बेटी की शादी हर माता-पिता के लिए जिंदगी का सबसे बड़ा सपना होती है। माता-पिता चाहते हैं कि उनकी बेटी को ऐसा जीवनसाथी मिले जो उसे जिंदगीभर खुश रखे और सम्मान दे। लेकिन उत्तर प्रदेश के गोरखपुर से सामने आया एक मामला इस बात की गंभीर चेतावनी देता है कि शादी के लिए रिश्ता तय करते समय सिर्फ बायोडाटा और दिखावे पर भरोसा करना कितना भारी पड़ सकता है।

गोरखपुर के कैंट थाना क्षेत्र के मोहद्दीपुर निवासी राधेश्याम अपनी बेटी के लिए रिश्ता तलाश रहे थे। इसी दौरान उन्हें एक विवाह समूह के माध्यम से इटावा के रहने वाले प्रीतम सिंह निषाद के बारे में जानकारी मिली। सबसे बड़ी बात यह थी कि बायोडाटा में प्रीतम सिंह को आईएएस अधिकारी बताया गया था।
राधेश्याम को लगा कि उन्हें अपनी बेटी के लिए एक पढ़ा-लिखा और प्रतिष्ठित परिवार मिल गया है। लेकिन शादी के बाद जो कथित सच्चाई सामने आई, उसने पूरे परिवार को हिलाकर रख दिया।
विवाह समूह के जरिए मिला था रिश्ता
जानकारी के मुताबिक राधेश्याम अपनी बेटी की शादी के लिए योग्य वर की तलाश कर रहे थे। इसी दौरान उन्हें निषाद विवाह ग्रुप के माध्यम से प्रीतम सिंह निषाद का बायोडाटा मिला।
बायोडाटा में प्रीतम सिंह की नौकरी आईएएस अधिकारी के तौर पर बताई गई थी। राधेश्याम ने रिश्ता आगे बढ़ाने से पहले अपनी तरफ से यह सुनिश्चित करने की कोशिश भी की कि वास्तव में प्रीतम आईएएस अधिकारी हैं या नहीं।
उन्होंने प्रीतम के परिवार से संपर्क किया और कथित तौर पर आईएएस अधिकारी होने का पहचान पत्र और संबंधित दस्तावेज मांगे। परिवार की तरफ से कुछ दस्तावेज और पहचान पत्र उपलब्ध कराए गए, जिन्हें देखकर राधेश्याम को विश्वास हो गया कि सामने वाला व्यक्ति वास्तव में आईएएस अधिकारी है।
इसके बाद दोनों परिवारों के बीच बातचीत शुरू हुई और रिश्ता शादी तक पहुंच गया।
दहेज की मांग का भी आरोप
रिश्ता तय होने के बाद शादी में कथित तौर पर दहेज और महंगे घरेलू सामान की मांग किए जाने की बात सामने आई। राधेश्याम का कहना है कि उन्होंने बेटी की खुशी और रिश्ता हाथ से निकल जाने के डर से परिवार की मांगें पूरी करने का फैसला किया।
शादी से पहले कथित तौर पर एक लाख रुपये दिए गए। इसके बाद तिलक और शादी की तैयारियों में भी बड़ी रकम खर्च की गई।
राधेश्याम के मुताबिक, बेटी की शादी में करीब 15 लाख रुपये तक खर्च हुए। इसमें शादी से जुड़े खर्च, फर्नीचर और घरेलू सामान आदि शामिल थे। पिता का उद्देश्य यही था कि बेटी के ससुराल वालों को किसी चीज की कमी महसूस न हो और उनकी बेटी को शादी के बाद किसी तरह की परेशानी न उठानी पड़े।
11 मार्च 2026 को दोनों की शादी पूरे रीति-रिवाज और धूमधाम से हुई।
राधेश्याम को लगा कि उन्होंने अपनी बेटी के लिए एक अच्छे परिवार और एक बड़े अधिकारी को दामाद के रूप में चुना है।
लेकिन उन्हें क्या पता था कि शादी के बाद ही पूरी कहानी बदलने वाली है।
विदाई के बाद गाड़ी में हुआ चौंकाने वाला खुलासा
शादी के बाद जब बेटी की विदाई हुई तो वह अपने पति प्रीतम सिंह के साथ ससुराल के लिए रवाना हुई।
रास्ते में कथित तौर पर प्रीतम को लगा कि उसकी पत्नी सो गई है। इसके बाद उसने फोन पर किसी व्यक्ति से बातचीत शुरू कर दी।
लेकिन वह यह नहीं जानता था कि उसकी पत्नी जाग रही थी और उसकी बातचीत सुन रही थी।
आरोप है कि बातचीत के दौरान प्रीतम ने अपनी पत्नी को हनीमून के बहाने गोवा ले जाने और वहां से किसी दूसरे व्यक्ति को सौंपने की बात कही।
जैसे ही दुल्हन ने यह बातचीत सुनी, उसके पैरों तले जमीन खिसक गई।
