Tuesday, July 28, 2026
Homeअपराधमनीषा मित्तल हत्याकांड: मौत से पहले बार-बार मांगी थी सुरक्षा, फिर भी...

मनीषा मित्तल हत्याकांड: मौत से पहले बार-बार मांगी थी सुरक्षा, फिर भी नहीं बच सकी जान

13 जून 2026 की शाम 6:00 बजे मनीषा मित्तल शिमला के सरस्वती पैराडाइज स्कूल के मेन गेट के सामने से गुजर ही रही थी कि पीछे से आए काले रंग के कपड़े पहने एक हमलावर ने करीब 3 फीट की दूरी से उन पर गोली चला दी। मनीषा गोली लगते ही जमीन पर गिर पड़ी। लेकिन वो हमलावर उन पर गोलियां दागता रहा। इतने में सफेद शर्ट पहने सामने से आए एक और हमलावर ने मनीषा पर कई राउंड और फायर किए ताकि उनके जिंदा रहने की जरा सी भी गुंजाइश बाकी ना रह जाए। कुछ ही सेकंड्स के अंदर सब कुछ खत्म हो चुका था। दो शूटर्स अपना काम पूरा करके वहां से फरार हो गए और सड़क पर सिर्फ खामोशी, खून और एक बेजान जिस्म रह गया। लेकिन इस कहानी का सबसे हैरान कर देने वाला पहलू यह नहीं है कि मनीषा की दिन दहाड़े हत्या कर दी गई। सबसे हैरान कर देने वाली बात यह है कि मनीषा को अपनी मौत का अंदाजा पहले ही हो चुका था और सिर्फ अंदाजा ही नहीं वे पिछले कई हफ्तों से बार-बार पुलिस और एडमिनिस्ट्रेशन से कह रही थी कि उनकी जान को खतरा है। कि यह मेरे साथ बदतमीजी कर रहे हैं। उल्टा मेरे को धमकी देकर जाते हैं। तुझे देख लेंगे, तुझे जान से मार देंगे। वीडियो में दिख रही मनीषा पिछले कई हफ्तों से लगातार पुलिस प्रशासन के सामने गुहार लगा रही थी।

लेकिन बार-बार मदद मांगने के बाद भी उन्हें सिर्फ निराशा ही हाथ लगी। जब उन्होंने हिमाचल पुलिस को कॉल करके अपनी सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता जताई तो ना सिर्फ पुलिस ने तुरंत वहां पहुंचने से इंकार कर दिया बल्कि उनकी बात को यह कह कर टाल दिया कि जब लड़ाई होगी तब हम आएंगे और फिलहाल के लिए वो ऑनलाइन कंप्लेंट दर्ज कर दें। तो पुलिस कहती है जब लड़ाई झगड़ा होगा तब हम आ जाएंगे कि क्या यह जब मुझे मार देंगी मैं अकेली हूं यहां पे अपनी बेटी के साथ में तभी यह लोग मेरी मदद करेंगे। सोचिए एक महिला बार-बार कह रही थी कि उसकी जान को खतरा है। लेकिन जिस व्यवस्था पर उसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी थी वो वही उसकी बात को गंभीरता से लेने को तैयार नहीं दिख रहा था। जब कानून और प्रशासन से मदद की हर उम्मीद धीरे-धीरे टूटने लगी तब मजबूरन मनीषा ने अपनी और अपनी 16 साल की बेटी की सुरक्षा के लिए एक वीडियो रिकॉर्ड करके सोशल मीडिया पर डाल दिया। शायद उनकी सोच यह थी कि अगर सब कुछ पब्लिक रिकॉर्ड का हिस्सा बन जाए तो जो लोग उन्हें नुकसान पहुंचाना चाहते हैं, वह कम से कम एक बार जरूर सोचेंगे। उस वक्त मनीषा शिमला की हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी में अपनी बेटी के साथ रह रही थी। रात करीब 1:02 पर उन्होंने एक वीडियो रिकॉर्ड की जिसमें उन्होंने अपने फोन की लाइव ट्रैकिंग दिखाई। हैरान कर देने वाली बात यह थी कि जब वह खुद शिमला में मौजूद थी तब उनके फोन की लोकेशन 26 सेकंड पहले रोहतक हरियाणा में दिख रही थी।

