Monday, July 27, 2026
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Kiara Advani vs Yash: एक ही सीन, लेकिन ट्रोल सिर्फ एक्ट्रेस क्यों?

क्या लड़का और लड़की को देखने के नजरिए में यह समाज दोगला है? वेल, टॉक्सिक के ट्रेलर के बाद यह थॉट मेरे मन में बार-बार आ रहा है। आपने देखा टॉक्सिक का ट्रेलर? वेल कैसा है वो आप कमेंट सेक्शन में बता सकते हैं। लेकिन कमेंट सेक्शन में लोगों ने किियारा आडवाणी को बहुत सारी गालियां दी है। लोगों ने लिखा कि यार शर्म करो किियाारा शादी के बाद कुछ करोड़ रुपए के लिए तुमने अपने आप को बेच दिया। किसी ने कहा कि यार तुम शादीशुदा औरत हो। एक बच्चे की मां हो। उसके बावजूद यह सीन कैसे कर सकती हो? उस बच्ची का भगवान मालिक है। कईयों ने सिद्धार्थ मल्होत्रा को टैग कर रखा था। कहा यार तुम्हारी पत्नी है। तुम कैसे अलऊ करते हो? और वो कमेंट लाइक कर रहे हो तुम जहां पर वो गंदी गंदी फोटो डाल रही है। कोई लिख रहा था कि सात साल से कोई हिट नहीं है इसलिए इज्जत बेचकर कर करियर बचा रही है।

पैसों के लिए बॉलीवुड वाले कुछ भी कर सकते हैं। यह लड़कियां कैसे करती हैं? और ऐसे बहुत सारे गंदे गंदे भद्दे भद्दे कमेंट्स कई तो ऐसे जो पढ़ नहीं सकता था। कुल मिलाकर क्योंकि वो शादीशुदा हैं इसलिए उनको कैरेक्टरलेस दिखाने की कोशिश की जा रही थी। उनके हस्बैंड को, उनकी बेटी को, उनके परिवार को टारगेट करने की कोशिश की जा रही थी। और जब ये सारे कमेंट्स मैं पढ़ रहा था तो मुझे एक बात का एहसास हुआ कि जिस सीन के लिए जिस फ्रेम के लिए जिस फिल्म के लिए किियारा आडवाणी को भर-भर के गालियां पड़ रही थी उसी सीन उसी फ्रेम उसी फिल्म में एक दूसरा इंसान भी है जिसका नाम यश है और वो भी शादीशुदा है। वो तो 2016 से शादीशुदा है। उनके दो बच्चे हैं और मैं बहुत बड़ा फैन भी हूं यश का। आई मीन क्या फिल्म थी यार केजीएफ। लेकिन उनका कमेंट सेक्शन जब आप देखेंगे तो वहां अलग कहानी है। उनके कमेंट सेक्शन में लिखा गया है कि भाई बॉस इज बैक रॉकी भाई फाड़ डाला। रॉकी भाई धुरंधर पर भारी पड़ेगा। किसी ने लिखा इस बार भाई ने ऋतिक जैसी बॉडी बनाई है। एक कमेंट तो और खतरनाक था। लिखा भाई नेक्स्ट इमरान हाशमी है। हर सीन में छाया है। क्या बढ़िया रोमांस किया।

एंड आई टूक अ पॉज। सीरियसली नेक्स्ट इमरान हाशमी। मतलब वो एक सीन जिसके लिए किरा आडवाणी को पूरा समाज कैरेक्टरलेस कह रहा है। उसी सीन के लिए यश को कॉम्प्लीमेंट दिया जा रहा है। मतलब आदमी करे तो अचीवमेंट और औरत करे धंधा। एक सीन दो कलाकार दोनों शादीशुदा दोनों बच्चों के मां-बाप। लेकिन समाश के तौर पर हमने कैरेक्टर सर्टिफिकेट सिर्फ केआर आडवाणी को दिया। और यहीं से मेरे मन में सवाल आया। क्योंकि कहानी सिर्फ एक एक्ट्रेस की नहीं है। यह कहानी हर उस औरत की है जो काम करती है। और मैं बिल्कुल ज्ञान देने के मूड में नहीं हूं। मैं आपको क्लियर कर दूं कि मैं जानता हूं कमेंट सेक्शन में बहुत गालियां आने वाली है। लेकिन मैं फिल्म के सीन सही है या गलत यह सीन करने चाहिए या नहीं करने चाहिए। मैं इस पर कोई टिप्पणी नहीं कर रहा। हो सकता है आपको सीन बहुत पसंद आए। हो सकता है आपको सही लगे। हो सकता है आपको गलत लगे। मैं दोनों तरह के जज्बातों की इज्जत करता हूं। मैं किियाारा आडवाणी से पैसे लेकर या उनको प्रमोशन के लिए भी कमेंट नहीं कर रहा हूं। यह भी मैं क्लियर कर दे रहा हूं क्योंकि आज जो किरा के साथ है कल यही दीपिका के साथ था।

