Tuesday, July 21, 2026
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जयपुर डबल मर्डर: पत्नी और मासूम बेटे की हत्या का मास्टरमाइंड निकला पति

जयपुर की वीवीआईपी सोसाइटी में रह रही श्वेता का डोरवेल बजता है। श्वेता डोर खोलती हैं तो सामने उन्हीं का कोई परिचित खड़ा था। उन्हें आदर पूर्वक श्वेता अपने घर में ले आती हैं और चाय पानी के साथ उनका हालचाल जानती हैं। तभी बगल के रूम में सो रहा श्वेता का 21 महीने का बच्चा उठ जाता है। श्वेता उन्हें सम्मान पूर्वक यह कहती हैं कि आप थोड़ा आराम कीजिए। मैं अपने बच्चे को शांत करवा के आती हूं। श्वेता जैसे ही बच्चे के रूम की तरफ जाने लगती हैं, उस शख्स को मौका मिल जाता है किचन तक जाने का। वो शख्स किचन तक जाता है। किचन में रखे खलबट्टे से बट्टा उठाता है और पीछे छुपाए हुए श्वेता के पीछे चला जाता है और मौका देखते ही श्वेता के सर पर पीछे से जोरदार वार कर देता है और वो वार इतनी तेज था कि श्वेता तुरंत नीचे गिर बेहोश हो जाती हैं और पल भर में श्वेता की सांसे थम जाती हैं। दरअसल श्वेता उत्तर प्रदेश कानपुर के सर्वोदय नगर की रहने वाली थी। श्वेता के पिता का नाम सुरेश मिश्रा और माता का नाम माधुरी मिश्रा था। परिवार वालों की मर्जी से श्वेता की शादी दिल्ली गांधीनगर के रहने वाले रोहित तिवारी से होती है।

रोहित तिवारी जो इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन में सीनियर मैनेजर के पद पर तैनात थे। उस समय रोहित की पोस्टिंग जयपुर में थी। पुरोहित अपनी पत्नी श्वेता के साथ जयपुर के प्रताप नगर यूनिक टावर आई ब्लॉक के फ्लैट नंबर तीन में रहने लगते हैं। बड़ी मिन्नतों के साथ शादी के लगभग 9 साल बाद श्वेता और रोहित को एक बेटा पैदा होता है जिसका नाम श्वेता और रोहित बड़े प्यार से श्रेयम रखते हैं। रोहित हर रोज अपने ऑफिस के लिए चले जाते और श्वेता एक गृहिणी थी जो घर में छोटे-मोटे काम किया करती और अपने बच्चे श्रेयम का देखभाल किया करती थी और श्वेता के कामों में हेल्प करवाने के लिए सुबह शाम एक पूजा नाम की लड़की उनके घर में काम करने के लिए आया करती थी। दिन था 7 जनवरी 2020 जब पूजा हर रोज की तरह श्वेता के घर में शाम 7:00 बजे काम करने के लिए आती हैं। पूजा डोरवेल बजाती हैं लेकिन अंदर से कोई भी दरवाजा खोलने के लिए नहीं आता। जब काफी टाइम बीत जाता है तो पूजा उस दरवाजे को थोड़ा सा अंदर की तरफ पुश करती है तो दरवाजा खुल जाता है। पूजा मैडम मैडम करते हुए श्वेता के रूम तक जाती हैं। जैसे ही श्वेता का रूम थोड़ा सा खोलती है।