वीडियो में मनीषा ने आगे बताया कि यह पहली बार नहीं था जब उन्हें अपने फोन के हैक होने का शक हुआ हो। मनीषा के मुताबिक इससे पहले भी वह कई बार हैकिंग की शिकायत कर चुकी थी। लेकिन पुलिस ने उन शिकायतों पर भी कोई ठोस कारवाही नहीं की। जबकि उनको पूरा यकीन था कि इन सबके पीछे कौन था। वीडियो में मनीषा ने सीधे-सीधे उस व्यक्ति का नाम तक लिया जिसे वो इन सबका जिम्मेदार मानती थी। रोहतक में कौन है? मैं आपको बता चुकी हूं जो वह तीन लोग हैं। तीन लोगों में से जो एक है पहला हिमांक मित्तल उसकी लोकेशन रोहतक की है और मेरा फोन फिलहाल रोहतक में चल रहा है। यह बात साफ इंडिकेट करता है कि किसने मेरा फोन हैक करवा रखा है जिससे वह मेरी सारी प्लानिंग, सारी बातें, सब कुछ सुन सके, पैसा ले देकर अपने काम करा सके और मेरा असली सच्चाई की जो लड़ाई है उसको हरा सके। मनीषा के इस बयान का सबसे चौंकाने वाला पहलू वो नाम था जो मनीषा ने अपने वीडियो में लिया था। कि हिमांक मित्तल कोई अनजान शख्स, पुराना दुश्मन या बाहरी व्यक्ति नहीं बल्कि मनीषा का अपना सगा भाई था। एक ऐसा रिश्ता जिसे आमतौर पर सुरक्षा, भरोसे और सहारे का प्रतीक माना जाता है। लेकिन मनीषा के लिए यह शख्स उनके जीवन का सबसे बड़ा डर बन चुका था। अपने साथ हो रहे साइबर टॉर्चर के साथ मनीषा ने यह भी बताया कि उनके फोन पर कॉल फॉरवर्डिंग भी एक्टिव कर दी गई थी। ताकि वे किसी से भी बात करें तो उनकी हर बात, हर प्लानिंग और हर कदम की जानकारी अपराधियों तक पहुंच सके। उनकी प्राइवेसी और आजादी दोनों को धीरे-धीरे छीना जा रहा था और शायद इससे भी ज्यादा परेशान कर देने वाली बात तब सामने आई जब उन्हें अपनी Instagram स्टोरी पर एक रील पोस्ट की और फिर उसके व्यूअर्स चेक किए।

उन व्यूअर्स में उन्हें एक ऐसी आईडी नजर आई जिसे देखकर वो खुद भी सन्न रह गई। दरअसल वो आईडी थी उनके पिता धर्मपाल मित्तल की। एक ऐसे व्यक्ति की जो अब इस दुनिया में ही मौजूद नहीं थे। यह पापा जो कि इस दुनिया में नहीं है। अब उनकी आईडी आज भी एक्टिव करके कोई उनका इस्तेमाल कर रहा है। लगातार मिल रही धमकियों, एडमिनिस्ट्रेशन की कथित लापरवाही और इस पूरे मानसिक उत्पीड़न ने उन्हें अंदर तक तोड़ दिया था। उनकी वीडियोस में अब सिर्फ डर नहीं बल्कि थकान, बेबसी और एक ऐसे इंसान की चीख सुनाई देने लगी थी जो हर दरवाजा खटखटा कर थक चुका था। और नहीं सहन होता। नहीं हो रहा मुझसे सहन। यह शब्द सिर्फ एक शिकायत नहीं थे। यह मदद की आखिरी पुकार थी। लेकिन अफसोस जिस मदद का वे इंतजार कर रही थी, वो कभी आई ही नहीं। 13 जून शनिवार की शाम करीब 6:00 बजे आखिरकार गोलियां चल गई। तब सवाल सिर्फ इतना नहीं रह गया कि मनीषा को किसने मारा? सवाल यह भी था कि जब वे जिंदा थी, जब वे बार-बार मदद मांग रही थी, जब वे अपने साथ होने वाले किसी बड़ी साजिश की तरफ इशारा कर रही थी, तब उन्हें बचाया क्यों नहीं गया? इस कहानी का सबसे दर्दनाक पहलू यह भी है कि अब एक 16 साल की बच्ची को अपनी मां के बिना जिंदगी गुजारनी पड़ेगी। इसलिए इस केस को सिर्फ एक क्राइम स्टोरी समझकर मत देखिए। इस