उससे पहले प्रियंका चोपड़ा के साथ था। बीच में काजोल के साथ आया था। आगे कोई और हीरोइन रहेगी। नाम बदलते रहते हैं। कहानी यहां जो है वो दूसरी है। और मैं यह भी क्लियर कर दूं कि मैं यश के खिलाफ भी नहीं हूं। मैं जैसा कि पहले भी क्लियर कर चुका हूं कि मैं यश को पसंद करता हूं। यह वीडियो देखकर लोग यश को भी जज मत करें। गालियां देने मत पहुंचे। उनकी पत्नी और उनके बच्चे को बिल्कुल मत घसीटे। मतलब यह तो मैं डिस्क्लेमर देके क्लियर कर रहा हूं। ये सवाल सिर्फ इसलिए उठा रहा हूं कि यार हम समाज के तौर पर दोगले हैं क्या? जो नहीं जानते उन्हें फिर से समझाते हैं। किरा आडवाणी इंडस्ट्री में 11 साल से हैं। 2023 में सिद्धार्थ मल्होत्रा शादी की थी। पिछले साल एक बेटी की मां बनी। यश की फिल्म टॉक्सिक में आ रही है। ट्रेलर आया आग लग गई। आग के साथ वो कहानियां है जो मैंने शुरू में बताई। करियर डूब रहा था। परिवार ने मना किया होगा। पैसा जीत गया। कैसे मुंह दिखाएगी? पैसे के लिए लोग कुछ भी बातें हैं। नंगी बहुत बहुत सारी चीजें। अब यहां पर एक सवाल पूछिए। मतलब एक तो हमें किसी के घर की बातचीत पता नहीं। फिर भी हमने सब कुछ लिख दिया। और एक खबर यह भी बीच में उड़ाई गई थी कि किरा को घर वालों ने मना किया। मेकर्स ने कहा सीन करोगे वो खुद आई। बहुत सारी बहुत सारी थ्योरीज इसको निकल कर आई लेकिन कहानी बिक चुकी थी।

कहानी सेट हो गई थी कि किियारा आडवाणी बेशर्म है लालची है। और यह सिर्फ मैं महसूस करके नहीं बोल रहा। मैंने बकायदा कमेंट सेक्शन एक्स पर YouTube पर इनफैक्ट Instagram पर भी उठे देखे हैं। बहुत सारे बहुत सारे देखे मैंने मतलब एक दो नहीं आप जाओ एक्स पे और कमेंट्स पढ़ने शुरू कर दो। सिंपल लेकिन अब यहां पर कुछ सवाल पूछने चाहिए। मुझे लगता है कि आरा आडवाणी को टॉक्सिक के ट्रेलर आने के बाद गंदे सीनंस को लेकर जो ट्रोल किया जा रहा है वो यश को तो नहीं किया जा रहा। शादीशुदा दोनों दोनों बच्चों के मां-बाप और इसमें भी एक इंटरेस्टिंग सवाल कि सिद्धार्थ मल्होत्रा ने अलऊ कैसे किया? अब ये बहुत इंपॉर्टेंट शब्द है। अलाऊ। मैं चाहता हूं इस सवाल को आप एक बार बड़े प्यार से आराम से सुन। अलऊ। बस इस शब्द में सारी कहानी है। देखो किियाारा आडवाणी कोई सामान तो है नहीं। वो 30 साल से ऊपर की कामयाब प्रोफेशनल है। 11 साल से खुद काम कर रही है। लेकिन हमारे दिमाग में शायद समाज के तौर पर हमेशा यह होता है कि औरत को परमिशन चाहिए। पहले पापा अलऊ करते हैं, फिर पति अलऊ करता है। थोड़े और समय बाद बेटा भी अलऊ करता है। और एक औरत की जिंदगी इसी परमिशन परमिशन में निकल जाती है। चलो एक पल के लिए मान भी लेते हैं कि अलऊ वाला सवाल जायज है।

