भोपाल की तृप्ति सिंह राजपूत पर फर्जी IAS बनकर ठगी और पहचान का दुरुपयोग करने के आरोप
भोपाल: मध्य प्रदेश में खुद को IAS अधिकारी बताकर कथित तौर पर लोगों का भरोसा जीतने और सरकारी नौकरी समेत कई काम कराने के नाम पर पैसे लेने का मामला सामने आया है। इस मामले में तृप्ति सिंह राजपूत नाम की महिला और उसके भाई समेत अन्य लोगों के खिलाफ पुलिस ने कार्रवाई की है। पुलिस जांच के मुताबिक, तृप्ति खुद को मध्य प्रदेश पर्यटन विभाग में अतिरिक्त निदेशक और ट्रेनी IAS अधिकारी बताती थी। उसके खिलाफ अलग-अलग मामलों में धोखाधड़ी और पहचान का दुरुपयोग करने के आरोपों की जांच चल रही है।
रिपोर्टों के अनुसार, तृप्ति मूल रूप से वाराणसी की रहने वाली है और लंबे समय से भोपाल में रह रही थी। कुछ रिपोर्टों में उसकी शैक्षणिक योग्यता को लेकर दावा किया गया है कि वह 10वीं कक्षा में फेल हुई थी। इसके बावजूद उसने कथित तौर पर वर्ष 2019 से खुद को IAS अधिकारी बताना शुरू किया। हालांकि, उसकी शिक्षा और शुरुआती गतिविधियों से जुड़े सभी दावों की स्वतंत्र पुष्टि पुलिस जांच के रिकॉर्ड से ही होगी।
सोशल मीडिया पर बनाई IAS अधिकारी की पहचान
पुलिस जांच के दौरान कथित तौर पर ऐसे दस्तावेज और सामान बरामद होने की जानकारी सामने आई है, जिनका इस्तेमाल तृप्ति अपनी फर्जी सरकारी पहचान को विश्वसनीय दिखाने के लिए करती थी। इनमें कथित सरकारी पहचान पत्र, सरकारी लेटरहेड, नियुक्ति से जुड़े दस्तावेज और खुद को ट्रेनी IAS अधिकारी दिखाने वाले सामान शामिल हैं।

पुलिस ने एक ऐसी इनोवा कार बरामद करने की भी जानकारी दी है, जिस पर ‘Government of India’ लिखा हुआ था। इसके अलावा कथित फर्जी CBI पहचान पत्र भी बरामद होने की बात सामने आई है। पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि कुछ दस्तावेज डिजिटल या AI तकनीक की मदद से तैयार किए गए थे या नहीं।
तृप्ति ने सोशल मीडिया पर ऐसी तस्वीरें और वीडियो भी पोस्ट किए, जिनसे उसके IAS अधिकारी होने का प्रभाव पैदा होता था। जांच में सामने आए एक वीडियो में वह दो अन्य महिलाओं के साथ खुद को IAS अधिकारी बताती नजर आई। वीडियो में तीनों महिलाओं की बातचीत सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पुलिस का ध्यान इस मामले की तरफ गया।
विधानसभा के नाम पर वायरल हुआ वीडियो
मामले में बड़ा मोड़ तब आया जब तृप्ति और दो अन्य महिलाओं का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। वीडियो में वे खुद को IAS अधिकारी बताती दिखाई दीं। शुरुआत में वीडियो को मध्य प्रदेश विधानसभा के आसपास का बताया जा रहा था।
लेकिन पुलिस की जांच के अनुसार, वीडियो जिस जगह शूट किया गया था, वह विधानसभा नहीं बल्कि भोपाल के एंथ्रोपोलॉजिकल म्यूजियम कॉम्प्लेक्स की एक गैलरी थी। पुलिस ने वीडियो की लोकेशन की जांच की और इसी दौरान तृप्ति की कथित फर्जी पहचान को लेकर पड़ताल आगे बढ़ी।
वीडियो में शामिल दो महिलाओं ने पुलिस को कथित तौर पर बताया कि तृप्ति ने उन्हें IAS अधिकारी की तरह व्यवहार करने के लिए कहा था। पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि इन महिलाओं की भूमिका क्या थी और वे खुद किसी धोखाधड़ी में शामिल थीं या उन्हें भी कथित तौर पर भ्रमित किया गया था।
