Tuesday, July 28, 2026
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श्रीदेवी रुदागी केस: इंटरनेशनल कराटे चैंपियन पर हनी ट्रैप और ब्लैकमेलिंग के आरोप

आज जो केस मैं आपको सुनाने वाला हूं वो शुरुआत में आपको सुनने में इंस्पायरिंग और मोटिवेटिंग लगेगा। लेकिन यह किस्सा एक ऐसे जुर्म की राह की तरफ रुख करेगा जिसकी कल्पना किसी ने भी नहीं की होगी। बसवन्ना बागेड़ी कर्नाटका का एक छोटा सा कस्बा जहां जिंदगी आमतौर पर सीधी और सीमित होती है। लेकिन इसी जगह से एक ऐसी लड़की निकली जिसके सपने उसकी हालातों से काफी बड़े थे। श्रीदेवी रुदागी का बचपन आसान नहीं था। जब वो सिर्फ 10वीं क्लास में थी तब उसके पिता को गैंगन की वजह से अपना एक पैर खोना पड़ा और घर की जिम्मेदारी उसकी मां पर आ गई जो दिन भर मजदूरी करके परिवार चलाती थी। ऐसे माहौल में अक्सर सपने छोटे पड़ जाते हैं। लेकिन श्रीदेवी ने अपनी कहानी वहीं से बदलनी शुरू की।

सिक्स्थ क्लास से शुरू हुआ उसका कराटे का सफर धीरे-धीरे एक जुनून बन गया और फिर वही जुनून उसे नेशनल लेवल तक ले गया। 2012 में विजयवाड़ा में हुई नेशनल कराटे चैंपियनशिप में उसने गोल्ड मेडल जीतकर सबका ध्यान अपनी ओर खींच लिया। लेकिन असली पहचान तब बनी जब 2020 में हावड़ा में हुई इंटरनेशनल कराटे चैंपियनशिप में उसने इंडिया को रिप्रेजेंट करते हुए गोल्ड मेडल जीता। एक छोटे से गांव की लड़की अब देश का नाम रोशन कर रही थी। लेकिन उसकी मेहनत सिर्फ कराटे तक सीमित नहीं रही। डांस, म्यूजिक, योगा और कई कलाओं में उसने अपनी पहचान बनाई। लेकिन उसके सफर में एक और चीज उतनी ही इंपॉर्टेंट थी। लोगों का साथ। उसके दादा शिवाराम पाटिल हमेशा उसके लिए एक इंस्पिरेशन और स्ट्रांग सपोर्ट सिस्टम बने रहे। और जब उसकी अचीवमेंट सामने आई तब लोकल एमएलए शिवंद एस पाटिल ने भी उसकी मदद की ताकि पैसे की कमी उसके सपनों के बीच ना आए। कई सारे अवार्ड्स और मेडल्स जीतने के बाद श्रीदेवी का सपना अब एशियन और ओलंपिक लेवल पर मेडल्स लाकर इंडिया के लिए एक नई पहचान बनाना था। लेकिन जिंदगी सिर्फ मेहनत और सपनों से नहीं चलती। कभी-कभी वक्त, किस्मत और इंसान की नियत मिलकर ऐसी कहानी लिख देते हैं जिसका अंजाम कोई सोच भी नहीं सकता।

