आजमगढ़, उत्तर प्रदेश: जिस घर में कभी बच्चों के भविष्य और परिवार की खुशियों की बातें होती थीं, उसी घर में एक रात ऐसा मातम छा गया कि हर आंख नम हो गई। एक मां ने एक ही दिन अपने परिवार से दो अपनों को खो दिया। एक तरफ जवान पोता था, जो दिल्ली में रहकर आईएएस परीक्षा की तैयारी कर रहा था, तो दूसरी तरफ परिवार का बुजुर्ग मुखिया, जो रोज की तरह रात को अपनी ट्यूबवेल पर सोने गया था।

यह दर्दनाक मामला उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले के पवई थाना क्षेत्र के केवती डिहवा गांव का बताया जा रहा है। यहां पारिवारिक विवाद और करीब तीन लाख रुपये की रकम को लेकर चली आ रही कथित रंजिश ने बेहद खौफनाक रूप ले लिया। घटना में अंकित यादव और उसके दादा जगदंबा प्रसाद की मौत हो गई। मामले में परिवार के ही एक सदस्य पर हत्या का आरोप बताया जा रहा है। हालांकि घटना की पूरी सच्चाई पुलिस जांच और अदालत में सामने आने वाले साक्ष्यों से ही स्पष्ट होगी।
दो भाइयों के अलग होने के बाद भी परिवार जुड़ा रहा
केवती डिहवा गांव के रहने वाले जगदंबा प्रसाद के दो बेटे थे—सुरेंद्र कुमार यादव और सूर्य कुमार यादव। समय के साथ दोनों भाई अलग-अलग रहने लगे थे। जगदंबा प्रसाद और उनकी पत्नी अपने बेटे सुरेंद्र यादव के साथ रहते थे।
बताया जाता है कि सुरेंद्र कुमार यादव अपने बच्चों की पढ़ाई और संस्कारों को लेकर काफी गंभीर रहते थे। आसपास के लोगों के बीच भी उनकी अच्छी छवि बताई जाती है।
सुरेंद्र का बेटा अंकित यादव पढ़ाई में होनहार था और दिल्ली में रहकर आईएएस परीक्षा की तैयारी कर रहा था। परिवार को अंकित से काफी उम्मीदें थीं।
दूसरी तरफ सुरेंद्र के भाई सूर्य कुमार यादव काफी समय से बीमार चल रहे थे।
भाई ने कराया इलाज, फिर वापस दिए तीन लाख रुपये
बताई गई जानकारी के मुताबिक, सूर्य कुमार यादव के इलाज को लेकर परिवार में परेशानी थी। आरोप है कि उनके बेटे संतोष यादव द्वारा पिता के खाते से पैसे निकालने के बावजूद इलाज पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा था।
जब यह बात सुरेंद्र यादव को पता चली तो उन्होंने अपने भाई की मदद करने का फैसला किया और उनका इलाज कराया।
इलाज में करीब तीन से चार लाख रुपये खर्च होने की बात बताई गई है। इलाज के बाद सूर्य कुमार यादव की तबीयत में सुधार हुआ।
इसके बाद सूर्य ने अपने भाई सुरेंद्र से कहा कि इलाज में जो पैसा खर्च हुआ है, वह उन्हें वापस करेंगे। इसी क्रम में उन्होंने अपने बैंक खाते से करीब तीन लाख रुपये निकालकर सुरेंद्र को दे दिए।
सूर्य का कथित तौर पर कहना था कि भाई ने अलग रहने के बावजूद बिना किसी स्वार्थ के उनका इलाज कराया था। अब जब वह स्वस्थ हो चुके हैं और उनके पास पैसा है, तो भाई को उसकी रकम लौटाने में क्या गलत है?
