‘केमिकल से काला कागज बनेगा नोट’, करोड़ों की ठगी का आरोप
देश के अलग-अलग हिस्सों में लोगों को पैसे कई गुना करने का लालच देकर ठगी करने वाले एक कथित अंतरराज्यीय गिरोह का पुलिस ने खुलासा किया है। मामले में नागपुर से दो महिलाओं की गिरफ्तारी के बाद जांच आगे बढ़ी और महाराष्ट्र से जुड़े सात अन्य आरोपियों को भी पकड़ा गया। पुलिस के मुताबिक, गिरोह कथित तौर पर लोगों को काले कागज को केमिकल से असली नोट में बदलने और रकम कई गुना करने का झांसा देता था। कार्रवाई में 4 करोड़ रुपये से अधिक नकद, 17 मोबाइल फोन और नोट के आकार में काटे गए काले कागज समेत कई सामान बरामद किए गए।
मामले में गिरफ्तार दो महिलाओं की पहचान कनीज फातिमा उर्फ भावना पांडे और दीपिका पालिवाल, दोनों की उम्र 24 वर्ष बताई गई है। पुलिस जांच के अनुसार, यह नेटवर्क कई राज्यों में सक्रिय था और 100 से अधिक लोगों को ठगी का शिकार बनाए जाने का संदेह है।
होटल में होती थी ‘केमिकल’ की डेमो

पुलिस के मुताबिक, आरोपियों का तरीका बेहद योजनाबद्ध था। संभावित पीड़ितों से होटल जैसे स्थानों पर मुलाकात की जाती थी। वहां कथित तौर पर एक ऐसा प्रदर्शन किया जाता था, जिससे सामने वाले व्यक्ति को यह विश्वास हो जाए कि किसी विशेष केमिकल की मदद से काले किए गए कागज या नोट को दोबारा असली मुद्रा में बदला जा सकता है।
रिपोर्टों के अनुसार, गिरोह असली नोट और केमिकल का इस्तेमाल करके डेमो देता था। इसके बाद पीड़ित को बताया जाता कि इस प्रक्रिया में इस्तेमाल होने वाला केमिकल विदेश से मंगाया जाता है और इसकी कीमत काफी ज्यादा है। इसी बहाने उससे अलग-अलग किस्तों में पैसे लिए जाते थे।
छह महीने तक चलता रहा कारोबारी के साथ संपर्क
इस मामले में छत्तीसगढ़ के बालोद से जुड़े कारोबारी उमेश गुप्ता की शिकायत ने पुलिस को कथित नेटवर्क तक पहुंचने में मदद की। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, उमेश को लगभग 45 करोड़ रुपये के फंड से जुड़ा प्रस्ताव दिया गया था। कथित तौर पर उन्हें बताया गया कि एक विशेष प्रक्रिया के जरिए काले कागज को असली नोट में बदला जा सकता है और निवेश की रकम को कई गुना किया जा सकता है।
रिपोर्ट के मुताबिक, होटल में डेमो देखने के बाद उमेश इस प्रक्रिया को लेकर आश्वस्त हो गए। इसके बाद करीब छह महीने के दौरान उन्होंने कथित तौर पर अलग-अलग किस्तों में लगभग 1.13 करोड़ रुपये दे दिए।
जब लंबे समय तक वादा पूरा नहीं हुआ और आरोपियों ने कथित तौर पर संपर्क करना बंद कर दिया, तब उमेश को ठगी का एहसास हुआ। इसके बाद उन्होंने पुलिस से शिकायत की।
CCTV और मोबाइल नंबर से पुलिस पहुंची आरोपियों तक
शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की। रिपोर्टों के अनुसार, पुलिस ने उस होटल से CCTV फुटेज हासिल की, जहां कारोबारी की आरोपियों से मुलाकात हुई थी।
इसके बाद उन मोबाइल नंबरों और डिजिटल जानकारियों की जांच की गई, जिनके जरिए पीड़ित और आरोपियों के बीच बातचीत हुई थी। पुलिस को जांच के दौरान आरोपियों के नागपुर में होने की जानकारी मिली।
इसके बाद नागपुर में कार्रवाई की गई और दो महिलाओं को गिरफ्तार किया गया। पुलिस से मिली जानकारी के आधार पर जांच आगे बढ़ी और महाराष्ट्र में मौजूद कथित गिरोह के अन्य सदस्यों तक पुलिस पहुंची।
छापेमारी में मिला 4 करोड़ से ज्यादा कैश
पुलिस के मुताबिक, आगे की कार्रवाई में महाराष्ट्र के पुणे जिले के खंडाला स्थित एक रिसॉर्ट में छापेमारी की गई। यहां कथित तौर पर गिरोह के सदस्य एक अन्य व्यक्ति को रकम कई गुना करने के नाम पर ठगने की कोशिश कर रहे थे।
कार्रवाई के दौरान 4 करोड़ रुपये से ज्यादा नकद, 17 मोबाइल फोन, काले कागज के नोट के आकार में कटे टुकड़े, कांच की प्लेटें और कथित ठगी में इस्तेमाल होने वाली अन्य सामग्री बरामद हुई। पुलिस ने इस मामले में महाराष्ट्र से सात आरोपियों की गिरफ्तारी की जानकारी दी।
100 से ज्यादा लोगों को ठगने का संदेह
पुलिस के अनुसार, यह कथित नेटवर्क केवल एक-दो लोगों तक सीमित नहीं था। जांच में सामने आया कि गिरोह ने छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, गुजरात, राजस्थान और दिल्ली समेत कई राज्यों में लोगों को निशाना बनाया हो सकता है।
पुलिस के मुताबिक, यह नेटवर्क वर्ष 2005 से सक्रिय होने का संदेह है और 100 से अधिक लोगों को ठगी का शिकार बनाए जाने की जांच की जा रही है। हालांकि कितने लोगों से कितनी रकम की ठगी हुई, इसका अंतिम आंकड़ा जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।
कैसे फंसते थे कारोबारी?
इस कथित स्कैम का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा केवल ‘केमिकल’ का प्रदर्शन नहीं था, बल्कि पीड़ित का भरोसा जीतना था। रिपोर्टों के अनुसार, आरोपियों की ओर से संभावित पीड़ितों से मुलाकात, उनकी आर्थिक क्षमता और जरूरतों को समझने तथा फिर धीरे-धीरे बड़ी रकम लगाने के लिए तैयार करने का तरीका अपनाया जाता था।
पीड़ित को पहले छोटी डेमो दिखाकर विश्वास दिलाने की कोशिश की जाती थी। इसके बाद विदेश से महंगा केमिकल मंगाने, टेस्ट कराने या दूसरी प्रक्रियाओं के नाम पर और रकम मांगी जाती थी। जब पर्याप्त पैसा मिल जाता, तो कथित तौर पर आरोपी संपर्क से बाहर हो जाते थे।
लालच और भरोसे के बीच छिपा था पूरा खेल
यह मामला इस बात का भी उदाहरण है कि जल्दी और कई गुना पैसा कमाने का लालच लोगों को किस तरह जोखिम भरे फैसले लेने के लिए प्रेरित कर सकता है। पुलिस की जांच अभी जारी है और यह पता लगाया जा रहा है कि इस कथित नेटवर्क में कितने लोग शामिल थे, कितने पीड़ित बने और रकम का इस्तेमाल कहां किया गया।
