जयपुर की वीवीआईपी सोसाइटी में रहने वाली श्वेता तिवारी और उनके 21 महीने के बेटे श्रेयम की हत्या के मामले ने पूरे देश को झकझोर दिया था। जांच में सामने आया कि इस खौफनाक वारदात की साजिश खुद पति ने रची थी।

जयपुर में वर्ष 2020 में सामने आया श्वेता तिवारी और उनके 21 महीने के बेटे श्रेयम की हत्या का मामला देश के सबसे चर्चित आपराधिक मामलों में शामिल हो गया था। इस घटना ने न केवल लोगों को हैरान कर दिया बल्कि रिश्तों पर भी कई सवाल खड़े कर दिए थे।
जानकारी के अनुसार, उत्तर प्रदेश के कानपुर की रहने वाली श्वेता तिवारी की शादी दिल्ली निवासी रोहित तिवारी से हुई थी। रोहित इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन में वरिष्ठ पद पर कार्यरत थे और उनकी पोस्टिंग उस समय जयपुर में थी। शादी के करीब नौ साल बाद दंपति को एक बेटा हुआ था, जिसका नाम श्रेयम रखा गया था। परिवार खुशहाल जीवन बिता रहा था, लेकिन पर्दे के पीछे रिश्तों में तनाव बढ़ रहा था।
7 जनवरी 2020 को जयपुर की एक पॉश सोसाइटी स्थित फ्लैट में श्वेता अपने बेटे के साथ मौजूद थीं। शाम के समय घर में काम करने वाली महिला जब पहुंची तो काफी देर तक दरवाजा नहीं खुला। बाद में दरवाजा हल्का खुला मिला। अंदर जाकर उसने श्वेता को खून से लथपथ हालत में पड़ा देखा और शोर मचाया। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची।
पुलिस ने जांच शुरू की तो पता चला कि श्वेता की मौत हो चुकी है और उनका 21 महीने का बेटा श्रेयम भी घर से गायब है। इस वजह से मामला हत्या के साथ-साथ अपहरण का भी बन गया। पुलिस ने सोसाइटी और आसपास के इलाकों के सीसीटीवी फुटेज खंगालने शुरू किए। शुरुआती जांच में एक संदिग्ध व्यक्ति अपार्टमेंट के आसपास दिखाई दिया, लेकिन उसका चेहरा ढका होने के कारण पहचान नहीं हो सकी।

इसी दौरान रोहित तिवारी के मोबाइल पर एक संदेश आया, जिसमें बेटे को सुरक्षित वापस करने के बदले फिरौती की मांग की गई थी। सबसे हैरानी की बात यह थी कि यह संदेश श्वेता के मोबाइल नंबर से भेजा गया था। पुलिस ने तकनीकी जांच शुरू की और नंबर की लोकेशन ट्रैक करने का प्रयास किया।
कुछ समय बाद सोसाइटी परिसर के पार्किंग क्षेत्र में एक बच्चे का शव बरामद हुआ। पहचान होने पर पुष्टि हुई कि वह श्रेयम का शव था। इस घटना के बाद पुलिस पर मामले को जल्द सुलझाने का दबाव बढ़ गया।
जांच के दौरान पुलिस ने परिवार, रिश्तेदारों और परिचितों से पूछताछ की। इसी बीच श्वेता के पिता ने पुलिस को बताया कि घटना से कुछ दिन पहले रोहित ने उनसे फोन पर बातचीत करते हुए श्वेता को अपने पास ले जाने की बात कही थी। इस जानकारी के बाद पुलिस का ध्यान रोहित की ओर गया।
हालांकि घटना के समय रोहित अपने कार्यालय में मौजूद था और सीसीटीवी फुटेज में भी उसकी उपस्थिति दर्ज थी। इसके बावजूद पुलिस ने उसके कॉल रिकॉर्ड की जांच की। जांच में पता चला कि घटना वाले दिन रोहित लगातार एक विशेष नंबर पर संपर्क में था। पुलिस उस नंबर के आधार पर एक संदिग्ध व्यक्ति तक पहुंची।
पूछताछ के दौरान कई चौंकाने वाले खुलासे हुए। जांच एजेंसियों के अनुसार, रोहित का विवाह से पहले एक महिला के साथ प्रेम संबंध था। शादी के बाद भी वह संपर्क में रहा, जिससे पति-पत्नी के बीच विवाद होने लगे। पुलिस के अनुसार, इसी तनाव के चलते कथित तौर पर एक साजिश रची गई।
जांच में सामने आया कि रोहित और उसके परिचितों ने मिलकर श्वेता को रास्ते से हटाने की योजना बनाई थी। आरोप है कि इसी साजिश के तहत एक परिचित व्यक्ति श्वेता के घर पहुंचा और मौका मिलते ही उन पर हमला कर दिया। बाद में मासूम बच्चे की भी हत्या कर दी गई।
पुलिस ने साक्ष्यों और पूछताछ के आधार पर आरोपियों को गिरफ्तार किया और मामले का खुलासा किया। यह घटना इस बात का उदाहरण बन गई कि निजी संबंधों में पैदा हुआ तनाव किस तरह भयावह अपराध का रूप ले सकता है।
जयपुर का यह मामला आज भी लोगों को झकझोर देता है। एक मां और उसके मासूम बेटे की दर्दनाक मौत ने पूरे देश को स्तब्ध कर दिया था। वहीं, जांच में सामने आए तथ्यों ने यह भी दिखाया कि अपराधी कितनी बारीकी से साजिश रच सकते हैं, लेकिन आखिरकार कानून के हाथ उनसे लंबे साबित होते हैं।
