सोनीपत में बिजली विभाग के कर्मचारियों ने ठेका प्रथा के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। दी इंपीरियल प्राइवेट लिमिटेड के तहत कार्यरत कर्मचारियों को नौकरी से हटाए जाने के विरोध में सोमवार को जिला सचिवालय पर हज़ारों कर्मचारियों ने गुस्सा जाहिर किया। प्रदर्शन का नेतृत्व जिला पार्षद संजय बड़वासनिया ने किया।
अर्धनग्न होकर किया विरोध:
गढ़ी ब्राह्मणान रोड से शुरू हुआ प्रदर्शन हनुमान मंदिर होते हुए जिला उपायुक्त कार्यालय तक पहुंचा। वहां कर्मचारियों ने अर्धनग्न होकर अपने विरोध को प्रकट किया और प्रशासन व सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। उन्होंने मुख्यमंत्री के नाम तहसीलदार कृति को ज्ञापन सौंपा, जिसमें ठेका प्रथा को तुरंत समाप्त करने और हटाए गए कर्मचारियों को पुनः कार्य पर लगाने की मांग की गई।
दो वर्षों से कर रहे थे काम:
जिला पार्षद संजय बड़वासनिया ने कहा कि दी इंपीरियल प्राइवेट लिमिटेड के तहत काम करने वाले कर्मचारी पिछले दो वर्षों से लगातार अपनी सेवाएं दे रहे थे। काम के दौरान कई कर्मचारियों को चोटें भी आईं, लेकिन उन्हें कोई सहायता नहीं दी गई। अब कंपनी ने ठेका अवधि समाप्त होने का हवाला देकर उन्हें हटा दिया, जिससे सैकड़ों परिवारों के सामने रोज़गार का संकट खड़ा हो गया।

सरकार के वादों पर सवाल:
चुनावों के दौरान सरकार ने ठेका प्रथा समाप्त करने और सभी कच्चे कर्मचारियों को पक्का करने का वादा किया था। मगर अब वह वादों से पीछे हट रही है। कर्मचारियों का कहना है कि ठेकेदार अपनी मनमर्जी से किसी भी समय कर्मचारियों को हटा देते हैं, जिससे युवाओं का भविष्य अंधकार में जा रहा है।
स्थायी रोजगार की मांग:
कर्मचारियों ने सरकार से आग्रह किया कि हटाए गए कर्मचारियों को हरियाणा कौशल रोजगार निगम के तहत पुनः कार्य पर लगाया जाए। उन्होंने कहा कि बढ़ती महंगाई और बेरोजगारी के इस दौर में स्थायी रोजगार देकर युवाओं को भविष्य की गारंटी दी जानी चाहिए।
प्रदर्शन में भारी भागीदारी:
दिनेश, श्याम, मनजीत, सविता, सुनील, दीपक, सुरेंद्र, रामवीर, राजेश, योगेश, सुरेश, कर्मवीर, जगविंदर, सतवीर, प्रदीप, सतीश, सुदेश सहित सैकड़ों कर्मचारी प्रदर्शन में शामिल हुए। कर्मचारियों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं, तो आंदोलन और उग्र रूप ले सकता है।
सोनीपत में बिजली विभाग कर्मचारियों का यह विरोध ठेका प्रथा और रोजगार असुरक्षा के खिलाफ गहरी नाराजगी का संकेत है। प्रशासन पर दबाव है कि वह तत्काल ठेका प्रथा पर निर्णय ले और हटाए गए कर्मचारियों को पुनः नौकरी प्रदान करके संकट को दूर करे।
