दुल्हन से दर्दनाक अंत तक: नेहा की मौत ने दहेज प्रताड़ना पर उठाए बड़े सवाल
मेरे हस्बैंड मैंने कहदे कि तag चल मैंने कहा नहीं मैं नहीं चला मैं फिर मैं उन्होंने मतलब मैंने खुद दस्या कि हां मैं तो चला है मैं कहा कोई नहीं त चला लियो मैं पीछे बैठ जाऊंगी [हंसी] आप सोशल मीडिया पर कहीं ना कहीं यह वीडियो जरूर देखे होंगे नेहा जो मासूम भोली चंचल हसमुख स्वभाव की लड़की हर लड़कियों की तरह नेहा का भी सपना था दुल्हन बनने का लाल जोड़े में तैयार होने का राजकुमार जैसा पति पाने सपना पूरा भी हुआ। लेकिन नेहा ने कभी सपने में भी नहीं सोचा होगा कि शादी के महज 5 महीने के अंदर नेहा का यह हाल होगा। कहानी है एक ऐसी नेहा की जो चंचल थी, हसमुख थी। लेकिन शादी के महज 5 महीने के अंदर उसके इस रूप तक की। नेहा जो पंजाब के रूपनगर जिले के आनंदपुर साहिब की रहने वाली एक साधारण परिवार में जन्म हुआ। बचपन से ही चंचल स्वभाव होने के कारण घर की लाडली बिटिया थी। नेहा के सौम्य स्वभाव के कारण गांव के भी लोग उसे अपनी बेटी की तरह ही प्यार देते थे। नेहा का जन्म तो हिंदू परिवार में हुआ लेकिन नेहा का जो लगाव था वह था सिख धर्म में। एक बार परिवार वालों ने नेहा को रोका भी कि तुम एक हिंदू परिवार की बेटी हो। तुम अपने धर्म को अपनाओ। अपने धर्म के हिसाब से जियो। अपने धर्म को मानो। लेकिन नेहा का सिख धर्म के प्रति एक अटूट प्रेम देखकर परिवार वाले भी नेहा को सिख धर्म के लगाव से रोक नहीं पाए। नेहा ने अमृत ग्रहण भी किया था।
अमृत ग्रहण सिख धर्म की वह प्रक्रिया है जो दिखाता है कि आप सिख धर्म में पूरी तरह समर्पित हैं। नेहा धीरे-धीरे बड़ी हो रही थी। परिवार को अब नेहा की शादी की चिंता सताने लगी। परिवार वालों ने नेहा से पूछा भी कोई पसंद हो तो बता सकती हो। लेकिन नेहा आजकल की लड़कियों से बिल्कुल अलग थी। नेहा ने अपने परिवार वालों की मर्जी और पसंद को ही अपनी पसंद माना और नेहा ने अपने माता-पिता परिवार वालों से कहा कि मुझे पूरा भरोसा है जो आप मेरे लिए पसंद करेंगे वो मेरे लिए दुनिया की सबसे खूबसूरत पसंद होगी। नेहा के किसी खास रिश्तेदार ने हिमाचल के सोलांग जिले के नालागढ़ के रामपुर के गांव में रहने वाले संजीव के परिवार वालों के बारे में बताते हैं। संजीव जो एक सेना में नौकरी करता था। लड़का सरकारी नौकरी में अफसर पोस्ट पर था। नेहा के परिवार को यह रिश्ता बहुत पसंद आया। नेहा के परिवार वालों ने संजीव के बारे में पता भी किया तो पता चला कि संजीव का परिवार और संजीव एक बेहद ही सरल स्वभाव और साधारण परिवार है। नेहा का परिवार बहुत ही ज्यादा खुश होता है और ऊपर से संजीव की एक सरकारी नौकरी तो नेहा के परिवार वालों ने और संजीव के परिवार वालों ने एक दूसरे से मिलकर बातें की। संजीव और नेहा को भी एक दूसरे से मिलवाया गया। दोनों एक दूसरे को पसंद करते हैं। और अब नेहा मन ही मन अपनी शादी को लेकर ख्वाब बुनने लगी। वो अपने शादी के बारे में सपने सजोने लगी। नए घर में जाने की, राजकुमार जैसे दूल्हे से शादी करने की और लाल जोड़े में तैयार होने की। धीरे-धीरे नेहा की शादी की डेट नजदीक आ रही थी।
