रोहतक जिले में धान की पराली जलाने की घटनाओं को रोकने और किसानों को विकल्पिक तरीकों से पराली प्रबंधन के लिए प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से कृषि विभाग की टीमें अब गांव-गांव जाकर निरीक्षण करेंगी। ये टीमें प्रत्येक खेत में जाकर यह जांच करेंगी कि किसानों ने पराली को जलाए बिना उसका उचित निपटान किया है या नहीं।
सरकार की ओर से पराली न जलाने वाले किसानों को 1200 रुपये प्रति एकड़ अनुदान देने की घोषणा की गई है। इसके लिए कृषि विभाग द्वारा खेतों का भौतिक निरीक्षण शुरू किया जा चुका है। साथ ही पराली जलाने वाले किसानों पर सख्त कार्रवाई के निर्देश भी जारी किए गए हैं।
सरकार को भेजी जाएगी विस्तृत रिपोर्ट
कृषि विकास अधिकारी (ADO) मोनिका पाराशर ने बताया कि विभाग को धान की पराली के निपटान से संबंधित विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर सरकार को भेजनी है। इस रिपोर्ट में प्रत्येक गांव और प्रत्येक किसान के पराली प्रबंधन की स्थिति का उल्लेख होगा।
उन्होंने कहा कि खेतों में जाकर यह देखा जाएगा कि किसानों ने पराली को मल्चर, हैप्पी सीडर, रोटावेटर, स्ट्रॉ रीपर या अन्य तकनीकों से मिट्टी में मिलाया है या नहीं।
मोनिका पाराशर ने बताया कि जिन किसानों ने पराली न जलाते हुए वैकल्पिक तकनीक अपनाई है, उन्हें प्रति एकड़ 1200 रुपये की राशि दी जाएगी। इसके लिए फील्ड टीमों को निर्देश दे दिए गए हैं कि वे सही और पारदर्शी तरीके से जांच करें।
जागरूकता अभियान से घटी पराली जलाने की घटनाएं
कृषि विभाग के अनुसार इससे पहले गांव-गांव जाकर किसानों को पराली न जलाने के लिए जागरूक किया गया था। किसानों को पराली जलाने के दुष्परिणामों, मिट्टी की उर्वरता पर प्रभाव, और पर्यावरण प्रदूषण पर इसके असर के बारे में बताया गया था।
अधिकारियों का कहना है कि इस जागरूकता अभियान का सकारात्मक परिणाम देखने को मिल रहा है और पराली जलाने की घटनाएं पिछले वर्षों की तुलना में काफी कम हुई हैं।
सैटेलाइट से रखी जा रही किसानों पर नजर

कृषि विभाग द्वारा पराली जलाने की गतिविधियों पर सैटेलाइट की मदद से नियमित नजर रखी जा रही है। जिन क्षेत्रों में आग लगने की सूचना मिली, वहां तुरंत टीम भेजी गई।
विभाग के अनुसार कुछ किसानों ने नियमों का उल्लंघन किया है, जिनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है और उन्हें सरकारी अनुदान से वंचित किया जाएगा।
ADO मोनिका ने स्पष्ट किया—
“जो किसान पराली जलाएगा, उसे न तो 1200 रुपये प्रति एकड़ की सहायता मिलेगी और न ही उसे किसी प्रकार की सरकारी छूट का लाभ मिलेगा।”
पराली जलाने वालों पर होगी सख्त कार्रवाई
अधिकारी ने बताया कि पराली जलाकर पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाले किसानों की पहचान कर ली गई है। ऐसे किसानों पर पर्यावरण संरक्षण अधिनियम के तहत कार्रवाई की जाएगी।
इसके साथ ही भविष्य में पराली न जलाने पर जोर देने के लिए गांवों में विशेष बैठकों का आयोजन भी होगा।
जो किसान नियम मानकर पराली का निपटान कर रहे हैं, उन्हें मिलेगा पूरा लाभ
कृषि विभाग ने साफ किया है कि जो किसान दिशा-निर्देशों का पालन करेंगे, उन्हें किसी प्रकार की परेशानी नहीं आएगी। ऐसे किसानों की सूची तैयार कर उन्हें अनुदान की राशि सीधे उनके खातों में भेजी जाएगी।
कृषि विभाग की टीमों का कहना है कि उनका उद्देश्य किसानों को दंड देना नहीं है, बल्कि उन्हें नई तकनीकों की ओर प्रोत्साहित करना है, जो खेतों की सेहत को बेहतर बनाए रखने में मदद करेगी।
