यूपी के बागपत के राजपुर खामपुर गांव की रहने वाली 27 साल की राखी कश्यप कहने को तो एक छोटी सी जगह से आती थी। लेकिन उसके सपने कभी भी छोटे नहीं थे। उसकी दुनिया, उसके ख्वाब, उसके एंबिशन सब कुछ उस गांव की सीमाओं से काफी आगे निकल चुके थे। खामपुर पुनिया के एचआर इंटर कॉलेज से स्कूलिंग पूरी करने के बाद राखी का फैशन एंड मॉडलिंग में इंटरेस्ट बढ़ने लगा। Instagram पर एक्टिव होने के साथ ही वो लखनऊ में फैशन एंड मॉडलिंग शोज़ में हिस्सा लेने लगी। अपनी लाइफ को वो वॉग्स, पोस्ट और रील्स के जरिए दुनिया के सामने रखने लगी।
लेकिन वो चाहती थी कि लोगों के सामने उसकी एक दबंग इमेज बने। इसलिए उसने अपना उठना बैठना नेता नगरी के लोगों के साथ तो शुरू किया ही। साथ ही एक साल पहले उसने अपने नाम पर एक लाइसेंस्ड पिस्टल ली और वही पिस्टल उसकी रील्स का हिस्सा बन गई। शर्ट, जींस और कमर में गन लगाकर वो अपनी एक बोल्ड और फियरलेस इमेज क्रिएट कर दी। जैसे दुनिया को यह बताना चाहती हो कि अब वह किसी से कम नहीं। क्लब में पार्टीज, लाउड म्यूजिक और ओपन कार में रील शूट करना यह सब उसकी फ्लैशी सोशल मीडिया लाइफ का रिफ्लेक्शन बन चुका था।
जहां वो एयरपोर्ट, फ्लाइट्स, लग्जरी होटल्स इन सब की रील्स डालकर सबको यह जता रही थी कि कैसे वो एक ड्रीम लाइफ जी रही है। कभी ऋषिकेश में बंजी जंपिंग, कभी मेघालय के पहाड़ों में सफर तो कभी राजस्थान में फोटोशूट। नैनीताल, उज्जैन, हरियाणा जैसे मानो हर जगह उसकी कहानी का एक नया चैप्टर बन रहा हो। इनफैक्ट हाल ही में उसने यह तक पोस्ट किया था कि वह जल्दी देश छोड़कर थाईलैंड में शिफ्ट होने वाली है और इस लाइफ चेंज को वो अपने हेटर्स के मुंह पर एक तमाचे की तरह देखती है। इंस्टा पर 11,000 फॉलोवर्स और 1900 से भी ज्यादा पोस्ट, ऐसी पोस्ट, जहां वो अक्सर खुद को धोखा खा चुकी एक लड़की के रूप में दिखाती, जहां मर्द जात एक विल्लेन था, और वो एक विक्टिम। और असली कहानी यहां से ही शुरू होती है क्योंकि यह चमक यह ग्लैमर सिर्फ एक परत थी।

एक ऐसी कहानी के ऊपर जहां सच और दिखावा एक दूसरे में इतना घुल चुके थे कि फर्क करना मुश्किल हो गया था। दरअसल लोगों के लिए राखी की जिंदगी ऊपर ऊपर से बिल्कुल परफेक्ट थी। इतनी परफेक्ट कि कोई भी उसके असली फैमिली बैकग्राउंड का अंदाजा नहीं लगा सकता था। लेकिन राखी की जिंदगी असलियत में उतनी ही उलझी हुई थी। राखी की दो शादियां हुई थी और दोनों ही टूट चुकी थी। एक मेरठ में और दूसरी कहीं और लेकिन अंजाम दोनों का एक जैसा। तलाक राखी की सोशल मीडिया लाइफ को देखकर यह अंदाजा लगाना मुश्किल था कि असल में वह एक गरीब परिवार से आती थी। जहां उसका बड़ा भाई राजीव एक छोटा सा चाऊमीन का ठेला लगाता था।
