Sunday, October 25, 2026
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पति की मौत, बेटी को खोया, चुड़ैल के ताने सहे, फिर बनी RAS अधिकारी: रोहिणी गुर्जर की संघर्ष भरी कहानी

दुखों से टूटने के बजाय रोहिणी ने बनाया अपनी मेहनत को ताकत

कहते हैं कि अगर इंसान के इरादे मजबूत हों, तो बड़ी से बड़ी मुश्किल भी उसे मंजिल तक पहुंचने से नहीं रोक सकती। राजस्थान की रोहिणी गुर्जर की कहानी इसी बात की मिसाल है। जिंदगी ने उन्हें ऐसे-ऐसे दुख दिए, जिनसे कोई भी इंसान टूट सकता है। पहले पति का साथ छूट गया, फिर बड़ी बेटी की मौत ने उन्हें अंदर तक झकझोर दिया। इतना ही नहीं, समाज के कुछ लोगों ने उन्हें चुड़ैल तक कहना शुरू कर दिया। ताने मारे गए, सवाल उठाए गए और लोगों ने उनसे दूरी बनानी शुरू कर दी।

लेकिन रोहिणी ने अपनी जिंदगी को इन परिस्थितियों के हवाले नहीं किया। जिस महिला को कभी सामाजिक तानों का सामना करना पड़ा, उसी ने अपनी मेहनत और दृढ़ इच्छाशक्ति के दम पर राजस्थान प्रशासनिक सेवा (RAS) में सफलता हासिल करने का मुकाम पाया। सितंबर 2026 में घोषित परिणाम में सफलता हासिल करने की बताई जा रही रोहिणी की कहानी संघर्ष, हौसले और आत्मविश्वास की प्रेरक मिसाल है।

अजमेर जिले के गांव से शुरू हुआ रोहिणी का सफर

रोहिणी गुर्जर राजस्थान के अजमेर जिले के घूघरा गांव की रहने वाली हैं। उनकी शादी जिले के ही नरैनी गांव के रहने वाले संजय गुर्जर से हुई थी। शादी के बाद परिवार बढ़ा और रोहिणी दो बेटियों की मां बनीं। उनकी छोटी बेटी का नाम भूमि बताया जाता है।

परिवार और बच्चों की जिम्मेदारियों के बीच भी रोहिणी के मन में पढ़ाई करने और कुछ बड़ा हासिल करने की इच्छा थी। वह सरकारी अधिकारी बनना चाहती थीं। उनके लिए यह केवल नौकरी पाने का सपना नहीं था, बल्कि अपनी पहचान बनाने और परिवार के लिए बेहतर भविष्य तैयार करने का लक्ष्य भी था।

जब रोहिणी ने अपने पति संजय गुर्जर के सामने पढ़ाई जारी रखने और अधिकारी बनने की इच्छा रखी, तो उन्होंने पत्नी का साथ दिया। संजय ने उनके सपने को अपना सपना मानते हुए उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया। पति के इस सहयोग से रोहिणी को उम्मीद थी कि वह एक दिन अपनी मेहनत से मंजिल जरूर हासिल करेंगी।

लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था।

2021 में पति की मौत ने बदल दी जिंदगी

वर्ष 2021 में संजय गुर्जर को अचानक दिल का दौरा पड़ा और उनका निधन हो गया। पति को खोने का दुख रोहिणी के लिए बेहद बड़ा सदमा था। दो छोटी बेटियों की जिम्मेदारी भी उनके कंधों पर आ गई।

जिस व्यक्ति ने उनके सपनों को आगे बढ़ाने का भरोसा दिया था, वही अचानक दुनिया से चला गया। इस घटना ने रोहिणी की जिंदगी की दिशा बदल दी। परिवार संभालना, बेटियों की देखभाल करना और अपने भविष्य को लेकर फैसले लेना उनके लिए बड़ी चुनौती बन गया।

इस कठिन समय में उन्हें भावनात्मक सहारे की जरूरत थी। लेकिन उपलब्ध जानकारी के अनुसार, आसपास के कुछ लोगों और ससुराल पक्ष के कुछ सदस्यों ने उन्हें सहारा देने के बजाय ताने मारने शुरू कर दिए।

