कि अगस्त 2025 में रक्षाबंधन के मौके पर वे अपनी बेटी को लेकर मुंबई से गुजरात के वलसाड जाएंगे। वहां अनामता उसी हाथ से रिया के छोटे भाई शिवम की कलाई पर राखी बांधेगी।
आखिर वह दिन भी आ गया।
रक्षाबंधन के दिन अनामता रिया के घर पहुंची। सामने रिया का परिवार था। वही घर, वही मां और वही भाई, लेकिन रिया खुद वहां मौजूद नहीं थी। अनामता ने रिया के हाथ से उसके भाई शिवम की कलाई पर राखी बांधी।
जैसे ही रिया की मां ने अनामता के हाथ को छुआ, उनकी आंखों से आंसू निकल पड़े। एक मां के लिए यह पल शब्दों में बयान करना शायद संभव ही नहीं था। उनकी बेटी रिया इस दुनिया में नहीं थी, लेकिन उसकी निशानी उनके सामने जीवित थी।
रिया का भाई भी खुद को रोक नहीं पाया। उसकी आंखों में आंसू थे और दिल में अपनी बहन की याद।
उसने भावुक होकर कहा कि मेरी बहन आज इस दुनिया में नहीं है, लेकिन उसने मुझसे वादा किया था कि वह हर साल मुझे राखी बांधेगी। आज मेरी बहन मेरे साथ नहीं है, लेकिन उसी के हाथ से मेरी कलाई पर राखी बंध रही है।
सोचिए, एक भाई के लिए इससे ज्यादा भावुक पल और क्या हो सकता है?
रिया ने जाते-जाते अपने भाई से जो वादा किया था, वह पूरा हुआ। शरीर भले ही रिया का साथ छोड़ गया, लेकिन उसके प्यार की एक निशानी उसके भाई तक वापस पहुंच गई।
यह कहानी हमें यह भी बताती है कि अंगदान सिर्फ किसी व्यक्ति के शरीर का हिस्सा किसी दूसरे व्यक्ति को देना नहीं है। कई बार यह किसी परिवार की उम्मीद, किसी मां की याद और किसी भाई-बहन के अधूरे रिश्ते को एक नई जिंदगी दे सकता है।
रिया आज इस दुनिया में नहीं है, लेकिन उसका दिया हुआ वादा आज भी जिंदा है।
एक बहन ने कहा था—“मैं जहां भी रहूं, तुम्हें हर रक्षाबंधन पर राखी जरूर बांधूंगी।”
और सच में, रक्षाबंधन आया तो राखी उसकी ही थी, हाथ भी उसका था और सामने उसका वही भाई था।
बस बहन रिया खुद वहां मौजूद नहीं थी।