वीडियो को पूरा देखिए, समझिए, सवाल पूछिए और अगर आपको लगता है कि किसी इंसान की आवाज को अनसुना करने की कीमत इतनी भयानक नहीं होनी चाहिए तो इस वीडियो को जितना हो सके शेयर कीजिए क्योंकि आज यह मामला सिर्फ मनीषा मित्तल का नहीं रह गया। यह उस 16 साल की बच्ची का भी मामला है जो अपनी मां को खो चुकी है। और शायद अगर हम सब खामोश रहे तो फिर एक और आवाज दबा दी जाएगी। बिल्कुल वैसे ही जैसे मनीषा के गुहारों को दबा दिया गया था। वेलकम टू द शो।

माय नेम इज शाश्वत एंड यू आर वाचिंग द अनटोल्ड स्टोरी ऑफ मनीषा मित्तल। मनीषा सरस्वती मित्तल मूल रूप से हरियाणा के रोहतक की रहने वाली थी। वो बचपन से ही पढ़ाई में काफी तेज थी और अपनी मेहनत के दम पर उन्होंने केमिस्ट्री में पीएचडी की डिग्री भी हासिल की थी। साल 2007 में उनकी शादी हुई और पिछले करीब 10 सालों से वे अपने पति डॉ. सुभाष यादव जो रेवाड़ी में डिप्टी सीएमओ थे उन्हीं के साथ रह रही थी। दोनों की पढ़ाई और प्रोफेशनल अचीवमेंट्स को देखकर यही लगता था कि शायद उनकी जिंदगी काफी सेटल्ड और कंफर्टेबल रही होगी। लेकिन अक्सर जिंदगी की असली कहानी वो नहीं होती जो बाहर से दिखाई देती है। पिछले कुछ समय से शादी में मनमुटाव के चलते मनीषा अपने पति से अलग होकर अपनी 16 साल की बेटी के साथ शिमला में रह रही थी और इस दौरान अगर उनके जीवन में कोई सबसे बड़ा मकसद था तो वह थी उनकी बेटी। मनीषा खुद भी कई बार यह कह चुकी थी कि उनकी बेटी ही उनके जीवन की सबसे बड़ी वजह है। शायद इसलिए हर मुश्किल, हर डर और हर लड़ाई के बीच वे लगातार खड़ी रही क्योंकि उन्हें सिर्फ खुद के लिए नहीं बल्कि अपनी बेटी के भविष्य के लिए भी लड़ना था। मनीषा के पिता धर्मपाल मित्तल ही वो शख्स थे जिन्होंने सरस्वती पैराडाइज इंटरनेशनल स्कूल की नींव रखी थी। उनका सपना था कि बच्चों को बेहतर से बेहतर शिक्षा मिल सके और इसी मकसद के साथ उन्होंने इस स्कूल की शुरुआत की थी। लेकिन वह खुद भी नहीं जानते थे कि नेक इरादों से शुरू हुआ यह संस्थान एक दिन उनके परिवार की बर्बादी का कारण बन जाएगा। स्कूल को स्मूथली चलाने के लिए साल 2005 में पैरामाउंट पब्लिक स्कूल इंटरनेशनल सोसाइटी का गठन किया गया। इस सोसाइटी का एक खास नियम था। वन फैमिली वन मेंबर यानी गवर्निंग बॉडी में शामिल हर मेंबर अलग फैमिली से होना चाहिए। फिर 2007 में मनीषा की शादी हो गई। शादी के बाद कानूनी तौर पर उनकी फैमिली अलग मानी गई और इसी वजह से 15 अगस्त 2007 को धर्मपाल मित्तल ने उन्हें सोसाइटी के गवर्निंग बॉडी में वाइस प्रेसिडेंट बना दिया।

अगले कई सालों तक सब कुछ नॉर्मल चलता रहा। स्कूल चल रहा था, सोसाइटी का काम चल रहा था और बाहर से देखने पर सब कुछ ठीक-ठाक लग रहा था। लेकिन कहते हैं ना कि कई बार सबसे बड़ा तूफान आने से पहले सब कुछ बिल्कुल शांत दिखाई देता है। क्योंकि इसी दौरान पर्दे के पीछे एक ऐसी साजिश तैयार हो रही थी जिसका असर आने वाले सालों में पूरे परिवार पर पड़ने वाला था। इस कहानी का टर्निंग पॉइंट 1 नवंबर 2016 से शुरू होता है। जब मनीषा के सगे भाई हिमांक मित्तल ने