नवंबर 2024 शादी का वह दिन था जब नेहा पूरी तरीके से लाल जोड़े में तैयार हुई थी। वह बहुत ही ज्यादा खुश थी। पहले से ही चंचल स्वभाव, हसमुख स्वभाव। वो जब ब्यूटी पार्लर में जाकर तैयार होती है तो उसकी कुछ सहेलियां ब्यूटी पार्लर वाली मैडम उससे कहती हैं कि तुम अपने पति से क्या मजाक करती हो? तो वो हंसते हुए कुछ इस तरह से उन लोगों को जवाब देती है। मेरे हस्बैंड मुझे कह कि तst चला है। मैंने कहा नहीं मैं नहीं चलानी। मैं फिर मैं उन्होंने मतलब मैंने खुद दस्या कि हां मैं तो चलाना है। मैं कहा कोई नहीं त चला लियो। मैं पीछे बैठ जांगी। [हंसी] नेहा की शादी संजीव से हो जाती है। शादी के बाद नेहा अपने मायके से ससुराल जाती हैं। वहां जाने के बाद नेहा बहुत खुश थी। क्योंकि नेहा ने अपने पति संजीव का खुद के प्रति लगाव देखा। अपने सासुर का अपने माता-पिता जैसा प्यार देखा। तो यह सब देखकर नेहा बहुत खुश होती है। उसको लगता है अब और क्या ही चाहिए। इतना प्यारा ससुराल है। पति भी प्यार करने वाला। मेरे मां-बाप जैसा मुझे प्यार देने वाले मेरे सासससुर वो बहुत खुश होती है। लेकिन नेहा की यह खुशी महज शादी के एक हफ्तों तक ही रहती है।

क्योंकि महज एक हफ्ते बाद ही नेहा की सास नेहा को धीरे-धीरे घर के कामों में लगाने लगी। और सोचिए जो लड़की सपने सजोकर अपने हाथों में मेहंदी लगाकर अपने ससुराल में गई हो उसको महज एक हफ्ते बाद ही झाड़ू पोछा बर्तन खाना बनाना नाश्ता बनाना सबको टाइम पर चाय देना यानी नेहा के ऊपर ही वह सारी जिम्मेदारियां थोप दी गई जो उस घर के सभी सदस्य मिलके थे। नेहा अकेले उस घर की सारी जिम्मेदारियां निभाती रही। लेकिन कभी भी नेहा किसी से कुछ भी नहीं कहती। धीरे-धीरे नेहा की सास अब नेहा को वह सब भी काम करवाने लगी जो काम नेहा के लिए बना ही नहीं था। नेहा को लगा कि शायद शादी के बाद ऐसे ही हर लड़कियों के साथ होता हो। इसलिए वह चुपचाप दर्द में होने के बाद भी अपनी सासू मां की बात मानते हुए वह सारे काम करती जो उनकी सासू मां नेहा से करने के लिए कहती। लेकिन धीरे-धीरे नेहा की सासू मां का नेहा के प्रति काम करवाना ही नहीं बल्कि नेहा को धीरे-धीरे ताने मारना भी शुरू कर देती हैं।
