इंदौर/जैसलमेर। कुछ प्रेम कहानियां ऐसी होती हैं, जिन्हें सुनकर आंखें नम हो जाती हैं। मध्य प्रदेश के इंदौर के रहने वाले मेजर हमजा आरिफ और दिल्ली की रहने वाली ज्योति की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। दोनों ने सात वर्षों तक हर मुश्किल का सामना किया, परिवारों को मनाया, समाज की बंदिशों से लड़े और आखिरकार जून 2026 में शादी के बंधन में बंध गए। लेकिन किस्मत को शायद यह मंजूर नहीं था। शादी के महज एक महीने बाद ही एक सड़क हादसे में मेजर हमजा आरिफ की मौत हो गई। जब उनका पार्थिव शरीर तिरंगे में लिपटकर घर पहुंचा तो पूरे परिवार के साथ उनकी पत्नी ज्योति का दर्द देखकर हर किसी की आंखें भर आईं।
मेजर हमजा आरिफ मध्य प्रदेश के इंदौर के राजेंद्र नगर क्षेत्र के रहने वाले थे। बचपन से ही उनका सपना देश की सेवा करना था। इसी सपने को पूरा करने के लिए उन्होंने कड़ी मेहनत की और वर्ष 2017 में भारतीय सेना में अधिकारी के रूप में शामिल हुए। सेना में रहते हुए उन्होंने देश के विभिन्न हिस्सों में अपनी सेवाएं दीं और अपने कर्तव्य को हमेशा सर्वोपरि रखा।
इसी दौरान वर्ष 2017 में उनकी मुलाकात दिल्ली की रहने वाली ज्योति से हुई। ज्योति पेशे से इंजीनियर थीं। दोनों की मुलाकात धीरे-धीरे दोस्ती में बदली और फिर यह दोस्ती गहरे प्रेम में बदल गई। दोनों ने एक-दूसरे के साथ पूरी जिंदगी बिताने का फैसला कर लिया था।
हालांकि, उनकी राह आसान नहीं थी। दोनों अलग-अलग धर्मों से संबंध रखते थे। यही वजह थी कि दोनों परिवार इस रिश्ते के लिए तैयार नहीं थे। लेकिन मेजर हमजा और ज्योति ने हार नहीं मानी। उन्होंने परिवारों को समझाने का प्रयास जारी रखा। पूरे सात वर्षों तक दोनों अपने रिश्ते को बचाए रखने और परिवारों की सहमति पाने की कोशिश करते रहे।

आखिरकार उनकी सच्ची मोहब्बत और धैर्य रंग लाया। वर्ष 2026 में दोनों परिवार इस रिश्ते के लिए तैयार हो गए। जून 2026 में पूरे रीति-रिवाज और परिवार की मौजूदगी में मेजर हमजा आरिफ और ज्योति की शादी संपन्न हुई। शादी के बाद दोनों ने अपने नए जीवन की शुरुआत की। परिवार और दोस्तों ने उन्हें शुभकामनाएं दीं और सभी को लगा कि अब उनकी सात साल पुरानी प्रेम कहानी को खूबसूरत मंजिल मिल गई है।
शादी के बाद मेजर हमजा आरिफ कुछ दिनों की छुट्टी पर अपनी पत्नी के साथ रहे। लेकिन सेना की जिम्मेदारियों के कारण उन्हें दोबारा अपनी ड्यूटी पर लौटना पड़ा। जुलाई 2026 के मध्य में वे राजस्थान के जैसलमेर स्थित अपनी यूनिट में वापस पहुंच गए। पत्नी ज्योति ने भी उन्हें मुस्कुराते हुए विदा किया, यह सोचकर कि कुछ समय बाद फिर मुलाकात होगी।
लेकिन नियति ने कुछ और ही तय कर रखा था।
30 जुलाई 2026 की रात मेजर हमजा आरिफ अपनी नई सफारी कार से कहीं जा रहे थे। इसी दौरान रास्ते में उनकी गाड़ी की टक्कर अचानक सामने आए एक ऊंट से हो गई। हादसा इतना भीषण था कि उन्हें गंभीर चोटें आईं और मौके पर ही उनकी मृत्यु हो गई।
इस दर्दनाक हादसे की सूचना जैसे ही परिवार तक पहुंची, घर में मातम छा गया। पत्नी ज्योति, जिन्होंने सात साल तक अपने प्रेम को शादी तक पहुंचाने के लिए संघर्ष किया था, यह खबर सुनते ही पूरी तरह टूट गईं। उन्हें विश्वास ही नहीं हो रहा था कि जिनके साथ उन्होंने अभी-अभी जीवनभर साथ निभाने की कसमें खाई थीं, वे अब इस दुनिया में नहीं रहे।
जब मेजर हमजा आरिफ का पार्थिव शरीर तिरंगे में लिपटकर उनके घर पहुंचा तो माहौल बेहद भावुक हो गया। सैन्य सम्मान के साथ उन्हें अंतिम विदाई दी गई। सेना के जवानों ने उन्हें सलामी दी और पूरे सम्मान के साथ अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी की गई।
सबसे अधिक मार्मिक दृश्य उस समय देखने को मिला जब पत्नी ज्योति अपने पति के पार्थिव शरीर के पास पहुंचीं। उनकी आंखों से लगातार आंसू बह रहे थे। कुछ ही सप्ताह पहले जिन हाथों में शादी की मेहंदी सजी थी, वही हाथ अब तिरंगे में लिपटे अपने जीवनसाथी को अंतिम बार छू रहे थे। वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम हो गईं।
यह घटना केवल एक परिवार का दुख नहीं है, बल्कि यह जीवन की अनिश्चितता का भी एहसास कराती है। एक ओर सात वर्षों का इंतजार, दूसरी ओर शादी के बाद भविष्य के अनगिनत सपने, लेकिन एक सड़क हादसे ने पलभर में सब कुछ बदल दिया।
मेजर हमजा आरिफ ने देश की सेवा करते हुए अपना जीवन समर्पित किया। उनके जाने से परिवार ने अपना बेटा खोया, पत्नी ने अपना जीवनसाथी और समाज ने एक जिम्मेदार सैनिक। उनकी यादें हमेशा उनके अपनों के साथ रहेंगी।
यह दुखद घटना एक बार फिर सड़क सुरक्षा और सतर्कता की आवश्यकता की भी याद दिलाती है। खासकर ऐसे क्षेत्रों में, जहां सड़कों पर अचानक पशु आ जाने की संभावना रहती है, वहां वाहन चालकों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत होती है।
मेजर हमजा आरिफ की कहानी प्रेम, संघर्ष, जिम्मेदारी और एक असहनीय बिछड़न की कहानी है। सात वर्षों की प्रतीक्षा के बाद मिली खुशियां केवल एक महीने में मातम में बदल गईं। उनकी यादें हमेशा उनके परिवार, मित्रों और देशवासियों के दिलों में जीवित रहेंगी।