स्कूल और उससे जुड़ी संपत्ति पर पूरा कब्जा करने की कोशिश शुरू कर दी। और यहीं से यह मामला सिर्फ एक स्कूल, एक सोसाइटी या किसी पद के विवाद तक सीमित नहीं रहता। यह बदल जाता है एक ऐसी फैमिली बिटियल की कहानी में जहां प्रॉपर्टी और कंट्रोल की लड़ाई ने धीरे-धीरे एक पूरे परिवार को बिखेर कर रख दिया। मनीषा के पिता धर्मपाल मित्तल अपने स्कूल और पढ़ाई के माध्यम से हर बच्चे तक पहुंचना चाहते थे। इसीलिए अब उनका सपना बन चुका था कि सरस्वती पैराडाइज स्कूल की और भी नई ब्रांचेस खोलना। और इसके लिए उन्होंने स्कूल को मॉडगेज पर रखकर करीब ₹8 करोड़ 80 लाख का लोन लिया था। ताकि हिमाचल प्रदेश के थियोग में स्कूल की एक नई ब्रांच शुरू की जा सके। लेकिन फिर महामारी के चलते उनका यह प्रोजेक्ट शुरू नहीं हो सका। नतीजा यह हुआ कि इस पूरी रकम की एफडी बनवानी पड़ी। पैसा अक्सर सिर्फ सुविधा नहीं विवाद भी लेकर आता है। और जब बात इतने ज्यादा पैसों की हो तो ऐसे में नियत का बिगड़ना ना वक्त देखता है और ना ही कोई रिश्ता। साल 2020 में जलने की वजह से मनीषा की मां की मौत हो गई। जहां सभी लोग इसे एक दुखद हादसा मान रहे थे। वहीं मनीषा को यकीन था कि यह सिर्फ एक एक्सीडेंट नहीं था। अपनी टेस्टिमनी में उन्होंने आरोप लगाया कि प्रॉपर्टी विवाद के चलते उनकी मां की हत्या की गई थी और इसके पीछे उनके सगे भाई हिमांक मित्तल का हाथ था। मनीषा के लिए मां को खोना ही एक बहुत बड़ा सदमा था। लेकिन वे इस डर से उभर भी नहीं पाई थी कि इस घटना के सिर्फ 4 महीने बाद उनके पिता धर्मपाल मित्तल की भी मिस्टीरियस कंडीशन में मौत हो गई। सिर्फ 4 महीने के अंदर मनीषा ने अपने मां और पिता दोनों को खो दिया था।

जहां एक तरफ वे अपने माता-पिता के बिछड़ने के दर से जूझ रही थी। वहीं दूसरी तरफ मनीषा ने पाया कि उनके भाई हिमांक मित्तल ने एफडी की रकम निकाल ली और रोहतक को निकल गया। मनीषा के हाथ में जो यह लेटर नजर आ रहा है, यह स्कूल के एक फॉर्मर प्रिंसिपल का लेटर है जो मनीषा के मुताबिक इस बात की पुष्टि करता है कि महामारी के दौरान हिमांग मित्तल पैसा निकालकर रोहताक चला गया। जबकि उस वक्त स्कूल को उन फंड्स की जरूरत थी। मनीषा ने बताया कि जब उन्होंने खुद से प्रॉपर्टी से जुड़े मामलों की जांच करनी शुरू की तो उन्हें पता चला कि हिमांक मित्तल ने फर्जी दस्तावेजों की मदद से धीरे-धीरे पूरी प्रॉपर्टी पर कब्जा कर लिया था। इतना ही नहीं हिमांक उन्हें खुलेआम धमकियां भी देता था और कहता था कि अगर उन्होंने प्रॉपर्टी में अपना हिस्सा मांगने या उस तरफ देखने की भी कोशिश की तो उन्हें जान से मार दिया जाएगा। मनीषा ने यह भी बताया कि हिमांक इस सब में अकेला नहीं था। उनका कहना था कि उसने गोविंद देशवाल नाम के एक व्यक्ति को भी अपने साथ मिला रखा था जो इस पूरी साजिश का हिस्सा था और दोनों ने मिलकर मनीषा के पति सुभाष यादव को भी पैसे का लालच दिखाकर अपने साथ कर लिया था। गोविंद देशवाल जो कि लाडोद गांव का है वह भी इसमें शामिल है। इन्होंने मेरे पति डॉक्टर सुभाष यादव उनको भी अपने साथ पैसे के पावर के दम पर मिला के मेरे साथ मारपिटाई करके बदतमीजी करके मेरे को हर तरह से मरने के लायक छोड़ दिया। जब मनीषा के पति ने भी उनका साथ छोड़ दिया तो वह पूरी तरह से अकेली पड़ गई थी। अब उन्हें सिर्फ खुद की ही नहीं बल्कि अपनी बेटी की भी हिफाजत करनी थी। लेकिन इतनी मुश्किलों के बाद भी मनीषा ने हार नहीं मानी। उनके माता-पिता के निधन के बाद स्कूल की सोसाइटी में कई पोजीशंस खाली हो गई थी।

