कहा जाता है कि उस दौर के कैमरे भी मधुबाला की खूबसूरती को पूरी तरह कैद नहीं कर पाते थे। उनकी तस्वीरें देखकर लोग आज भी उनकी खूबसूरती की तारीफ करते हैं, लेकिन उनके चाहने वाले मानते थे कि कैमरे उनकी खूबसूरती का महज कुछ हिस्सा ही दिखा पाते थे। जितनी अद्भुत उनकी खूबसूरती थी, उतनी ही दर्दनाक थी उनकी जिंदगी।

एक तरफ उनके नाम के साथ शोहरत, दौलत और कामयाबी जुड़ती चली गई, तो दूसरी तरफ उनकी निजी जिंदगी में दर्द लगातार बढ़ता गया। महज 36 साल की उम्र में दुनिया को अलविदा कह देने वाली यह अभिनेत्री भारतीय सिनेमा के इतिहास में हमेशा के लिए अमर हो गईं।
आज हम बात कर रहे हैं “वीनस ऑफ इंडियन स्क्रीन” यानी हिंदी सिनेमा की खूबसूरती की देवी मधुबाला की।
मधुबाला का बचपन का नाम मुमताज जहां देहलवी था। उनका जन्म 14 फरवरी 1933 को दिल्ली में हुआ था। उनके पिता का नाम अताउल्लाह खान और माता का नाम आयशा बेगम था। मुमताज अपने माता-पिता की 11 संतानों में पांचवें नंबर की संतान थीं।
मुमताज का बचपन बेहद मुश्किल परिस्थितियों में बीता। परिवार आर्थिक तंगी से जूझ रहा था और हालात इतने खराब थे कि उनके कई भाई-बहनों की बीमारी, इलाज की कमी और अभावों के कारण मौत हो गई। परिवार के लिए एक वक्त ऐसा भी आया जब खाने-पीने तक की परेशानी खड़ी हो गई।
मुमताज के पिता अताउल्लाह खान एक तंबाकू बनाने वाली कंपनी में काम करते थे, लेकिन किसी कारणवश उनकी नौकरी चली गई। परिवार की आर्थिक स्थिति लगातार बिगड़ती चली गई। कुछ रिपोर्ट्स में यह भी बताया जाता है कि एक बार उनके घर में आग लगने के कारण परिवार का काफी सामान जल गया था और उनके सामने खाने तथा पहनने तक का संकट खड़ा हो गया था।
लेकिन इसी मुश्किल दौर में मुमताज के अंदर छिपी एक प्रतिभा परिवार के लिए उम्मीद की किरण बनकर सामने आई।
मुमताज बचपन से ही बेहद खूबसूरत थीं। उन्हें गाना गाने, डांस करने और अभिनय करने का भी शौक था। एक दिन उन्हें एक रेडियो स्टेशन के बच्चों के कार्यक्रम में गाने का मौका मिला। संयोग से उस कार्यक्रम में बॉम्बे टॉकीज के मैनेजर राज बहादुर भी मौजूद थे।
मुमताज की आवाज और प्रतिभा से राज बहादुर इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने उनके पिता अताउल्लाह खान से कहा कि उनकी बेटी को फिल्मों में काम करने का मौका दिया जा सकता है।
यह बात अताउल्लाह खान के लिए किसी उम्मीद से कम नहीं थी। परिवार की आर्थिक स्थिति खराब थी और उन्हें अपनी बेटी की प्रतिभा में भविष्य दिखाई देने लगा था। इसके बाद अताउल्लाह खान अपने परिवार के साथ मुंबई चले आए।
मुंबई पहुंचने के बाद उन्होंने बॉम्बे टॉकीज के चक्कर लगाने शुरू कर दिए। उनका उद्देश्य सिर्फ इतना था कि उनकी बेटी मुमताज को फिल्मों में काम करने का वह मौका मिल जाए, जिसका वादा उनसे किया गया था।
एक दिन अताउल्लाह खान अपनी बेटी के साथ बॉम्बे टॉकीज के बाहर बैठे थे। तभी राज बहादुर की नजर उन दोनों पर पड़ी। उन्होंने मुमताज को पहचान लिया और उन्हें बॉम्बे टॉकीज की मालकिन तथा प्रसिद्ध अभिनेत्री देविका रानी से मिलवाया।
कहा जाता है कि मुमताज ने देविका रानी के सामने अपनी प्रतिभा का ऐसा प्रदर्शन किया कि वह भी उनसे प्रभावित हुए बिना नहीं रह सकीं।