उसका एक छोटा भाई विकास था जो कुछ खास नहीं करता था और पिता शेरदीन की मौत 4 साल पहले हो चुकी थी। राखी ने पिछले 7 सालों से अपने परिवार से कोई भी संबंध नहीं रखा था। या फिर यूं कहें कि राखी का परिवार भी उससे सारे रिलेशन तोड़ चुका था। और इसके पीछे की वजह आपको खुद ब खुद केस में आगे चलकर समझ आ जाएगी। कहते हैं कि कहानी में जो किरदार सबसे ज्यादा चमकदार होते हैं, कभी-कभी उनका सफर सबसे अंधेरे कोने में खत्म हो जाता है। 28 अप्रैल 2026 को बागपत से लगभग 800 कि.मी. दूर मिर्जापुर के नौगवा के जंगल में एक बोरे के अंदर अनजान लड़की की लाश मिलती है। जिसका किसी ने धारदार हथियार से मर्डर किया था।
शिनाख्त करने पर पता चला कि यह लाश बागपत की रहने वाली राखी कश्यप की थी। पुलिस ने जब पोस्टमार्टम करवाया तो पता चला कि राखी का पहले गला रेता गया और उसके बाद उसके सीने और पीठ पर चाकू से कई वार किए गए। आखिर राखी को इतनी भयानक मौत किसने और क्यों दी और वह भी उसके शहर से इतनी दूर। राखी के घर वालों को जब इसकी खबर मिली तो उनका रिएक्शन बिल्कुल अलग था। ना उनमें कोई खास गम था और ना ही कोई तकलीफ। इनफैक्ट उन्होंने राखी की बॉडी को लेने और उसका अंतिम संस्कार करने से भी मना कर दिया। यह एक बहुत बड़ी बात थी और ऐसा करने के पीछे की वजह भी राखी के ऐसे बैकग्राउंड से जुड़ती है जो कहीं ना कहीं उसकी हत्या का कारण बनी। यह केस सुलझाना इतना आसान नहीं था और उस वक्त तक पुलिस को भी अंदाजा नहीं था कि इस हत्या के तार राखी की लाश के मिलने से 10 दिन पहले यानी 18 अप्रैल 2026 को सहारनपुर के बड़गांव एरिया के पास नहर से मिली एक आदमी की लाश से जुड़े थे। वो बॉडी कपड़ों में लिपटी हुई थी।
हाथ पैर बंधे हुए थे और चेहरे पर किसी भारी चीज से वार किया गया था ताकि पहचान मुश्किल हो जाए। फॉरेंसिक टीम ने जब बॉडी को एग्जामिन किया तो पता चला कि उसे तीन गोलियां मारी गई थी। पुलिस ने पहचान करने की कोशिश की लेकिन जब कोई क्लेम करने नहीं आया और ना ही पुलिस उसकी शिनाख्त कर पाई तो पुलिस ने ही उस बॉडी का अंतिम संस्कार कर दिया और कपड़ों एंड बाकी एविडेंस को जांच के लिए भेज दिया। उस वक्त तक पुलिस को भी अंदाजा नहीं था कि यह एक ऐसा ट्विस्टेड केस बनने वाला है जहां कई किरदार धीरे-धीरे एक दूसरे से जुड़ते चले जाएंगे। यह वही केस है जहां लोगों ने इसे सिर्फ एक मर्डर नहीं माना बल्कि कई लोगों के लिए यह कर्मों का फल लगने लगा। क्या यह दो लाशें दो अलग कहानियां थी या फिर एक ही सच के दो टुकड़े। वेलकम टू द शो। माय नेम इज शाश्वत एंड यू आर वाचिंग द ट्विस्टेड केस ऑफ बुलेट गर्लफ्रेंड। राखी कश्यप का केस एक ब्लाइंड मर्डर केस लग रहा था। कोई क्लियर सस्पेक्ट नहीं, कोई डायरेक्ट लीड नहीं। सबसे बड़ा सवाल था