इसलिए साल 2021 में मनीषा ने नई गवर्निंग बॉडी फॉर्म की ताकि स्कूल के ऑपरेशन में कोई रुकावट ना आ सके। लेकिन इसी दौरान एक और साजिश रची जा रही थी। दरअसल पैरेलल में हिमांग मित्तल ने भी अपनी एक अलग गवर्निंग बॉडी बना ली थी और खुद को सोसाइटी का वाइस प्रेसिडेंट बताने लगा था। अब एक ही सोसाइटी में दो अलग-अलग गवर्निंग बॉडीज मौजूद थी। विवाद बढ़ता गया और मामला इतना उलझ गया कि सच्चाई का पता लगाने के लिए एसडीएम को इंक्वायरी बिठानी पड़ी। यहीं से मनीषा ने अपनी लड़ाई और तेज कर दी। अपने दावों को साबित करने के लिए उन्होंने आरटीआई के जरिए स्कूल और सोसाइटी से जुड़े डॉक्यूमेंट्स निकलवाए और इन्हीं डॉक्यूमेंट्स को खंगालते वक्त उनके हाथ एक ऐसा कागज लगा जो हिमांक मित्तल के पूरे खेल का सबसे बड़ा सबूत था। दरअसल 1 नवंबर 2016 को उनके पिता धर्मपाल मित्तल को एहसास हो गया था कि स्कूल के अंदर कुछ गड़बड़ चल रही है। इसलिए उन्होंने स्कूल की ओरिजिनल प्रोसीडिंग्स और जरूरी डॉक्यूमेंट्स मनीषा को सौंप दिए थे और सोसाइटी के मेंबर्स को एक लेटर लिखकर अपनी चिंता भी जाहिर करना चाहते थे। लेकिन यहीं पर हिमांक ने पूरा खेल खेला। उसने दो अलग-अलग लेटर्स इस तरह से टाइप कर प्रिंट करवाए जिससे दोनों का फॉर्मेट और सीरियल नंबर एक जैसा लगे। भले ही दोनों डॉक्यूमेंट्स के कंटेंट पूरी तरह से अलग हो। फिर हिमांक ने अपने पिता से यह कहकर दोनों डॉक्यूमेंट्स पर साइन करवा लिए कि एक ओरिजिनल कॉपी है और दूसरी उसकी डुप्लीकेट। जबकि असली लेटर का सीरियल नंबर 11 था जिसमें स्कूल में हो रही गड़बड़ियों का जिक्र था। वहीं दूसरे लेटर में यह लिखा गया था कि सोसाइटी के मेंबर्स को बदला जा रहा है। और फिर हिमांक ने सीरियल नंबर्स को टपर करते हुए ओरिजिनल 11 नंबर वाले लेटर को जिसमें स्कूल की गड़बड़ियों की बात की थी उसे रिकॉर्ड से ही हटा दिया और एडीएम ऑफिस में सिर्फ वही डॉक्यूमेंट जमा किया जिसमें लिखा था कि सोसाइटी के मेंबर्स को बदला जा रहा है। मनीषा ने सिर्फ आरोप ही नहीं लगाए बल्कि उन दावों के सपोर्ट में डॉक्यूमेंट्स भी पेश किए और आखिरकार 2 मार्च 2022 को एसडीएम की इंक्वायरी में इस पूरे मामले की तस्वीर साफ होनी शुरू हो गई। इंक्वायरी के दौरान हैंडराइटिंग एक्सपर्ट्स की मदद ली गई और जांच में यह सामने आया कि धर्मपाल मित्तल और नूतन मिश्रा के सिग्नेचर्स फौज करके डुप्लीकेट प्रोसीडिंग्स तैयार की गई थी।