क्योंकि जहां एक तरफ एक लड़की अपने देश के लिए ओलंपिक मेडल का सपना देख रही थी, उसी लड़की को सिर्फ 3 साल बाद ही सेंट्रल क्राइम ब्रांच ने अरेस्ट कर लिया। आखिर ऐसा क्या हुआ कि 25 साल की श्रीदेवी रुदागी एक इंटरनेशनल गोल्ड मेडलिस्ट एक मल्टीटलेंटेड पर्सनालिटी की सपनों से भरी जिंदगी ऐसे अंधेरे मोड़ पर आ खड़ी हुई। वेलकम टू द शो। माय नेम इज शाश्वत एंड यू आर वाचिंग द डबल लाइफ ऑफ श्रीदेवी साल 2023 25 साल की श्रीदेवी ने बेंगलुरु के महालक्ष्मी लेआउट में छोटे बच्चों के लिए एक प्री स्कूल खोला स्कूल ठीक-ठाक चलने भी लगा और बच्चों के एडमिशन भी होने लगे। उन्हीं में ही 34 साल की राकेश वैष्णव जो अपनी पत्नी और तीन बेटियों के साथ पास में ही रहते थे। अपनी 5 साल की सबसे छोटी बेटी का उसी स्कूल में एडमिशन करवा दिया। अब क्योंकि श्रीदेवी ही स्कूल ओनर भी थी और टीचर भी इसलिए बच्चों के सभी पेरेंट्स से उसका ही डायरेक्ट इंटरेक्शन होता था और इसी पेरेंट टीचर इंटरेक्शन में श्रीदेवी की बातचीत राकेश वैष्णव से शुरू हुई। इस बातचीत की शुरुआत तो राकेश की बच्ची को लेकर हुई थी। लेकिन कुछ महीनों बाद यह पेरेंट टीचर मीटिंग और इंटरेक्शन एक बहुत ही अलग ज़ोन में चला गया। साल 204 एक नया साल एक नई शुरुआत। लेकिन यहीं से शुरू हुआ एक ऐसा खेल जहां इमोशंस नहीं कैलकुलेशंस चल रही थी।

श्रीदेवी ने राकेश से बढ़ती अपनी गरीबी का फायदा उठाया और स्कूल मेंटेनेंस के नाम पर ₹ लाख उधार ले लिए और वह भी इस वादे के साथ कि वह जल्दी यह पैसे वापस लौटा देगी। राकेश ने भरोसा दिखाते हुए उसकी मदद कर दी क्योंकि उस वक्त उसके लिए यह रकम कोई खास बड़ी नहीं थी। लेकिन उसे अंदाजा नहीं था कि असल में वह धोखे की एक ऐसी सुरंग में घुस रहा है जहां उसका कोई दूसरा छोर नहीं है। कुछ महीने बाद जब राकेश ने अपने पैसे वापस मांगे तो श्रीदेवी ने अपने पापा की तबीयत खराब होने की बात कहकर थोड़े और वक्त की मोहलत मांगी। आखिरकार मोहलत तो मिली लेकिन जब फिर कुछ महीनों बाद राकेश ने श्रीदेवी से पैसे लौटाने को कहा तो उसने एक नया दांव चलते हुए राकेश को इसी स्कूल में पार्टनरशिप का ऑफर दिया। यहां तक सब कुछ एक नॉर्मल नेगोशिएशन जैसा लग रहा था। लेकिन असली गेम अब शुरू हुआ जब राकेश ने फिर से इंसिस्ट किया। लेकिन इस बार श्रीदेवी ने पैसे नहीं बल्कि कुछ ऐसा ऑफर किया जिसके बारे में खुद राकेश ने भी उम्मीद नहीं की थी। वो ऑफर था सेक्सुअल रिलेशन बनाने का। श्रीदेवी पैसों को लेकर डेस्पिरेशन की एक नई सीमा को लांग चुकी थी और वो इसके लिए राकेश के साथ शारीरिक संबंध बनाने को भी तैयार थी क्योंकि वह जानती थी कि यह एक ऐसा वीक पॉइंट है जिसके आगे राकेश का खुद पर भी बस नहीं चलेगा।

उसने राकेश को अपने घर बुलाया और वहां जो हुआ उसने सिर्फ उनके बीच की बाउंड्रीज नहीं बल्कि राकेश की सोचने समझने की शक्ति को भी धुंधला कर दिया। श्रीदेवी ने अपने जिस्म को एक हथियार बना राकेश के ऊपर इस्तेमाल किया था और राकेश इसे प्यार समझ एक ट्रैप में फंसने वाला था क्योंकि इसके बाद श्रीदेवी ने उधार पैसे लौटाने की बजाय उल्टा राकेश से ₹500 की डिमांड रख दी। अब चकि राकेश सिर्फ इमोशनली नहीं बल्कि फिजिकली भी इन्वेस्ट हो चुका था। इसलिए अब इस शुरुआती छोटी सी मांग को पूरा करने में वह मुकर नहीं पाया। राकेश का श्रीदेवी के लिए ऑब्सेशन बढ़ रहा था और अब वह हर पल श्रीदेवी से जुड़ा रहना चाहता था। इसलिए उसने श्रीदेवी और खुद के लिए दो नए फोंस और नए सिम कार्ड खरीदे और दोनों के बीच WhatsApp और वीडियो कॉल्स पर बातचीत शुरू हुई। श्रीदेवी की कोशिश रहती थी कि बातों का डिस्कशन या तो पैसों और बिजनेस को लेकर हो या फिर सेक्सुअल डिजायर्स और फेंटसीज का। पैसों का डिस्कशन इसलिए ताकि वह राकेश के फाइनेंसियल स्टेटस और उसके इन्वेस्टमेंट को टटोल सके और यह समझ सके कि आखिर वह किस हद तक अपनी डिमांड्स को ले जा सकती है और सेक्सुअल चैट्स इसलिए ताकि इसका लालच देकर राकेश की आंखों पर पट्टी बांध सके। शुरुआत में तो सब कुछ नॉर्मल लग रहा था।

