Tuesday, July 28, 2026
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आगरा में पति की लाश 45 दिन तक बाथरूम के नीचे दफन! पत्नी रूबी शर्मा पर हत्या का आरोप

आगरा के सिकंदरा इलाके में सुरेंद्र शर्मा की संदिग्ध मौत और बाथरूम के नीचे मिले कंकाल ने सभी को चौंका दिया। पत्नी रूबी शर्मा पर हत्या कर शव दफनाने का आरोप है। पुलिस हत्या, आत्महत्या और अन्य सभी एंगल से जांच कर रही है।

क्या आप उस बाथरूम में रोज नहा सकते हैं जिसके ठीक नीचे आपके पति की लाश दफन हो? रूबी शर्मा नहाती थी। पूरे 45 दिनों तक। दो बेटियों का बाप 16 साल की शादी और फिर एक ऐसी पत्नी जो हर रोज उसी फर्श पर खड़े होकर नहाती जिसके नीचे उसने अपने पति को हमेशा हमेशा के लिए दफन कर दिया था। इस खबर ने हिंदुस्तान को अंदर तक डरा दिया है। चेहरे याद आ रहे हैं। कभी मुस्कान का, कभी सोनम का, कभी सिया। और यह सवाल उठ रहा है कि क्या इस देश में अब मर्द सुरक्षित नहीं है? क्या शादी सात जन्मों का नहीं जिंदगी का खतरा बन गया है? क्योंकि 17 मई की रात इस औरत ने बड़े प्यार से अपने पति के लिए खीर बनाई। वो खीर जिसको लेकर पुलिस कहती है कि उसमें चीनी कम थी। नींद की गोलियां ज्यादा थी। सुबह तक पति की सांसे थम चुकी थी और उसके बाद इस औरत ने फावड़ा उठाया। बाथरूम का फर्श तोड़ा, गड्ढा खोदा और अपने पति को नीचे दफनाकर मिट्टी डाल दी। मिस्त्री बुलवाया, टाइल्स लगवाई और थारे जाकर रोने लगी कि मेरा पति लापता है। प्लीज खोज दो। मेरे बच्चों को क्या होगा? शातिर ऐसी कि अगले 45 दिनों तक पति के साथ वो खुशती रही। जबकि वो जानती थी कि उसके पति गुम नहीं हुए हैं। उसी घर मिल उसके बाथरूम के नीचे उसी के द्वारा दफन किए गए हैं। हिंदुस्तान डर रहा है क्योंकि मुस्कान का नीला ड्रम वो भूल नहीं पा रहा। और जिस दिन यह घटना एक्सपोज होती है उसी दिन सोनम को सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिलती है। सिया की मिडिल फिंगर पर पूरे देश से गुस्सा दिखता है और अब आगरा की ये कहानी लोगों को डरा रही है कि रिश्तों को हुआ क्या है?

