Tuesday, July 28, 2026
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9 साल पुराने चर्चित सीएलयू घूस सीडी कांड में बड़ा फैसला: कारोबारी भुवनेश ऐलावादी बरी

करीब 9 साल पुराने हरियाणा के बहुचर्चित सीएलयू (चेंज ऑफ लैंड यूज) घूस सीडी कांड में सोमवार को एक बड़ा फैसला सामने आया। हांसी के भाजपा विधायक विनोद भ्याना के करीबी माने जाने वाले कारोबारी भुवनेश ऐलावादी को अदालत ने सभी आरोपों से बरी कर दिया है। यह फैसला अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश (ADJ) सौरभ खत्री की कोर्ट ने सुनाया।

यह मामला 2013-14 के दौरान का है, जब प्रदेश में कांग्रेस की सरकार हुआ करती थी। उस समय विनोद भ्याना मुख्य संसदीय सचिव थे। एक स्टिंग ऑपरेशन के दौरान भुवनेश ऐलावादी को कथित रूप से सीएलयू पास कराने के एवज में रिश्वत मांगते हुए वीडियो में दिखाया गया था। यह वीडियो जुलाई 2014 में इनेलो नेता अभय चौटाला द्वारा सार्वजनिक किया गया था, जिसके बाद पूरा मामला सुर्खियों में आ गया था।

2016 में दर्ज हुई थी एफआईआर

वीडियो के आधार पर 2016 में विजिलेंस ब्यूरो ने एफआईआर दर्ज की, जिसके बाद भुवनेश ऐलावादी को हांसी की गांधी कॉलोनी में स्थित घर से गिरफ्तार किया गया था। पूछताछ के लिए उन्हें एक दिन के रिमांड पर भी रखा गया और विजिलेंस टीम ने उनका वॉइस सैंपल भी लिया था।

हालांकि, हाईकोर्ट ने इस मामले में वीडियो में नजर आ रहे विधायकों की गिरफ्तारी पर रोक लगा रखी थी, लेकिन ऐलावादी की गिरफ्तारी ने इस कांड को एक बार फिर चर्चा में ला दिया था।

अदालत ने क्यों किया बरी?

भुवनेश ऐलावादी की पैरवी कर रहे वकील अमित परुथी ने बताया कि अदालत ने अपने फैसले में कई महत्वपूर्ण आधारों का उल्लेख किया है:

1️⃣ वीडियो और सीडी की प्रामाणिकता सिद्ध नहीं हुई

आईटी एक्ट की धारा 65-बी के अनुसार इलेक्ट्रॉनिक सबूत को प्रमाणित करना अनिवार्य होता है।
अदालत ने पाया कि —

  • सीडी और पेन ड्राइव की प्रामाणिकता प्रमाणित नहीं की गई।
  • मूल मेमोरी चिप को जब्त नहीं किया गया।
  • रिकॉर्डिंग किसने की, कैसे की, इसकी स्पष्ट जानकारी मौजूद नहीं थी।

इन खामियों के कारण वीडियो को अदालत ने अप्रमाणिक साक्ष्य माना।

2️⃣ गवाहियों में विरोधाभास

मुख्य गवाह धर्मेंद्र स्टिंग की तारीख और वर्ष को लेकर लगातार उलझते रहे।
उनके बयान पर कई प्रश्नचिह्न लगने के कारण अदालत ने इसे विश्वसनीय नहीं माना।

3️⃣ साक्ष्यों की कमी

अदालत ने कहा कि केवल अस्पष्ट वीडियो और विरोधाभासी बयानों के आधार पर
किसी भी व्यक्ति को दोषी नहीं ठहराया जा सकता

● अदालत का स्पष्ट निष्कर्ष

फैसले में कहा गया कि अभियोजन पक्ष आरोप साबित करने में नाकाम रहा।
इसी वजह से कोर्ट ने भुवनेश ऐलावादी को सभी आरोपों से बरी करने का आदेश दिया।

एक बार फिर चर्चा में आया पुराना मामला

सीएलयू घूस सीडी कांड एक समय हरियाणा की राजनीति का बड़ा मुद्दा रहा है। कांग्रेस शासन में शुरू हुआ यह विवाद भाजपा सरकार आने के बाद भी सुर्खियों में बना रहा।
अब अदालत द्वारा ऐलावादी को बरी किए जाने के बाद यह मामला एक बार फिर चर्चा का विषय बन गया है।

अगला कदम क्या?

कानूनी जानकारों का कहना है कि यदि विजिलेंस चाहे तो इस फैसले के खिलाफ अपील कर सकती है, हालांकि अभी तक इस पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।

Sonu Baali
Sonu Baalihttp://khasharyananews.com
संस्थापक, खास हरियाणा न्यूज़- हरियाणा की ज़मीन से जुड़ा एक निष्पक्ष और ज़मीनी पत्रकार। पिछले 6+ वर्षों से जनता की आवाज़ को बिना किसी एजेंडे के सामने लाने का प्रयास कर रहे हैं। देसी अंदाज़ और सच्ची पत्रकारिता में विश्वास रखते हैं। 🌐 khasharyana.com
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