Saturday, September 12, 2026
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पाकिस्तान के लिए जासूसी के आरोप में गिरफ्तार हिसार की यूट्यूबर ज्योति मल्होत्रा ने हाईकोर्ट में लगाई जमानत याचिका

हिसार की यूट्यूबर ज्योति मल्होत्रा, जिन्हें पाकिस्तान के लिए जासूसी के आरोप में गिरफ्तार किया गया था, ने अब पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट में जमानत के लिए याचिका दायर की है। ज्योति के वकील कुमार मुकेश ने बताया कि इस याचिका पर जल्द सुनवाई हो सकती है।

इससे पहले 23 अक्टूबर को हिसार सेशन कोर्ट ने ज्योति की जमानत याचिका खारिज कर दी थी। अदालत ने टिप्पणी की थी कि आरोपी की रिहाई से जांच में बाधा आ सकती है और यह मामला राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा है।

क्या है मामला?

हिसार पुलिस ने 34 वर्षीय ज्योति मल्होत्रा को 16 मई 2025 को आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम (Official Secrets Act) और भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत गिरफ्तार किया था।
ज्योति अपने यूट्यूब चैनल ‘ट्रैवल विद जो’ के लिए जानी जाती हैं। गिरफ्तारी के बाद से वह हिसार सेंट्रल जेल में बंद हैं।

सेशन कोर्ट ने क्यों खारिज की थी जमानत

हिसार के एडिशनल सेशन जज डॉ. परमिंदर कौर ने आदेश में कहा था कि रिकॉर्ड में प्रथम दृष्टया गोपनीयता अधिनियम और BNS के तहत गंभीर अपराध सामने आए हैं।
अदालत के अनुसार,

“अभियुक्त के इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस से मिले फोरेंसिक साक्ष्य, मल्टी एजेंसी सेंटर (SMAC) की रिपोर्ट और विदेशी अधिकारी के साथ संपर्कों से यह आशंका बनती है कि जमानत मिलने पर जांच प्रभावित हो सकती है।”

कोर्ट ने यह भी कहा था कि आरोपी डिजिटल सबूतों से छेड़छाड़ कर सकती है और इससे राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा हो सकता है। इसलिए सार्वजनिक हित को ध्यान में रखते हुए जमानत याचिका खारिज की गई थी।

वकील ने बताए जमानत के तीन आधार

पाकिस्तान के लिए जासूसी के आरोप में गिरफ्तार हिसार की यूट्यूबर ज्योति मल्होत्रा ने हाईकोर्ट में लगाई जमानत याचिका

ज्योति की ओर से दायर नई याचिका में वकील कुमार मुकेश ने तीन प्रमुख आधार रखे हैं—

  1. कोई गोपनीय दस्तावेज साझा नहीं किया गया:
    वकील का कहना है कि सीक्रेट एक्ट की धारा 3 के तहत तब कार्रवाई होती है जब कोई व्यक्ति डिफेंस से जुड़ी योजनाएं, नक्शे या मॉडल साझा करे। पुलिस चार्जशीट में ऐसा कोई साक्ष्य नहीं दे पाई है।
  2. पुलिस ने सीक्रेट एक्ट से जुड़ा कुछ भी रिकवर नहीं किया:
    न तो कोई सैन्य दस्तावेज और न ही ऐसा कोई डेटा मिला है जिससे साबित हो सके कि ज्योति ने सरकार की गोपनीय जानकारी साझा की। वकील का कहना है कि अगर कोई उल्लंघन हुआ भी हो, तो उसमें अधिकतम सजा तीन वर्ष की ही है।
  3. पाक एजेंट से संपर्क का ठोस सबूत नहीं:
    पुलिस ने दावा किया था कि ज्योति के मोबाइल में पाकिस्तानी एजेंट शाकिर का नंबर मिला है। लेकिन पूरी चार्जशीट में न कोई चैट रिकॉर्ड मिला और न ही कॉल लॉग।
    वकील के अनुसार, ज्योति का ‘दानिश’ नामक व्यक्ति से संपर्क सिर्फ वीजा प्रक्रिया के लिए था।

चार्जशीट पर विवाद

ज्योति के वकील ने बताया कि पुलिस ने कोर्ट में अधूरी चार्जशीट जमा की थी।
पुलिस ने कहा था कि चार्जशीट में कुछ संवेदनशील जानकारियां हैं जिन्हें सार्वजनिक नहीं किया जा सकता। अदालत ने यह तर्क स्वीकार करते हुए चार्जशीट के कुछ हिस्सों को गोपनीय रखने का आदेश दिया था।
इसके बाद वकील को चार्जशीट की एक सीडी कॉपी दी गई।

राष्ट्रीय सुरक्षा बनाम व्यक्तिगत स्वतंत्रता

यह मामला राष्ट्रीय सुरक्षा और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के बीच संतुलन का एक अहम उदाहरण बन गया है।
सेशन कोर्ट ने साफ कहा था कि अगर आरोपी को जमानत देने से सार्वजनिक व्यवस्था या न्यायिक प्रक्रिया पर असर पड़ने का खतरा हो, तो उसे राहत नहीं दी जानी चाहिए।
अब देखना यह होगा कि हाईकोर्ट इस जमानत याचिका पर क्या रुख अपनाता है।

Sonu Baali
Sonu Baalihttp://khasharyananews.com
संस्थापक, खास हरियाणा न्यूज़- हरियाणा की ज़मीन से जुड़ा एक निष्पक्ष और ज़मीनी पत्रकार। पिछले 6+ वर्षों से जनता की आवाज़ को बिना किसी एजेंडे के सामने लाने का प्रयास कर रहे हैं। देसी अंदाज़ और सच्ची पत्रकारिता में विश्वास रखते हैं। 🌐 khasharyana.com
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