पेटवाड़ गांव के जस्टिस सूर्यकांत के CJI बनने की सिफारिश, 24 नवंबर को शपथ लेने की संभावना, पूरे गांव में खुशी की लहर
हरियाणा के हिसार जिले के पेटवाड़ गांव के रहने वाले जस्टिस सूर्यकांत देश के 53वें चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) बन सकते हैं। वर्तमान CJI भूषण आर. गवई ने केंद्र सरकार को उनकी नियुक्ति की सिफारिश भेज दी है। गवई का कार्यकाल 23 नवंबर को समाप्त हो रहा है, ऐसे में 24 नवंबर को जस्टिस सूर्यकांत CJI के रूप में शपथ ले सकते हैं।
उनके CJI बनने की खबर से पूरे गांव में जश्न का माहौल है। लोग इसे “दूसरी दिवाली” की तरह मना रहे हैं। गांव में उनके पैतृक घर को सजाया जा रहा है।
परिवार में खुशी की लहर
जस्टिस सूर्यकांत के बड़े भाई मास्टर ऋषिकांत गांव में ही रहते हैं। उन्होंने बताया कि परिवार में सभी लोग शिक्षण कार्य से जुड़े रहे हैं, लेकिन सूर्यकांत ने कानून की राह चुनी। पिता मदन गोपाल, संस्कृत के शिक्षक और प्रसिद्ध साहित्यकार थे। उन्होंने हरियाणवी में रामायण लिखी थी, जिसके लिए उन्हें हिंदी साहित्य अकादमी का सूरदास पुरस्कार मिला था।
शिक्षा और प्रारंभिक जीवन

- सूर्यकांत ने 10वीं तक की पढ़ाई गांव के सरकारी स्कूल से की।
- ग्रेजुएशन हिसार के सरकारी कॉलेज से की।
- बचपन से ही हाजिर जवाब और तेज दिमाग के थे।
- उन्होंने युवावस्था में एक कविता “मेढ़ पर मिट्टी चढ़ा दो” लिखी थी, जो उस समय काफी चर्चित हुई।
विचार और प्रेरणा
सूर्यकांत जयप्रकाश नारायण से बेहद प्रभावित थे और उन्हें अपना आदर्श मानते थे। छात्र राजनीति में जरूर सक्रिय रहे, परंतु उन्होंने कभी किसी राजनीतिक दल से जुड़ाव नहीं रखा।
गांव और प्रकृति से जुड़ाव
वे बेहद जमीन से जुड़े व्यक्ति हैं। जब भी गांव आते हैं, तो खेतों में जरूर जाते हैं। खेतों के तालाब किनारे बैठना उन्हें सुकून देता है। हाल ही में दिवाली से एक दिन पहले गांव आए थे और सभी ग्रामीणों को “दीपावली की राम-राम” कही थी।
बचपन की यादें ताजा
हाल ही में जब गांव पहुंचे, तो वे सीधे अपने पुराने घर गए, जहां उनका जन्म हुआ था। उन्होंने वहीं अपने पुराने स्टडी रूम को देखा और बचपन की चारपाई पर बैठकर पुरानी यादें ताजा कीं।
परिवार और समाजसेवा
- उनकी पत्नी सविता सूर्यकांत, इंग्लिश प्रोफेसर और कॉलेज प्रिंसिपल के पद से रिटायर्ड हैं।
- उनकी दो बेटियां हैं — मुग्धा और कनुप्रिया, दोनों पढ़ाई कर रही हैं।
- वे अपने NGO ‘पंडित राम प्रसाद आत्माराम धर्मार्थ न्यास’ के माध्यम से हर साल गांव के प्रतिभावान बच्चों को सम्मानित करते हैं।
- NGO बिना किसी चंदे के गांव के स्कूलों में 10वीं और 12वीं के टॉपर छात्रों को सम्मानित करता है।
पिता का योगदान: साहित्य और समाज
सूर्यकांत के पिता मदन गोपाल ने न केवल हरियाणवी में रामायण लिखी बल्कि 14 पुस्तकें भी लिखीं, जिनमें प्रमुख हैं —
- नगरी नगरी द्वारे द्वारे
- कमल और कीचड़
- माटी की महक
- यह कैसा हिंदुस्तान है
- रागनी संग्रह चूंदड़ी
उन्हें पंडित लख्मीचंद पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया था।