लेकिन क्या समाज ने यह पूछा कि यश की पत्नी राधिका ने क्या उन्हें अलऊ किया? क्योंकि मुझे यह सवाल नहीं दिखा। राधिका जी भी दो बच्चों की मां है। उनके घर में भी वही सीन गया होगा। उनके भी रिश्तेदार होंगे। उनकी भी सोसाइटी होगी। उनकी भी दोस्त होंगी। वो भी सोशल मीडिया पर एक्टिव होंगे या उनके बच्चे एक्टिव होंगे या उनके परिवार के लोग एक्टिव होंगे। लेकिन समाज के तौर पर किसी ने लिखा नहीं कि राधिका ने यश को अलऊ किया। जबकि सिद्धार्थ मल्होत्रा के कमेंट लाइक करने को लेकर भी सिद्धार्थ मल्होत्रा को 10,000 गाली पड़ी। अब सिद्धार्थ के लिए तो दो टैग तैयार है। एक बेचारा पति बोल रहा है, दूसरा बेशर्म पति। लेकिन राधिका जी के लिए ना कोई सिंपथी है, ना कोई सवाल का जिक्र। अब एक सेकंड के लिए आप खुद को उस औरत की जगह रखकर देखिए कि आपके पति की फिल्म पर पूरा देश चीख रहा है। कि यार बहुत ज्यादा सेक्सीी सीन कर दिए। भाई, इतना कर लेते पिक्चर में। कि यार आडवाणी को करना नहीं चाहिए यार। मतलब कोई और मजे कर रहा है और यहां यश को लेकर किसी ने जिक्र नहीं किया। सिद्धार्थ के लोगों को बुरा लग रहा है लेकिन राधिका जी के लिए बुरा नहीं लग रहा। किियारा को परमिशन चाहिए लेकिन यश को परमिशन नहीं चाहिए। यानी ये गुस्सा जो है आसान शब्दों में कहें वैल्यूस का नहीं है। वैल्यू्यूज होती तो दोनों घर की फिक्र होती। और सबसे बड़ा इल्जाम जानते हैं क्या है? कि आरा आडवाणी ने पैसों के लिए टॉक्सिक में यश के साथ रोमांस किया। ओके। चलिए एक सेकंड के लिए मान लेते हैं कि अच्छी फीस देकर उन्होंने यह रोल एक्सेप्ट किया होगा। लेकिन मेरे भाई जिस सीन को लेकर तुम किियाारा को गरिया रहे हो जिस फिल्म को लेकर यश ने भी तो वो फिल्म चैरिटी में नहीं बनाई होगी। मतलब पूरी इंडस्ट्री तो ऐसे ही चलती है ना भाई।

हर एक्टर पैसे, नाम और करियर के लिए रोल चुनता है। और बाकी अलाउ वाली बात है तो फिर हमने पहले ही कहा कि अगर किियाारा आडवाणी को परमिशन चाहिए होगी सिद्धार्थ से तो यश को भी तो चाहिए होगी। अगर किियारा के लिए आपको बुरा लग रहा है कैसे कर सकती है? तो यश के लिए क्यों नहीं बुरा लग रहा? कि यार कैसे कर सकती? तुम भी दो बच्चों के बाप हो। क्योंकि शादीशुदा दोनों, दो बच्चों के बाप दोनों और हम और आप भी तो सैलरी के लिए करते हैं पैसों के लिए। कई बार कई फैसले मतलब मैं इस सीन को जस्टिफाई नहीं कर रहा हूं। मैं सिर्फ थॉट प्रोसेस की बात कर रहा हूं। थॉट प्रोसेस की कि यश की फीस उनके एंबिशन पर हैशटैग नहीं चल रहा। लेकिन किियारा ने अगर अच्छा पैसा देखकर फिल्म साइन कर ली तो सवाल है और यह शरीर बेचने वाली भाषा कितनी आसानी से हम एक इंसान के लिए लफ्ज़ देते हैं वो भी उस काम के लिए जो पूरी क्रू के सामने मतलब अकेले में नहीं होता है रिकॉर्ड ना पूरी टीम होती है प्रोफेशनल तरीके से कैमरा लाइट बहुत सारे लोग होते हैं उसके बाद दो एक्टर्स शूट करते हैं यश की हां हमें हां लगती है यश का फैस सला प्रोफेशनल फैसला लगता है लेकिन किियारा वो बिकती हुई नजर आती है। कहानी यह है कि औरत की रजामंदी को समाज रजामंदी मानता ही नहीं। स्क्रीन पर गोली चलाने वाले को हम मर्डर नहीं कहते। स्क्रीन पर डॉक्टर बनने वाले से हम असली सर्जरी नहीं करवाते। लेकिन स्क्रीन पर रोमांस करने वाली औरत को हम कैरेक्टरस कह देते हैं।

