Sunday, October 25, 2026
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तेलंगाना में खौफनाक हत्याकांड: महिला ने बेटे के साथ मिलकर की दो महिलाओं की हत्या, CCTV से खुला राज

तेलंगाना में अधजली लाश मिलने से शुरू हुई जांच

तेलंगाना के सिद्धिपेट जिले से सामने आए एक कथित हत्याकांड ने पुलिस को कई गंभीर सवालों के सामने खड़ा कर दिया। इस मामले की शुरुआत एक सुनसान इलाके में महिला की अधजली लाश मिलने से हुई। पुलिस की जांच में सामने आए तथ्यों के मुताबिक, मृतका की पहचान अतिकम विजया के रूप में हुई। मामले की पड़ताल आगे बढ़ी तो CCTV फुटेज, मोबाइल फोन की लोकेशन, कॉल रिकॉर्ड और अन्य सुरागों ने जांच की दिशा बदल दी।

पुलिस के अनुसार, इस मामले में रजिता नाम की महिला और उसके 17 वर्षीय बेटे की भूमिका सामने आई। जांच में उन पर विजया की हत्या करने, उनके गहने लूटने और शव को ठिकाने लगाने की कोशिश करने के आरोप लगे। पुलिस ने यह भी जांच की कि क्या इससे पहले भी इसी तरह की घटनाएं हुई थीं।

यह मामला केवल एक महिला की हत्या की जांच तक सीमित नहीं रहा। पुलिस के सामने संभावित अन्य वारदातों, कथित आर्थिक लालच और परिवार के भीतर हिंसा से जुड़े पहलुओं की भी पड़ताल का सवाल खड़ा हुआ। हालांकि, इन आरोपों और जांच के निष्कर्षों को समझते समय पुलिस के दावों, उपलब्ध साक्ष्यों और अदालत में साबित होने वाले तथ्यों के बीच अंतर बनाए रखना जरूरी है।

8 अगस्त की रात जंगल में मिली महिला की लाश

दिए गए विवरण के अनुसार, 8 अगस्त 2026 की रात करीब 12 बजे रमक्का पेट के बाहरी इलाके में कुछ लोगों ने जंगल की तरफ आग जलती देखी। शुरुआत में उन्हें लगा कि शायद वहां कोई व्यक्ति आग जला रहा है। लेकिन जब वे नजदीक पहुंचे तो वहां एक इंसानी शव जलता हुआ दिखाई दिया।

बारिश के कारण आग पूरी तरह नहीं फैल पाई थी। शव का काफी हिस्सा जल चुका था, जिससे मौके पर मौजूद लोगों के लिए मृतका की पहचान करना मुश्किल था। इस दृश्य से घबराए लोगों ने बिना देर किए पुलिस को सूचना दी।

सूचना मिलने के बाद पुलिस टीम मौके पर पहुंची और घटनास्थल की जांच शुरू की। शव की हालत को देखते हुए उसे पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया, ताकि मृतका की पहचान और मौत से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्यों का पता लगाया जा सके।

शुरुआती स्तर पर पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती मृतका की पहचान करना थी। शव की स्थिति ऐसी थी कि केवल देखकर उसकी पहचान करना आसान नहीं था। इसके बाद पुलिस ने आसपास के क्षेत्रों में दर्ज गुमशुदगी की शिकायतों और उपलब्ध रिकॉर्ड की जांच शुरू की।

अतिकम विजया के रूप में हुई मृतका की पहचान

पुलिस ने आसपास के इलाकों में लापता महिलाओं से संबंधित रिकॉर्ड खंगाले। इसी दौरान अतिकम विजया का नाम सामने आया। पुलिस ने पहचान की पुष्टि के लिए उनके परिवार से संपर्क किया और उनके भाई को बुलाया।

दिए गए विवरण के अनुसार, मृतका के भाई ने शव की पहचान अपनी बहन विजया के रूप में की। इस पुष्टि के बाद पुलिस की जांच का केंद्र बदल गया। अब मामला केवल अज्ञात शव मिलने का नहीं था, बल्कि एक महिला की हत्या की जांच बन चुका था।

पुलिस के लिए यह पता लगाना जरूरी था कि विजया आखिरी बार कहां देखी गई थीं, उनकी किन लोगों से बातचीत हुई थी और वे किन परिस्थितियों में लापता हुईं। इसी उद्देश्य से पुलिस ने उनके संपर्कों, मोबाइल फोन से संबंधित उपलब्ध रिकॉर्ड और आसपास लगे CCTV कैमरों की फुटेज की जांच शुरू की।