उससे ज्यादा डरा रहा है वो तरीका। क्योंकि जब पूछा गया कि लाश छिपाने का तरीका सीखा कहां से? तो कहा अजय देवगन की फिल्म दें की थी। और उस खौफनाक अंदाज को इसने जिंदगी में उतार कर रख दिया। सवाल क्यों? किस लिए? और इन सारे सवालों को जानने के लिए आपको चलना होगा 17 मई की उस रात को आगरा के उस घर में जब ये शातिर औरत खीर बना रही थी। अपने पति को आखिरी बार खिलाने के लिए। नमस्कार, मैं हूं शुभांकर मिश्रा और हिंदुस्तान में जो कुछ हो रहा है इन दिनों वो डराने वाला है। हर रोज एक ऐसी खबर जो आपको अंदर तक हिला देती है। शादी जैसे पवित्र रिश्ते से विश्वास उठा देती है। और आज की कहानी आगरा की है। आगरा जहां के सिकंदरा इलाके में एक आम सा घर जिसमें पांच लोगों का परिवार रहता था। 40 साल की सुरेंद्र शर्मा, पत्नी रूबी, दो बेटी और बूढ़ी मां। शादी को 16 साल हो चुके थे। लेकिन 17 मई की उस रात इस घर में सिर्फ दो लोग थे सुरेंद्र और रूबी और यहीं इस साजिश की पहली चाल चली गई। रूबी ने बड़ी चालाकी से अपने दोनों बेटियों और सास को जेठ के घर भिजवा दिया। घर खाली था। खेल शुरू हुआ। रात को रूबी ने खीर बनाई। सुरेंद्र की पसंदीदा खीर। पर उस कटोरी में प्यार नहीं मौत परोसी गई थी। रूबी ने उसमें नींद की 18 से 20 गोलियां घोल दी थी। और सबसे हैरान करने वाली बात यह कि गोलियां कहीं बाहर से नहीं आई। वो घर में रखी थी। यह उसकी सास की दवाइयां थी जो कभी कभार सुरेंद्र भी खाते थे। यानी जिस दवा पर पूरे घर को भरोसा था उस रात वही जहर बन गई। सुरेंद्र खीर खाकर धीरे-धीरे बेहोशी में डूबते चले गए और पुलिस की माने तो रूबी यहीं नहीं रुकी। बेहोश पड़े सुरेंद्र का उसने गला घोट दिया ताकि कोई कोर कसर बाकी ना रह जाए। सुबह बिस्तर पर सुरेंद्र की लाश थी और सामने खड़ी थी रूबी। ना आंखों में आंसू ना हाथों में कफन ना दिल में पछतावा। अब उसने अगला काम शुरू किया। ₹400 देकर बाहर से मिट्टी और गिट्टी मंगवाई। उसने फावड़ा उठाया। बाथरूम का फर्श तोड़ने लगी।

आगरा में पति की लाश 45 दिन तक बाथरूम के नीचे दफन! पत्नी रूबी शर्मा पर हत्या का आरोप

करीब 40 मिनट की खुदाई के बाद एक गड्ढा तैयार हुआ और उसके बाद अपने पति की लाश को कमरे से घसीट कर बाथरूम तक ले गई। जिस आदमी के साथ उसने 16 साल गुजारे थे, उसने उसे उस गड्ढे में फेंक दिया। ऊपर से नमक छिड़का ताकि लाश जल्दी गल जाए और बदबू बाहर ना आए। फिर मिट्टी डालकर फर्श बराबर किया। कुछ दिनों के बाद मिस्त्री आया, प्लास्टर हुआ और चमचमाती नई टाइल्स लगवा दी गई। बाथरूम अब ऐसा दिख रहा था जैसे वहां कभी कुछ हुआ ही ना हो। लेकिन उन चमचमाती टाइल्स के पीछे पूरा इंसान दफ्त था। 45 दिनों तक किसी को भनक नहीं लगी। रूबी ने लाश ठिकाने लगा दी थी लेकिन बारी थी दुनिया की आंखों में धूल झोंकने की। इसके बाद रूबी अपनी जेठ के घर पहुंची और रोते हुए कही कि सुरेंद्र घर से चले गए हैं। चारप दिन में लौट आएंगे। दिन बीतने लगे सुरेंद्र लौटे नहीं। फिर 26 मई को गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज हुई। आप सोचिए कैसे? रूबी ने जेठ के साथ मिलकर थाने जाकर रिपोर्ट लिखवाई। जिस देवरानी पर आगे चलकर सबसे बड़ा शक होना था, वो जेठ के कंधे से कंधा मिलाकर पति को ढूंढने की गुहार लगा रही थी। और यहीं से शुरू होता है वो नाटक जो हफ्तों चलता है। पुलिस सुरेंद्र को ढूंढती रही। सीसीटीवी फुटेज वहां ले गए। वो साथ-साथ घूमती रही। यानी जिस औरत ने अपने हाथों से अपने पति को मारा था वो पुलिस के साथ बैठकर फुटेज में उसे तलाशती रही। घर पर जो भी आता वो यही पूछता कि सुरेंद्र का कुछ पता चला और हर बार रूबी की आंखों में आंसू आ जाते। उसकी आवाज भरभरा उठती और जवाब होता कि पता नहीं कहां चले गए। पड़ोसी पूछते तो वो रोने लगती।