नेहा की शादी के महज एक महीने ही बीते थे। जब नेहा की सास नेहा से कहती हैं कि अरे तुमने दहेज में लाया ही क्या है? तुम्हारे बाप ने ना तो कार दी ना ही ढंग के सामान दिए और ना ही बहुत ज्यादा कैसी दे दिए हैं। ऐसे भला कौन शादी करता है? हम लोग तो इज्जतदार हैं इसलिए चुप बैठ गए। दूसरा कोई होता तो वहीं शादी तोड़ के मंडप से ही दुल्हन छोड़ के घर आ जाता। वह तो हम लोग का सीधापन था जो तुमको ब्याह के अपने घर लाए। यह बात नेहा को बहुत ज्यादा बुरी लगती है। वह अपने पति संजीव से इस बारे में कहती भी है कि मां ऐसा क्यों कह रही हैं? मेरे पिता की जितनी हैसियत थी, उन्होंने अपनी हैसियत के हिसाब से ज्यादा ही दिया है। जिस पर संजीव नेहा का सपोर्ट नहीं करता। बल्कि वह भी अपनी मां को सपोर्ट करते हुए कहता है कि मां ने गलत ही क्या कहा। तुम्हारे परिवार वालों ने हम लोगों की बेइज्जती करने की कोई भी कसर नहीं छोड़ी। वो तो हम लोग ठहरे सीधे-साधे वरना हम लोग भी बेइज्जती का बदला बेइज्जती करके दे सकते थे। लेकिन हमने ऐसा नहीं किया। जब संजीव भी नेहा से यह बात कहता है तो नेहा अंदर ही अंदर टूट जाती है। वह पहली बार अपने मायके में फोन कर सारी बातें बताती है। नेहा अपनी मां से कहती है मां यहां पर सब मुझे जानवरों की तरह काम करवाते हैं। जैसे ही मैं कोई काम करके बैठती हूं, मुझे तुरंत दूसरे काम करने के लिए कह दिया जाता है।
मां, मैं थक जाती हूं और अब तो यह लोग मुझे दहेज के लिए भी ताने मार रहे हैं। लेकिन नेहा की मां अपनी बेटी की बात नहीं समझ पाती। उनको लगता है कि नेहा अपने घर की लाडली बिटिया थी। कभी कोई काम की नहीं थी। तो शायद नेहा को जो थोड़ा बहुत काम करने को कहा जा रहा है वो उसको ज्यादा लग रहा है। और नेहा को कभी उसके मायके में कोई ऊंची आवाज में बोला नहीं है। इस वजह से शायद मायके की थोड़ी छोटी-मोटी डांटें भी ज्यादा लग रही हैं। नेहा की मां ने समझाया बेटा अभी नया-नया ससुराल है। नए-नए लोग हैं। धीरे-धीरे सब सही हो जाएगा। तुम थोड़ा एडजस्ट करना सीखो। नेहा को भी लगा कि शायद मैं ज्यादा ही कुछ समझ रही हूं। ऐसा कुछ नहीं है। शायद ऐसा हर ससुराल में नई लड़कियों के साथ होता ही हो। लेकिन नेहा की जो सास थी वो दिन प्रतिदिन नेहा के प्रति बर्ताव बदलते ही जा रही थी। यानी शादी के एक हफ्ते बाद नेहा को बेहिसब काम करवाना और शादी के महज 1 महीने बाद ही नेहा को दहेज के लिए ताने मारना। और अब शादी के महज 3-4 महीने ही बीते थे कि सास और पति मिलकर नेहा को शारीरिक प्रताड़ना भी देते। लेकिन नेहा को लगा कि अगर मैं यह बात अपने मायके में अपनी मां-बाप से कहती हूं तो मेरे मां-बाप को कष्ट होगा। उनको लगेगा कि मैं छोटी-छोटी चीजों को हमेशा उनसे शेयर करती हूं या शिकायत करती हूं। इस वजह से नेहा अपने ससुराल वालों की प्रताड़ना सहती रही।