घर बेचने वाली, इज्जत बेचने वाली, शरीर बेचने वाली। और एक कड़वा सच बोलूं अगर आप लोग बुरा ना माने। जो लोग सबसे ज्यादा कमेंट कर रहे हैं ना किरा ने अपनी इज्जत बेच दी कर दिया। यही वो लोग हैं जो सिनेमा हॉल में जाएंगे वो सीन देखने के लिए और वहां सीटी मारेंगे। बाहर लौट कर लिखेंगे हे साली यही दोगलापती है। और ये बहुत टॉक्सिक है। बहुत टॉक्सिक दोगलापती है। और जाते-जाते एक वो इंपॉर्टेंट वो लाइन जो किियारा यश की मूवी टॉक्सिक में मुझे सबसे ज्यादा हिपोक्रेट लगी है। बच्ची की मां होकर किियारा यह कैसे कर सकती है? हम ना समाज के तौर पर मां शब्द के साथ जानते हैं क्या करते हैं? हम मां को महान बोलते हैं। देवी बोलते हैं, त्याग की मूर्ति बोलते हैं। और फिर उसी महानता को धीरे-धीरे उसका पिंजरा बना देते हैं कि मां बन गई। अब सपना बंद, करियर बंद, पहचान बंद तो सिर्फ मां है। पिता के साथ इतना कांसेप्ट नहीं है क्योंकि होता तो यश भी तो दो बच्चों के पिता है। किसी ने नहीं लिखा कि यार दो बच्चों के बाप होकर तुम ये कैसे कर सकते हो? बॉलीवुड में जितने मेल एक्टर हैं, जितने मेल एक्टर हैं वो सब रोमांस करते हैं शादी के बाद। फ्रॉम खान टू कुमारस टू और एक्स वाई जेड देवगंस एंड एवरीवन। सब रोमांस करते हैं अपने ऐसे आधी उम्र की लड़कियों के साथ और कभी किसी ने लिखा कि यार तुम पिता होकर कैसे करते हो?

अरे कितनों के पिता तो बार-बार शादी भी कर रहे हैं। पिता बनने से आदमी करियर नहीं रुकता। हमारे यहां अगर कोई क्रिकेटर बच्चा पैदा होने के अगले दिन से मैदान पे उतर कर मैच खेलने लगे तो हम कहते हैं यार देश के लिए सर्विस कर रहा है। हीरो है यार हमारा। कोई एक्टर वो आ जाए। क्या कमिटेड आदमी है यार। यह होती कमिटमेंट। लेकिन अगर औरत बच्चा पैदा होने के बाद सेट पर आ जाए। हम कहेंगे यार क्या बेशर्म औरत है यार। मतलब घर परिवार देखना चाहिए था। और एक सवाल और चल रहा था कि 30-40 साल की एक्ट्रेस क्यों लेते हैं यार? यंग अनमैरिड लड़कियां रखनी चाहिए। मतलब कहानी यह दिक्कत सीन से नहीं है। दिक्कत इस बात से है कि किियारा शादीशुदा है। औरत है, एक मां है और अपना काम कर रही है। और परमिशन नहीं मांग रही है। ये वाला सवाल थोड़ा ज्यादा चुभ रहा है। बहुत सारे लोगों को बट इसमें बहुत सिंपल सा मेरा सवाल है कि आओ लड़ते नहीं है। एक सिंपल सवाल का जवाब दो मुझे। 55 60 65 70 साल का साउथ से लेकर बॉलीवुड का हीरो जब वो अपनी बिटिया की उम्र की हीरोइन के साथ नाचता है रोमांस करता है और इंटिमेट सीन करता है कभी कोई पूछा कि रिटायर कब हो गए और ये किसी एक हीरोइन को नहीं फेस करना पड़ा आप याद करो दीपिका ने शादी के बाद गहराइयां की जबरदस्त रोल करीना ने की थी की एन का जबरदस्त रोल प्रियंका ऐश्वर्या जिसने भी शादीशुदा होने के बाद कोई भी ऐसा सीन किया जिसमें आए सीधे उसे डिफाइन कर दिया लोगों ने और जिन एक्ट्रेस ने शादी के बाद ऐसे रोल छोड़ दिए उन्हें फौरन यह संस्कारी है। ये टैग दे दिया गया। मर्दों को लेकर कोई टैग नहीं है। कोई टैग नहीं कहीं कुछ नहीं। मतलब इस पूरे मामले को अगर आप बॉलीवुड से उठाकर अपने घर में भी चेक करेंगे तो आपको कहानी यहां भी समझ में आएगी। चलिए अब आपसे पूछते हैं। आपकी बहन नौकरी करती है? तो शादी के बाद किसी ना किसी ने तो जरूर पूछा होगा ना कि ससुराल वाले अलऊ करते हैं क्या? या कई बार हमारे यहां समाज में लोग कहते हैं हमने अपनी बहू को अलऊ कर रखा है। हमने अपनी बीवी को अलऊ कर रखा है। थोड़ा लेट आए मोहल्ले में बात शुरू आती है। पत्नी अगर काम के सिलसिले में मेल कोलीग के साथ बाहर जाए तो रिश्तेदार भ चढ़ा लेते हैं।

