हिसार के हांसी में 38 वर्षों की कानूनी लड़ाई के बाद बिट्टू गोयल परिवार को उनकी पुश्तैनी दुकान का वैध कब्जा वापस मिला। गुरुवार को कोर्ट के आदेश पर प्रशासन और पुलिस की मौजूदगी में 55 गज की इस दुकान को कब्जा मुक्त कराया गया।
दुकान के मालिक बिट्टू गोयल ने बताया कि यह दुकान उनके पिता कैलाश चंद्र गोयल के नाम पर है, जो हांसी बस स्टैंड के पीछे फिरकी वाली गली के नजदीक स्थित है। यह दुकान लगभग 63 वर्ष पहले किराए पर दी गई थी, लेकिन समय के साथ किराएदार ने इस पर स्थायी कब्जा जमा लिया, जिससे मामला कोर्ट तक पहुँच गया।
लगातार 38 वर्षों तक चली कानूनी लड़ाई के बाद, जनवरी 2025 में बिट्टू गोयल के पक्ष में फैसला आया। गुरुवार को कोर्ट के आदेश पर ड्यूटी मजिस्ट्रेट रोहताश की निगरानी में दुकान को खाली कराया गया।
मौके पर सुरक्षा और प्रशासनिक तैयारी:
किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए बस स्टैंड चौकी इंचार्ज जोगिंदर सिंह अपनी पुलिस टीम के साथ तैनात रहे। प्रशासन ने एहतियातन एक जेसीबी और एक हाइड्रा मशीन (क्रेन) भी मौके पर बुलाई थी।
किराएदार का दावा:
दुकान पर लंबे समय से कब्जा जमाए जोगिंदर निवासी भगत सिंह रोड ने कहा कि उनका इस दुकान पर 63 साल से कब्जा है और वे नियमित रूप से किराया देते रहे हैं। उन्होंने कार्रवाई को अन्यायपूर्ण बताया और कहा कि उन्हें अपना सामान निकालने का पर्याप्त समय नहीं दिया गया।

कोर्ट आदेश और कब्जा हस्तांतरण:
ड्यूटी मजिस्ट्रेट रोहताश ने स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई पूर्णतः अदालत के आदेशों के अनुरूप की गई है। कोर्ट ने विजेता पक्ष को उनकी संपत्ति का वैध कब्जा दिलाया और कब्जा हस्तांतरण शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुआ।
परिवार की राहत:
38 साल पुराने इस मामले में न्याय मिलने पर गोयल परिवार ने राहत की सांस ली। बिट्टू गोयल ने कहा, “यह केवल संपत्ति नहीं, हमारे पिता की मेहनत और विरासत की जीत है।”
इस घटना ने हांसी और हिसार के नागरिकों को यह संदेश दिया कि लंबे समय तक चले कानूनी संघर्षों में भी न्याय मिल सकता है। कोर्ट और प्रशासन की तत्परता ने सुनिश्चित किया कि कब्जा हस्तांतरण व्यवस्थित और सुरक्षित तरीके से हो।