लेकिन यहीं से परिवार के भीतर विवाद और गहरा होने लगा।
तीन लाख रुपये को लेकर बढ़ता गया विवाद
जानकारी के अनुसार, सूर्य के बेटे संतोष यादव को अपने पिता द्वारा चाचा सुरेंद्र को पैसे लौटाना पसंद नहीं आया। वह कथित तौर पर अपने चाचा पर आरोप लगाने लगा कि उन्होंने उसके पिता को बहकाकर पैसे निकलवा लिए।
इसी बात को लेकर संतोष और सुरेंद्र के बीच कई बार विवाद होने की बात सामने आई है।
बताया जाता है कि सुरेंद्र यादव विवाद को बढ़ाने के बजाय ऐसी बातों को नजरअंदाज करते रहे। वह परिवार में किसी तरह का बड़ा झगड़ा नहीं चाहते थे।
लेकिन आरोप है कि संतोष के मन में यह नाराजगी लगातार बढ़ती गई।
अंकित की कामयाबी भी बनी कथित रंजिश की वजह
अंकित यादव दिल्ली में रहकर आईएएस परीक्षा की तैयारी कर रहा था। पढ़ाई में अच्छा होने के कारण परिवार को उससे भविष्य में बड़ी उम्मीदें थीं।
कथित तौर पर संतोष अंकित को लेकर भी नाराज रहता था। उसे लगता था कि उसके चाचा सुरेंद्र की सबसे बड़ी ताकत और भविष्य की उम्मीद उनका बेटा अंकित है।
इसी कथित रंजिश को लेकर यह भी आरोप लगाया जा रहा है कि अंकित को निशाना बनाया गया।
इसके अलावा जगदंबा प्रसाद को लेकर भी संतोष के मन में नाराजगी होने की बात कही जा रही है। आरोप है कि वह अपने दादा पर दोनों बेटों के बीच भेदभाव करने का आरोप लगाता था और मानता था कि दादा सुरेंद्र का ज्यादा पक्ष लेते हैं।
हालांकि इन सभी आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकती है।
9 जुलाई की रात सामने आया खौफनाक घटनाक्रम
घटना 9 जुलाई 2026 की रात की बताई जा रही है।
रोज की तरह जगदंबा प्रसाद खाना खाने के बाद घर से करीब 100 से 200 मीटर की दूरी पर स्थित अपनी ट्यूबवेल पर सोने चले गए थे। दूसरी तरफ अंकित घर के बरामदे में सो रहा था।
बताई गई जानकारी के अनुसार, रात करीब एक बजे संतोष कथित तौर पर कुल्हाड़ी लेकर अंकित के पास पहुंचा और उस पर हमला कर दिया।
अंकित की आवाज सुनकर घर में सो रही उसकी दादी और परिवार के अन्य सदस्य जाग गए। परिजन जब तक अंकित के पास पहुंचे, उसकी हालत गंभीर हो चुकी थी और उसकी मौत हो गई थी।
परिवार में चीख-पुकार मच गई।
दादा को बताने पहुंचा तो सामने आया दूसरा सदमा
अंकित की मौत से परिवार पहले ही टूट चुका था। इसी दौरान परिवार का एक सदस्य अपने दादा जगदंबा प्रसाद को घटना की जानकारी देने के लिए ट्यूबवेल की तरफ गया।
लेकिन वहां पहुंचते ही उसके पैरों तले जमीन खिसक गई।
जगदंबा प्रसाद भी अपनी चारपाई पर मृत अवस्था में मिले। उनके साथ भी हिंसा किए जाने की बात सामने आई।
जिस परिवार ने कुछ देर पहले ही अंकित को खोया था, उसे अब अपने बुजुर्ग मुखिया की मौत की खबर भी मिल चुकी थी।
एक ही रात में दादा और पोते की मौत से पूरे गांव में मातम पसर गया।
क्या तीन लाख रुपये से ज्यादा कीमती थीं दो जिंदगियां?
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर एक परिवार के भीतर शुरू हुआ आर्थिक विवाद इतना गंभीर कैसे हो गया कि दो जिंदगियां चली गईं?
अगर विवाद की वजह वास्तव में तीन लाख रुपये की रकम थी, तो क्या उस रकम से ज्यादा कीमती किसी इंसान की जिंदगी नहीं थी?
अंकित के परिवार की उम्मीदें उसके भविष्य से जुड़ी थीं। वह दिल्ली में रहकर आईएएस बनने की तैयारी कर रहा था। दूसरी ओर जगदंबा प्रसाद परिवार के बुजुर्ग थे।
अब दोनों नहीं हैं।
परिवार के लिए पैसा वापस आ सकता था, विवाद बातचीत से सुलझ सकता था और रिश्तों में आई कड़वाहट को भी समय के साथ खत्म किया जा सकता था। लेकिन चली गई जान वापस नहीं आती।
यह घटना परिवारों के लिए एक गंभीर संदेश भी छोड़ती है कि संपत्ति, पैसा और पारिवारिक मतभेद अगर समय रहते बातचीत से नहीं सुलझाए जाएं तो उनके परिणाम बेहद भयावह हो सकते हैं।