लेकिन आपके भाई से, आपके पति से कभी किसी ने सवाल नहीं पूछा होगा। तो किियारा के साथ जो हो रहा है सोशल मीडिया पर वो कोई नई बीमारी नहीं है। वो वही हमारे घरों की पुरानी टॉक्सिक सोच है। उसी का बस बड़ा वर्जन है। फर्क सिर्फ इतना है कि पर्दे पर एक्ट्रेस है इसलिए दिख रहा है। हमारे घर में रोज होता है इसलिए दिखता नहीं। और बाकी भाई किियारा की बेटी बहुत छोटी है। एक दिन वह बड़ी होगी, इंटरनेट पर पढ़ेगी। उसके दिमाग में दो ही सवाल आएंगे। या तो मेरी मां ने गलत किया था और या मेरी मां के साथ गलत हो रहा था। और दोनों में से जो भी जवाब वो सुनेगी समाज के तौर पर वो हमारी हार होगी। ये सोचिएगा अपनी बेटियों को यही छोड़ के जाएंगे। बाकी मैं जानता हूं कुछ लोग इसके बाद भी उत्पात मचाने मेरे कमेंट सेक्शन में आएंगे। मैं जानता हूं लोग लिखने आएंगे और जो सवाल वो लिखेंगे उसका जवाब मैं देता हूं। क्योंकिरा आडवाणी यश की फिल्म टॉक्सिक पर्यारा को ट्रोल करने वाले अपनी टॉक्सिटी कमेंट सेक्शन में फैलाएंगे। वो शायद मुझ पर भी इल्जाम लगाएं। कह रहे हैं फेमिनिस्ट एजेंडा चला रहे हैं मर्दों के खिलाफ वीडियो बनाई है। भाई साहब मैंने किसी मर्द के खिलाफ एक भी शब्द नहीं बोला। क्योंकि किियारा को ट्रोल करना मर्द औरत की कहानी नहीं है। यहां कहानी है कि एक तराजू एक तरफ झुका हुआ है। मैं तो सिर्फ इतना पूछ रहा हूं कि जो पैमाना किियाारा के लिए है वो यश के लिए क्यों नहीं है? जो करीना दीपिका के लिए है वो बाकी सारे मेल एक्टर्स के लिए क्यों नहीं है?