जांच के दौरान पुलिस ने अलग-अलग टीमों को काम सौंपा। एक टीम घटनास्थल और आसपास के रास्तों की फुटेज देख रही थी, जबकि दूसरी टीम तकनीकी साक्ष्यों और मोबाइल रिकॉर्ड का विश्लेषण कर रही थी।

CCTV में दिखी संदिग्ध मोपेड

जांच में एक महत्वपूर्ण सुराग CCTV फुटेज से मिला। घटनास्थल से कुछ दूरी पर लगे कैमरे में TVS एक्सेल मोपेड दिखाई दी। फुटेज में एक युवक मोपेड चलाता नजर आया, जबकि पीछे एक महिला बैठी हुई थी।

पुलिस की नजर मोपेड के आगे रखे एक बड़े बोरे पर पड़ी। फुटेज के अनुसार, मोपेड सुनसान और अंधेरे वाले इलाके की ओर बढ़ी। वहां पहुंचने के बाद दोनों व्यक्ति नीचे उतरे और बोरे को उठाकर जंगल की तरफ ले जाते दिखाई दिए। इसके बाद वे कैमरे की नजर से बाहर हो गए।

पुलिस को संदेह हुआ कि बोरे में शव हो सकता है। हालांकि, केवल इस फुटेज से बोरे के भीतर मौजूद सामान की पुष्टि नहीं हो सकती थी। इसलिए पुलिस ने इस सुराग को अन्य साक्ष्यों के साथ जोड़कर जांच आगे बढ़ाने का फैसला किया।

जांच टीम ने मोपेड के नंबर की पहचान करने और उसके रजिस्ट्रेशन से संबंधित जानकारी हासिल करने का प्रयास किया। साथ ही, पुलिस ने घटनास्थल से पीछे की ओर CCTV फुटेज देखनी शुरू की, ताकि पता चल सके कि मोपेड किस इलाके से आई थी और वहां से निकलने के बाद किस दिशा में गई।

ढाई घंटे की टाइमलाइन ने बढ़ाया शक

पुलिस ने अलग-अलग कैमरों में दर्ज समय को मिलाकर मोपेड की आवाजाही की टाइमलाइन तैयार की। दिए गए विवरण के अनुसार, रात करीब 8 बजकर 45 मिनट पर मोपेड भूपल्ली के रिहायशी इलाके से निकलकर मुख्य सड़क की ओर जाती दिखाई दी। उसके आगे एक बड़ा बोरा रखा हुआ था।

इसके बाद रात करीब 11 बजकर 14 मिनट पर वही मोपेड जंगल की तरफ से वापस आती नजर आई। पुलिस के मुताबिक, वापसी के समय मोपेड पर पहले दिखाई दिया बोरा मौजूद नहीं था।

इन दोनों फुटेज के बीच लगभग ढाई घंटे का अंतर था। जांचकर्ताओं के लिए यह अंतर महत्वपूर्ण बन गया, क्योंकि इसी अवधि में मोपेड जंगल के आसपास रही थी। पुलिस ने इस दौरान की गतिविधियों को समझने के लिए कई रास्तों और चौराहों पर लगे कैमरों की फुटेज की जांच की।

फुटेज को पीछे की ओर ट्रैक करते हुए पुलिस भूपल्ली के एक रिहायशी क्षेत्र तक पहुंची। वहां एक किराना दुकान और चाय की दुकान के आसपास मोपेड की आवाजाही दिखाई दी। इसी के बाद मोपेड के रजिस्ट्रेशन और उसके मालिक से संबंधित जानकारी की जांच ने पुलिस का ध्यान रजिता नाम की महिला की ओर खींचा।

मोपेड के रजिस्ट्रेशन से रजिता तक पहुंची पुलिस

जांच में सामने आए विवरण के मुताबिक, संदिग्ध मोपेड 38 वर्षीय रजिता के नाम पर दर्ज थी। पुलिस ने इसके बाद जल्दबाजी में कोई निष्कर्ष निकालने के बजाय अन्य साक्ष्यों की जांच जारी रखी।

विजया के मोबाइल फोन से संबंधित रिकॉर्ड और कॉल डिटेल की जांच की गई। पुलिस ने यह भी देखा कि घटना से पहले किन लोगों से संपर्क हुआ था और संबंधित मोबाइल नंबर किस समय किन टावर क्षेत्रों में सक्रिय थे।