जब लोगों ने रोहिणी को कहा चुड़ैल

पति की मौत के बाद रोहिणी को कथित तौर पर अपमानजनक टिप्पणियों का सामना करना पड़ा। कुछ लोग उन्हें चुड़ैल कहने लगे। आरोप है कि उनके बारे में ऐसी बातें कही गईं कि उन्होंने अपने पति की जान ले ली और अब परिवार के दूसरे सदस्यों के साथ भी ऐसा हो सकता है।

किसी महिला के लिए पति की मौत के बाद इस तरह के आरोप और ताने सहना बेहद पीड़ादायक हो सकता है। रोहिणी पहले ही अपने जीवनसाथी को खोने के दुख से जूझ रही थीं। ऐसे में सामाजिक दूरी और अपमान ने उनकी मुश्किलें और बढ़ा दीं।

इन परिस्थितियों का असर उनकी पढ़ाई पर भी पड़ा। उन्होंने कुछ समय के लिए अपने अधिकारी बनने के सपने को पीछे छोड़ दिया और दोनों बेटियों की परवरिश पर ध्यान देने लगीं।

लेकिन उनकी जिंदगी में कुछ ऐसे लोग भी थे, जिन्होंने मुश्किल समय में उनका हाथ नहीं छोड़ा।

95 साल की दादी सास ने दिया हौसला

रोहिणी की कहानी में उनकी 95 वर्षीय दादी सास की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण बताई जाती है। जब रोहिणी दुखों से घिरी हुई थीं और पढ़ाई छोड़ चुकी थीं, तब दादी सास ने उन्हें दोबारा अपने सपने की ओर लौटने के लिए प्रेरित किया।

उन्होंने रोहिणी को समझाया कि वह पढ़ाई जारी रखें और अपने लक्ष्य को हासिल करने की कोशिश करें। दादी सास का भरोसा उनके लिए नई उम्मीद लेकर आया।

इसके साथ ही उनकी ननद ने भी उनका साथ दिया। परिवार के इन सदस्यों ने रोहिणी को मानसिक संबल दिया और उन्हें यह एहसास कराया कि मुश्किल परिस्थितियों के बावजूद वह अकेली नहीं हैं।

कभी-कभी जिंदगी में एक व्यक्ति का भरोसा भी किसी को दोबारा खड़ा होने की ताकत दे देता है। रोहिणी के लिए उनकी दादी सास और ननद का समर्थन इसी तरह का सहारा बना।

2023 में भरा RAS का फॉर्म, शुरू हुई नई लड़ाई

परिवार के सहयोग और अपने भीतर बची उम्मीद के सहारे रोहिणी ने वर्ष 2023 में राजस्थान प्रशासनिक सेवा यानी RAS की परीक्षा के लिए आवेदन किया।

बताई गई जानकारी के अनुसार, उन्होंने 10 अक्टूबर 2023 को प्रारंभिक परीक्षा दी और उसे पास कर लिया। प्रारंभिक परीक्षा में सफलता के बाद मुख्य परीक्षा की तैयारी उनके लिए अगला बड़ा पड़ाव थी।

पति को खोने और सामाजिक ताने सहने के बाद दोबारा पढ़ाई की राह पर लौटना आसान नहीं रहा होगा। घर की जिम्मेदारियों और बेटियों की देखभाल के बीच प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी के लिए समय निकालना भी एक चुनौती थी।

इसके बावजूद रोहिणी ने तैयारी जारी रखी। उन्हें उम्मीद थी कि मेहनत से वह अपने पति के सपने और परिवार के भरोसे को एक नई पहचान दे सकेंगी।

लेकिन मुख्य परीक्षा से पहले उनकी जिंदगी में एक और बड़ा दुख आया।

मुख्य परीक्षा से पहले बड़ी बेटी की मौत

बताए गए घटनाक्रम के मुताबिक, 29 जून 2024 को रोहिणी की बड़ी बेटी अचानक बीमार पड़ गई और उसकी मौत हो गई। मुख्य परीक्षा की तारीख 20 जुलाई 2024 बताई गई है। यानी परीक्षा से कुछ ही सप्ताह पहले उन्हें अपनी बेटी को खोने का असहनीय दुख झेलना पड़ा।

