उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने पुलिस महकमे के भीतर काम करने वाले कर्मचारियों की परेशानियों और मेडिकल छुट्टी से जुड़े सवालों को फिर चर्चा में ला दिया है। अपनी पत्नी को खोने के बाद एक पुलिसकर्मी का रोते हुए वीडियो सामने आया है। वीडियो में सिपाही नागेंद्र वर्मा अधिकारियों के सामने फूट-फूटकर रोते हुए अपनी पत्नी के इलाज के लिए छुट्टी नहीं मिलने की बात कहते नजर आ रहे हैं।

नागेंद्र वर्मा मूल रूप से उत्तर प्रदेश के अमेठी जिले के रहने वाले हैं। साल 2020 में वह उत्तर प्रदेश पुलिस में भर्ती हुए थे और वर्तमान में बस्ती जिले के लालगंज थाने में तैनात बताए जा रहे हैं। उनकी पत्नी केसरी वर्मा भी उत्तर प्रदेश पुलिस में सिपाही थीं। केसरी मूल रूप से प्रतापगढ़ जिले की रहने वाली थीं और वर्ष 2018 में उत्तर प्रदेश पुलिस में भर्ती हुई थीं।
दोनों की मुलाकात के बाद परिवार की सहमति से वर्ष 2024 में नागेंद्र और केसरी वर्मा की शादी हुई। शादी के बाद दोनों पति-पत्नी बस्ती जिले में ही पुलिस की नौकरी कर रहे थे। दोनों ने लालगंज थाने से कुछ दूरी पर बनकटी कस्बे में किराए का कमरा लिया था, जहां दोनों साथ रहते थे।
बताया जा रहा है कि जुलाई महीने में केसरी वर्मा छुट्टी लेकर अपने मायके प्रतापगढ़ गई थीं। छुट्टी पूरी होने के बाद 22 अगस्त 2026 को वह वापस अपनी ड्यूटी पर लौट रही थीं। इसी दौरान रास्ते में उनका एक्सीडेंट हो गया। हादसे में उनके सिर पर गंभीर चोट आई और उन्हें सिर पर चार टांके लगाए गए।
इलाज के बाद केसरी वर्मा वापस अपनी ड्यूटी पर आ गईं, लेकिन उनके स्वास्थ्य में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ। उनके पति नागेंद्र वर्मा के अनुसार, हादसे के बाद भी केसरी के सिर में लगातार तेज दर्द रहता था और उनकी तबीयत खराब चल रही थी। ऐसे में दोनों ने उनकी आगे की चिकित्सा और आराम के लिए छुट्टी लेने का फैसला किया।
27 अगस्त 2026 को नागेंद्र वर्मा और केसरी वर्मा ने बस्ती के पुलिस अधीक्षक कार्यालय में छुट्टी के लिए आवेदन दिया। नागेंद्र वर्मा का आरोप है कि छुट्टी के आवेदन के साथ उन्होंने केसरी की सिटी स्कैन रिपोर्ट और इलाज से संबंधित मेडिकल दस्तावेज भी लगाए थे।
नागेंद्र का कहना है कि उनकी पत्नी के सिर पर चोट लगी थी, चार टांके आए थे और उनका इलाज चल रहा था। इसके बावजूद उनके अनुसार न तो उन्हें सामान्य छुट्टी यानी सीएल मिल सकी और न ही मेडिकल लीव स्वीकृत हुई।
यहीं से यह मामला बेहद भावुक और गंभीर हो जाता है।
29 अगस्त 2026 की रात अचानक केसरी वर्मा की तबीयत ज्यादा बिगड़ गई। पति नागेंद्र वर्मा उन्हें लेकर तत्काल इलाज के लिए ले जाने की कोशिश करने लगे। लेकिन रास्ते में ही केसरी की हालत इतनी बिगड़ गई कि उन्होंने दम तोड़ दिया।
अपनी पत्नी को अपनी आंखों के सामने और अपने ही हाथों में खोने के बाद नागेंद्र पूरी तरह टूट गए। शवगृह के बाहर अधिकारियों के सामने उनका दर्द कैमरे में कैद हो गया। वह फूट-फूटकर रोते हुए अपनी पत्नी के इलाज के लिए छुट्टी नहीं मिलने का जिक्र करते दिखाई दिए।