दिए गए विवरण के अनुसार, विजया और रजिता के मोबाइल फोन की गतिविधियों में समय और स्थान से जुड़ी समानताएं सामने आईं। कॉल रिकॉर्ड में यह भी संकेत मिला कि लापता होने से पहले विजया की बातचीत रजिता से हुई थी।

ये डिजिटल संकेत पुलिस के संदेह को मजबूत करने वाले सुराग बने, लेकिन किसी भी मामले में मोबाइल लोकेशन या कॉल रिकॉर्ड को अन्य साक्ष्यों के साथ मिलाकर ही समझना जरूरी होता है। इसी वजह से जांच टीम ने CCTV फुटेज और अन्य उपलब्ध जानकारी को एक साथ जोड़ना जारी रखा।

पेट्रोल खरीदने और गहने बेचने की फुटेज की जांच

पुलिस की जांच में दो और महत्वपूर्ण सुराग सामने आने का दावा किया गया। पहला सुराग एक पेट्रोल पंप की CCTV फुटेज से जुड़ा था। विवरण के अनुसार, रजिता एक बड़े कंटेनर में पेट्रोल भरवाती दिखाई दी।

जांचकर्ताओं ने इस गतिविधि को संदिग्ध परिस्थितियों में हुई अन्य गतिविधियों के साथ जोड़कर देखा। पुलिस यह समझने की कोशिश कर रही थी कि पेट्रोल किस उद्देश्य से खरीदा गया और क्या इसका संबंध जंगल में मिले शव से था।

दूसरा सुराग एक स्थानीय ज्वेलरी दुकान की फुटेज से जुड़ा बताया गया। इसमें रजिता के गहने देने और बदले में पैसे लेने की बात सामने आई। पुलिस ने यह पता लगाने का प्रयास किया कि ये गहने कहां से आए थे और क्या उनका संबंध मृतका से था।

CCTV में दिखाई देने वाली गतिविधियां, मोपेड की आवाजाही और मोबाइल रिकॉर्ड से मिले संकेतों को मिलाकर पुलिस ने रजिता से पूछताछ करने का फैसला किया। इस चरण पर जांच का उद्देश्य केवल संदेह के आधार पर कार्रवाई करना नहीं, बल्कि उपलब्ध साक्ष्यों की पुष्टि करना भी था।

पूछताछ में मां-बेटे की कथित भूमिका सामने आई

दिए गए विवरण के अनुसार, पुलिस रजिता के घर पहुंची और उससे पूछताछ की। पुलिस का दावा है कि शुरुआत में उसने आरोपों से इनकार किया, लेकिन बाद में पूछताछ के दौरान कथित तौर पर अपराध में अपनी भूमिका स्वीकार की।

पुलिस ने CCTV फुटेज में दिखाई देने वाले युवक के बारे में भी जानकारी जुटाई। विवरण के अनुसार, वह रजिता का 17 वर्षीय बेटा था। पुलिस ने उससे भी पूछताछ की और मामले में उसकी कथित भूमिका की जांच की।

जांच के मुताबिक, मां और बेटे पर आरोप लगा कि उन्होंने विजया को अपने संपर्क में लिया, उनकी हत्या की और उनके पास मौजूद गहने ले लिए। इसके बाद शव को बोरे में रखकर मोपेड से सुनसान इलाके में ले जाने और उसे जलाकर पहचान मिटाने की कोशिश करने का आरोप भी सामने आया।

यहां यह स्पष्ट करना आवश्यक है कि पुलिस पूछताछ में कथित स्वीकारोक्ति अपने आप में अदालत में दोष सिद्ध होने के बराबर नहीं होती। मामले में आरोपों की पुष्टि संबंधित साक्ष्यों, कानूनी प्रक्रिया और न्यायिक विचार के आधार पर होती है।

आर्थिक तंगी और लालच को लेकर पुलिस की जांच

पुलिस की जांच से जुड़े विवरण में रजिता के पारिवारिक और आर्थिक हालात का भी उल्लेख किया गया है। बताया गया कि वह अपने पति दुबैया और बेटे के साथ रहती थी तथा एक छोटी चाय की दुकान चलाती थी। उसका पति मजदूरी करता था और परिवार की आय सीमित थी।

पुलिस के अनुसार, इस मामले में आर्थिक लाभ की आशंका की जांच की गई। आरोप था कि विजया के गहने लेने के बाद उन्हें बेचकर नकदी हासिल की गई। हालांकि, आर्थिक परिस्थितियां अपने आप में किसी अपराध का प्रमाण नहीं होतीं। किसी भी व्यक्ति की आपराधिक जिम्मेदारी का निर्धारण उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही किया जाना चाहिए।