जिस व्यक्ति के साथ वह कुछ घंटे पहले ही सात फेरे लेकर नई जिंदगी शुरू करने निकली थी, उसी पर कथित तौर पर उसे बेचने की योजना बनाने का आरोप लग रहा था।
दुल्हन ने बिना समय गंवाए अपने पिता राधेश्याम को फोन किया और पूरी बातचीत के बारे में बताया।
बेटी की बात सुनकर पिता रह गए सन्न
बेटी की बात सुनते ही राधेश्याम को बड़ा झटका लगा। उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि आखिर ऐसा कैसे हो सकता है।
उन्होंने अपनी बेटी की शादी में कोई कमी नहीं छोड़ी थी। शादी के खर्च से लेकर कथित दहेज और घरेलू सामान तक, उन्होंने अपनी क्षमता के अनुसार सब कुछ दिया था।
इसके बावजूद अगर उनकी बेटी को बेचने की कथित योजना बनाई जा रही थी, तो यह उनके लिए किसी सदमे से कम नहीं था।
राधेश्याम ने इसके बाद प्रीतम सिंह और उसके परिवार के बारे में दोबारा जानकारी जुटानी शुरू की।
और यहीं से कथित धोखाधड़ी की एक और परत सामने आने का दावा किया गया।
IAS अधिकारी नहीं, कथित फर्जी पहचान का मामला
राधेश्याम को जांच-पड़ताल के दौरान कथित तौर पर पता चला कि प्रीतम सिंह वास्तव में आईएएस अधिकारी नहीं है।
आरोप है कि उसने फर्जी पहचान और दस्तावेजों का इस्तेमाल करके खुद को बड़ा अधिकारी बताया था।
इतना ही नहीं, शिकायत में यह भी दावा किया गया कि प्रीतम पहले भी इसी तरह की कथित धोखाधड़ी कर चुका था और दो अन्य महिलाओं से शादी करने के मामले में जेल जा चुका था।
बताया जा रहा है कि वह कुछ समय पहले ही जेल से बाहर आया था और इसके बाद कथित तौर पर राधेश्याम के परिवार के संपर्क में आया।
यदि ये आरोप जांच में सही साबित होते हैं तो यह मामला केवल एक परिवार के साथ हुई धोखाधड़ी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि शादी के नाम पर फर्जी पहचान और कथित मानव तस्करी जैसी गंभीर आशंकाओं की जांच का विषय बन सकता है।
आखिर गलती कहां हुई?
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि राधेश्याम से गलती कहां हुई?
क्या उन्होंने बेटी के लिए रिश्ता तय करने में जल्दबाजी की?
या फिर सामने वाले लोगों ने इतनी कथित तरीके से तैयारी की थी कि दस्तावेज और पहचान दिखाकर परिवार का विश्वास जीत लिया?
शादी जैसे रिश्ते में सिर्फ बायोडाटा, पहचान पत्र या किसी व्यक्ति द्वारा बताए गए पद पर भरोसा करना पर्याप्त नहीं है। खासकर जब सामने वाला व्यक्ति किसी बड़े सरकारी पद पर होने का दावा करे, तो उसके पद और नियुक्ति की स्वतंत्र रूप से आधिकारिक माध्यम से पुष्टि करना बेहद जरूरी है।
इस मामले में राधेश्याम ने कथित तौर पर दस्तावेज मांगे थे, लेकिन अगर वे दस्तावेज भी फर्जी थे तो यह सवाल और गंभीर हो जाता है कि उन्हें तैयार किसने किया और उनका इस्तेमाल कितने लोगों को गुमराह करने के लिए किया गया।
फिलहाल इस मामले में सामने आए आरोपों की जांच और संबंधित अधिकारियों की कार्रवाई से ही पूरी सच्चाई स्पष्ट होगी।
एक पिता ने बेटी की खुशी के लिए लाखों रुपये खर्च किए, बड़े पद का दावा करने वाले व्यक्ति पर भरोसा किया और धूमधाम से बेटी की शादी की। लेकिन शादी के बाद बेटी ने जो कथित बातचीत सुनी, उसने पूरे परिवार की जिंदगी बदल दी।
यह मामला हर माता-पिता के लिए एक बड़ा सबक है—शादी के लिए रिश्ता तय करते समय केवल बायोडाटा या दिखावटी दस्तावेजों पर भरोसा न करें। नौकरी, पद, पहचान, परिवार और पिछली शादी या आपराधिक रिकॉर्ड जैसी महत्वपूर्ण जानकारियों का स्वतंत्र रूप से सत्यापन जरूर करें।
क्योंकि शादी जिंदगी का फैसला है, और इस फैसले में थोड़ी सी जल्दबाजी कभी-कभी बहुत भारी पड़ सकती है।
