Wednesday, September 9, 2026
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शादी के 6 महीने बाद बेटे की मौत, सास ने बहू को बेटी बनाया; 5 साल बाद उसी चौखट से दुल्हन बनाकर विदा किया

सीकर: शादी के महज छह महीने बाद जब एक मां के जवान बेटे की अर्थी घर पहुंची तो पूरा परिवार गहरे सदमे में डूब गया। नई-नवेली बहू की आंखों के सामने उसका सुहाग उजड़ चुका था। रिश्तेदारों और पड़ोसियों ने सलाह दी कि अब बहू को उसके मायके भेज देना ही बेहतर होगा। लेकिन सास ने ऐसा करने से साफ इनकार कर दिया।

सास ने अपनी बहू से कहा कि वह अब इस घर से अपनी बेटी बनकर रहेगी। उसने बहू की पढ़ाई पूरी कराई, उसे शिक्षक बनने के लिए प्रेरित किया और जब पांच साल बाद उसकी जिंदगी में दोबारा खुशियों ने दस्तक दी तो उसी सास ने अपनी बहू को बेटी की तरह सजाकर उसकी शादी कराई और पूरे सम्मान के साथ विदा किया।

यह कहानी राजस्थान के सीकर जिले के रामगढ़ की रहने वाली कमला की है, जो सरकारी विद्यालय में शिक्षिका हैं। कमला के दो बेटे हैं। उनका छोटा बेटा शुभम विदेश में मेडिकल की पढ़ाई कर रहा था।

रिश्तेदार के गांव में हुई थी शुभम और सुनीता की मुलाकात

बताया जाता है कि शुभम कुछ समय के लिए छुट्टियां बिताने अपने घर आया हुआ था। इसी दौरान वह एक रिश्तेदार के गांव में शादी समारोह में शामिल होने गया। वहीं उसकी मुलाकात सुनीता नाम की युवती से हुई।

पहली मुलाकात के बाद दोनों के बीच दोस्ती हुई और धीरे-धीरे यह दोस्ती प्यार में बदल गई। शुभम ने अपने रिश्ते को परिवार से छिपाने के बजाय सीधे अपनी मां कमला को इसके बारे में बताया। उसने अपनी मां से कहा कि वह सुनीता से प्यार करता है और उसी से शादी करना चाहता है।

इसके बाद कमला के परिवार की तरफ से सुनीता के परिवार के पास शादी का प्रस्ताव भेजा गया।

सुनीता के परिवार की आर्थिक स्थिति बहुत अच्छी नहीं थी। ऐसे में उन्होंने पहले ही कमला के परिवार से पूछ लिया कि शादी में उनकी तरफ से क्या-क्या अपेक्षा है। इस पर कमला की तरफ से कथित तौर पर जवाब दिया गया कि उन्हें किसी तरह के दहेज की जरूरत नहीं है।

कमला ने कहा कि वह दहेज के सख्त खिलाफ हैं और उन्हें विदाई में सिर्फ सुनीता चाहिए।

25 मई 2016 को हुई सादगी से शादी

इसके बाद 25 मई 2016 को शुभम और सुनीता की शादी बेहद सादगी से हुई। दोनों परिवारों की मौजूदगी में विवाह संपन्न हुआ।

शादी के बाद सुनीता अपने ससुराल आ गईं। परिवार में खुशियों का माहौल था। लेकिन शादी के कुछ ही समय बाद शुभम को अपनी मेडिकल की पढ़ाई पूरी करने के लिए विदेश लौटना पड़ा।

शुभम पढ़ाई के लिए किरगिस्तान चला गया। परिवार को उम्मीद थी कि पढ़ाई पूरी करने के बाद वह डॉक्टर बनकर वापस आएगा और अपने परिवार का नाम रोशन करेगा।

लेकिन किसी को नहीं पता था कि यह खुशी ज्यादा दिनों तक नहीं रहने वाली।

छह महीने बाद आई मौत की खबर

नवंबर 2016 में विदेश में रहते हुए शुभम को अचानक ब्रेन स्ट्रोक हुआ। इलाज की कोशिशों के बावजूद उसकी जान नहीं बच सकी।

जिस बेटे के सिर पर कुछ महीने पहले सेहरा सजा था, उसी बेटे की मौत की खबर परिवार के लिए किसी वज्रपात से कम नहीं थी।

शुभम का शव विदेश से राजस्थान के सीकर जिले स्थित उसके गांव लाया गया। जब सुनीता ने अपने पति का शव देखा तो वह पूरी तरह टूट गईं। कमला के लिए भी यह जिंदगी का सबसे बड़ा दुख था।

जिस घर से कुछ महीने पहले बेटे की बारात निकली थी, उसी घर से अब उसकी अर्थी निकल रही थी।

रिश्तेदारों ने कहा- बहू को मायके भेज दीजिए

शुभम के अंतिम संस्कार के बाद रिश्तेदार और पड़ोसी कमला के पास बैठकर उन्हें ढांढस बंधाने लगे। कई लोगों ने सलाह दी कि सुनीता अभी बहुत छोटी है। उसकी पूरी जिंदगी आगे पड़ी है, इसलिए उसे उसके मायके भेज देना चाहिए।