उसी दौरान बॉम्बे टॉकीज की फिल्म “बसंत” बन रही थी, जिसके निर्देशक अमिया चक्रवर्ती थे। फिल्म में एक बाल कलाकार की जरूरत थी। जब मुमताज को निर्देशक से मिलवाया गया तो उनकी खूबसूरती और अभिनय क्षमता ने उन्हें भी प्रभावित कर दिया।
मुमताज को फिल्म “बसंत” में बाल कलाकार के तौर पर काम करने का मौका मिला। फिल्म रिलीज हुई तो लोगों ने छोटी सी मुमताज के अभिनय की खूब तारीफ की।
यही वह दौर था जब फिल्म इंडस्ट्री को इस बच्ची के अंदर छिपी उस प्रतिभा का अंदाजा होने लगा था, जो आगे चलकर हिंदी सिनेमा की सबसे बड़ी अभिनेत्रियों में शामिल होने वाली थी।
इसके बाद मुंबई के मशहूर रंजीत स्टूडियो ने मुमताज को कई फिल्मों के लिए साइन किया। हालांकि इस दौरान उनके करियर के फैसले काफी हद तक उनके पिता ही लेते थे। परिवार की आर्थिक जरूरतों के कारण कई बार ऐसी फिल्मों में भी काम स्वीकार किया गया, जिनका प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा।
लेकिन मुमताज ने हार नहीं मानी।
वक्त के साथ उनकी खूबसूरती और अभिनय दोनों निखरते गए। जब वह महज 16 साल की थीं, तब उन्हें फिल्म “नीलकमल” में मुख्य अभिनेत्री की भूमिका मिली। इस फिल्म में उनके साथ उस दौर के मशहूर अभिनेता राज कपूर थे।
यहीं से मुमताज के करियर ने एक नया मोड़ लेना शुरू किया। अब वह सिर्फ एक बाल कलाकार नहीं रह गई थीं, बल्कि हिंदी सिनेमा की एक उभरती हुई अभिनेत्री बन चुकी थीं।
आने वाले वर्षों में उन्होंने एक के बाद एक कई फिल्मों में काम किया और धीरे-धीरे उनका नाम दर्शकों के दिलों में बसता चला गया। उनकी खूबसूरती, मासूमियत, मुस्कान और अभिनय ने उन्हें बाकी अभिनेत्रियों से अलग पहचान दी।
लेकिन जिस जिंदगी को बाहर से देखने पर लोग सपनों जैसी जिंदगी समझते थे, उसके पीछे एक गहरा दर्द छिपा हुआ था।
मधुबाला की जिंदगी में प्रेम भी आया, रिश्ते भी बने और कई विवाद भी हुए। उनकी निजी जिंदगी में कई ऐसे मोड़ आए, जिन्होंने उन्हें अंदर से तोड़ दिया। दूसरी तरफ उनकी सेहत भी लगातार बिगड़ती चली गई।
कम उम्र में ही उन्हें दिल से जुड़ी गंभीर बीमारी का पता चला। इसके बावजूद उन्होंने काम करना जारी रखा। उनके चेहरे की मुस्कान देखकर शायद ही कोई अंदाजा लगा सकता था कि उस मुस्कान के पीछे कितना दर्द छिपा हुआ है।
उनकी जिंदगी की सबसे यादगार फिल्मों में “मुगल-ए-आजम” का नाम आज भी सबसे ऊपर लिया जाता है। अनारकली के किरदार में मधुबाला ने ऐसा अभिनय किया कि वह किरदार भारतीय सिनेमा के इतिहास का हिस्सा बन गया।
फिल्म की शूटिंग के दौरान भी उनकी तबीयत ठीक नहीं रहती थी, लेकिन उन्होंने अपने अभिनय में कोई कमी नहीं आने दी।
मधुबाला की खूबसूरती और अभिनय आज भी लोगों को आकर्षित करता है। उनकी तस्वीरें देखकर आज की पीढ़ी भी यही सवाल करती है कि आखिर इतनी खूबसूरत अभिनेत्री इतनी कम उम्र में दुनिया से कैसे चली गई?
मधुबाला ने सिर्फ 36 साल की उम्र में इस दुनिया को अलविदा कह दिया। 23 फरवरी 1969 को उनका निधन हो गया।
उनकी जिंदगी हमें यह बताती है कि पर्दे पर मुस्कुराता हुआ चेहरा हमेशा खुश हो, यह जरूरी नहीं। जिस अभिनेत्री को दुनिया ने खूबसूरती की देवी कहा, उसकी अपनी जिंदगी दर्द, संघर्ष और अधूरी खुशियों से भरी रही।
मधुबाला आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी मुस्कान, उनकी खूबसूरती और उनका अभिनय आज भी हिंदी सिनेमा के इतिहास में जिंदा है।
