दो दिवसीय हड़ताल के बीच रोहतक सिविल अस्पताल में डॉक्टरों ने दिया भरोसा, मरीजों को नहीं हुई कोई परेशानी
रोहतक में सिविल मेडिकल सर्विसेज एसोसिएशन द्वारा घोषित दो दिवसीय हड़ताल ने स्वास्थ्य सेवाओं पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया था, लेकिन सिविल अस्पताल रोहतक के डॉक्टरों ने जिम्मेदारी का परिचय देते हुए ओपीडी में ड्यूटी देकर स्वास्थ्य सेवाओं को प्रभावित नहीं होने दिया। रविवार सुबह जैसे ही ओपीडी का समय शुरू हुआ, डॉक्टर अपनी-अपनी सीटों पर मौजूद दिखे और सामान्य दिनों की तरह मरीजों को इलाज मिलता रहा।
हड़ताल के बावजूद डॉक्टर ओपीडी में पहुंचे
एसोसिएशन के आह्वान पर प्रदेशभर के सरकारी डॉक्टरों को हड़ताल में शामिल होना था। सिविल अस्पताल रोहतक में सुबह डॉक्टरों के पहुंचने और सामान्य रूप से काम करने की वजह से स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह सुचारू रहीं।
अस्पताल प्रबंधन के अनुसार, यहां कुल 46 डॉक्टरों की ड्यूटी लगती है, जिनमें से 39 डॉक्टर उपस्थित रहे और अपनी-अपनी ओपीडी में मरीजों को देखते हुए नजर आए।

वैकल्पिक स्टाफ की तैयारी की गई थी
सिविल सर्जन डॉ. रमेश चंद्र ने पहले से ही यह अनुमान लगाकर व्यवस्थाएं कर ली थीं कि हड़ताल के कारण स्टाफ की कमी पड़ सकती है। लेकिन डॉक्टरों के समय पर पहुंच जाने के कारण वैकल्पिक स्टाफ की जरूरत नहीं पड़ी।
ओपीडी कार्ड बनाने से लेकर दवाइयां वितरित करने तथा लैब में सभी टेस्ट करने तक सभी सेवाएं सामान्य रहीं।
डॉ. रमेश चंद्र ने स्वयं लिया व्यवस्थाओं का जायजा
हड़ताल की घोषणा को देखते हुए सिविल सर्जन स्वयं अस्पताल पहुंचे और सभी ओपीडी ब्लॉकों का निरीक्षण किया। उन्होंने बताया कि अस्पताल प्रशासन की प्राथमिकता मरीजों को बिना रुकावट स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना है।
“हड़ताल के बावजूद मरीजों को किसी भी तरह की दिक्कत नहीं होने दी गई। डॉक्टरों का ड्यूटी पर पहुंचना सराहनीय है,” — सिविल सर्जन।
हड़ताल क्यों? एसोसिएशन ने बताई अपनी मजबूरी
सिविल मेडिकल सर्विसेज एसोसिएशन के सदस्य डॉ. विश्वदीप ने कहा कि हड़ताल का निर्णय मजबूरी में लिया गया है।
उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य विभाग में लागू की जा रही कुछ नई नीति और सरकार के “तुगलकी फरमानों” के खिलाफ पहले भी ज्ञापन दिया गया था, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।
इसलिए एसोसिएशन ने दोबारा सरकार तक अपनी मांगें पहुंचाने के लिए हड़ताल का सहारा लिया है।
डॉक्टरों ने धरने में शामिल न होकर बनाई दूरी
हड़ताल के दौरान कई जिलों में डॉक्टर अस्पताल परिसर में एकत्र होकर धरना दे रहे थे, लेकिन रोहतक सिविल अस्पताल के डॉक्टरों ने ऐसा नहीं किया।
उन्होंने अपनी उपस्थिति ओपीडी में दर्ज करवाई और मरीजों के इलाज को सर्वोच्च प्राथमिकता दी।
इस कदम को लेकर मरीजों और परिजनों ने राहत की सांस ली।
स्वास्थ्य सेवाएं नहीं हुई बाधित
अस्पताल प्रशासन के अनुसार—
- सभी ओपीडी ब्लॉक खुले रहे
- डिस्पेंसरी में दवाइयां वितरित हुईं
- लैब में टेस्ट बिना रुकावट चलते रहे
- गंभीर मरीजों के इलाज में कोई बाधा नहीं आई
मरीजों और उनके परिजनों ने डॉक्टरों के इस निर्णय की सराहना करते हुए कहा कि हड़ताल के बीच भी स्वास्थ्य सेवाएं बंद न होने देना मानवीय दृष्टिकोण दर्शाता है।