पूजा उस रूम में श्वेता की स्थिति देख जोर-जोर से चिल्लाते हुए बाहर की तरफ भागने लगती है। वो बाहर जाती है। सोसाइटी के लोगों को श्वेता के बारे में बताती हैं। सोसाइटी के कुछ लोग और पूजा दोबारा श्वेता के रूम में आते हैं। तो सोसाइटी के लोग श्वेता की स्थिति देखते हुए मौके पर पुलिस बुलाते हैं। पुलिस आती है और पुलिस वाले गंभीरता को देखते हुए श्वेता की जानकारी श्वेता के पति रोहित को देते हैं और कहते हैं आप फौरन घर आ जाइए क्योंकि आपकी पत्नी श्वेता की मौत हो चुकी है और यह खबर सुन रोहित दौड़ा भागा अपने घर आता है। वो देखता है श्वेता पूरी तरीके से खून से लथपथ पड़ी हुई है। श्वेता का हंसता मुस्कुराता चेहरा हमेशा के लिए शांत हो चुका है। श्वेता की सांसे हमेशा के लिए थम चुकी हैं। रोहित देखते ही रोने लगते हैं। वो कहते हैं जब मैं गया तो श्वेता बिल्कुल ठीक थी। हंसी खुशी मुझे ऑफिस के लिए भेजती है। लेकिन महज 4 से 5 घंटों में श्वेता के साथ क्या हो गया? रोहित अपनी पत्नी को ऐसा देख पूरी तरीके से टूट जाते हैं। जब उनको थोड़ा ख्याल आता है तो वह पुलिस वालों से और सोसाइटी के जो लोग वहां पर इकट्ठा हुए थे उनसे पूछते हैं कि मेरा बेटा श्रेयम कहां है?

पुलिस वाले उनसे पूछते हैं क्या आपका कोई बेटा था? जिस पर रोहित बताते हैं हां। सुबह जब मैं ऑफिस के लिए गया तो मेरी पत्नी और मेरा 21 महीने का बेटा इसी घर में था। लेकिन अभी तो मेरी पत्नी की मौत हो चुकी है। तो मेरा बेटा श्रेय कहां है? अब पुलिस वालों के लिए यह केस पूरी तरीके से क्रिटिकल बनता जा रहा था। क्योंकि जो पुलिस अभी तक मौत के साक्ष्यों को जुटाने में लगी हुई थी, इस पूरे मामले को सुलझाने में लगी हुई थी। अब उन्हीं पुलिस वालों के सामने दो केस आ चुके थे। एक श्वेता की मौत का और दूसरा उन्हीं के 21 महीने के बेटे श्रेयम के लापता होने का। पुलिस वालों ने मामले की गंभीरता को देखते हुए फॉरेंसिक टीम को बुलाते हैं और मौके की हर एक जानकारी लेते हुए श्वेता की डेड बॉडी को पोस्टमार्टम के लिए भेज देते हैं और इधर रोहित श्वेता के मौत की जानकारी अपने माता-पिता के साथ-साथ उत्तर प्रदेश के कानपुर में रह रहे श्वेता के माता-पिता को भी देते हैं। श्वेता के माता-पिता जैसे ही अपनी बेटी की मौत की सूचना सुनते हैं, वह पूरी तरीके से टूट जाते हैं। पिता सुरेश और माता माधुरी अपने बेटे शुभम के साथ फौरन जयपुर के लिए निकल जाते हैं और इधर पुलिस पूरे मामले की गंभीरता से जांच में जुट जाती है। सबसे पहले पुलिस उस अपार्टमेंट में लगे हुए सभी सीसीटीवी कैमरे को चेक करने की बात करती है तो पता चलता है कि यह एक बीवीआईपी सोसाइटी होने के बाद भी यहां पर कुछ ही कैमरे लगे हुए हैं