इतना ही नहीं फाइनेंसियल रिकॉर्ड्स की जांच में करोड़ों रुपए की गड़बड़ियां भी सामने आई। जांच का शक हेमांक मित्तल पर गया जिसने फर्जी सिग्नेचर्स के जरिए डॉक्यूमेंट तैयार करके बड़े पैमाने पर फाइनेंसियल फ्रॉड किया था। इन खुलासों के बाद एसडीएम ने अकाउंट्स का ऑडिट करवाने और गड़बड़ी की पुष्टि होने पर एफआईआर दर्ज कराने के ऑर्डर्स दे दिए। ऐसा लग रहा था कि अब सच सामने आ चुका है और शायद अब इंसाफ की शुरुआत होगी। लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई। एसडीएम ऑफिस की इंक्वायरी रिपोर्ट के बाद डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर ने आर्डर दिया कि तुरंत एक तहसीलदार अपॉइंट किया जाए जो साल 2005 से लेकर उस वक्त तक सोसाइटी के जितने भी ओरिजिनल मेंबर्स रहे हैं उनको बुलाकर इंक्वायरी की फाइंडिंग्स उनके सामने रखें और असली गवर्निंग बॉडी की पहचान करते हुए नए इलेक्शंस करवाए। लेकिन गड़बड़ी की इंतहा देखिए कि तहसीलदार ने सभी ओरिजिनल मेंबर्स को बुलाने के बजाय सिर्फ तीन लोगों को बुलाया और उनसे ही अपने लोग लेकर आने को कहा। फिर इसके बाद एक फर्जी इलेक्शन करवाया गया। यानी एक तरफ इंक्वायरी में फर्जरी और फाइनेंसियल इर्रेगुलरिटी सामने आ चुकी थी और दूसरी तरफ उसी विवाद को सुलझाने की प्रक्रिया पर ही नए सवाल खड़े होने लगे। ओरिजिनल लेटर आप देख सकते हैं ओरिजिनल उनके साइन है। तीन लोगों को उन्होंने बुलाया था इलेक्शन के लिए। जबकि ऑर्डर्स के अंदर साफ है कि जितने भी मेंबर्स हैं उनको तहसीलदार जी बुलाएंगे। इसके बाद हिमांक मित्तल ने पुराने मेंबर्स को हटाकर खुद को स्कूल का प्रेसिडेंट घोषित कर दिया और यह सब देखकर मनीषा ने इसका विरोध करते हुए इसके खिलाफ अपील दाखिल कर दी। आखिरकार 16 दिसंबर 2025 को इस अपील का फैसला मनीषा के हक में आया। जब रजिस्ट्रार ने पूरे मामले की दोबारा इन्वेस्टिगेशन करने के ऑर्डर्स दे दिए। इसी के बाद 22 जनवरी 2026 को मनीषा ने एसपी को इनफॉर्म किया कि वे स्कूल के प्रिमाइससेस के अंदर जाना चाहती हैं। 26 जनवरी को संजली पुलिस स्टेशन की एसएओ की परमिशन के साथ वे स्कूल के अंदर गई। लेकिन स्कूल पहुंचते ही कहानी ने एक और मोड़ ले लिया। जब मनीषा के खिलाफ हिमांग मित्तल, गोविंद देशवाल और स्कूल के एक महिला कर्मी ने शिकायत दर्ज करवाई जिसमें यह आरोप लगाया गया कि मनीषा ने ताले तोड़कर स्कूल में जबरदस्ती एंट्री की और चौकीदार रविंद्र के साथ मारपीट की। बट जब पुलिस ने पूरी घटना की जांच की तो चौकीदार रविंद्र ने मारपीट की बात से ही इंकार कर दिया। एसएओ ने पूरे मामले का हर पहलू समझा और उन्हें एहसास हुआ कि यहां कभी भी कानून व्यवस्था की स्थिति बिगड़ सकती है। जांच के बाद एसएओ ने हेमांक मित्तल, गोविंद देशवाल और महिला कर्मी के खिलाफ अपनी रिपोर्ट तैयार करके एसडीएम ऑफिस और एसपी के पास भेज दी। इतना ही नहीं एसओ ने खुद मनीषा को आगाह किया कि आपकी जान को खतरा हो सकता है। इसलिए अपनी सुरक्षा का ध्यान रखिए और अगर कोई परेशानी आती है तो वी आर विद यू। यह शायद पहली बार था जब किसी पुलिस अधिकारी ने भी इस पूरे विवाद को सिर्फ प्रॉपर्टी डिस्प्यूट नहीं बल्कि एक पॉसिबल जानलेवा खतरे के रूप में देखा था। लेकिन इसके बाद भी मनीषा की मुश्किलें कम नहीं हुई। कोर्ट के ऑर्डर्स उनके हक में आने के बाद भी जब उन्होंने