रोहतक जिले के महम में हाल ही में भारत की कम्यूनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के प्रतिनिधिमंडल ने अधिकारियों से मुलाकात कर कई अहम मांगें रखीं। प्रतिनिधिमंडल ने उपमंडल नागरिक अस्पताल महम के एसएमओ को ज्ञापन सौंपा और अस्पताल में स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार की आवश्यकता पर जोर दिया।
प्रतिनिधिमंडल ने हरियाणा के स्वास्थ्य मंत्री से आग्रह किया कि महम अस्पताल में मरीजों की सुविधा के लिए 100 बेड की व्यवस्था की जाए। इसके अलावा, अस्पताल में खाली पड़े डॉक्टरों के पदों को भरने, पैरामेडिकल स्टाफ की भर्ती करने और सीटी स्कैन एवं अल्ट्रासाउंड मशीन लगाने की मांग की गई। प्रतिनिधिमंडल ने यह भी कहा कि सभी तरह की मेडिकल जांच मुफ्त करवाई जाए और अस्पताल में निशुल्क इलाज की सुविधा शुरू की जाए, ताकि गरीब और मध्यमवर्गीय लोग बेहतर स्वास्थ्य सेवा प्राप्त कर सकें।

वरिष्ठ नागरिकों के लिए रियायती पास मान्य करने की मांग
सीपीआईएम प्रतिनिधिमंडल ने एसडीएम महम को भी एक ज्ञापन सौंपा। इसमें उन्होंने मांग की कि सहकारी समिति की बसों में वरिष्ठ नागरिकों के रियायती पास मान्य किए जाएं। प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि कई वरिष्ठ नागरिकों को रोजाना बसों में अपमान का सामना करना पड़ता है, क्योंकि बस संचालक रियायती पास स्वीकार नहीं करते और उन्हें आधी टिकट के बजाय पूरी टिकट के पैसे चुकाने पड़ते हैं। उन्होंने ऐसे बस मालिकों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की भी मांग की।
प्रतिनिधिमंडल में कौन थे मौजूद
इस अवसर पर सीपीआईएम जिला सचिव कामरेड सतवीर सिंह, किसान नेता मास्टर बलवान सिंह, मजदूर नेता कामरेड प्रकाश चंद्र, सत्यनारायण और कई अन्य सामाजिक संगठनों के कार्यकर्ता उपस्थित थे। प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि उनकी मांगें आम जनता के हित में हैं और सरकार को इन्हें प्राथमिकता के आधार पर पूरा करना चाहिए।
प्रतिनिधिमंडल ने अधिकारियों से स्पष्ट किया कि अस्पताल में सुविधाओं का विस्तार न केवल मरीजों के लिए जरूरी है, बल्कि यह क्षेत्र की स्वास्थ्य सेवाओं को भी सशक्त बनाएगा। उन्होंने कहा कि डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ की कमी के कारण मरीजों को सही समय पर इलाज नहीं मिल पाता, जिससे गंभीर रोगों के इलाज में देरी होती है।
सामाजिक और राजनीतिक महत्व
प्रतिनिधिमंडल ने यह भी संकेत दिया कि स्वास्थ्य सेवाओं और वरिष्ठ नागरिकों के हित में उनकी मांगें सिर्फ एक राजनीतिक मुद्दा नहीं, बल्कि समाज के कमजोर वर्ग की भलाई से जुड़ी हैं। उन्होंने अधिकारियों से अपील की कि ये मुद्दे जल्द से जल्द हल किए जाएं।
प्रतिनिधिमंडल के नेताओं का कहना था कि यदि सरकार और प्रशासन ने इन मांगों पर समय पर ध्यान नहीं दिया, तो वे जनता के बीच जाकर इस मुद्दे को उठाएंगे और जनसुरक्षा व स्वास्थ्य सेवा के लिए आंदोलन की संभावना जताई।