और उनमें से कुछ कैमरे काम भी नहीं कर रहे हैं और महज 9 घंटे के अंदर पुलिस वालों ने लगभग अलग-अलग 150 लोगों से पूछताछ करते हैं और 100 से अधिक लोगों के कॉल डिटेल चेक करते हैं। लेकिन कुछ भी पता नहीं चलता। फिर पुलिस वाले यह डिसाइड करते हैं कि इस अपार्टमेंट से लगभग 2 कि.मी. दूर तक जितने भी सीसीटीवी कैमरे हैं, उन सभी को चेक किया जाए। शायद कुछ क्लू निकल आए और यह करना पुलिस वालों के लिए एक पॉजिटिव रिजल्ट देता है। बाहर के कैमरे में पुलिस वालों को यह शख्स दिखाई देता है जो उस अपार्टमेंट में आते हुए दिख रहा है। फिर पूरी जांच टीम इस आदमी के बारे में पता करने में लग जाती है। लाख कोशिश के बाद भी इस आदमी के बारे में कुछ भी पता नहीं चलता क्योंकि यह आदमी अपना चेहरा रुमाल से ढका हुआ था। अब पुलिस वालों के पास सिर्फ दो ऑप्शन थे। उस आदमी का कपड़ा और उसके पैर में पहना हुआ ब्राउन कलर का यह सोच। और इधर कुछ पुलिस वाले श्वेता के पति रोहित तिवारी से पूछते हैं कि क्या आपकी किसी से दुश्मनी थी? जिस पर रोहित बताते हैं नहीं। मेरी किसी से कोई दुश्मनी नहीं थी। वो पूछते हैं क्या आपकी पत्नी श्वेता से किसी की कोई रंजिश थी? जिस पर रोहित बताते हैं नहीं। मेरी पत्नी बहुत ही ज्यादा मिलनसार थी, सीधी थी और सोसाइटी वालों से भी पुलिस वालों को यही पता चलता है कि श्वेता एक हसमुख औरत थी जो खुद भी हंसती थी और लोगों को भी हंसाया करती थी। श्वेता का कभी किसी से तनिक भी गिला शिकवा रहा ही नहीं।

लेकिन तभी 12 से 13 घंटों बाद रोहित के मोबाइल पर एक मैसेज आता है। अगर तुम अपने बेटे श्रेयम को जिंदा देखना चाहते हो तो ₹ लाख का इंतजाम करो। रोहित कहता है ठीक है मैं ₹30 लाख का इंतजाम कर दूंगा लेकिन एक बार तुम लोग मेरे बेटे का चेहरा दिखा दो जिस पर वह कॉल करने वाले लोग फोन काट देते हैं और उनके बेटे का चेहरा नहीं दिखाते। रोहित यह जानकारी पुलिस वालों को देते हैं और सबसे बड़ी आश्चर्य की बात जिस नंबर से रोहित को फोन आया था, मैसेज आया था, वह नंबर किसी और का नहीं बल्कि श्वेता का था। तो पुलिस वालों को यही लगा कि शायद जिन्होंने श्वेता के साथ ऐसा किया वही लोग श्वेता की मोबाइल और उनके बेटे को यहां से ले गए हैं। फिर उस नंबर की लोकेशन ट्रेस की जाती है तो पता चलता है कि उस नंबर की लोकेशन उस अपार्टमेंट से महज एक 2 कि.मी. के अंदर की दिख रही है। लेकिन जब जांच और आगे बढ़ती है तो पता चलता है जो श्वेता का नंबर है वह श्वेता के मोबाइल में चल ही नहीं रहा बल्कि किसी नए फोन में यूज़ हो रहा है। पुलिस वाले लाख कोशिशों के बाद भी उस आदमी तक नहीं पहुंच पाते। इधर जांच चल ही रही थी। पुलिस उस अपार्टमेंट के कोने-कोने में तलाश अभियान जारी ही की हुई थी।

तभी उसी अपार्टमेंट के पार्किंग जोन में खड़ी गाड़ियों के बीच एक बच्चे की डेड बॉडी मिलती है। रोहित को बुलाया जाता है कि यहां पर एक बच्चे की डेड बॉडी मिली हुई है। रोहित डरा सहमा यह सोचते हुए कि कहीं वह डेड बॉडी मेरे बच्चे की ना हो। वहां पर आता है। जैसे ही रोहित उस बच्चे को देखता है, रोहित पूरी तरीके से टूट जाता है। रोहित घुटनों के बल बैठकर रोने लगता है। वह कहता है, हां, यह मेरा बेटा श्रेयम है। मेरी पत्नी के साथ-साथ मेरे बेटे को भी खत्म कर दिया। फिर जांच टीम रोहित से पूछती है कि एक बार थोड़ा आप ध्यान देकर बताइए कि क्या एकद महीने के बीच कभी किसी से आपकी कोई बात बहस हुई हो? किसी से आपकी थोड़ी दुश्मनी हुई हो? जिस पर रोहित पुलिस वालों से गुस्सा करते हुए यह कहते हैं कि आप लोग मुझे बार-बार क्यों परेशान कर रहे हैं? जब मैं कह रहा हूं कि मेरी किसी से दुश्मनी नहीं है और मैं उस वक्त अपने ऑफिस में था तो मुझसे पूछताछ क्यों कर रहे हैं? जिस पर पुलिस वालों को थोड़ा रोहित पर डाउट होता है कि आखिर यह रोहित इतना ज्यादा अग्रेसिव क्यों हो रहा है? हम लोग तो सिर्फ जानने की कोशिश कर रहे हैं। क्या किसी से कभी भी थोड़ी बहुत बहस हुई है जिसके कारण ऐसी घटना हो सकती है?