पति को खोने के बाद बेटी की मौत ने रोहिणी को एक बार फिर गहरे सदमे में डाल दिया। जिस मां के सामने अपनी बेटी के साथ भविष्य बनाने के सपने होते हैं, उसके लिए इस तरह का दुख शब्दों में बयां करना मुश्किल है।

ऐसी परिस्थितियों में परीक्षा की तैयारी करना और मानसिक रूप से खुद को संभालना बेहद कठिन हो सकता है। रोहिणी के सामने भी यही चुनौती थी।

लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, उन्होंने 20 जुलाई 2024 को RAS मुख्य परीक्षा दी और उसमें भी सफलता हासिल की।

यह उनके संघर्ष का एक महत्वपूर्ण पड़ाव था। उन्होंने निजी जीवन के असहनीय दुख के बावजूद अपने लक्ष्य की ओर कदम बढ़ाना जारी रखा।

इंटरव्यू के बाद सितंबर 2026 में मिली सफलता

मुख्य परीक्षा पास करने के बाद रोहिणी ने वर्ष 2025 में साक्षात्कार दिया। इसके बाद वह अंतिम परिणाम का इंतजार कर रही थीं।

सितंबर 2026 में RAS परीक्षा का परिणाम घोषित होने पर रोहिणी के सफल होने की जानकारी सामने आई। इस सफलता के साथ उनके अधिकारी बनने के सपने को पूरा होने का मुकाम मिला।

हालांकि, उनके चयन, रैंक और आवंटित पद की आधिकारिक पुष्टि संबंधित परीक्षा प्राधिकरण के परिणाम से की जानी चाहिए।

रोहिणी की कहानी केवल परीक्षा पास करने तक सीमित नहीं है। यह उस हौसले की कहानी है, जिसने उन्हें लगातार दो बड़े व्यक्तिगत दुखों के बाद भी आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। यह उन लोगों के सहयोग की भी कहानी है, जिन्होंने मुश्किल समय में उनका साथ दिया।

रोहिणी का संदेश: हालात से लड़कर आगे बढ़ना जरूरी

रोहिणी के हवाले से बताया गया है कि उनकी जिंदगी में बार-बार ऐसे हालात आए, जिन्होंने उन्हें तोड़ने की कोशिश की। लेकिन उन्होंने अपने पति और दादी सास के भरोसे को टूटने नहीं देना चाहा। उन्होंने अपने सपनों को पूरा करने के लिए संघर्ष जारी रखा।

उनकी यात्रा यह संदेश देती है कि किसी व्यक्ति की परिस्थितियां उसकी पूरी पहचान तय नहीं करतीं। विधवा होने, परिवार में दुखद घटनाएं होने या समाज की आलोचना का सामना करने से किसी महिला की क्षमताएं कम नहीं हो जातीं।

हालांकि, यह भी जरूरी है कि किसी महिला की सफलता को केवल दुख सहने की क्षमता से न मापा जाए। उसे शिक्षा, सम्मान, समान अवसर और परिवार का सहयोग मिलना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

रोहिणी की कहानी उन महिलाओं के लिए प्रेरणा बन सकती है, जो कठिन परिस्थितियों में अपने लक्ष्य से दूर हो रही हैं। उनका सफर बताता है कि सही सहयोग, मेहनत और दृढ़ संकल्प से आगे बढ़ने की राह बनाई जा सकती है।

Sonu Baali
Sonu Baalihttp://khasharyananews.com
संस्थापक, खास हरियाणा न्यूज़- हरियाणा की ज़मीन से जुड़ा एक निष्पक्ष और ज़मीनी पत्रकार। पिछले 6+ वर्षों से जनता की आवाज़ को बिना किसी एजेंडे के सामने लाने का प्रयास कर रहे हैं। देसी अंदाज़ और सच्ची पत्रकारिता में विश्वास रखते हैं। 🌐 khasharyana.com
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