स्कूल के बेहतर ऑपरेशन और उसकी प्रोग्रेस को लेकर प्रिंसिपल नीरज वर्मा से बात करनी चाही तो प्रिंसिपल ने उन्हें मिलने से ही मना कर दिया। प्रिंसिपल नीरज वर्मा ने यहां तक कह दिया कि उन्हें कोर्ट के ऑर्डर समझ नहीं आते और वे सिर्फ हिमांक मित्तल की बात मानेंगे। बाद में हिमांक मित्तल और प्रिंसिपल नीरज वर्मा ने मिलकर पेरेंट्स के फर्जी सिग्नेचर के साथ एक लेटर भी तैयार करवाया जिसमें यह दिखाया गया कि मनीषा स्कूल में घुसकर डिस्टरबेंस क्रिएट कर रही है। क्या मैंने यहां पे कोई डिस्टरबेंस क्रिएट की? इर्रेगुलरिटी की, इंटरफेरेंस किया स्कूल के अंदर कि जैसे आपके बच्चों की पढ़ाई में दिक्कत हो रही है या आपके पास में कोई कोर्ट के ऑर्डर्स है कि मैं यहां क्यों नहीं रह सकती? आप अगर मुझे एक रीज़न दे दीजिए। आई विल मैं यहां से तुरंत चली जाऊंगी इमीडिएटली।

मनीषा बार-बार यही कहती रही कि वे स्कूल में किसी भी तरह के डिस्टरबेंस क्रिएट करने नहीं आई हैं। लेकिन उनकी बात का सामने वाले लोगों पर कोई असर होता नजर नहीं आ रहा था। और फिर 1 अप्रैल की शाम करीब 5:00 बजे हेंग मित्तल अपने साथ कई लोगों और कुछ गाड़ियों को लेकर स्कूल के अंदर घुस वहां अपने ताले लगाने के बाद मनीषा के साथ बदतमीजी करता है और बार-बार उसे जान से मारने की धमकी देने लगता है। कि यह मेरे साथ बदतमीजी कर रहे हैं। उल्टा मेरे को धमकी देकर जाते हैं। तुझे देख लेंगे। तुझे जान से मार देंगे। हिमां की धमकियों से परेशान मनीषा ने जब पुलिस से मदद की गुहार लगाई तब उन्होंने भी वहां आने से मना कर दिया कि क्या यह जब मुझे मार देंगे मैं अकेली हूं यहां पे अपनी बेटी के साथ में तभी यह लोग मेरी मदद करेंगे। पुलिस से मदद ना मिलने पर मजबूरन मनीषा Facebook पर लाइव आती हैं ताकि हिमांक उनके साथ कुछ गलत करने से डरे। वे बताती है कि हिमांक ने उनके फोन को हैक करवाया। उनकी बेटी की फोटो के नीचे गंदे गंदे कमेंट्स करवाए और उसे भी जान से मारने की धमकी दी। आज से ठीक चार-प दिन पहले लगातार मेरा फोन हैक करवा के मेरे को गाली गलौज इतने गंदे लेवल की मेरी बेटी की फोटो के ऊपर इतने गंदे कमेंट्स इतना टॉर्चर और प्रेशराइज करके इस लड़के ने रखा है कि मैं क्या करूं अगर हमारा कोर्ट में केस चल रहा है तो कोर्ट में चले ना यह कौन सा तरीका है कि मैं जान से मार दूंगा मैं देख लूंगा मनीषा बार-बार कहती रही कि हिमांग पर हरियाणा में पहले से ही आईपीसी 506 के तहत एफआईआर दर्ज है। उनका कहना था कि इतने सबूत, रिपोर्ट्स और शिकायतों के बावजूद भी पैसे और पार के दम पर वो खुलेआम उन्हें जान से मारने की धमकी दे रहा है। लेकिन उनकी हर कंप्लेंट, हर अपील और हर गुहार के बाद भी सिस्टम ने ऐसी कोई कार्रवाही नहीं की जो उनकी जान बचा पाती और आखिरकार जिस बात का डर मनीषा बार-बार जताती रही वो सच हो गया।