वीडियो में नागेंद्र अधिकारियों से गुहार लगाते हुए कहते नजर आए कि अगर उनकी पत्नी को समय पर छुट्टी मिल गई होती तो वह उसका बेहतर इलाज करा सकते थे और शायद आज उनकी पत्नी उनके साथ होतीं।
उनका कहना था कि मेडिकल दस्तावेज और सिटी स्कैन रिपोर्ट तक आवेदन के साथ लगाई गई थी। इसके बावजूद छुट्टी नहीं मिली। रोते हुए नागेंद्र अधिकारियों से सिर्फ यही कहते नजर आए कि अगर उस समय उनकी पत्नी को इलाज के लिए छुट्टी दे दी जाती तो वह उन्हें अच्छे से इलाज करा पाते।
हालांकि, केसरी वर्मा की मौत का वास्तविक चिकित्सकीय कारण क्या था, इसे लेकर आधिकारिक मेडिकल रिपोर्ट और जांच के निष्कर्ष महत्वपूर्ण होंगे। फिलहाल केवल छुट्टी नहीं मिलने को उनकी मौत का प्रत्यक्ष कारण मानना उचित नहीं होगा। यह नागेंद्र वर्मा का आरोप और उनकी व्यक्तिगत पीड़ा है, जिसकी स्वतंत्र रूप से पुष्टि होना बाकी है।
लेकिन इस घटना ने एक बड़ा सवाल जरूर खड़ा कर दिया है—अगर कोई पुलिसकर्मी खुद गंभीर चोट के बाद लगातार दर्द में है और उसके पास मेडिकल रिपोर्ट भी है, तो ऐसी स्थिति में मेडिकल अवकाश देने की प्रक्रिया क्या है? क्या गंभीर स्वास्थ्य स्थिति में किसी कर्मचारी के आवेदन पर तत्काल चिकित्सकीय मूल्यांकन की व्यवस्था होनी चाहिए? और अगर छुट्टी का आवेदन अस्वीकार किया जाता है, तो उसके पीछे क्या कारण होता है?
केसरी वर्मा की मौत ने उनके परिवार और पति नागेंद्र वर्मा को गहरे सदमे में डाल दिया है। एक तरफ नागेंद्र खुद पुलिस विभाग में सिपाही हैं और कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी निभाते हैं, वहीं दूसरी तरफ उन्होंने अपनी पत्नी को खो दिया है।
सबसे दर्दनाक बात यह है कि नागेंद्र और केसरी दोनों पुलिस की वर्दी पहनकर लोगों की सेवा करते थे। शादी के बाद दोनों एक साथ रहते थे और ड्यूटी की व्यस्त जिंदगी के बीच अपने परिवार को संभाल रहे थे। लेकिन कुछ ही दिनों के भीतर एक सड़क हादसे, लगातार खराब स्वास्थ्य और फिर अचानक हुई मौत ने उनकी पूरी जिंदगी बदल दी।
आज नागेंद्र के सामने पत्नी की यादें हैं और वह सवाल भी, जिसका जवाब शायद आने वाली जांच से मिलेगा—क्या केसरी को समय पर बेहतर चिकित्सा सुविधा मिल सकती थी? क्या उनकी मेडिकल स्थिति को देखते हुए छुट्टी पर अलग निर्णय लिया जा सकता था?
इन सवालों का अंतिम जवाब जांच और उपलब्ध मेडिकल रिकॉर्ड से ही सामने आ सकेगा। लेकिन पत्नी की मौत के बाद नागेंद्र का रोता हुआ चेहरा यह जरूर दिखाता है कि एक पुलिसकर्मी भी आखिर इंसान है—जिसे अपने परिवार के लिए वक्त, इलाज और सहारे की उतनी ही जरूरत होती है, जितनी किसी आम नागरिक को।
केसरी वर्मा अब इस दुनिया में नहीं हैं। पीछे रह गया है एक पति, जिसने अपनी जीवनसंगिनी को अपनी आंखों के सामने खो दिया और अब अधिकारियों से सिर्फ इतना पूछ रहा है कि अगर उस वक्त छुट्टी मिल गई होती, तो क्या कहानी कुछ और होती?