तो यह रोहित छोटी सी बात पर इतना ज्यादा गुस्सा क्यों हो रहा है? उन पुलिस वालों को रोहित पर ही डाउट होने लगता है। कहीं यह रोहित ही इस पूरे केस में शामिल तो नहीं लेकिन उन पुलिस वालों के पास कोई भी ऐसा साक्ष्य नहीं था जिसके बिहाफ पर वो लोग रोहित से पूछताछ कर सके। फिर पुलिस वाले सुरेश और माधुरी से श्वेता के और रोहित के रिलेशन के बारे में पूछना शुरू करते हैं। आपकी बेटी और आपके दामाद के बीच कैसा रिश्ता था? क्या वह लोग अपनी शादी से खुश थे? या फिर उनके बीच किसी बात को लेकर वाद-विवाद चल रहा था। जिस पर श्वेता के पिता ने पुलिस वालों के सामने जो सच बताया वो उस पूरे केस को पल भर में खोल कर रख दिया। श्वेता के पिता पुलिस वालों से बताते हैं कि आज से लगभग 3 दिन पहले 5 जनवरी को मेरा दामाद रोहित मेरे पास खून किया था और वह कहता है कि तुम्हें जितना पैसा चाहिए बताओ मैं दे दूंगा लेकिन अपनी बेटी श्वेता को यहां से ले जाओ। नहीं तो मुझसे गुस्से में कुछ बहुत बड़ा हो जाएगा। अब उन पुलिस वालों के पास रोहित से पूछताछ करने की वजह मिल चुकी थी। वह लोग दोबारा रोहित को बुलाते हैं और रोहित से कड़ाई से पूछताछ करते हैं। लेकिन रोहित कहता है नहीं मैंने अपनी पत्नी को नहीं मारा। आप लोग मुझे परेशान कर रहे हैं और उल्टा रोहित उन पुलिस वालों के खिलाफ एसपी ऑफिस जाकर कंप्लेन कर देता है और रोहित कहता है कि जिस वक्त मेरी पत्नी की मौत हुई उस दिन मैं पूरे टाइम ऑफिस में था। तो जब पुलिस वाले रोहित के ऑफिस में जाकर सारे सीसीटीवी कैमरे को देखते हैं तो वह सच पाते हैं कि जो रोहित कह रहा है वह सच है। सुबह 9:00 बजे से लेकर जब तक इधर पुलिस वालों ने खुद रोहित के पास फोन कर यह जानकारी नहीं दे दी थी आपकी पत्नी श्वेता की मौत हो चुकी है तब तक रोहित उसी ऑफिस में मीटिंग कर रहा था।