लेकिन धीरे-धीरे वो इसी जाल में और गहरा उतरता चला गया। श्रीदेवी ने जो शुरू किया वो सिर्फ चंद उधार के पैसों तक सीमित नहीं था। उसे पता चल चुका था कि राकेश एक बड़ा बिजनेसमैन है और उसकी क्या कैपेसिटी है। इसलिए अब उसने सीधा ₹15 लाख की डिमांड रख दी। यहां से राकेश को एहसास होने लगा कि वह एक सिलसिलेवार तरीके से शिकार हो रहा है। पानी अब सर के ऊपर जा चुका था और वह इन सब से बाहर निकलना चाहता था। इसलिए उसने अपना सिम कार्ड तोड़ते हुए यह फैसला लिया कि अब वह उससे दोबारा कांटेक्ट नहीं करेगा। और इसी सोच से उसे लगा कि शायद अब उसके और श्रीदेवी के बीच का रिलेशन खत्म हो जाएगा। लेकिन ऐसे जाल इतनी आसानी से टूटते नहीं है। क्योंकि जब कोई इंसान धीरे-धीरे फंसाया जाता है तो अक्सर वह तब समझ पाता है जब बाहर निकलने के सारे रास्ते या तो लगभग खत्म हो चुके हो या फिर दिखाई देना बंद हो गए हो। राकेश को लगा था कि अब जिंदगी धीरे-धीरे नॉर्मल हो जाएगी। लेकिन उस वक्त तक उसकी जिंदगी के दूसरे हिस्से भी बिखरने लगे थे। बिजनेस में लगातार लॉसेस के बाद उसने अपने परिवार के साथ गुजरात शिफ्ट होने का एक मुश्किल डिसीजन लिया और इसके लिए उसे स्कूल से अपनी बेटी का ट्रांसफर सर्टिफिकेट चाहिए था। एक सिंपल सा काम जो उसे लगा कि बस फॉर्मेलिटीज का हिस्सा है।

12 मार्च को अचानक श्रीदेवी रुदागी ने उसकी वाइफ को फोन पर कॉल किया और स्कूल आकर पीसी ले जाने को कहा। राकेश की वाइफ को कॉल करना असल में श्रीदेवी का एक प्लान का हिस्सा था क्योंकि उसे पता था कि राकेश यह सुनकर खुद चला आएगा क्योंकि उसे डर होगा कि कहीं उसकी पत्नी को श्रीदेवी कहीं कुछ बता ना दे। राकेश इस ख्याल के साथ कि पिछला सब कुछ खत्म हो गया है और वह बिना किसी शक के वहां पहुंच गया। लेकिन जैसे ही वह वहां स्कूल के पास पहुंचा, वहां कुछ और ही उसका इंतजार कर रहा था। गणेश काले और सागर मोरे नाम के दो लोगों ने राकेश को जबरदस्ती पकड़ लिया और स्कूल के अंदर ले गए। उस दिन स्कूल की छुट्टी थी इसलिए वहां कोई और मौजूद नहीं था। राकेश को यह समझने का मौका भी नहीं मिला कि आखिर क्या हो रहा है। तभी गणेश काले ने सागर मोरी की तरफ इशारा करते हुए राकेश से कहा कि श्रीदेवी और सागर की सगाई हो चुकी है। अब यह सुनते ही एक पल के लिए राकेश का दिमाग सुन पड़ गया और उसने सफाई देते हुए कहा कि उसे इस बारे में बिल्कुल भी पता नहीं था। वो तो बस श्रीदेवी से यूं ही मिलता था और वह लोग बस कभी कबभार बाहर खाने को गए थे और इसके अलावा दोनों के बीच कुछ नहीं है। राकेश की दी गई सफाई और झूठ ने उसके अंदर के डर को दिखा दिया था और इसी डर का फायदा उठाते हुए दोनों ने उसे धमकाते हुए कहा कि तू श्रीदेवी के साथ बड़े मजे कर रहा था ना। अब यह सब कुछ तुम्हारी वाइफ और तुम्हारे फादर इन लॉ को बता दिया जाएगा। राकेश के लिए यह सिर्फ धमकी नहीं थी। यह उसके पूरे परिवार के बिखरने का डर था।

