रोहतक: पीजीआईएमएस स्थित ट्रोमा सेंटर में देर रात मरीज के परिजनों और डॉक्टरों के बीच कहासुनी का मामला सामने आया। जानकारी के अनुसार, यह घटना रात लगभग 9 बजे हुई, जब एक घायल मरीज का इलाज हो रहा था। विवाद इतना बढ़ गया कि परिजनों ने डॉक्टरों के साथ हाथापाई शुरू कर दी और इलाज के लिए रखे गए सामान को बिखेर दिया।
घटना का विवरण
सूत्रों ने बताया कि ट्रोमा सेंटर में भर्ती एक युवक पोल गिरने से घायल हुआ था। घायल युवक का इलाज चल रहा था तभी उसके परिजन और करीब 15 से 20 अन्य लोग अंदर आए। इलाज को लेकर डॉक्टरों और परिजनों के बीच बहस शुरू हुई, जो देखते ही देखते हाथापाई में बदल गई। इस दौरान अस्पताल में रखे इलाज के उपकरण और सामान भी बिखेर दिए गए।
पुलिस ने किया हस्तक्षेप
डॉक्टरों ने घटना की सूचना पुलिस को दी, जिसके बाद पीजीआई थाना की टीम मौके पर पहुंची और स्थिति को शांत कराया। अस्पताल प्रशासन ने बताया कि डॉक्टरों ने सुरक्षा के मद्देनजर बाहर निकलकर पुलिस की मदद ली।
पुलिस की प्रतिक्रिया
हालांकि पीजीआई थाना एसएचओ रोशन लाल ने कहा कि ट्रोमा सेंटर में कोई बड़ा झगड़ा नहीं हुआ। उनके अनुसार, यह केवल मरीज के परिजनों और डॉक्टरों के बीच मामूली कहासुनी थी। उन्होंने कहा कि कोई हाथापाई या तोड़फोड़ जैसी गंभीर घटना पुलिस रिकॉर्ड में दर्ज नहीं है और अभी तक किसी ने कोई शिकायत भी नहीं दी है।

अस्पताल में सुरक्षा व्यवस्था
यह घटना अस्पताल में सुरक्षा की आवश्यकताओं पर सवाल उठाती है। ट्रोमा सेंटर जैसे संवेदनशील विभागों में मरीजों और उनके परिजनों की भावनाएँ उच्च होती हैं। ऐसे में उचित सुरक्षा और कर्मचारी मार्गदर्शन का होना बेहद जरूरी है। अस्पताल प्रशासन ने यह भी बताया कि भविष्य में इस तरह की घटनाओं से निपटने के लिए आवश्यक उपाय किए जाएंगे।
परिजन और डॉक्टरों के बीच तनाव
घटना के दौरान डॉक्टरों ने कहा कि उनका मुख्य उद्देश्य मरीज का उपचार करना है, लेकिन जब विवाद बढ़ा और परिजन हिंसक हुए, तो उन्हें इलाज रोककर प्रशासन और पुलिस से सहायता लेनी पड़ी। यह घटना दिखाती है कि अस्पतालों में मरीजों और उनके परिवार के साथ संवाद और शांतिपूर्ण व्यवहार बनाए रखना कितना महत्वपूर्ण है।