राखी को किसने मारा? इन्वेस्टिगेशन शुरू होते ही पुलिस ने टेक्निकल एविडेंस पर फोकस किया। आसपास के मोबाइल लोकेशन डाटा निकाले गए। कॉल रिकॉर्ड्स एनालाइज किए गए और सीसीटीवी फुटेज को स्कैन किया गया। सर्वििलेंस के थ्रू पुलिस धीरे-धीरे सस्पेक्ट्स की लिस्ट बनाने लगी। केस की सीरियसनेस को देखते हुए पुलिस की कई टीम्स पैरेलल में काम कर रही थी। हर एक छोटी डिटेल को जोड़ा जा रहा था। कौन कहां था, किस वक्त था, किससे बात हुई थी। साथ ही पुलिस यह भी समझने की कोशिश कर रही थी कि राखी मिर्जापुर तक कैसे पहुंची। उसे वहां कौन ले गया और इस मर्डर के पीछे का मास्टरमाइंड कौन है? राखी का परमानेंट एड्रेस, उसके कांटेक्ट्स, उसके रीसेंट मूवमेंट्स सब कुछ वेरीफाई किए जा रहे थे। धीरे-धीरे इन्वेस्टिगेशन एक डायरेक्शन लेने लगी और यहीं से एक नाम निकल कर सामने आया।
कपिल चौहान जिसे पुलिस ने सहारनपुर से अरेस्ट किया। कपिल चौहान की गिरफ्तारी के बाद जब पुलिस ने उससे पूछताछ शुरू की तो धीरे-धीरे इस केस की ऐसी परतें खुलनी शुरू हुई जो अभी तक नजर आ रही सच्चाई से बिल्कुल अलग थी। राखी डूडा यानी डिस्ट्रिक्ट अर्बन डेवलपमेंट एजेंसी जो एक गवर्नमेंट एंटिटी होती है उसमें एक संविदाकर्मी यानी कॉन्ट्रक्चुअल एंप्लई थी। लेकिन सरप्राइजिंगली सोशल मीडिया में जो लाइफस्टाइल वो फ्लेक्स कर रही थी। वो इस कॉन्ट्रैक्ट बेस्ड जॉब की इतनी थोड़ी सी सैलरी में कैसे पॉसिबल थी? दरअसल राखी बेहद शातिर और लालची किस्म की थी। वो पैसे वाले लोगों को टारगेट करती। उन्हें पहले अपने प्यार के जाल में फंसाती। उनके साथ रिलेशनशिप का ढोंग करती और फिर शुरू होता ब्लैकमेलिंग का खेल। ऐसे करके उसने कई लोगों से मोटी रकम वसूली थी। और कई और लोगों से इसके पर्सनल और पैसों को लेकर विवाद भी चल रहे थे। जिन्हें वो अपनी लोकल पॉलिटिकल कनेक्शंस की धमकी देकर दबा देती थी।
राखी के इसी चाल चलन की वजह से उसके परिवार ने उससे दूरी बना ली थी। कहने को तो वह गरीब थे लेकिन नियत और ईमान में बेईमानी नहीं थी। वहीं राखी को उसका लालच एक अंधेरे दलदल में धकेल रहा था। शायद यही वजह रही कि राखी की शादीशुदा जिंदगी की गाड़ी पटरी पर ना चल सकी। राखी की जब दूसरी शादी टूटी तो तलाक के बाद वह बागपत के खेकरा से अर्जुनपुरम कॉलोनी में शिफ्ट हो गई। लेकिन यहां शिफ्ट होने के पीछे भी एक वजह थी और वह वजह थी उसका एक शादीशुदा आदमी से चल रहा अफेयर। दरअसल राखी का अपने ही ऑफिस के एक डिपार्टमेंट में 2018 से काम कर रहे 37 साल के सिटी मिशन मैनेजर विक्रांत कुमार से अफेयर था
जो बीते 3 साल से चल रहा था। विक्रांत कुमार मूल रूप से यूपी के प्रयागराज का था और वह भी वहीं बागपत की अर्जुनपुरम कॉलोनी में रहता था। विक्रांत की वाइफ प्राची नोएडा में सिंचाई विभाग में नौकरी करती थी और वहीं बेटी के साथ नोएडा में ही रहती थी। राखी और विक्रांत के बीच चल रहे अफेयर से उसकी पत्नी प्राची अनजान थी। वहीं राखी और विक्रांत एक दूसरे से शादी करने का प्लान बना रहे थे। लेकिन विक्रांत राखी की असली फितरत से अनजान था। अब हुआ यूं कि विक्रांत ने मथुरा में एक प्लॉट खरीदा था।