सुनीता के मायके वालों ने भी कमला से अपनी बेटी को वापस भेजने का आग्रह किया।

लेकिन कमला ने इस फैसले को स्वीकार नहीं किया।

उन्होंने साफ कहा कि सुनीता अब सिर्फ उनके बेटे की पत्नी नहीं है। वह उनके परिवार का हिस्सा है और उसका भविष्य अब उनकी जिम्मेदारी है।

इसके बाद कमला ने ऐसा फैसला लिया, जिसने वहां मौजूद हर व्यक्ति को भावुक कर दिया।

“सुनीता मेरी बहू नहीं, मेरी बेटी है”

कमला ने कहा कि वह सुनीता को अब अपनी बहू के रूप में नहीं, बल्कि अपनी बेटी की तरह रखेंगी।

कमला ने सुनीता की जिंदगी को दोबारा खड़ा करने का फैसला किया। उन्होंने उसे घर में एक अलग कमरा दिया, ताकि वह शांत वातावरण में अपनी पढ़ाई पूरी कर सके।

कमला ने सुनीता से कहा कि वह अपना भविष्य बनाए और पढ़ाई पर ध्यान दे।

इसके बाद सुनीता ने अपनी पढ़ाई जारी रखी। कमला ने उसे बीएड की पढ़ाई पूरी करने में मदद की। सास ने बहू का साथ उस समय दिया, जब वह जिंदगी के सबसे कठिन दौर से गुजर रही थी।

2021 में सुनीता बनीं शिक्षिका

सुनीता ने मेहनत जारी रखी और साल 2021 में राजस्थान फर्स्ट ग्रेड परीक्षा पास कर शिक्षिका बनने में सफलता हासिल की।

जिस लड़की की जिंदगी कुछ साल पहले पति की मौत के बाद पूरी तरह अंधेरे में चली गई थी, उसने अब अपने पैरों पर खड़े होकर एक नई पहचान बना ली थी।

कमला के लिए भी यह किसी उपलब्धि से कम नहीं था।

लेकिन कमला की जिम्मेदारी यहीं खत्म नहीं हुई।

उन्होंने तय किया कि सुनीता को पूरी जिंदगी अकेले नहीं रहना चाहिए। उन्होंने सुनीता के भविष्य के बारे में सोचना शुरू किया और उसके लिए एक योग्य रिश्ता तलाशने लगीं।

2022 में सास ने बेटी की तरह किया कन्यादान

साल 2022 में कमला ने सुनीता का रिश्ता भोपाल के सीएजी कार्यालय में ऑडिटर बताए जाने वाले मुकेश मालवीय से तय किया।

इसके बाद कमला ने अपनी बहू की शादी बिल्कुल उसी तरह करने का फैसला किया, जैसे कोई मां अपनी बेटी की शादी करती है।

शादी की तैयारियां हुईं। सुनीता दुल्हन बनकर तैयार हुईं और इस बार भी कमला उनके साथ थीं।

लेकिन इस बार माहौल बिल्कुल अलग था।

पांच साल पहले जिस चौखट से सुनीता नई-नवेली दुल्हन बनकर आई थीं, उसी चौखट से पांच साल बाद वह दोबारा दुल्हन बनकर विदा हो रही थीं।

फर्क सिर्फ इतना था कि पहली बार वह शुभम की पत्नी बनकर आई थीं और दूसरी बार कमला की बेटी बनकर अपनी नई जिंदगी की शुरुआत करने जा रही थीं।

शादी में मौजूद लोगों की आंखें भी नम थीं। हर कोई कमला के इस फैसले और उनकी सोच की तारीफ कर रहा था।

यह कहानी सिर्फ एक सास और बहू की कहानी नहीं है। यह उस सोच की मिसाल है, जिसमें रिश्ते खून से नहीं बल्कि इंसानियत, जिम्मेदारी और अपनापन से मजबूत होते हैं।

कमला चाहतीं तो परिस्थितियों का हवाला देकर सुनीता को उसके मायके भेज सकती थीं। लेकिन उन्होंने उसे अकेला छोड़ने के बजाय उसके भविष्य को संवारने का फैसला किया।

उन्होंने बहू को बेटी की तरह पढ़ाया, उसे आत्मनिर्भर बनाया और जब जिंदगी में दोबारा खुशियों का मौका आया तो खुद मां बनकर उसका कन्यादान किया।

Sonu Baali
Sonu Baalihttp://khasharyananews.com
संस्थापक, खास हरियाणा न्यूज़- हरियाणा की ज़मीन से जुड़ा एक निष्पक्ष और ज़मीनी पत्रकार। पिछले 6+ वर्षों से जनता की आवाज़ को बिना किसी एजेंडे के सामने लाने का प्रयास कर रहे हैं। देसी अंदाज़ और सच्ची पत्रकारिता में विश्वास रखते हैं। 🌐 khasharyana.com
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