मोहल्ले की औरतें उसे दिलासा दे रही थी। परिवार उसके साथ आंसू बहा रहा था। आप सोच कर देखिए उन बेटियों के लिए कि बेटियां अपनी मां से पूछती होंगी कि मम्मी पापा कब आएंगे और वो शायद जवाब देती होगी कि जल्दी बेटा जिस मां को यह पता था कि पापा कभी नहीं आएंगे वो रोज अपनी बच्चियों की आंखों में झूठी उम्मीद भर रही थी। सबसे हैरान करने वाली बात जानते क्या है? यह सब करते हुए रूबी उसी घर में रहती रही। रोज उसी बाथरूम में नहाती जिसके फर्श के ठीक नीचे उसका पति दफन था। हर सुबह वो उसी फर्श पर खड़ी होती। पानी उसी जमीन पर गिरता जिसके नीचे सुरेंद्र की लाश धीरे-धीरे गलकर कंकाल बन गई थी। पुलिस खाली हाथ थी। ना कोई सुराग ना गवाह ना सबूत। फिर एक ट्रक चोरी केस ने उसको एक्सपोज कर दिया। हां जी। रूबी का प्लान इतना परफेक्ट था कि शायद कभी ना पकड़ा जाता लेकिन उसे पकड़वाया एक केस ने जिसका इस घर से दूर-दूर तक कोई रिश्ता नहीं था। एक पुरानी ट्रक चोरिया केस जुलाई के पहले हफ्ते में आगरा पुलिस उसी मामले की जांच में लगी थी। इसी बीच एक टीम रूबी के घर पहुंची और यह ध्यान रखिएगा पुलिस ना हत्या की जांच करने आई थी ना सुरेंद्र केस के लिए। वो बस एक रूटीन पूछताछ के लिए आई थी। लेकिन दरवाजे पर पुलिस को देखते ही डेढ़ महीने से पत्थर बनी रूबी के हाथपांव फूल गए। जो औरत इतने दिनों से पुलिस के साथ घूम रही थी वो अचानक इतनी घबरा गई कि उसने फोन करके मदद मांगी और यही उसकी गलती रही। दरअसल परिवार को रूबी पर शक था। सुरेंद्र के लापता होने के बाद जो कहानियां वो सुनाती उसमें झोल आ रहा था। कभी कुछ कहती कभी कुछ। और यह झोल सबसे पहले रूबी के पति के भाई सुरेंद्र ने पकड़ा था और जब वह घबराई हुई दिखाई पड़ी तो उसके मुंह से सच निकल गया कि वो बाहर नहीं गए हैं। उनकी लाश को तो मैंने बाथरूम के नीचे दफन कर दिया है। बेटियों के सास के जेठ के पैरों तले जमीन खिसक गई कि जिस भाई को पिछले 45 दिनों से वो गली-गली में ढूंढ रहे थे वो उन्हीं के घर में उन्हीं के बाथरूम के नीचे दफन था जहां उसकी बेटियां नहाती थी। जहां यह औरत नहाती थी। खबर पुलिस को दी गई। पुलिस पहुंची। निशानानदेही पर बाथरूम खोलने का फैसला किया गया और जो निकला वो दृश्यम फिल्म की कहानी जैसा था।