जिसे राखी चाहती थी कि यह प्लॉट विक्रांत उसके नाम कर दे। पर इसी बात को लेकर दोनों के बीच झगड़े होने लगे थे। विक्रांत को अंदेशा नहीं था कि राखी की नियत उसके पैसों और जमीन पर किए गए इन्वेस्टमेंट में थी। जिसे हड़पने के लिए उसने अफेयर का यह लंबा खेल खेला था। और इस खेल को अंजाम तक पहुंचाने के लिए इस कहानी में एंट्री होती है एक नए किरदार की। सुधारस चौहान। बागपत का रहने वाला सुधारस भाजपा युवा मोर्चा का नेता था और उसके राखी के साथ संबंध थे। राखी ने सुधारस से कहा कि अगर हम दोनों मिलकर विक्रांत को रास्ते से हटा दें तो उसके बाद हम दोनों साथ में रह पाएंगे और वह प्लॉट और विक्रांत के पैसों से ऐश कर पाएंगे।
अब राखी और विक्रांत के बीच संबंध बहुत बिगड़ते जा रहे थे। वो उसे लगातार वार्निंग दे रही थी। उसकी जिंदगी बर्बाद करने की धमकी दे रही थी। इनफैक्ट दिसंबर 2025 में तो राखी ने गुस्से में आकर विक्रांत की कार में आग तक लगा दी। विक्रांत बुरी तरह फंस चुका था और इसलिए उसे मजबूरी में अपनी वाइफ को पूरा सच बताना पड़ा जो अब तक इस पूरे वाक्य से अनजान थी। उधर राखी के दिलो दिमाग में बसा लालच उसे बेसब्र कर रहा था और अब वह सब कुछ हड़पने के खातिर विक्रांत के मर्डर के दिन को चुनती है और अब इस कहानी में शामिल होता है एक और किरदार कपिल चौहान जो सुधारस चौहान का दोस्त होता है। सुधारस अपने दोस्त कपिल को पैसों का लालच देकर विक्रांत के मर्डर प्लान में शामिल कर लेता है। 15 अप्रैल की शाम राखी इस मामले को सुलझाने और सब कुछ पहले जैसा ठीक करने का झूठा वादा देकर विक्रांत को बहाने से एक फ्लैट में बुलाती है। विक्रांत जब शाम को उस फ्लैट में पहुंचता है तो वहां पर सुधारस और कपिल पहले से ही मौजूद होते हैं।
फिर राखी ने दोबारा वही मांगे विक्रांत के सामने रखी लेकिन विक्रांत ने उसके नाम जमीन करने से मना कर दिया। राखी को लग गया कि इस आखिरी वार्निंग के बाद सिर्फ एक ही तरीका बाकी है और उसी प्लान के तहत उसने विक्रांत के सीने पर अपनी लाइसेंस गन से तीन बार गोली मारकर हत्या कर दी। गोली मारने के बाद तीनों ने मिलकर पहले तो सर पर भारी चीज से चेहरे को इस कदर कुचला ताकि कोई भी शिनाख्त ना कर पाए। फिर पर्स, आईडी कार्ड, फोन सब कुछ निकाल दिया। इसके बाद देर रात तीनों विक्रांत की लाश को लेकर वहां से लगभग 130 कि.मी. दूर सहारनपुर ले गए और वहां एक नहर में हाथ पैर बांधकर फेंक दिया। असल में केस की शुरुआत में जो हमने 18 अप्रैल को मिली एक लावारिस लाश की बात की थी, वो विक्रांत की थी, जो पुलिस को सहारनपुर की नहर में मिली थी। अब सवाल यह था कि आखिर जब राखी ने अपने प्लान को अंजाम दे दिया था तो फिर उसका कत्ल किसने और क्यों किया?