श्वेता के केस को जांच कर रहे उन सभी पुलिस वालों के पास ऐसा कोई बहाना नहीं था। ऐसा कोई प्रूफ नहीं था जिससे वह दोबारा रोहित से पूछताछ कर सके। फिर पुलिस वाले रोहित से बिना बताए हुए 7 जनवरी की रोहित के मोबाइल की सारी कॉल डिटेल निकालती है। तो देखती है कि रोहित उस दिन एक नंबर पर दिन में 20 बार कॉल पर बात किया है। फिर पुलिस वाले उसी नंबर के थ्रू उस नंबर से बात कर रहे आदमी के पास पहुंचते हैं। वो वहां पहुंचकर डोरवेल बजाते हैं। जैसे ही गेट खुलता है, अंदर जाते हैं तो सामने वही ब्राउन कलर का शूज पड़ा हुआ था। जो उस दिन अपार्टमेंट के सामने संदिग्ध व्यक्ति दिखा था जो अपने चेहरे पर रुमाल बांधा हुआ था। वो आदमी जो शूज पहना हुआ था वही सोच उस घर के अंदर पड़ा हुआ था। पुलिस वाले सिविल ड्रेस में थे तो वह आदमी पहचान ही नहीं पाता कि यह पुलिस वाले हैं। वह घुसते ही पूछते हैं यह सोच किसका है। जिस पर वह आदमी कहता है मेरा है। तुरंत बिना कुछ बताए हुए पुलिस उस आदमी को गिरफ्तार करते हुए थाने ले आती है। फिर इधर से रोहित को बुलाया जाता है और पूछा जाता है कि यह आदमी कौन है? यही आदमी 7 जनवरी को आपके अपार्टमेंट के सामने दिखा हुआ था। चेहरे पर रुमाल बांधा हुआ था। जिससे इसकी पहचान नहीं हो पाई। आप बताइए यह आदमी कौन है जिससे आप 7 जनवरी को पूरे दिन लगभग 20 बार कॉल पर बात किए हुए हैं। जिससे रोहित पूरी तरीके से घबरा जाता है और वह कहता है मेरी पत्नी और बच्चे को मारने वाला यही शख्स है। जब वह आदमी देखता है कि रोहित पूरा का पूरा इल्जाम मेरे ऊपर डाल रहा है तो उसका सब्र का भार टूट जाता है और वह बताता है कि हां मैंने ही श्वेता और इनके बेटे को मारा है। लेकिन ऐसा करने के लिए मुझे रोहित ने ही कहा था। फिर वह जांच टीम रोहित से जब कड़ाई से पूछताछ करती है,

अपनी भाषा में पूछताछ करती है, तो यह रोहित सारा सच बता देता है और वह सच इतना खौफनाक, इतना दर्दनाक होता है, सुन आपके रोंगटे खड़े हो जाएंगे। दरअसल रोहित बताता है कि श्वेता की शादी से पहले ही मेरे कॉलेज की एक लड़की से मैं बहुत प्यार करता था। लेकिन मैं परिवार वालों के मनाने के बाद भी उस लड़की से शादी नहीं कर पाया और मैं शादी के बाद भी उस लड़की से अपना रिश्ता नहीं तोड़ पाया क्योंकि मैं उससे सच्चा प्यार करता था। पहले सब कुछ ठीक चल रहा था। श्वेता को उस लड़की के बारे में नहीं पता था। लेकिन जब धीरे-धीरे श्वेता को उस लड़की के बारे में पता चलता है तो श्वेता हर रोज मुझसे उस लड़की को लेकर झगड़ा किया करती थी। कहती थी तुम उससे बात क्यों करते हो? तुम ऑफिस में उससे मिलते क्यों हो? जिस बात को लेकर मुझे चिढ़ होने लगी। और इधर मेरे ऑफिस में काम कर रहे एक हरी नाम के आदमी से मेरी दोस्ती होती है। उसको मैं अपने दिल की बात बताता हूं कि मैं शादी के पहले से ही एक लड़की से बहुत प्यार करता हूं। लेकिन मेरी शादी श्वेता से हो जाती है। मेरा एक बच्चा भी है। लेकिन अब मेरी पत्नी को मेरी गर्लफ्रेंड के बारे में पता चल चुका है। अब मैं क्या करूं? तो उस ऑफिस में काम कर रहा वो हरी भी अपनी समस्या रोहित को बताता है और वह बताता है जो समस्या तुम्हारे साथ है सेम यही समस्या मेरे साथ भी है।

