Sunday, September 6, 2026
Homeअपराधमुंबई नेवी क्वार्टर में एक ही परिवार की चार अर्थियां: पत्नी और...

मुंबई नेवी क्वार्टर में एक ही परिवार की चार अर्थियां: पत्नी और दो बच्चों की मौत के बाद नौसेना कर्मी ने भी उठाया खौफनाक कदम

मुंबई से सामने आई एक दर्दनाक घटना ने हर किसी को झकझोर कर रख दिया। 15 अगस्त के दिन राजस्थान के झुंझुनू जिले के ककरना गांव में एक परिवार से एक साथ चार अर्थियां उठीं। इनमें भारतीय नौसेना में कार्यरत पूनम मल, उनकी पत्नी ओमा, उनका तीन वर्षीय बेटा यश और महज तीन महीने की बेटी शामिल थी। एक परिवार, जिसमें कुछ समय पहले तक खुशियां थीं, अचानक मातम में बदल गया।

बताया जा रहा है कि पूनम मल को वर्ष 2015 में भारतीय नौसेना में नौकरी मिली थी। उनके पिता शंभू दयाल राजस्थान के झुंझुनू जिले के ककरना गांव में छोटी सी किराना की दुकान चलाते हैं। पूनम मल के बड़े भाई भी भारतीय सेना में कार्यरत बताए जाते हैं। करीब चार साल पहले पूनम मल की शादी राजस्थान के सीकर जिले के खंडेला गांव की रहने वाली ओमा से अरेंज मैरिज के जरिए हुई थी।

शादी के बाद पूनम मल और ओमा मुंबई में नेवी के हाई सिक्योरिटी क्वार्टर में रहने लगे। उनके परिवार में दो बच्चे हुए। तीन साल का बेटा यश और तीन महीने की मासूम बेटी। बाहर से देखने पर परिवार सामान्य दिखाई देता था, लेकिन बताया जा रहा है कि पति-पत्नी के बीच लंबे समय से घरेलू विवाद चल रहा था।

परिजनों के मुताबिक दोनों की आर्थिक और सामाजिक परिस्थितियों में अंतर था। ओमा का मायका आर्थिक रूप से अपेक्षाकृत बेहतर बताया जाता है, जबकि पूनम मल का परिवार सामान्य आर्थिक स्थिति वाला था। इसी वजह से रहन-सहन, कपड़े, खान-पान और दूसरी घरेलू बातों को लेकर दोनों के बीच अक्सर विवाद होने की बात सामने आई है।

घटना से करीब एक सप्ताह पहले विवाद इतना बढ़ गया था कि ओमा ने अपने पिता को फोन कर कथित तौर पर कहा था कि वह उन्हें मुंबई से अपने साथ ले जाएं। परिजनों के अनुसार, ओमा ने अपने पिता से यह भी कहा था कि अगर वह उसे नहीं ले गए तो उसके साथ और बच्चों के साथ अनहोनी हो सकती है।

इसके बाद ओमा के पिता मुंबई स्थित नेवी क्वार्टर पहुंचे। वह अपनी बेटी और दोनों नाती-नातिन को अपने साथ ले जाना चाहते थे। लेकिन बताया जा रहा है कि पूनम मल ने पत्नी को ले जाने पर आपत्ति नहीं की, मगर बच्चों को अपने साथ रखने की बात कही। उनका कहना था कि वह अपने दोनों बच्चों के बिना नहीं रह सकते।

ऐसे में ओमा के पिता वापस लौट गए। बताया जाता है कि उन्हें यह चिंता थी कि यदि उनकी बेटी को तो वह अपने साथ ले जाते हैं, लेकिन बच्चे वहीं रह जाते हैं, तो बच्चों की देखभाल कौन करेगा। यही फैसला आगे चलकर इस परिवार की सबसे बड़ी त्रासदी से जुड़ गया।

इसके बाद 13 अगस्त से परिवार के लोग पूनम मल को लगातार फोन करते रहे। लेकिन फोन रिसीव नहीं हुआ। परिवार की चिंता बढ़ती गई। इसी दौरान 14 अगस्त को पूनम मल के पिता के मोबाइल पर एक WhatsApp संदेश पहुंचा। संदेश में कथित तौर पर उन्हें मुंबई के नेवी क्वार्टर आने और पत्नी ओमा तथा दोनों बच्चों के शव ले जाने की बात कही गई थी।