16 अप्रैल 2026 जब विक्रांत अपने ऑफिस नहीं पहुंचा तो साथ में काम करने वाले लोगों ने उसे कांटेक्ट करने की कोशिश की। लेकिन उसका फोन स्विच्ड ऑफ आ रहा था। इसके बाद उसके कलीग ने उसकी वाइफ को इनफॉर्म किया। विक्रांत के अचानक गायब होने से उसकी वाइफ प्राची परेशान हो गई। उसने रिश्तेदारों, जान पहचान के लोगों के यहां उसे ढूंढने की कोशिश की। लेकिन किसी को भी विक्रांत की कोई खबर नहीं थी। आखिरकार हर पॉसिबल जगह ढूंढने के बाद प्राची ने 22 अप्रैल को विक्रांत की मिसिंग रिपोर्ट दर्ज कराई। रिपोर्ट में उसने यह भी बताया कि विक्रांत का राखी कश्यप नाम की एक महिला से कांटेक्ट था
जो किस कदर विक्रांत पर प्रेशर बना रही थी और अपनी डिमांड्स पूरी करवाने के लिए उसे धमका रही थी। इस इनपुट के बाद पुलिस इन्वेस्टिगेशन का फोकस सीधा राखी पर शिफ्ट हो गया। प्राची की तरफ से दी गई इनफेशन के बेसिस पर पुलिस ने विक्रांत के मोबाइल की कॉल डिटेल्स निकाली। रिकॉर्ड्स में यह सामने आया कि विक्रांत की सबसे ज्यादा बात राखी कश्यप से ही होती थी। इसके बाद बागपत पुलिस ने राखी को क्वेश्चनिंग के लिए बुलाया। उससे लगातार सवाल किए गए लेकिन हर बार वो सीधा जवाब देने की बजाय बात को घुमा देती थी। पुलिस को राखी पर शक तो हो रहा था। लेकिन उस वक्त उनके हाथ कोई ठोस सबूत नहीं लगा था।
इसलिए उन्होंने पूछताछ के बाद उसे जाने दिया। जब सुधारस और कपिल को पता चला कि पुलिस ने राखी को विक्रांत के सिलसिले में पूछताछ के लिए बुलाया है तो उनके अंदर पकड़े जाने का डर सताने लगा। उन्हें लगने लगा कि अगर पुलिस ने राखी से सच उगलवा लिया तो उसके साथ-साथ वह भी पकड़े जाएंगे। बस यहीं से सुधारस ने कपिल के साथ मिलकर राखी को ही जान से मारने का प्लान बनाया। कपिल ने राखी को कॉल कर पार्टी के बहाने एक फार्म हाउस पर बुलाया। जहां सुधारस पहले से ही मौजूद था। राखी दोनों की इस चाल से अनजान विक्रांत को रास्ते से हटाने का जश्न मनाने वहां पहुंच गई। सबने देर तक शराब पी जिसमें सुधारोस और कपिल सिर्फ साथ में पीने का ढोंग करते रहे ताकि उन्हें ज्यादा नशा ना हो जाए। जब उन्होंने राखी को नशे में पूरी तरह धुत पाया तो मौका देखकर पहले चाकू से उसका गला रेता और फिर पेट और पीठ पर कई वार कर उसकी हत्या कर दी।
उसके बाद दोनों ने उसकी लाश को एक बोरे में भरा और वहां से लगभग 800 कि.मी. दूर मिर्जापुर के नौगावा के जंगलों में फेंक आए। लेकिन इस केस में पुलिस इन्वेस्टिगेशन में हुई चूक के बावजूद इनका बचना नामुमकिन था और यह पूरा खेल दुनिया के सामने आना था। पुलिस विक्रांत की गुमशुदगी की जांच कर रही थी और इस सिलसिले में राखी से पूछताछ कर रही थी। लेकिन जब राखी ही गायब हो गई और फिर उसकी लाश शहर से इतनी दूर पुलिस को मिली तो पुलिस को समझ आ गया कि मामला कुछ और ही है और आशंका जताई कि कहीं विक्रांत का भी मर्डर ना हो गया हो। फिर पुलिस ने वो किया जो अगर वह पहले कर लेती तो ना सिर्फ राखी जिंदा बच जाती बल्कि विक्रांत के कत्ल के जुर्म में तीनों अरेस्ट हो जाते और विक्रांत को अंतिम विदाई उसकी पत्नी और बेटी दे पाते।
