गाजियाबाद से सामने आया एक मामला रिश्तों, विश्वास और पारिवारिक मूल्यों पर गंभीर सवाल खड़े करता है। जिस पिता ने अपने बेटे के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए करोड़ों रुपये की संपत्ति उसके नाम कर दी, उसी बेटे ने कथित रूप से अपने पिता की जान ले ली। यह घटना न केवल एक परिवार की त्रासदी है, बल्कि यह भी दिखाती है कि संपत्ति और गलत संगति किस तरह रिश्तों को तबाह कर सकती है।
मृतक हरि ओम चौधरी गाजियाबाद के बुढ़ाना गांव के रहने वाले थे। वे इलाके के एक सम्मानित और संपन्न व्यक्ति माने जाते थे। उनके पास लगभग 75 बीघा कृषि भूमि थी और दिल्ली-मेरठ रोड पर उनकी एक मार्केट भी थी, जहां कई दुकानें किराए पर चल रही थीं। इन दुकानों से उन्हें हर महीने लाखों रुपये की आय होती थी।
परिवार में उनकी पत्नी अनीता चौधरी, बड़ा बेटा निखिल और छोटा बेटा निशु था। परिवार आर्थिक रूप से मजबूत था और किसी प्रकार की कमी नहीं थी। बताया जाता है कि बड़ा बेटा निखिल पढ़ाई में ज्यादा रुचि नहीं रखता था। उसने 12वीं तक पढ़ाई करने के बाद पिता से कहा कि वह आगे पढ़ाई नहीं करना चाहता और अपना व्यवसाय करना चाहता है।
हरि ओम चौधरी अपने दोनों बेटों से बेहद प्यार करते थे। उन्हें आशंका थी कि भविष्य में संपत्ति को लेकर कोई विवाद न हो, इसलिए उन्होंने अपने जीवनकाल में ही निखिल के नाम करीब 25 बीघा जमीन और मार्केट की कुछ दुकानें कर दी थीं। दूसरी ओर छोटा बेटा निशु पढ़ाई में अच्छा था और शांत स्वभाव का माना जाता था।

15 जुलाई 2026 की रात यह परिवार एक ऐसी घटना का शिकार हुआ जिसने सब कुछ बदल दिया। रात करीब 10 बजे अनीता चौधरी ने अपने बेटे निखिल को फोन कर पूछा कि वह घर कब लौटेगा। बताया जाता है कि निखिल ने जवाब दिया कि वह छोटा बच्चा नहीं है और जब उसका मन होगा तब घर आएगा।
रात करीब 12 बजे निखिल घर पहुंचा। दरवाजे की घंटी बजने पर उसकी मां ने दरवाजा खोला। उसी दौरान हरि ओम चौधरी भी जाग गए। परिवार के अनुसार निखिल नशे की हालत में था और उसकी चाल तथा बातचीत दोनों लड़खड़ा रही थीं।
पिता ने बेटे से देर रात घर आने और नशे की हालत में रहने को लेकर नाराजगी जताई। इसी बात पर दोनों के बीच कहासुनी शुरू हो गई। पहले मामूली बहस हुई, लेकिन देखते ही देखते माहौल बेहद तनावपूर्ण हो गया।
आरोप है कि गुस्से में निखिल ने अपनी रिवॉल्वर निकाली और अपने पिता पर कई गोलियां चला दीं। गोलियां लगने के बाद हरि ओम चौधरी मौके पर ही गंभीर रूप से घायल होकर गिर पड़े। घर में अचानक गोलियों की आवाज गूंज उठी और पूरे परिवार में अफरा-तफरी मच गई।
पास के कमरे में सो रहा छोटा बेटा निशु भी आवाज सुनकर बाहर आया। उसने देखा कि उसके पिता घायल पड़े हैं और मां उन्हें बचाने की कोशिश कर रही हैं। बताया जाता है कि निखिल पहले भी आक्रामक व्यवहार कर चुका था, इसलिए निशु भयभीत हो गया। घटना के बाद आरोपी घर से फरार हो गया।
इसके बाद अनीता और निशु ने घायल हरि ओम चौधरी को अस्पताल पहुंचाया, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। जिस पिता ने अपने बेटे को सब कुछ देने की कोशिश की थी, उसी बेटे पर उनकी हत्या का आरोप लग गया।
पुलिस को घटना की सूचना दी गई और जांच शुरू की गई। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि परिवार में पहले भी तनाव की स्थिति बन चुकी थी। कुछ रिपोर्टों के अनुसार आरोपी निखिल का व्यवहार पहले भी आक्रामक रहा था। पुलिस ने मामला दर्ज कर आरोपी की तलाश शुरू की और बाद में उसे गिरफ्तार कर लिया।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार पूछताछ के दौरान आरोपी ने घटना से जुड़े कई महत्वपूर्ण तथ्यों की जानकारी दी। मामले की विस्तृत जांच जारी है और पुलिस सभी पहलुओं की जांच कर रही है।
यह घटना समाज के लिए भी एक चेतावनी है। विशेषज्ञों का मानना है कि पारिवारिक संवाद की कमी, नशे की लत, गुस्से पर नियंत्रण न होना और संपत्ति को लेकर बढ़ती संवेदनशीलता कई बार गंभीर अपराधों का कारण बन जाती है। परिवारों में समय रहते समस्याओं का समाधान और कानूनी कदम उठाना भविष्य में बड़ी घटनाओं को रोक सकता है।
हरि ओम चौधरी का मामला यह सवाल छोड़ जाता है कि आखिर एक पिता का अपने बेटे पर अटूट विश्वास कैसे इतनी दर्दनाक त्रासदी में बदल गया। यह घटना केवल एक आपराधिक मामला नहीं, बल्कि टूटते पारिवारिक रिश्तों की भी एक दुखद कहानी है।
