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भारत ने बासमती एक्सपोर्ट के क्षेत्र में एक नया इतिहास रच दिया है। इस साल अप्रैल से अगस्त 2025 तक यानी सिर्फ पांच महीनों में देश ने 2.7 मिलियन टन बासमती चावल का निर्यात किया है। यह पिछले साल की तुलना में करीब चार लाख टन अधिक है।
जहां पाकिस्तान केवल एक मिलियन टन बासमती एक्सपोर्ट करता है, वहीं भारत अब छह मिलियन टन से अधिक निर्यात कर रहा है। इस बार एक्सपोर्टर्स ने 6.5 मिलियन टन का लक्ष्य तय किया है।

हरियाणा और करनाल का अहम योगदान:
ऑल इंडिया राइस एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष सतीश गोयल ने बताया कि देश के कुल एक्सपोर्ट में हरियाणा का योगदान 35-40% है। वहीं केवल करनाल जिला 70% तक योगदान दे रहा है।
गोयल के अनुसार, अमेरिका ने बासमती चावल पर 50% टैरिफ लगा दिया है, लेकिन इससे एक्सपोर्ट पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ेगा। “अगर अमेरिका 2 या ढाई लाख टन चावल नहीं भी लेता, तो भी हमारे एक्सपोर्टर्स को फर्क नहीं पड़ेगा,” उन्होंने कहा।
भारत अब जापान सहित नई मार्केट्स की ओर बढ़ रहा है। भारत सरकार के सहयोग से भारतीय प्रतिनिधिमंडल हाल ही में जापान गया था और उम्मीद जताई जा रही है कि वहां के उपभोक्ताओं को भी भारतीय बासमती की खुशबू पसंद आएगी।
सेटेलाइट सर्वे से हुई फसल की जांच:
करनाल के नूरमहल में राइस एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन की जनरल बॉडी मीटिंग में अपेडा के चेयरमैन अभिषेक देव ने अध्यक्षता की।
इस बैठक में पूरे देश के 150 से अधिक एक्सपोर्टर्स शामिल हुए।
बासमती फसल की निगरानी के लिए हर साल सेटेलाइट और फील्ड सर्वे करवाया जाता है।
सर्वे के अनुसार, पंजाब में बाढ़ से थोड़ा नुकसान हुआ, लेकिन कुल नुकसान सिर्फ 1% तक ही सीमित रहा।
पांच महीनों में 4 लाख टन की बढ़ोतरी:
सतीश गोयल ने बताया कि 1 अप्रैल से 30 अगस्त 2025 के बीच भारत ने 2.7 मिलियन टन बासमती एक्सपोर्ट किया, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह आंकड़ा 2.3 मिलियन टन था।
यह वृद्धि भारत के बासमती उद्योग के लिए एक बड़ी उपलब्धि है।
पिछले साल तोड़ा गया एक्सपोर्ट रिकॉर्ड:
वित्त वर्ष 2024-25 में भारत ने 6 मिलियन टन बासमती का निर्यात कर नया रिकॉर्ड बनाया।
2023-24 में यह आंकड़ा 5 मिलियन टन था।
सरकारी नीतियों और अंतरराष्ट्रीय मांग में तेजी के चलते यह उछाल दर्ज किया गया।
अमेरिकी टैरिफ के बावजूद मजबूत रहा एक्सपोर्ट:
अमेरिका ने टैरिफ बढ़ा दिया है, फिर भी भारतीय बासमती की मांग स्थिर बनी हुई है।
पिछले साल भारत ने अमेरिका को 2.7 लाख टन बासमती चावल भेजा था, और उम्मीद है कि इस साल भी लगभग इतनी ही मात्रा में निर्यात होगा।
170 देशों में पहुंची भारतीय बासमती की खुशबू:

भारत का बासमती अब 170 देशों में एक्सपोर्ट किया जा रहा है।
सिर्फ सऊदी अरब, ईरान और इराक को मिलाकर हर साल 3 मिलियन टन चावल भेजा जाता है, जो कुल एक्सपोर्ट का लगभग आधा हिस्सा है।
सरकारी नीतियों से मिली बूस्ट:
राइस एक्सपोर्टर्स के अनुसार, केंद्र सरकार की स्थिर विदेशी व्यापार नीति, क्वालिटी कंट्रोल और अनुकूल नीतियों के कारण भारत ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में मजबूत स्थिति बनाई है।
बीते दस वर्षों में बासमती एक्सपोर्ट दोगुना हुआ है — मात्रा और मूल्य दोनों के लिहाज से।
अगले साल का लक्ष्य — 6.5 मिलियन टन:
वित्त वर्ष 2025-26 के लिए एक्सपोर्टर्स ने 6.5 मिलियन टन का टारगेट रखा है।
उद्योग को विश्वास है कि मौजूदा रफ्तार और बढ़ती मांग के चलते यह लक्ष्य आसानी से हासिल किया जा सकता है।