वह कभी भी अपने मायके में फोन कर दोबारा शिकायत नहीं की। लेकिन 19 अप्रैल 2025 का वो दिन था जब नेहा के मायके वालों के पास नेहा के ससुराल के पड़ोसियों ने फोन किया और बताया कि आपकी बेटी की तबीयत बहुत ज्यादा खराब है। आप तुरंत अपनी बेटी के ससुराल पहुंचे। माता-पिता को लगा कि आखिर बेटी या बेटी के ससुराल वाले फोन कर मुझे क्यों नहीं बताए? यह पड़ोसी ऐसा क्यों कर रहे हैं? नेहा की मां ने नेहा के ससुराल में फोन भी किया लेकिन कोई भी फोन को रिसीव नहीं करता। वो लोग घबराकर फौरन नेहा के ससुराल पहुंचते हैं तो देखते हैं उनकी बेटी नेहा एक रूम में बेसुद हालत में पड़ी है और दूसरे रूम में पति संजीव और उनकी सास ससुर मिलके आराम से बातें कर रहे हैं जैसे कुछ हुआ ही नहीं है। नेहा की मां पूछती भी हैं मेरी बेटी की ऐसी हालत है और आप लोग यहां पर इस हाल में बैठे हैं। जिस पर नेहा के ससुराल वाले कहते हैं कि जब आपकी बेटी मुझसे कुछ बताएगी तभी तो हम लोग जानेंगे। जब वो अपनी तबीयत की बातें पड़ोसियों को बताएगी तो पड़ोसी ही तो आपको सूचना देंगे।
नेहा के माता-पिता बिना किसी लड़ाई झगड़े के चुपचाप नेहा को वहां से लेकर पास के हॉस्पिटल रूपनगर में एडमिट करवाते हैं। वहां पर नेहा का प्राथमिक इलाज भी होता है। लेकिन नेहा को आराम नहीं होता। नेहा को रूपनगर हॉस्पिटल से पीजीआई चंडीगढ़ रेफर कर दिया जाता है। लेकिन पति संजीव रूपनगर से अपने घर वापस चला आता है और नेहा को चंडीगढ़ पीजीआई नेहा के मां-बाप ले जाते हैं। वहां पर नेहा धीरे-धीरे रिकवर करने लगती है। लेकिन नेहा के शरीर में पोइजन पूरी तरीके से फैल चुका था। इस वजह से 21 अप्रैल 2025 को नेहा अपनी सासे लेना बंद कर देती है। और जैसे ही डॉक्टर्स ने यह जानकारी नेहा के माता-पिता को दी तो नेहा के माता-पिता पूरी तरीके से टूट जाते हैं, बिखर जाते हैं क्योंकि उनको लगा अपनी बेटी के मौत के जिम्मेदार वो खुद हैं। क्योंकि उनकी बेटी ने शादी के महज 15 दिन बाद ही उनको सारी बातें बताई थी। लेकिन उन्होंने अपनी बेटी की बातों को नजरअंदाज किया और आज उनकी बेटी उनको छोड़कर हमेशा के लिए जा चुकी है।
इसके बाद नेहा के मां-बाप पुलिस स्टेशन जाकर उनके ससुराल वालों के ऊपर एफआईआर करते हैं। पति संजीव जो आर्मी में था सास ससुर थाने जाते हैं। पुलिस उन्हें अरेस्ट करती है और जब कड़ाई से पूछताछ होती है, जांच होती है तो पता चलता है कि जो नेहा के शरीर में पोइजन था वह नेहा ने खुद नहीं लिया बल्कि नेहा की सास और नेहा के पति ने जबरदस्ती चाय में मिलाकर नेहा को दिया था। जिस वजह से नेहा के शरीर में वो पोइजन पूरी तरीके से फैल गया और नेहा की दर्दनाक मौत हुई। सोचिए अगर आज नेहा की मां नेहा की बातें सुन लेती, उनके ससुराल वालों को समझ पाती, तो शायद आज नेहा उनके बीच होती। बाकी इस पूरी घटना पर आपकी क्या राय है? आप क्या कहना चाहते हैं कि क्या आज भी कुछ ऐसे सास, ससुर और पति भी हैं जो अपनी बहुओं और पत्नियों का यह हाल किया करते हैं।