जांचकर्ताओं ने यह भी पड़ताल की कि क्या आरोपियों ने घटना से पहले कोई तैयारी की थी और क्या घटनास्थल से जुड़े साक्ष्यों को नष्ट करने का प्रयास किया गया था। मोपेड, बोरे, पेट्रोल के कंटेनर और गहनों से संबंधित सुरागों की इसी संदर्भ में जांच की गई।

घर से गहने, नकदी और अन्य सामान बरामद होने का दावा

दिए गए विवरण के मुताबिक, पुलिस ने रजिता के घर की तलाशी ली। तलाशी के दौरान लगभग पांच से छह तोले सोना, करीब 53 तोले चांदी, दो मोबाइल फोन और लगभग एक लाख रुपये नकद मिलने का दावा किया गया।

इसके अतिरिक्त, शव को जंगल तक ले जाने के लिए इस्तेमाल की गई बताई गई TVS एक्सेल मोपेड और पेट्रोल रखने वाला कंटेनर भी पुलिस ने जब्त किया। इन वस्तुओं को जांच के लिए संभावित साक्ष्य के तौर पर देखा गया।

किसी बरामद वस्तु का मामले से संबंध स्थापित करने के लिए उसकी पहचान, जब्ती की प्रक्रिया और अन्य साक्ष्यों के साथ उसका मेल महत्वपूर्ण होता है। इसलिए बरामदगी से जुड़े दावों को पुलिस रिकॉर्ड और आधिकारिक जानकारी के आधार पर प्रकाशित करना उचित है।

जांच में अन्य महिलाओं से जुड़ी घटनाओं का भी जिक्र

इस मामले की जांच के दौरान पुलिस ने कथित तौर पर अन्य घटनाओं की कड़ियां भी तलाशनी शुरू कीं। दिए गए विवरण में जून 2025 की एक घटना का उल्लेख है, जिसमें भूपल्ली की रहने वाली अन्नपूर्णा पर सुबह की सैर के दौरान हमला कर उनके गहने छीनने का आरोप लगाया गया। विवरण के अनुसार, वह हमले में बच गई थीं।

इसके बाद मई 2026 में कुंथा रेखा नाम की महिला की हत्या का मामला भी जांच के दायरे में आया। पुलिस के सामने यह जांचने का सवाल था कि क्या इस घटना और विजया की हत्या के बीच कोई संबंध था।

बताया गया कि रेखा को कथित तौर पर चाय की दुकान पर बुलाया गया था और बाद में उनकी हत्या कर शव को सुनसान इलाके में ले जाकर छोड़ने का आरोप सामने आया। पुलिस ने इन घटनाओं के बीच समानताओं और संभावित साक्ष्यों की जांच की।

हालांकि, अलग-अलग घटनाओं को एक ही आपराधिक सिलसिले का हिस्सा मानने से पहले प्रत्येक मामले के साक्ष्यों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है। आरोपों की गंभीरता के बावजूद अंतिम निष्कर्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही निकाला जाना चाहिए।

पति को निशाना बनाने की साजिश का आरोप

जांच से जुड़े विवरण में रजिता के पति दुबैया के साथ कथित हिंसा का भी उल्लेख किया गया। आरोप था कि उनके नाम पर बीमा पॉलिसी कराई गई थी और बाद में उन्हें नुकसान पहुंचाने की योजना बनाई गई।

दिए गए विवरण के अनुसार, पति को मारने के कथित प्रयासों और उनके साथ शारीरिक हिंसा की भी जांच की गई। उनके पैरों पर चोट पहुंचाने और गर्म पानी डालने जैसे गंभीर आरोपों का जिक्र है।

ये आरोप मामले को और गंभीर बनाते हैं, लेकिन इन्हें प्रमाणित तथ्य के रूप में प्रस्तुत करने से पहले संबंधित पुलिस रिकॉर्ड, पीड़ित के बयान और अन्य साक्ष्यों की पुष्टि जरूरी है। पारिवारिक हिंसा से जुड़े मामलों में पीड़ित की सुरक्षा और निष्पक्ष जांच विशेष महत्व रखते हैं।

नाबालिग बेटे की भूमिका और कानूनी प्रक्रिया

इस मामले में कथित तौर पर शामिल बताए गए बेटे की उम्र 17 वर्ष थी। इसलिए उसकी भूमिका की जांच किशोर न्याय से संबंधित कानूनी प्रक्रिया के तहत किए जाने की बात कही गई।