पुलिस ने जब विक्रांत की लास्ट मोबाइल लोकेशन चेक की तो पाया कि 15 अप्रैल की रात को राखी और विक्रांत की मोबाइल लोकेशन सेम थी। उसके बाद उसी रात राखी की मोबाइल टावर लोकेशन का मूवमेंट सहारनपुर में दिखा रहा था। इसलिए पुलिस ने हाल ही में सहारनपुर और आसपास के इलाकों में मिली लावारिस लाशों का रिकॉर्ड खंगालना शुरू किया। जिसमें उन्हें हाल में हुआ एक केस मिला जिसमें लावारिस लाश की पहचान नहीं हो पाई थी और उसका अंतिम संस्कार कर दिया गया था। पुलिस ने उस केस में मृतक के कपड़े एविडेंस के रूप में रख लिए थे। पर जब उन कपड़ों को पुलिस ने विक्रांत की वाइफ प्राची को दिखाया तो उन्हें देखकर प्राची की आंखों से निकले आंसुओं ने यह कंफर्म कर दिया कि वो लाश विक्रांत की थी। फिर पुलिस ने राखी के कॉल रिकॉर्ड्स की जांच की जिसमें से दो नंबर से उसकी सबसे ज्यादा बात हुई थी
और आखिरी बार जिसकी कॉल उसके पास आई थी वो था कपिल चौहान और राखी का मोबाइल बंद होने से पहले राखी की लास्ट लोकेशन और उसी वक्त कपिल की मोबाइल लोकेशन एक ही जगह की थी इसलिए पुलिस ने सबसे पहले कपिल को अरेस्ट किया और फिर उसके कबूलनामे के बाद 1 मई को प्राइम एक्यूज़्ड सुधार चौहान को बागपत से गिरफ्तार कर लिया गया| जुर्म के रास्ते पर कोई वफादार नहीं होता| ऊपर से डर और खुदग्रजी इंसान को हमेशा पहले धोखा देने पर मजबूर करती है। सुधारस और कपिल ने राखी के साथ मिलकर विक्रांत को मारा। लेकिन जब उन्हें अपने पकड़े जाने का डर सताया तो उन्होंने एक सेकंड नहीं सोचा राखी का गला रेतने में।
अपराध के रास्ते में वैसे भी कोई दोस्त नहीं होता। सिर्फ एक फितरत होती है जिसमें साथ वाला अपना फायदा कमाने और अपना नुकसान बचाने में लगा होता है। राखी की लाइफ एक परफेक्ट एग्जांपल है कि जो सोशल मीडिया में चमकता है जरूरी नहीं कि वो असल जिंदगी में सोना हो। एक हंबल बैकग्राउंड से आने के बावजूद लग्जरी दिखाना उसकी इनसिक्योरिटी को छुपाने का एक तरीका था। और इसी इनसिक्योरिटी से पनपा लालच उसे जुर्म के दलदल में ले गया। कहने को तो राखी के सोशल मीडिया में हजारों फॉलोवर्स थे।
लेकिन जब उसकी लाश मिली तो उसकी रियल लाइफ में उसका अपना परिवार भी उसे लेने नहीं आया। इस केस को अगर साइकोलॉजिकल एंगल से देखा जाए तो राखी कश्यप का बिहेवियर काफी हद तक डार्क ट्रायड के कांसेप्ट में फिट बैठता है। डार्क ट्रायड तीन नेगेटिव पर्सनालिटी ट्रेड्स का कॉम्बिनेशन होता है। नार्सिसिज्म, मैकियावेलेनिज्म और साइकोपैथी। नार्सिसिज्म यानी खुद से हद से ज्यादा प्यार जो राखी के सोशल मीडिया प्रोफाइल से साफ बयां होता है। जहां वो अटेंशन पाने के लिए एक तरफ फ्लैशी लाइफस्टाइल का दिखावा करती है। वहीं दूसरी तरफ खुद को ही विक्टिम पोट्रे करती है। मैक्यावेलिनिज्म यानी अपने फायदे के लिए दूसरों का इस्तेमाल करना और तीसरा साइकोपैथी। विक्रांत के साथ 3 साल तक रिलेशनशिप में होने के बावजूद जिस तरह उसका मर्डर किया गया। उसकी बॉडी को डिसफिगर किया गया।
वो इस बात की तरफ इशारा करता है कि उसके अंदर इमोशंस और गिल्ट का एलिमेंट ऑलमोस्ट खत्म हो चुका था। दूसरी तरफ विक्रांत जो एक पढ़ा लिखा, सेटर्ड और शादीशुदा आदमी था जो धीरे-धीरे एक ऐसे रिश्ते में फंस गया जहां से निकलना उसके लिए मुश्किल होता गया। इसे साइकोलॉजी में संग कॉस्ट फैलेसी कहते हैं। मतलब जब एक इंसान किसी रिलेशन या सिचुएशन में इतना टाइम, इमोशन और पैसा इन्वेस्ट कर चुका होता है तो उसके लिए वहां से निकलना बहुत मुश्किल हो जाता है।
भले ही वो सिचुएशन उसके लिए जानलेवा क्यों ना बन रही हो। यह केस सिखाता है कि गुनाह की उम्र चाहे कितनी लंबी क्यों ना लगे। आखिर में उसका हिसाब यही चुकाना पड़ता है।
