महम कस्बे के वार्ड एक में स्थित उजाला नगर कॉलोनी पिछले लगभग 40 वर्षों से अवैध बनी हुई है। कॉलोनी के निवासियों के वोट नगरपालिका के वार्ड एक में दर्ज हैं, लेकिन इतने लंबे समय के बावजूद कॉलोनी को वैधता नहीं मिली है।
अवैध होने के कारण कॉलोनी में सड़क, नाली और जल निकासी जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। बारिश के मौसम में कच्ची गलियों के कारण घरों से निकलना मुश्किल हो जाता है, जिससे बच्चों और पशुओं को भी परेशानी होती है।
वार्डवासियों ने बताया कि हर चुनाव के समय नेता कॉलोनी को वैध कराने का वादा करते हैं, लेकिन चुनाव जीतने के बाद यह मुद्दा भूल जाता है। हाल ही में महम कस्बे की कुछ कॉलोनियों को वैधता मिली, लेकिन उजाला नगर कॉलोनी अभी भी सूची में शामिल नहीं हुई।
सुविधाओं के अभाव में निवासियों ने स्वयं ही गलियों और नालियों के निर्माण का बीड़ा उठाया है। उन्होंने आपस में पैसे एकत्रित कर गलियों में मिट्टी डलवाई और हिसार बाईपास पर तोड़ी जा रही इंटरलॉक सड़क की पुरानी ईंटों और रेत का उपयोग कर रहे हैं।

इस काम के लिए कॉलोनी के लोगों ने दो मिस्त्री और चार मजदूर अपने खर्च पर लगाए हैं। साथ ही, गलियों के दोनों ओर नालियों का निर्माण कार्य भी शुरू किया जा चुका है। वार्डवासियों का कहना है कि इस बार चुनाव में आने वाले नेताओं से इस मुद्दे पर जवाब मांगा जाएगा।
कुछ समाजसेवियों ने भी इस कार्य में सहयोग दिया है। उन्होंने मिट्टी और पुरानी इंटरलॉक ईंटें उपलब्ध कराने में मदद की। इसी तरह, कॉलोनी के अन्य हिस्सों में भी लोगों ने पैसे एकत्रित कर निर्माण कार्य शुरू कर दिया है।
निवासियों का मानना है कि अगर सरकारी समर्थन और वैधता मिल जाए, तो कॉलोनी का विकास और भी तेज़ी से हो सकेगा। इसके अलावा, इससे न केवल निवासियों की सुविधा बढ़ेगी बल्कि क्षेत्र में साफ-सफाई और जल निकासी की समस्या भी कम होगी।
यह पहल उजाला नगर कॉलोनी के लोगों की स्वयंसेवी भावना और सामाजिक जिम्मेदारी का उदाहरण है। ग्रामीण और समाजसेवी सहयोग से कॉलोनी धीरे-धीरे आधुनिक और रहने योग्य बन रही है, लेकिन सरकारी सहयोग के बिना यह काम पूरी तरह से स्थायी नहीं हो सकता।