उसके चेहरे पर घबराहट साफ थी। लेकिन उसके पास कोई रास्ता नहीं था। इसके बाद उन्होंने उसे जबरदस्ती एक एसयूवी गाड़ी में बिठाया और कहा कि तुमको अब पुलिस स्टेशन ले चल रहे हैं। यह सुनते ही राकेश की सांस अटक गई। उस वक्त राकेश के अंदर सिर्फ एक ही इमोशन था डर का। उसे ना यह समझ आ रहा था कि उसका क्या होगा और ना यह कि यह सब रुकेगा कैसे? लेकिन पुलिस स्टेशन जाने की बजाय वो उसे गाड़ी से उसके ही घर के करीब ले गए और वहां जाकर असली वजह सामने आई। उन्होंने उसे धमकाते हुए कहा कि ₹1 करोड़ दो वरना तुम्हारी वाइफ को सब कुछ सच बता देंगे। अब राकेश के लिए यह सिर्फ पैसे का मामला नहीं था बल्कि उसकी इज्जत और उसका परिवार दांव पर लग चुका था और तभी इस कहानी का सबसे क्रूशियल कैरेक्टर फिर से एंट्री लेता है श्रीदेवी रुदागी। उसी वक्त राकेश के फोन पर उसका कॉल आता है। उसकी आवाज में एक अजीब सा कॉन्फिडेंस था जैसे अब सब कुछ उसके कंट्रोल में हो। उसने सीधा अपने कनेक्शन का जिक्र किया जो मल्लेश्वरम सब डिवीजन के एक फॉर्मर एसीपी का था और इस बात का एहसास दिलाया कि अगर उसने कोऑपरेट नहीं किया तो सिचुएशन उसके लिए और भी बुरी हो सकती है। अब राकेश पूरी तरह टूट चुका था। वो गिड़गिड़ा रहा था। अपने बिजनेस लॉसेस का हवाला दे रहा था। बार-बार हाथ जोड़कर सिर्फ एक ही मौका मांग रहा था।

इसलिए शुरू में 1 करोड़ की डिमांड रखने वाले अब धीरे-धीरे नीचे आए और आखिरकार डील ₹20 लाख पर सेटल हुई। लेकिन यहां भी रहम नहीं था। उन्होंने तुरंत पहली इंस्टॉलमेंट के तौर पर ₹1,90,000 ले लिए और तब जाकर राकेश को छोड़ा गया। वो वहां से तो निकल गया लेकिन जो डर, जो बेइज्जती और जो प्रेशर उसने महसूस किया था वो अभी भी खत्म नहीं हुआ था। बल्कि यह तो बस एक शुरुआत थी। 17 मार्च 2025 यानी सिर्फ 5 दिन बाद श्रीदेवी रुदागी का फिर से कॉल आता है। और इस बार उसकी टोन अलग थी। उसने सीधा कहा कि ₹15 लाख अरेंज करो। वरना जो प्राइवेट वीडियो कॉल्स और चैट्स हमारे बीच हुई है वो तुम्हारी वाइफ को दिखा दी जाएंगी। हर लफ्ज में एक क्लियर थ्रेट था। एक ऐसा डर जो सीधा राकेश के घर उसके रिश्ते उसकी इज्जत पर वार कर रहा था। हैरानी इस बात की भी थी कि श्रीदेवी ने सिर्फ डिमांड नहीं रखी बल्कि उसने पूरा ब्रेकडाउन भी दिया। 5 लाख उन्हीं फॉर्मर एसीपी के लिए। 1 लाख सागर के लिए, 1 लाख गणेश के लिए और बाकी 8 लाख खुद के लिए। असल में यह एक वेल स्ट्रक्चरर्ड एक्सटॉशन प्लान था। यहां फोन के उस पार्ष श्रीदेवी बार-बार उसे याद दिलाती रही कि पेमेंट करो वरना तुम्हारी वीडियोस बाहर आएंगी और तुम बर्बाद हो जाओगे। राकेश के लिए अब हर रिंगटोन एक नाइट मेयर बन चुकी थी और हर कॉल, एक नई धमकी और हर दिन एक नई बेचैनी। आखिरकार जब सारी हदें पार हो गई तो उसने बेंगलुरु के सेंट्रल क्राइम ब्रांच से कांटेक्ट किया और पूरी कहानी उनके सामने रख दी।