अगर पैमाना शादीशुदा है कि शादीशुदा होके यह सीन नहीं करना है। सबको नहीं करना चाहिए ना। भाई औरत से दिक्कत क्यों है? और इसको आप एजेंडा कहते हैं तो एजेंडा ही सही क्योंकि आप ही लोग तो घर में कहते हैं हमने अपने घर में बेटी को अलऊ किया है पढ़ने के लिए। अलऊ किया है कॉलेज जाने के लिए। अलऊ किया है जॉब करने के लिए। दूसरा कमेंट शायद हो सकता है आ जाए कि तुम में संस्कार नहीं है यार। चलो संस्कार की बात भी कर लेते हैं। संस्कार तो यह है ना भाई। किसी की मां किसी की बेटी को गाली नहीं देते। और इल्जाम लगाओ तो सबूत देते हैं। अफवाह पर चरित्र नहीं तय करते। तो संस्कार किसके पास हुए? उन लोगों के जो एक औरत को उसी चीज के लिए गाली दे रहे हैं जिसके लिए उस मर्द को अरे भाई इमरान हाशमी बन गया अपना दोस्त। अरे फाड़ दी भाई वो भी आप देख लेना। और संस्कार क्या सिर्फ बेटी बहू पर लागू होती है। बेटों पर नहीं। और तीसरे लोग सीधे गरियाने आएंगे। गाली देने। भाई इस वीडियो का पूरा मुद्दा यही था। हमारा समाज तर्क की जहां गाली थी जवाब देता है। तो तुम्हारी गाली मेरे खिलाफ नहीं मेरे वीडियो के पक्ष में ही है। और ये सोचना असली टॉक्सिक कौन है? कि आरा घर में क्या बात हुई? यश के घर में क्या बात हुई? ये उनका मसला है। कि आरा का पति है। यश की पत्नी है। वो दोनों एडल्ट हैं। वो दोनों भी एडल्ट हैं। यानी चार समझदार एडल्ट हैं। दो परिवार है। आपसी समझ है। जिसकी शादी फैसला उसका अब आप भी कह सकते हो कि भैया तुम काहे वीडियो बनाए? फिर सवाल अच्छा है जवाब भी दे दे रहे। उनका फैसला निजी है। लेकिन जब लाखों लोग मिलकर एक औरत को सरेआम गाली दे रहे हैं तो ये निजी नहीं है। ये सबकी प्रॉब्लम है। और मैं उनके फैसले पर नहीं बोल रहा। मैं उन गालियों पर बोल रहा हूं जो सिर्फ एक को पड़ रही है। सवाल पूछना है तो कंसेंट में पूछिए। स्क्रिप्ट में पूछिए। जेंडर पर भी। बस इतनी सी कहानी थी इसलिए वीडियो था। बाकी वीडियो की शुरुआत में हमने आपको कुछ कमेंट सुनाए थे। अब दोबारा उस कमेंट्स को सुनिएगा। बस इस बार नाम बदला है। अबे शर्म करो यश यार। पैसों के लिए साला तुमने इज्जत बेच दी।

दो बच्चों के बाप होकर ये सब सीन कर रहे हो। अरे राधिका पंडित तुम्हारा पति कैसा आदमी है यार? तुमने कैसा अलाउ कर दिया? बेशर्म पत्नी अरे कैरेक्टरलेस आदमी है। अजीब लग रहा है ना आपको सुनकर? चुभ भी रहा होगा। बस यही पूरी मेरी वीडियो की बात थी। जो बात यश के लिए चुभ रही है वो किियारा के लिए नॉर्मल लग रही है। और जिस दिन इस सवाल का जवाब मिल जाएगा कमेंट सेक्शन में जरूर बताइएगा। क्योंकि टॉक्सिक सिर्फ फिल्म का नाम नहीं है। टॉक्सिक वो नजर है जो एक ही फ्रेम में औरत को विलेन और आदमी को हीरो बनाती है। और वो सीन पर्दे पर 2 मिनट का था लेकिन समाज में कई 100 सालों से चल रहा है। और इस सीन पर कट बोलने का काम किसी डायरेक्टर का नहीं होगा। इस बार हमें कट करना होगा। सोचिएगा जरूर। बाकी जाते-जाते यह वीडियो ना सींस के सपोर्ट में है ना यश के खिलाफ। सवाल सिर्फ एक है एक जैसे काम पर सजा अलग-अलग क्यों?

Sonu Baali
Sonu Baalihttp://khasharyananews.com
संस्थापक, खास हरियाणा न्यूज़- हरियाणा की ज़मीन से जुड़ा एक निष्पक्ष और ज़मीनी पत्रकार। पिछले 6+ वर्षों से जनता की आवाज़ को बिना किसी एजेंडे के सामने लाने का प्रयास कर रहे हैं। देसी अंदाज़ और सच्ची पत्रकारिता में विश्वास रखते हैं। 🌐 khasharyana.com
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