आगरा में रूबी ने अपने पति को जिस तरह से मारा वो दृश्यम 3 की कहानी थी। मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में मजदूर बुलाए गए, हथौड़े चलाए गए। चमचमाती टाइल्स एक करके उखाड़ी गई। फर्श टूटा, खुदाई हुई और थोड़ी ही देर में जमीन के नीचे इंसानी ढांचा दिखने लगा। नमक और मिट्टी अपना काम कर चुके थे। सुरेंद्र शर्मा का शरीर गलकर कंकाल बन चुका था। 45 दिनों तक जिस फर्श पर रूबी नहा रही थी, उसी फर्श के नीचे जब कंकाल निकला तो पूरे मोहल्ले में सन्नाटा छा गया। लोग आंखों से देखकर भी यकीन नहीं कर पा रहे थे कि जिस घर में उनका वर्षों से आना जाना था उसके बाथरूम के नीचे एक लाश थी। जिस बाथरूम का रोज इस्तेमाल हो रहा था उसके नीचे इस केस का सबसे बड़ा सबूत था। कंकाल को पोस्टमार्टम और फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया। पूरा घर सील किया गया और फिर आया इस पूछताछ का सबसे ठंडापन। जब पूछा गया कि लाश को घर में छिपाने की तरकीब कहां से आई? तो उसने कहा कि मैंने अजय देवगन की दृश्य देखी थी। फिल्म पहले देखी थी लेकिन कहानी याद थी और इसीलिए उस फार्मूले को अपनाया ताकि जेल ना जाना पड़े। अब आप यह सोचिए कि सालों पहले देखी गई एक फिल्म की कहानी दिमाग में इतनी गहरी बैठी है कि सही मौका आते ही पूरी की पूरी जमीन पर उतार दी गई। फिल्म में वो घटना परिवार को बचाने के लिए थी यहां परिवार को मिटाने के लिए। फिल्म में लिखकर आता है कि यह घटना काल्पनिक है। लेकिन जब कोई कल्पना को हकीकत बना दे तो फिर क्या ही कहा जाए और इस कहानी का सबसे नया चौंकाने वाला हिस्सा सुनिए। जब यह सब कुछ हो गया, लाश मिल गई, पुलिस अरेस्ट कर ली गई, तब यह औरत अपने बयान से पलट गई है। अब वो कह रही है कि मैंने कुछ नहीं किया। उसने तो फांसी लाकर जान दी थी। मैं तो बस बदनामी और पुलिस के डर से लाश को दफनाई थी।

यहां दो बातें आप समझिए। पहला कि ये दावा रूबी का अपना है। पुलिस को उस पर यकीन नहीं है। दूसरा हत्या हुई या आत्महत्या इसका आखिरी जवाब फॉरेंसिक और पोस्टमार्टम रिपोर्ट देगी जो अब तक आनी बाकी है। तब तक यह केस अदालत में नहीं सवालों में टंगा है। लेकिन जो सवाल बड़ा है वो यह कि 16 साल की शादी दो बेटियां फिर यहां नौबत क्यों आई कि इस तरह से हत्या हुई? इस तरह से पाना पड़ा। पूछताछ में रूबी कहती है कि पति शराब पीते थे। पड़ोसियों ने भी इस बात पर मोहर लगाई है। मोहल्ले वाले भी कहते हैं कि शराब की लत ऐसी थी कि सुरेंद्र ने डिलीवरी बॉय की नौकरी तक छोड़ दी थी। बेरोजगार बैठे थे। घर का पूरा खर्च रूबी उठा रही थी कपड़े सिलकर। और जो थोड़े बहुत पैसे आते वो भी सुरिंद छीन के ले जाया करता। यानी रूबी जो दिन में मेहनत कर रही थी जिन हाथों से रात को वही हाथ मार खा रहे थे। पड़ोसी कहते हैं कि हमने समझाया था और यहीं से सवाल है कि क्या एक सताई हुई औरत का आखिरी कदम था? हालांकि इससे पहले आप भावुक हो। हम आपको बता दें कि ये तस्वीर इतनी सीधी नहीं है। पुलिस के सामने अभी भी कई सवाल है। पहला सवाल कि नींद की गोलियां खिलाना तो अकेली औरत के बस की बात है। लेकिन एक भारी भरकम आदमी की लाश अकेले घसीटना। 10 फीट के बाथरूम का पूरा फर्श अकेले तोड़ना, गड्ढा खोदना, दफनाना और फिर पक्का फर्श बनवा लेना। क्या वाकई में ये अखिल और इंतकाम है या फिर सिया मुस्कान जैसे कोई और भी है जो इसमें शामिल है? कोई और मर्द, कोई आशिक? दूसरा सवाल। जिस सुकून से इस पूरी घटना की तैयारी हुई है। बेटियों और सास को भिजवा देना, मिट्टी पहले से मंगवा लेना। ये किसी अचानक भड़के गुस्से का काम नहीं लगता बल्कि लंबी प्लानिंग की तरफ इशारा करता है।