संदेश मिलने के बाद परिवार ने नौसेना के अधिकारियों से संपर्क किया और उन्हें पूरी स्थिति बताई। परिजनों ने बताया कि वे पूनम मल को लगातार फोन कर रहे हैं, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो पा रहा है।

इसके बाद अधिकारी नेवी क्वार्टर पहुंचे। बताया जाता है कि कमरे का दरवाजा अंदर से बंद था। जब दरवाजा खोला गया तो अंदर का दृश्य देखकर अधिकारी भी स्तब्ध रह गए। कमरे में पूनम मल की पत्नी ओमा, तीन वर्षीय बेटा यश और तीन महीने की बच्ची मृत अवस्था में मिले। वहीं पूनम मल भी कमरे में फंदे पर मृत मिले।

प्रारंभिक तौर पर सामने आई जानकारी के मुताबिक आशंका जताई गई कि पूनम मल ने पहले पत्नी और दोनों बच्चों की जान ली और उसके बाद खुद भी आत्महत्या कर ली। हालांकि घटना के वास्तविक कारणों और घटनाक्रम की पूरी पुष्टि जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर ही हो सकती है। पुलिस और संबंधित एजेंसियों की जांच से ही यह स्पष्ट होगा कि उस रात वास्तव में क्या हुआ था।

चारों शवों का पोस्टमार्टम कराया गया, जिसके बाद उन्हें राजस्थान स्थित उनके गांव ले जाया गया। 15 अगस्त, जिस दिन देश स्वतंत्रता दिवस मना रहा था, उसी दिन इस परिवार के घर से चार अर्थियां उठीं। यह दृश्य गांव के लोगों और परिवार के लिए बेहद पीड़ादायक था।

इस घटना का सबसे दुखद पहलू यह है कि एक छोटी बच्ची, जिसने अभी दुनिया को ठीक से देखा भी नहीं था, और तीन साल का मासूम बच्चा भी इस त्रासदी का शिकार हो गए। पति-पत्नी के बीच होने वाले विवाद का सबसे भयावह असर उन बच्चों पर पड़ा, जिनका उस विवाद में कोई दोष नहीं था।

यह घटना समाज के सामने कई गंभीर सवाल भी खड़े करती है। आखिर घरेलू विवाद किस बिंदु पर इतना गंभीर हो जाता है कि परिवार टूटने की स्थिति तक पहुंच जाता है? क्या समय रहते परिवार, रिश्तेदार या विशेषज्ञ हस्तक्षेप कर ऐसे विवादों को रोक सकते हैं? क्या पति-पत्नी के बीच आर्थिक स्थिति, रहन-सहन और जीवनशैली को लेकर होने वाले मतभेदों को बातचीत और समझदारी से सुलझाया जा सकता है?

किसी भी वैवाहिक रिश्ते में मतभेद होना असामान्य नहीं है, लेकिन जब विवाद लगातार बढ़ने लगे तो उसे नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है। ऐसे समय में परिवार के भरोसेमंद लोगों, काउंसलर या संबंधित सहायता तंत्र की मदद लेना जरूरी है।

मुंबई की यह घटना केवल एक परिवार की कहानी नहीं है, बल्कि यह याद दिलाती है कि घरेलू विवाद को समय रहते गंभीरता से लेना कितना जरूरी है। चार जिंदगियां खत्म हो गईं और पीछे रह गए माता-पिता, भाई-बहन और रिश्तेदारों के लिए जिंदगी भर का दर्द। इस घटना की पूरी सच्चाई जांच के बाद सामने आएगी, लेकिन फिलहाल यह त्रासदी हर किसी को सोचने पर मजबूर कर रही है कि आखिर छोटे-छोटे विवादों को हम समय रहते क्यों नहीं रोक पाते।

Sonu Baali
Sonu Baalihttp://khasharyananews.com
संस्थापक, खास हरियाणा न्यूज़- हरियाणा की ज़मीन से जुड़ा एक निष्पक्ष और ज़मीनी पत्रकार। पिछले 6+ वर्षों से जनता की आवाज़ को बिना किसी एजेंडे के सामने लाने का प्रयास कर रहे हैं। देसी अंदाज़ और सच्ची पत्रकारिता में विश्वास रखते हैं। 🌐 khasharyana.com
RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Recent Comments