पुलिस ने तुरंत एक्शन लिया और इन्वेस्टिगेशन में सबसे पहले एक बड़ी बात क्लियर हो गई कि जिस फॉर्मर एसीपी कनेक्शन का नाम लेकर राकेश को डराया जा रहा था उनका इस पूरे कनेक्शन से कोई लेना देना नहीं था। वो सिर्फ उन अपराधियों का एक झांसा था। एक साइकोलॉजिकल प्रेशर क्रिएट करने का तरीका था। पुलिस ने बिना देरी किए श्रीदेवी रुदागी, सागर मोरे और गणेश काले को अरेस्ट कर लिया और तीनों को 14 दिन की जुडिशियल कस्टडी में भेज दिया गया। लेकिन ऐसे केसेस में एक चीज बार-बार देखने को मिलती है और पिछले कई हाई प्रोफाइल एक्सटॉर्शन और हनी ट्रैप केसेस में यह डिबेट उठ चुकी है कि लॉ के कुछ प्रोविजंस कभी-कभी एक्यूज़्ड के लिए टैक्टिकल एडवांटेज बन जाते हैं। गणेश काले और सागर मोरे के लिए बेल लेना आसान नहीं होगा क्योंकि किडनैपिंग फॉर रैंसम और एक्सटॉशन जैसे ऑफेंसेस काफी सीरियस माने जाते हैं। यह नॉन बेलेबल और कॉग्निजिबल ऑफेंसेस हैं। और बीएएनएस के तहत अगर ऑफेंसेस उम्र कैद या डेथ पेनल्टी कैटेगरी में आते हो तो कोर्ट्स जनरली बेल देने में काफी स्ट्रिक्ट अप्रोच रखते हैं। लेकिन यहीं पर कई लीगल एक्सपर्ट्स एक और एंगल की तरफ इशारा करते हैं

जो पहले भी सिमिलर केसेस में देखा गया है। बीएएनएस के सेक्शन 480 में जो नॉन बेलेबल ऑफेंसेस में बेल से रिलेटेड है। एक प्रोविजन दिया गया है जिसे कॉमनली जेंडर एक्सेप्शन के नाम से डिस्कस किया जाता है। इस प्रोविजन के अंदर कोर्ट को यह डिस्क्रीशन दिया गया है कि अगर एक्यूज़्ड एक वुमेन या चाइल्ड या सिक और इनफर्म कंडीशन में हो तो सीवियर ऑफेंसेस में भी बेल कंसीडर की जा सकती है। इसलिए यह प्रोविजन काफी फ्रस्ट्रेटिंग सिचुएशन क्रिएट करता है। जहां ऐसे केसेस में इनवॉल्व महिला सीरियस एलगेशन के बावजूद इस प्रोविजन का इनडायरेक्ट लीगल एडवांटेज लेकर बेल पर रिहा हो जाती हैं। अब कोर्ट रूम की लड़ाई सिर्फ एविडेंस की नहीं होती बल्कि नैरेटिव की भी होती है। और ऐसे हाई प्रोफाइल्स एक्सटॉरशन या हनी ट्रैप केसेस में अक्सर डिफेंस साइड बचाव करने की बजाय कंप्लेनेंट की क्रेडिबिलिटी पर ही अटैक करना शुरू कर देती है। डिफेंस इसे एक कंसेंसुअल रिलेशनशिप दिखाकर एक्सटॉशन में दिए गए पैसों को विलिंगली दिए गए गिफ्ट्स, हेल्प या इन्वेस्टमेंट के रूप में दिखाती है और फिर नैरेटिव को उल्टा घुमा दिया जाता है। कोर्ट में यह तक कह दिया जाता है कि रिलेशनशिप सीक्रेट था। इसलिए तब तक ठीक था। लेकिन जैसे ही वाइफ को पता चला तो कवर स्टोरी के लिए कंप्लेनेंट ने उसी रिलेशनशिप को एक्सटॉरशन का नाम देना शुरू कर दिया।

