उत्तर प्रदेश के अमरोहा जिले से एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें दावा किया गया कि तीन सगी बहनों ने एक ही युवक से शादी कर ली। वीडियो सामने आने के बाद यह मामला चर्चा का विषय बन गया। हालांकि, विवाद बढ़ने के बाद संबंधित लोगों ने सामने आकर दावा किया कि यह शादी असली नहीं थी, बल्कि सोशल मीडिया पर व्यूज और फॉलोअर्स बढ़ाने के लिए बनाया गया एक प्रैंक वीडियो था। फिलहाल पूरे मामले को लेकर सोशल मीडिया पर अलग-अलग तरह की चर्चाएं जारी हैं।
जानकारी के अनुसार, यह मामला अमरोहा जिले के हसनपुर क्षेत्र से जुड़ा बताया जा रहा है। वायरल दावों के मुताबिक, तीन बहनें—सरोज, सावित्री और संतोष—कुछ समय से सोशल मीडिया के लिए रील्स बना रही थीं। बेहतर वीडियो बनाने के लिए उन्हें एक कैमरामैन की जरूरत थी। इसी दौरान उनकी मुलाकात क्षेत्र के ही रहने वाले विकास नामक युवक से हुई, जो कैमरा ऑपरेट करने और वीडियो शूट करने का काम करता था।
बताया जा रहा है कि पिछले करीब छह महीने से विकास तीनों बहनों की रील्स शूट कर रहा था। इसी दौरान उनके बीच अच्छी दोस्ती हो गई। सोशल मीडिया पर वायरल दावों में कहा गया कि बाद में बहनों में से एक को विकास से प्रेम हो गया। इसके बाद तीनों बहनों ने आपस में चर्चा की और कथित तौर पर यह फैसला लिया कि वे एक-दूसरे से अलग नहीं होना चाहतीं, इसलिए यदि शादी होगी तो एक ही युवक से की जाएगी।
वायरल वीडियो में दावा किया गया कि 17 जुलाई 2026 को चारों लोग अमरोहा के एक मंदिर पहुंचे और वहां हिंदू रीति-रिवाज से विवाह कर लिया। इसके बाद कथित शादी की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किए गए, जो देखते ही देखते वायरल हो गए।

वीडियो वायरल होने के बाद लोगों ने इस मामले पर तीखी प्रतिक्रियाएं देना शुरू कर दिया। सोशल मीडिया पर कई लोगों ने इस शादी को लेकर सवाल उठाए, वहीं कुछ संगठनों ने भी इस पर आपत्ति जताई। विवाद उस समय और बढ़ गया जब सोशल मीडिया पर यह दावा किया गया कि तीनों बहनों में से एक की उम्र विवाह योग्य नहीं है। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।
शुरुआत में वायरल वीडियो में दिखाई देने वाले युवक और तीनों बहनों ने कैमरे के सामने कहा कि वे अपने फैसले से खुश हैं और उन्हें समाज की परवाह नहीं है। उनके बयान सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से साझा किए गए। इसी वजह से मामला और अधिक चर्चा में आ गया।
लेकिन जैसे-जैसे विवाद बढ़ा, मामला नया मोड़ लेता दिखाई दिया। बाद में बड़ी बहन और विकास ने मीडिया के सामने आकर कहा कि यह कोई वास्तविक शादी नहीं थी। उनका दावा था कि पूरा वीडियो केवल मनोरंजन और सोशल मीडिया पर लोकप्रियता हासिल करने के उद्देश्य से बनाया गया था। उन्होंने कहा कि उनका मकसद केवल वायरल होना और अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर फॉलोअर्स बढ़ाना था।
इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर बहस और तेज हो गई। कुछ लोगों ने उनके स्पष्टीकरण को सही माना, जबकि कई यूजर्स का कहना था कि विवाद बढ़ने और कानूनी कार्रवाई की आशंका के बाद इसे प्रैंक बताया जा रहा है। फिलहाल इन दोनों दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि सोशल मीडिया पर अधिक व्यूज और फॉलोअर्स पाने की होड़ में कई कंटेंट क्रिएटर्स ऐसे वीडियो बना रहे हैं, जिनसे भ्रम की स्थिति पैदा हो जाती है। कई बार ऐसे वीडियो समाज में गलत संदेश भी पहुंचाते हैं और अनावश्यक विवाद खड़े कर देते हैं। इसलिए कंटेंट बनाने वालों को जिम्मेदारी के साथ काम करना चाहिए।
यह भी जरूरी है कि सोशल मीडिया पर वायरल होने वाले किसी भी वीडियो या दावे को अंतिम सत्य मानने से पहले उसकी पुष्टि की जाए। कई बार अधूरी जानकारी या एडिट किए गए वीडियो लोगों को भ्रमित कर सकते हैं। ऐसे मामलों में प्रशासनिक जांच और आधिकारिक बयान का इंतजार करना ही उचित होता है।
फिलहाल अमरोहा का यह मामला सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि वायरल वीडियो वास्तव में एक प्रैंक था या नहीं। यदि भविष्य में इस मामले में कोई आधिकारिक जांच या बयान सामने आता है, तो उसी के आधार पर वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
