13 साल में जर्जर हुआ रोहतक का राजीव गांधी स्पोर्ट्स स्टेडियम, रखरखाव के अभाव में टूटा इंफ्रास्ट्रक्चर; सरकार से 34 करोड़ के बजट की प्रतीक्षा
रोहतक का राजीव गांधी खेल स्टेडियम, जो अंतरराष्ट्रीय स्तर की सुविधाओं के साथ वर्ष 2012 में बनाया गया था, आज बुरी तरह से जर्जर हालत में पहुंच चुका है। 151 करोड़ रुपए की लागत से तैयार इस स्टेडियम को आधुनिक खेल सुविधाओं का केंद्र माना जाता था, लेकिन पिछले 10 सालों में रखरखाव के अभाव ने इसे खंडहर में बदलकर रख दिया है।
2012 में बना था आधुनिक स्टेडियम
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा की सरकार ने 112 एकड़ में फैले इस विशाल स्टेडियम का निर्माण कराया था। क्रिकेट, फुटबॉल, हॉकी, बैडमिंटन, जिम्नास्टिक, टेबल टेनिस, कबड्डी, वॉलीबॉल, बास्केटबॉल और भारोत्तोलन सहित लगभग हर खेल की सुविधाएं यहां उपलब्ध थीं। इसे हरियाणा के सबसे बड़े और अत्याधुनिक खेल परिसरों में शुमार किया गया था।
लेकिन 2013 के बाद बिगड़ना शुरू हुआ सिस्टम
सरकार बदलने के बाद स्टेडियम का रखरखाव लगातार विभागीय विवादों के कारण प्रभावित होता गया। पहले इसे हुड्डा (HSVP) को सौंपा गया, फिर नगर निगम को देने की बातें हुईं, लेकिन जिम्मेदारी किसी ने भी पूरी तरह नहीं निभाई। परिणामस्वरूप स्टेडियम की हालत धीरे-धीरे खराब होती गई और आज स्थिति भयावह है।
दीवारों का प्लास्टर झड़ रहा, शीशे टूटे, टंकियों में पानी नहीं
स्टेडियम परिसर में घूमने पर पूरी बदहाली साफ दिखाई देती है।
- दीवारों से प्लास्टर उखड़ चुका है
- कई जगह शीशे टूटे पड़े हैं
- पानी की टंकियां सूखी पड़ी हैं, उनमें गंदगी भरी है
- सीढ़ियों के नीचे कंकड़-पत्थर और कूड़ा जमा है
- शौचालयों की हालत बेहद खराब
- पीने के पानी की प्याऊ में न नल हैं, न सप्लाई
यह सब देखकर विश्वास करना मुश्किल हो जाता है कि यह कभी अंतरराष्ट्रीय सुविधाओं वाला स्टेडियम था।
बास्केटबॉल कोर्ट, स्केटिंग ट्रैक और आर्चरी ग्राउंड खराब

खासकर आउटडोर और इनडोर ग्राउंड की स्थिति खिलाड़ियों के लिए बेहद चिंताजनक है।
- बास्केटबॉल कोर्ट उखड़ चुका है
- स्केटिंग ट्रैक में बड़े-बड़े गड्ढे हैं
- आर्चरी ग्राउंड पर समतल मैदान तक नहीं बचा
- एथलेटिक पवेलियन के बोर्ड का “C” तक गायब है
यह स्थिति बताती है कि वर्षों से यहां देखभाल पर कोई ध्यान नहीं दिया गया।
फायर सिस्टम भी सिर्फ दिखावा
स्टेडियम में लगाया गया फायर सुरक्षा सिस्टम भी जंग खा चुका है। उसमें से पानी निकलना तो दूर, उसे चालू करना भी संभव नहीं। किसी भी हादसे की स्थिति में यह सिस्टम पूरी तरह बेकार है।
34 करोड़ का एस्टीमेट बना, लेकिन बजट मंजूर नहीं
खेल विभाग ने स्टेडियम को नया रूप देने के लिए 34 करोड़ रुपए का प्रस्ताव तैयार किया था। इसमें सिंथेटिक एथलेटिक ट्रैक, हॉकी टर्फ, स्टेडियम की मरम्मत और लाइटिंग सुधार जैसी योजनाएं शामिल हैं।
लेकिन अब तक सरकार की तरफ से बजट रिलीज नहीं किया गया।
विधानसभा में भी उठ चुका मुद्दा
स्थानीय विधायक बीबी बत्रा सहित कई जनप्रतिनिधियों ने विधानसभा में स्टेडियम की बदहाली का मुद्दा उठाया था। खेल मंत्री गौरव गौतम ने भी स्वीकार किया था कि स्टेडियम की हालत खराब है और 8 करोड़ 81 लाख का प्रस्ताव पीडब्ल्यूडी में लंबित है।
तीन विभागों के बीच फंसा स्टेडियम
2019 से 2022 तक यह HSVP के पास रहा।
2022 से खेल विभाग के पास है।
HSVP ने 2.5 करोड़ रुपए खर्च किए थे, जबकि खेल विभाग ने 99 लाख रुपए।
लेकिन यह रकम विशाल स्टेडियम के रखरखाव के लिए काफी नहीं थी।