यही वजह है कि ऐसे केसेस में इन्वेस्टिगेटिंग एजेंसीज डिजिटल चैट्स, कॉल रिकॉर्ड्स, ट्रांजैक्शन ट्रेट्स और थ्रेट्स के कंक्रीट एविडेंस पर इतना जोर देती है क्योंकि कोर्ट रूम में सिर्फ एलगेशंस नहीं इंटेंट और कोवर्जन प्रूफ करना पड़ता है। और सच यह है कि इसी जगह पर ऐसे केसेस सबसे ज्यादा कॉम्प्लिकेटेड हो जाते हैं। क्योंकि कोर्ट रूम में हर साइड अपनी एक अलग कहानी सुना रहा होता है। ऐसे हनी ट्रैप और सेक्सटॉशन केसेस में असली वेपन प्राइवेट फोटो या वीडियोस नहीं होते बल्कि विक्टिम का डर होता है। सोसाइटी का डर, फैमिली टूटने का डर, इज्जत खत्म होने का डर। श्रीदेवी रुदागी को पता था कि राकेश एक शादीशुदा बिजनेसमैन है। यहां सिर्फ उसके पैसे टारगेट नहीं किए जा रहे थे बल्कि उसकी रेपुटेशन को होस्टेज बनाया जा रहा था। जब यह कहानी शुरू हुई तो श्रीदेवी एक ऐसी लड़की थी जिसे देखकर लगता था कि मेहनत से सब कुछ हासिल किया जा सकता है। एक इंटरनेशनल गोल्ड मेडलिस्ट, एक टीचर बट एंबिशन विदाउट मोरल कंपस इज डेंजरस।

श्रीदेवी ने अपने उसी दिमाग और डिसिप्लिन को एक ऐसी साजिश में लगा दिया जिसने उसकी पूरी जिंदगी तबाह कर दी और राकेश राकेश को लगा था कि थोड़े पैसे देकर थोड़ी मदद करके वो एक नया रिश्ता एक नया थ्रिल शुरू कर रहा है। लेकिन सच तो यह है कि हनी ट्रैप में फंसने वाला इंसान तब तक शिकार बनता रहता है जब तक वो अपने डर से बड़ा कदम नहीं उठाता। एक्सटॉशन करने वाले आपसे सिर्फ पैसे नहीं मांगते। वह आपकी इज्जत, आपका परिवार और आपकी मानसिक शांति को गिरवी रख लेते हैं। इस केसेस में सबसे बड़ी सीख यही मिलती है कि जब प्रोफेशनल और पर्सनल बाउंड्रीज धुंधली होने लगे तब वहीं रुक जाइए। क्योंकि एक बार आपने डर के आगे घुटने टेक दिए तो सामने वाला आपकी पूरी जिंदगी का सौदा कर लेगा।

Sonu Baali
Sonu Baalihttp://khasharyananews.com
संस्थापक, खास हरियाणा न्यूज़- हरियाणा की ज़मीन से जुड़ा एक निष्पक्ष और ज़मीनी पत्रकार। पिछले 6+ वर्षों से जनता की आवाज़ को बिना किसी एजेंडे के सामने लाने का प्रयास कर रहे हैं। देसी अंदाज़ और सच्ची पत्रकारिता में विश्वास रखते हैं। 🌐 khasharyana.com
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