मैं भी किसी और लड़की से प्यार करता हूं और मेरी भी पत्नी रोज मुझसे उस लड़की को लेकर झगड़ा किया करती है। फिर रोहित और उसका दोस्त हरी दोनों मिलकर यह प्लान बनाते हैं कि चलो हम लोग एक दूसरे से दोस्ती करते हैं और इस दोस्ती को घर तक पहुंचाते हैं। फिर हरी और रोहित दोनों लोग मिलकर यह प्लान बनाते हैं कि ठीक है हम लोग एक दूसरे की पत्नी को मार देंगे। हरी कहता है मैं तुम्हारी पत्नी और बच्चे को मार दूंगा और इधर रोहित कहता है ठीक है मैं भी तुम्हारी पत्नी और बच्चे को मार दूंगा और हम लोग आपस में दोस्त हैं तो किसी को हमारे ऊपर जरा भी शक नहीं होगा। हरी बताता है 7 जनवरी 2020 को श्वेता को मारने मैं ही जाने वाला था। लेकिन उस समय मैं पूरी तरीके से होपलेस हो जाता हूं। तो फिर मैं अपने एक दोस्त को चुनता हूं। जिस दोस्त को श्वेता भी जानती थी और इधर रोहित भी जानता था। क्योंकि अगर उस सोसाइटी में कोई अनजान व्यक्ति जाता तो सोसाइटी पर खड़े गेट मैन उसको बाहर से ही रोक देते। इसी वजह से मैं एक परिचित व्यक्ति को श्वेता के पास भेजता हूं जिसे श्वेता भी जानती थी और वह श्वेता के पास जाता है। श्वेता उन्हें चाय पानी पिलाती हैं। अच्छे से उनके साथ पेश आती हैं। लेकिन जब श्वेता का बेटा श्रेय रोने लगती हैं और वो रूम की तरफ जाती हैं तो वो शख्स किचन में जाकर बट्टा लेकर श्वेता के सर पर वार करता है और श्वेता बेहोश हो जाती हैं। और जब श्वेता बेहोश होकर नीचे गिर जाती है तो बेड पर लेटा हुआ उनका 21 महीने का बच्चा श्रेयम तेजी से रोने लगता है। मानो वो अपनी मां को बचाने की कोशिश कर रहा है। जिस पर इस ब्राउन शूज वाले को उस बच्चे का रोना देखकर दर्द आने लगता है। वो रवि के पास फोन करता है और कहता है कि बच्चा रो रहा है। मां बेहोश पड़ी है।

मेरी हिम्मत नहीं हो रही है। मैं श्वेता को मार सकूं। फिर यही बात रवि श्वेता के पति रोहित को बताता है कि आपका 21 महीने का बच्चा रो रहा है। श्वेता बेहोश पड़ी है। वह आदमी श्वेता को नहीं मारना चाहता। सोचिए पैसा लेकर मारने वाले को उस बच्चे और श्वेता के ऊपर रहम आ जाती है। लेकिन श्वेता के पति रोहित को श्वेता और अपने बच्चे के ऊपर तनिक भी रहम नहीं आती। श्वेता का पति रोहित कहता है कि जिस काम के लिए वह वहां गया है जल्दी से करें और वहां से निकल जाए। फिर वह आदमी किचन तक जाकर चाकू ले आता है और श्वेता के गर्दन को काटकर श्वेता की सासे हमेशा हमेशा के लिए छीन लेता है और वहीं पर बगल में रो रहे बच्चे श्रेयम को भी देता है। सोचिए आजकल के माता-पिता अपने निजी स्वार्थ अपनी हवस को मिटाने के लिए इस तरह से अंधे हो चुके हैं। अपनी पत्नी तो छोड़ो अपने बच्चे तक को नहीं छोड़ रहे हैं। बाकी आपको क्या लगता है कि समाज में दिन प्रतिदिन ऐसी घटनाएं बढ़ती ही क्यों जा रही हैं?

Sonu Baali
Sonu Baalihttp://khasharyananews.com
संस्थापक, खास हरियाणा न्यूज़- हरियाणा की ज़मीन से जुड़ा एक निष्पक्ष और ज़मीनी पत्रकार। पिछले 6+ वर्षों से जनता की आवाज़ को बिना किसी एजेंडे के सामने लाने का प्रयास कर रहे हैं। देसी अंदाज़ और सच्ची पत्रकारिता में विश्वास रखते हैं। 🌐 khasharyana.com
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