नाबालिग के मामलों में कानूनी प्रक्रिया वयस्क आरोपियों से अलग हो सकती है। संबंधित प्राधिकरण बच्चे की उम्र, मामले की प्रकृति और लागू कानून के अनुसार निर्णय लेते हैं। पुलिस के आरोप या पूछताछ में सामने आए बयान अपने आप में अंतिम न्यायिक निष्कर्ष नहीं होते।

दिए गए विवरण में बेटे की काउंसलिंग और किशोर न्याय व्यवस्था के तहत आगे की प्रक्रिया का उल्लेख है। इस पहलू ने मामले में बच्चों की परवरिश, पारिवारिक वातावरण और कथित अपराध में नाबालिग की भूमिका पर भी सवाल खड़े किए।

परवरिश, पारिवारिक माहौल और अपराध की जिम्मेदारी

इस मामले का एक संवेदनशील पहलू आरोपी बताए गए किशोर का पारिवारिक माहौल है। विवरण में उसके कमरे में पढ़ाई का टाइम-टेबल, प्रेरक वाक्य, मेडल और खेलों से जुड़ी उपलब्धियों का उल्लेख किया गया है। पड़ोसियों के हवाले से उसे पढ़ाई और खेल में अच्छा बताया गया।

दिए गए विवरण में एक डायरी का भी जिक्र है, जिसमें किशोर ने अपनी मां के प्रति सकारात्मक भावनाएं और पिता के प्रति नाराजगी व्यक्त की थी। यदि इन बातों की पुष्टि होती है, तो वे उसके घरेलू अनुभवों को समझने में मदद कर सकती हैं। हालांकि, किसी डायरी में लिखी बातों से अकेले पूरे पारिवारिक संबंधों या किसी व्यक्ति की मानसिक स्थिति का अंतिम निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।

बच्चों के विकास में परिवार का वातावरण, भावनात्मक सुरक्षा, संवाद और सही मार्गदर्शन महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। फिर भी, किसी नाबालिग की भूमिका और जिम्मेदारी का आकलन अनुमान के आधार पर नहीं, बल्कि तथ्यों और लागू कानून के अनुसार होना चाहिए।

इस मामले से यह व्यापक सवाल जरूर उठता है कि बच्चों को केवल पढ़ाई और करियर की सफलता के लिए तैयार करना पर्याप्त नहीं है। उन्हें यह समझाना भी जरूरी है कि किसी के प्रति प्रेम, भरोसा या वफादारी का अर्थ गलत काम में उसका साथ देना नहीं होता। हिंसा, लालच या किसी के प्रति नफरत किसी अपराध को उचित नहीं ठहरा सकती।

पुलिस जांच और न्यायिक प्रक्रिया पर टिकी नजरें

सिद्धिपेट के इस मामले में CCTV फुटेज, मोबाइल रिकॉर्ड, गहनों से जुड़े सुराग और कथित बरामदगी ने जांच को आगे बढ़ाने में भूमिका निभाई। पुलिस के अनुसार, रजिता और उसके बेटे की भूमिका की पड़ताल की गई और मामले से संबंधित वस्तुएं जब्त की गईं।

लेकिन इस तरह के गंभीर मामलों में जांच के प्रत्येक चरण की पुष्टि जरूरी है। आरोपियों की कानूनी स्थिति, दर्ज धाराओं, अदालत में पेश किए गए साक्ष्यों और आगे की सुनवाई के बारे में आधिकारिक जानकारी के आधार पर ही अंतिम अपडेट प्रकाशित किया जाना चाहिए।

अतिकम विजया की मौत से शुरू हुई यह जांच कई गंभीर सवाल छोड़ती है। पुलिस को यह स्थापित करना होगा कि वारदात किन परिस्थितियों में हुई, किसकी क्या भूमिका थी और उपलब्ध साक्ष्य आरोपों को किस हद तक साबित करते हैं। अंतिम निर्णय अदालत की प्रक्रिया के बाद ही सामने आएगा।

Sonu Baali
Sonu Baalihttp://khasharyananews.com
संस्थापक, खास हरियाणा न्यूज़- हरियाणा की ज़मीन से जुड़ा एक निष्पक्ष और ज़मीनी पत्रकार। पिछले 6+ वर्षों से जनता की आवाज़ को बिना किसी एजेंडे के सामने लाने का प्रयास कर रहे हैं। देसी अंदाज़ और सच्ची पत्रकारिता में विश्वास रखते हैं। 🌐 khasharyana.com
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