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और एफएफएफएल टीम मौके पर पहुंची और क्राइम सीन से सभी जरूरी सबूत जमा किए। इन्वेस्टिगेशन और सीसीटीवी फुटेज की जांच में पता चला कि दोनों हमलावर एक सफेद स्विफ्ट कार से आए थे। पुलिस से बचने के लिए उन्होंने हरियाणा की ओरिजिनल नंबर प्लेट हटाकर हिमाचल की HP10 सीरीज वाली फर्जी नंबर प्लेट लगा रखी थी और चेकिंग से बचने के लिए मेन हाईवेज की जगह लिंक रोड का इस्तेमाल किया था। पुलिस ने अलग-अलग टीम्स बनाकर आई विटनेसेस से पूछताछ, सीसीटीवी एनालिसिस और टेक्निकल सर्विलेंस शुरू किया। इन सभी सबूतों और एक स्पेशल ऑपरेशन की मदद से पुलिस ने सिर्फ 40 घंटों के अंदर दोनों आरोपियों को हरियाणा के रोहतक से गिरफ्तार कर लिया। पहले आरोपी की पहचान 22 साल के आशीष अहलाबाद के रूप में हुई जो हरियाणा के झज्जर जिले के दुजाना गांव का रहने वाला था और उसके खिलाफ पहले ही आर्म्स एक्ट, अवैध वसूली और BNS 308 समेत कई मामले दर्ज थे। दूसरा आरोपी 25 साल का दीपक बुधवार था। जिसके खिलाफ भी आर्म्स एक्ट और BNS 308 समेत चार क्रिमिनल केसेस दर्ज थे। पुलिस के मुताबिक दोनों पेशेवर शूटर्स से और पूछताछ के दौरान दोनों ने मनीषा पर फायरिंग करने की बात कबूल कर ली। मनीषा की हत्या के तुरंत बाद हिमांक ने खुद को इनोसेंट बताते हुए इंटरनेट पर एक वीडियो पोस्ट की और अपनी चोट का हवाला देते हुए उसने खुद को ही एक विक्टिम बता दिया कि मेरी इसमें कोई इन्वॉल्वमेंट नहीं है। कल सुबह से पुलिस भी मेरे घर पर आई हुई है। मुझसे पूछताछ कर रही है। मैं हर चीज में सपोर्ट करने के लिए कोपरेट करने के लिए तैयार हूं। ऑलरेडी मेरे साथ भी एक हमला हो चुका है। 1 जून को मेरे साथ भी हमला हुआ था। मेरे एक पैर में फ्रैक्चर भी है। एक हाथ में फ्रैक्चर है। दूसरे हाथ और दूसरे पैर का मास भी फटा हुआ है। एक तरफ हिमांक लगातार खुद को बेगुनाह बताता रहा।

वहीं दूसरी तरफ उसने इस पूरी घटना के लिए उल्टा मनीषा की संगत और उनके फैसले को जिम्मेदार ठहराने की कोशिश की। लेकिन पुलिस की इन्वेस्टिगेशन अब सिर्फ बयानों पर नहीं सबूतों पर आगे बढ़ रही थी। जब इन्वेस्टिगेटर्स ने शूटर के कॉल रिकॉर्ड्स के साथ उनके बैंक ट्रांजैक्शंस खगाले तो एक बेहद अहम कड़ी सामने आई। मर्डर से कुछ ही दिन पहले शूटर दीपक बुधवार के अकाउंट में ₹00 ट्रांसफर हुए थे। पुलिस के मुताबिक यह रकम हिमांक मित्तल के करीबी गोविंद देशवाल के अकाउंट से भेजी गई थी। इतना ही नहीं टेक्निकल इन्वेस्टिगेशन में यह भी सामने आया कि वारदात से कुछ दिन पहले गोविंद, आशीष और दीपक तीनों की मोबाइल लोकेशन शिमला में एक ही एरिया में मौजूद थी। अब पुलिस ने गोविंद के अकाउंट की भी गहराई से जांच की और इन्वेस्टिगेशन में यह पता चला कि मर्डर से कुछ दिन पहले हिमांक मित्तल ने गोविंद के अकाउंट में करीब ₹8.5 लाख ट्रांसफर किए थे और मर्डर से 2 दिन पहले ही गोव

Sonu Baali
Sonu Baalihttp://khasharyananews.com
संस्थापक, खास हरियाणा न्यूज़- हरियाणा की ज़मीन से जुड़ा एक निष्पक्ष और ज़मीनी पत्रकार। पिछले 6+ वर्षों से जनता की आवाज़ को बिना किसी एजेंडे के सामने लाने का प्रयास कर रहे हैं। देसी अंदाज़ और सच्ची पत्रकारिता में विश्वास रखते हैं। 🌐 khasharyana.com
RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Recent Comments