हरियाणा के इसराना क्षेत्र में बुधवार को दीनबंधु सर छोटू राम किसान भवन में सर छोटू राम जयंती का भव्य समारोह आयोजित किया गया। इस अवसर पर भाजपा की वरिष्ठ नेता श्रीमती सुमित्रा जागलान मुख्य अतिथि रहीं, जबकि ब्लॉक समिति अध्यक्ष हरपाल मलिक विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद थे।
श्रीमती सुमित्रा जागलान ने अपने संबोधन में कहा कि किसान भवन किसी विशेष जाति या धर्म का नहीं है। उन्होंने सर छोटू राम को गरीबों का मसीहा बताया और उनके बताए मार्ग पर चलकर देश व प्रदेश को विकास के रास्ते पर ले जाने का आह्वान किया। उन्होंने सर छोटू राम के प्रसिद्ध कथन ‘हे भोले किसान, पहले दुश्मन को पहचान और फिर बोलना सीख, तभी आगे बढ़ सकता है’ का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि किसान वर्ग में 36 बिरादरी आती हैं और इन्हीं के कारण आज हम जमीनों के मालिक बने हुए हैं।
विशिष्ट अतिथि ब्लॉक समिति अध्यक्ष हरपाल मलिक ने दीनबंधु सर छोटू राम भवन के लिए पंचायत से और जमीन उपलब्ध कराने की मांग की। उन्होंने आश्वासन दिया कि भवन निर्माण का खर्च जनता के सहयोग या राजनीतिक मदद से पूरा किया जाएगा।
किसान भवन अध्यक्ष देवेंद्र जागलान ने बताया कि भवन में लगभग 22 दुकानें हैं, जिन्हें दोबारा बनाने की आवश्यकता है। उन्होंने अनुमानित लागत लगभग 50 लाख रुपए बताई। देवेंद्र जागलान ने कहा कि ब्लॉक समिति की ओर से जो भी सहायता मिल सकेगी, वह ली जाएगी। यदि इससे पूरा खर्च नहीं होता, तो आपसी सहयोग से धन जुटाकर किसान भवन को नई ऊंचाइयों पर ले जाया जाएगा।

इस मौके पर लाइब्रेरी निर्माण की भी मांग की गई। देवेंद्र जागलान ने कहा कि यहां 36 बिरादरी के बच्चे पढ़ने आते हैं और उन्हें शिक्षा के बेहतर अवसर उपलब्ध कराना जरूरी है। सुमित्रा जागलान ने लाइब्रेरी निर्माण के लिए आवश्यक धनराशि उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया।
कार्यक्रम में किसान नेता देवेंद्र जागलान, राज सिंह आर्य, राम सिंह जागलान नौल्था, गौशाला समिति के प्रधान सूरजभान जागलान, इसराना सरपंच राजेश जागलान, पुठ्ठर सरपंच समेर सिंह सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
समारोह के दौरान स्थानीय लोगों ने सर छोटू राम की शिक्षाओं को याद किया और किसानों के कल्याण एवं भवन के विकास में सहयोग देने का संकल्प लिया। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों के अधिकारों और उनकी सांस्कृतिक विरासत को बढ़ावा देना भी था।
यह जयंती समारोह सर छोटू राम के आदर्शों और उनके द्वारा बताए गए मार्गदर्शन को युवा पीढ़ी तक पहुँचाने का एक महत्वपूर्ण प्रयास साबित हुआ।