सरकारी नौकरी के नाम पर पैसे लेने का आरोप
जांच में तृप्ति पर सबसे गंभीर आरोप सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर पैसे लेने से जुड़े हैं। पुलिस के मुताबिक, उसने खुद को मध्य प्रदेश पर्यटन विभाग की अधिकारी बताकर लोगों को सरकारी नौकरी दिलाने का भरोसा दिया।
चंदेरी के एक मामले में चार लोगों ने कथित तौर पर सरकारी नौकरी मिलने की उम्मीद में करीब 9.80 लाख रुपये और अपने मूल दस्तावेज दिए थे। पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने प्रत्येक व्यक्ति से करीब 3 लाख रुपये लेने की बात कही थी। नौकरी नहीं मिलने पर शिकायतकर्ताओं को तृप्ति की पहचान पर संदेह हुआ और मामला पुलिस तक पहुंचा।
इसके अलावा भोपाल में एक अलग शिकायत में आरोप लगाया गया कि तृप्ति और उसके सहयोगियों ने मध्य प्रदेश पर्यटन विभाग के होटल की लीज दिलाने के नाम पर करीब 49 लाख रुपये लिए। एक अन्य मामले में भी नौकरी दिलाने के नाम पर 3 लाख रुपये लेने का आरोप सामने आया है। इन सभी मामलों की अलग-अलग जांच चल रही है।
पति के शक ने खोली कथित फर्जी पहचान
इस पूरे मामले का एक और दिलचस्प पहलू तृप्ति की शादी से जुड़ा है। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, तृप्ति ने जिस परिवार में शादी की, वहां भी उसने खुद को IAS अधिकारी के रूप में पेश किया था।
बाद में परिवार को उसकी बताई गई नौकरी को लेकर संदेह हुआ। खास तौर पर जब परिवार के एक परिचित वरिष्ठ IAS अधिकारी से मुलाकात की बात आई और तृप्ति ने कथित तौर पर कई बार इससे बचने की कोशिश की, तो परिवार का शक बढ़ गया।
इसके बाद उसके पति ने मसूरी स्थित लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी (LBSNAA) से RTI के माध्यम से जानकारी मांगी। रिपोर्टों के अनुसार, जवाब में तृप्ति सिंह राजपूत के नाम से वहां IAS प्रशिक्षण का रिकॉर्ड नहीं मिला। इसके बाद परिवार के सामने उसके IAS अधिकारी होने के दावे पर गंभीर सवाल खड़े हो गए।
भाई समेत कई लोगों पर जांच
पुलिस ने इस मामले में तृप्ति के भाई सुधांशु सिंह को भी गिरफ्तार किया था। पुलिस जांच यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कथित फर्जी पहचान तैयार करने, लोगों से संपर्क करने और पैसे के लेन-देन में किस-किस व्यक्ति की भूमिका थी।
इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, तृप्ति और उसके भाई को चंदेरी पुलिस ने 23 अगस्त 2026 को गिरफ्तार किया था। बाद में भोपाल में भी उसके खिलाफ अलग-अलग शिकायतों के आधार पर मामले सामने आए। पुलिस ने यह भी बताया कि जांच के दौरान अन्य संभावित पीड़ितों और सहयोगियों की भूमिका की पड़ताल की जा रही है।
कोचिंग संस्थानों में लेक्चर देने का भी आरोप
जांच में यह बात भी सामने आई कि तृप्ति कथित तौर पर भोपाल के कुछ सिविल सर्विस कोचिंग संस्थानों में भी पहुंची और खुद को प्रशासनिक अकादमी से जुड़ा हुआ बताकर अभ्यर्थियों को लेक्चर देती थी। पुलिस इस गतिविधि की भी जांच कर रही है।