इसीलिए पुलिस अब रूबी की कॉल डिटेल्स और Google सर्च हिस्ट्री खंगाल रही है। कि वारदात से पहले उसने इंटरनेट पर क्या-क्या खोजा और इस एंगल पर भी जांच चल रही है कि इस साजिश में कोई मददगार तो शामिल नहीं। पुलिस कह रही है अभी और भी एंगल है जिन पर जांच यानी कहानी पूरी नहीं हुई है। पन्ने खाली है। लेकिन हिंदुस्तान के मन में सवाल है कि मुस्कान से लेकर सोनम, सोनम से लेकर सिया और सिया से लेकर रूबी आखिर पतियों को मारने का सिलसिला थमे कब? क्योंकि मुस्कान ने प्रेमी के साथ मिलकर पति को मारा। लाश नीले ड्रम में भर दी। सोनम हनीमून के बहाने मेघालय की वादियों में पति को ले जाती है और आज हत्या करने के बाद जमानत पर घूम रही है। कल ही उसे रिहा किया गया। सिया जिसने जेल की गाड़ी से पूरे देश को मिडिल फिंगर दिखाया और बताया कि ना कानून का डर है ना समाज की शर्म। और अब रूबी जिसने दृश्यम फिल्म देखकर अपने घर को पति के कब्र बना दिया। ये चार नाम चार शहर लेकिन कहानी एक जैसी हर बार वही सवाल कि औरतों को हो क्या गया है कोई कहता है कि सताई हुई औरतों की बगावत है कोई कहता है कि रिश्तों में जहर है कोई कहता है सजा का डर खत्म है महिलाओं को पता है

कानून के हक में है वो बच जाएंगे तभी तो शायद ना पछतावा ना शर्म ना घबराहट लेकिन सच शायद इन सबके बीच यही है सच यह भी है कि शराब और घर की मारपीट चॉइससेस का सम्मान ना होना एक ज़हर लेकिन उस जहर का इलाज कानून है, अदालत है, अलग होना है। पहाड़ से धकेल देना, ड्रम में डालकर मार देना या बाथरूम में गड्ढा खोदकर खीर खिलाकर बेहोश करके गाड़ देना नहीं। क्योंकि जिस दिन इंसान दुखी होकर खुद ही जज बनकर फैसले सुनाएगा, उस दिन घरघर नहीं रहेंगे। घर कब्रिस्तान बन जाएंगे। बाकी चलते-चलते हम चाहते हैं कि आप भी उन दो बेटियों के बारे में सोचो जिनके पिता अब इस दुनिया में नहीं है। और जिनके कातिल उसकी मां है। क्योंकि उस रात खीर में सिर्फ नींद की गोलियां नहीं खुली थी। दो मासूम बच्चियों का पूरा बचपन खुला था। और अब जब रूबी कह रही है कि उसने नहीं मारा तो आखिरी सवाल आपसे आपको क्या लगता है? रूबी पीड़िता है या कातिल या दोनों? फैसला जनता और अदालत दोनों को करना है। अदालत का फैसला वक्त पर आएगा।

Sonu Baali
Sonu Baalihttp://khasharyananews.com
संस्थापक, खास हरियाणा न्यूज़- हरियाणा की ज़मीन से जुड़ा एक निष्पक्ष और ज़मीनी पत्रकार। पिछले 6+ वर्षों से जनता की आवाज़ को बिना किसी एजेंडे के सामने लाने का प्रयास कर रहे हैं। देसी अंदाज़ और सच्ची पत्रकारिता में विश्वास रखते हैं। 🌐 khasharyana.com
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